N K Prajapati
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Teacher, Writer, Motivator
#✍मेरे पसंदीदा लेखक #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓ #📗प्रेरक पुस्तकें📘
✍मेरे पसंदीदा लेखक - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓ #✍मेरे पसंदीदा लेखक
📚कविता-कहानी संग्रह - ना हवा ना पानी बदला ना पांव खों मिली पनईंयां मानव देखो कैसा बदला मन मुटाव खों जानों मुईयां ना सूरज ने जाति पूंछी दद्दा बाई आंगन की शोभा माया पूंछी खूबईं होत थी इनकी सेवा ना तरुवर ने समय हुआ परिवर्तन इतना अब कहां ये सबकुछ दिखता घर घर रेखा सबने खींची माया पीछे रोता फिरता हर दिन घटती नई कहानी पिता को रखे कौन মান भाई भाई ने साधे मौन নিন থাল্ত্রী ক্ধী নানী ೯ তুনা हुई दुर्दशा ना देखी ऐसी परे पे पूंछत कौन समय पनिया भरने जातीं पनघट कुटुंब लाज का ओढ़े घूंघट ज्वार बाजरा मक्के की रोटी नौन मिर्च संग भूख मिटाती खेत में बैठे भरी दुपहरी सांझ ढले संग कीर्तन होते दो ठऊ चोंपे खूंटा बांधे पसेई भरे के पिंडा माढे भुंसारे से चकिया पीसी एन के प्रजापति हंसी की सालें बीती खुशी ना हवा ना पानी बदला ना पांव खों मिली पनईंयां मानव देखो कैसा बदला मन मुटाव खों जानों मुईयां ना सूरज ने जाति पूंछी दद्दा बाई आंगन की शोभा माया पूंछी खूबईं होत थी इनकी सेवा ना तरुवर ने समय हुआ परिवर्तन इतना अब कहां ये सबकुछ दिखता घर घर रेखा सबने खींची माया पीछे रोता फिरता हर दिन घटती नई कहानी पिता को रखे कौन মান भाई भाई ने साधे मौन নিন থাল্ত্রী ক্ধী নানী ೯ তুনা हुई दुर्दशा ना देखी ऐसी परे पे पूंछत कौन समय पनिया भरने जातीं पनघट कुटुंब लाज का ओढ़े घूंघट ज्वार बाजरा मक्के की रोटी नौन मिर्च संग भूख मिटाती खेत में बैठे भरी दुपहरी सांझ ढले संग कीर्तन होते दो ठऊ चोंपे खूंटा बांधे पसेई भरे के पिंडा माढे भुंसारे से चकिया पीसी एन के प्रजापति हंसी की सालें बीती खुशी - ShareChat
#✍मेरे पसंदीदा लेखक #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #📚कविता-कहानी संग्रह
✍मेरे पसंदीदा लेखक - में चंचलता মন ব্ল্সান ম নম্পনা में लघुता 3IT f೯' में व्याकुलता मनुष्य में मानवता परिवार में एकता प्रकृति में सुंदरता  नदियों में पवित्रता মম্ভুব্র ম বিথালনা वाणी में मधुरता में एकाग्रता काम में मनोहरता रुप दुःख में सहनशीलता स्त्री में सौंदर्यता विचारों में गंभीरता पदार्थ में कठोरता एन के प्रजापति अतिआवश्यक है में चंचलता মন ব্ল্সান ম নম্পনা में लघुता 3IT f೯' में व्याकुलता मनुष्य में मानवता परिवार में एकता प्रकृति में सुंदरता  नदियों में पवित्रता মম্ভুব্র ম বিথালনা वाणी में मधुरता में एकाग्रता काम में मनोहरता रुप दुःख में सहनशीलता स्त्री में सौंदर्यता विचारों में गंभीरता पदार्थ में कठोरता एन के प्रजापति अतिआवश्यक है - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #✍मेरे पसंदीदा लेखक
