वो श्रद्धा हैं ,वो भक्ति हैं
वो अनादि ,अनंत ,वो शक्ति हैं ।
सत्य है वही ,वही शिव है
बाघम्बर ओढ़े वो अद्वितीय हैं ।
भस्मी रमाए अंग - अंग में #🛕बाबा केदारनाथ📿
वो औढरधानी प्रलयंकर है ।
गल लिपटाये सर्प ,जटा में गंग
रहते हैं भोले भूत पिशाचों के संग ।
वो साकार भी है ,निराकार भी हैं
नीलकंठ हैं वो , ओंकार भी हैं ।
डम डम डमरू बजाते वो नटराज
खोले त्रिनेत्र तो प्रलय का है आगाज ।
चंद्र सोहे भाल ,कैलाशों के हैं वासी
निर्विकार निर्लेप , वो हैं मेरे अविनाशी ।
इस महाशिवरात्रि मेरे शिवा का अनहद नाद आप सबके मन में भी छा जाए ! शुभ महाशिवरात्रि !!