
༺ 🇰𝗼𝗼𝗹 🇲𝘂𝗻𝗱𝗮 ༻
@koolmunda
सुनो ये तुम्हारा मुल्क तुम्हें उदासी ही देगा..
कोई अच्छा सा वीर पटा कर जारा बन जाओ..❤️
🩵💛💜🩷❤️♥️❤️🩷💜💛🩵
जब तुम प्रेम में होते हो,
तब तुम प्रयास नहीं करते सुंदर दिखने का—
तुम स्वतः सुंदर हो जाते हो।
क्योंकि प्रेम भीतर की ऊर्जा को बहने देता है, रोकता नहीं।
अप्रेम में मन सिकुड़ जाता है,
शरीर भी उसी संकुचन को धारण कर लेता है।
तनाव, भय, क्रोध—
ये सब प्रेम की अनुपस्थिति के लक्षण हैं।
और यही अस्वस्थता का मूल कारण हैं।
प्रेम में व्यक्ति फैलता है—जैसे फूल खिलता है।
उसका हर श्वास एक संगीत बन जाता है,
हर धड़कन में एक नृत्य छिपा होता है।
स्वास्थ्य सिर्फ शरीर की अवस्था नहीं है,
यह तुम्हारी चेतना की स्थिति है।
और चेतना तब संतुलित होती है,
जब उसमें प्रेम बह रहा हो।
सुंदरता भी चेहरे में नहीं होती—
वह तुम्हारे अस्तित्व की सुगंध है।
अगर प्रेम है, तो वह सुगंध अपने आप फैलती है
इसलिए,
प्रेम को पाना मत— प्रेम बनो।
क्योंकि
वही तुम्हें स्वस्थ करेगा,
वही तुम्हें सुंदर बनाएगा।
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तीर्थयात्रा वह नहीं जो पैरों से होती है,
तीर्थयात्रा वह है जो हृदय में घटती है।
जब तुम किसी मंदिर,
मस्जिद या तीर्थ पर जाते हो,
तुम बाहर की यात्रा कर रहे हो।
लेकिन प्रेम… प्रेम तुम्हें भीतर ले जाता है।
और भीतर की यात्रा ही असली तीर्थयात्रा है।
प्रेम में जब तुम डूबते हो,
तो तुम्हारा “मैं” धीरे-धीरे मिटने लगता है।
और जहाँ “मैं” मिटता है,
वहीं परमात्मा प्रकट होता है।
प्रेम कोई संबंध नहीं, प्रेम एक अवस्था है।
और इस अवस्था में पहुँच जाना ही सबसे बड़ा तीर्थ है।
तुम काशी जाओ या मक्का,
अगर तुम्हारे भीतर प्रेम नहीं है, तो सब व्यर्थ है।
लेकिन यदि तुम्हारे भीतर प्रेम जाग गया,
तो हर जगह काशी है, हर क्षण तीर्थ है।
प्रेम तुम्हें पवित्र करता है,
क्योंकि प्रेम में तुम स्वार्थ से मुक्त हो जाते हो।
और जहाँ स्वार्थ समाप्त,
वहीं पवित्रता का जन्म होता है।
इसलिए #ओशो कहते हैं —
प्रेम को खोजो मत…
प्रेम बन जाओ।
क्योंकि जब तुम स्वयं प्रेम बन जाते हो,
तो तुम्हारी हर साँस, हर क्षण, हर कदम—
एक जीवित तीर्थयात्रा बन जाता है।
प्रेम ही असली तीर्थ है।
जहाँ प्रेम है, वहीं परमात्मा है।
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