📚कविता-कहानी संग्रह - धन्य धन्य मां भारती धन्य धन्य मां भारती हो रहा है राष्ट्र उन्नत नित हो रही है आरती .मातृभूमि रज तिलक कर धन्य धन्य मां भारती बढ चलें मंजिल की ओर उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम चहुं दिस ओर भारत भारत লঃস মাঙনা যান নিলানী नित हो रही है आरती। धन्य.. . २.तकनीकी का युग है देखो मार्ग स्वयं से अपने खोजो विकसित हो ये राष्ट्र हमारा  -:रचनाः- कीर्तिमान नव गढ़े चलो एन के प्रजापति गाकर कोयल हमें बताती नित हो रही है आरती। धन्य..  ३.संगठित हो एक रहें मन से मन के भेद मिटें यही सीखता विश्व यहां से अमिट सभ्यता है यहां की की वाणी गाती महापुरुषों नित हो रही है आरती। धन्य.. I/ धन्य धन्य मां भारती धन्य धन्य मां भारती हो रहा है राष्ट्र उन्नत नित हो रही है आरती .मातृभूमि रज तिलक कर धन्य धन्य मां भारती बढ चलें मंजिल की ओर उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम चहुं दिस ओर भारत भारत লঃস মাঙনা যান নিলানী नित हो रही है आरती। धन्य.. . २.तकनीकी का युग है देखो मार्ग स्वयं से अपने खोजो विकसित हो ये राष्ट्र हमारा  -:रचनाः- कीर्तिमान नव गढ़े चलो एन के प्रजापति गाकर कोयल हमें बताती नित हो रही है आरती। धन्य..  ३.संगठित हो एक रहें मन से मन के भेद मिटें यही सीखता विश्व यहां से अमिट सभ्यता है यहां की की वाणी गाती महापुरुषों नित हो रही है आरती। धन्य.. I/ - ShareChat
#✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
✍मेरे पसंदीदा लेखक - कौन क्या समझे राज गहरा पूनम रात अमावस अंधेरा बगिया दुःख का डेरा सुख की तरुवर डाली छाया पहरा महल अटारी आंगन सूना रोता हरदम मुश्किल जीना मात पिता न भईया बहना क्यों माने ये सबका कहना सच नहीं यहां बिकता క్ైర గ్గే' मानव रूपी दानव रहता सत्यता :- हो कौन? नहीं जानता मस्त मग्न ये धुन में रहता एन के प्रजापति मर्यादा का चीर हरण नहीं जाएगा कोई वन ೯ IథuT qUT 9 ಶ: घर घर होता देखो रण कृष्ण ने गीता  सुनाई कुरुक्षेत्र इंद्रजीत रावण बात समझाई मानस लिख बतलाई বুলমী कलयुग मानव अकल न आई विरूद्ध  f काज न करना मानवता को ले के चलना वेद पुराण सद्ग्रंथ बखाना सकल चराचर ब्रह्म समाना कौन क्या समझे राज गहरा पूनम रात अमावस अंधेरा बगिया दुःख का डेरा सुख की तरुवर डाली छाया पहरा महल अटारी आंगन सूना रोता हरदम मुश्किल जीना मात पिता न भईया बहना क्यों माने ये सबका कहना सच नहीं यहां बिकता క్ైర గ్గే' मानव रूपी दानव रहता सत्यता :- हो कौन? नहीं जानता मस्त मग्न ये धुन में रहता एन के प्रजापति मर्यादा का चीर हरण नहीं जाएगा कोई वन ೯ IథuT qUT 9 ಶ: घर घर होता देखो रण कृष्ण ने गीता  सुनाई कुरुक्षेत्र इंद्रजीत रावण बात समझाई मानस लिख बतलाई বুলমী कलयुग मानव अकल न आई विरूद्ध  f काज न करना मानवता को ले के चलना वेद पुराण सद्ग्रंथ बखाना सकल चराचर ब्रह्म समाना - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓ #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #📚कविता-कहानी संग्रह #🙏गुरु महिमा😇 #✍मेरे पसंदीदा लेखक
🙏कर्म क्या है❓ - था दिन यही जो बांकी देखा शिष्य को गुरु से लड़ते देखा महाभारत जहां द्रोण लडे थे एकलव्य जहां जिद पे अडे थे कलियुग और आगे निकला पर सुनाई देती है इक आहट जो शिष्यों बीच गुरु खडा अकेला सोचने पे जो मजबूर करती है नहीं पढ़ना क्या कर लोगे निकलो बाहर नहीं बचोगे समय की कीमत जो पहचान ले दौर कठिन होता गया भविष्य को उज्जवल वो बना ले वर्तमान बिगड़ता गया की है बहुत गहरी সহিনা হান दूरी किताबों से बिन गुरु के डुबकी है अधूरी दोस्ती असंगत से शिष्य शिक्षक से बड़ा अभिभावक सामने खडा झूठी वो कहावत हुई प्रजापति एन के मांस तुम्हारा हड्डी हमारी कुछ और ही स्थिति लाड़ले को डंडी मारी क्यों नहीं कोई शत्रु गुरुवर से पूछो मार भी इसकी आशीष समझो नाव एक पतवार दो बैठे ज्ञान के सागर में लेती हिलोरे धैर्य और संयम पार करा दे गुरु कृपा जो जीवन संवार दे था दिन यही जो बांकी देखा शिष्य को गुरु से लड़ते देखा महाभारत जहां द्रोण लडे थे एकलव्य जहां जिद पे अडे थे कलियुग और आगे निकला पर सुनाई देती है इक आहट जो शिष्यों बीच गुरु खडा अकेला सोचने पे जो मजबूर करती है नहीं पढ़ना क्या कर लोगे निकलो बाहर नहीं बचोगे समय की कीमत जो पहचान ले दौर कठिन होता गया भविष्य को उज्जवल वो बना ले वर्तमान बिगड़ता गया की है बहुत गहरी সহিনা হান दूरी किताबों से बिन गुरु के डुबकी है अधूरी दोस्ती असंगत से शिष्य शिक्षक से बड़ा अभिभावक सामने खडा झूठी वो कहावत हुई प्रजापति एन के मांस तुम्हारा हड्डी हमारी कुछ और ही स्थिति लाड़ले को डंडी मारी क्यों नहीं कोई शत्रु गुरुवर से पूछो मार भी इसकी आशीष समझो नाव एक पतवार दो बैठे ज्ञान के सागर में लेती हिलोरे धैर्य और संयम पार करा दे गुरु कृपा जो जीवन संवार दे - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #🎵 राधा-कृष्ण भजन 🙏
📚कविता-कहानी संग्रह - कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे नाम जो राधा से जुड़ा है नाम जो जोड़ने की जंजीर है नाम जो मीरा ने जपा है नाम जो मीठे रस की खीर है नाम जो सूरदास ने गाया নাম তী মন ব্ধী মলীননা ৪৫া ঐ नाम जो बृज रज समाया नाम जो कष्ट इस तन के मिटा दे नाम जो कलयुग को हराए नाम जो पानी भोजन हवा है नाम जो राह सब दिखाए नाम जो हर रोग की दवा है नाम जो आंसू आंखों का नाम जो पाप से बचाए नाम जो शब्द कानों का नाम जो सत्कर्म कराए नाम जो सांस हरजीवकी विष्णु महेश है जो ब्रह्मा नाम जो चाबी जीवन की जो तीनों लोकों में श्रेष्ठ है नाम जो जीवन का आधार है नाम जो भव से पार ले जाए नाम जो नौका खेवनहार है नाम जो परमात्मा से मिलाए कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे नाम जो राधा से जुड़ा है नाम जो जोड़ने की जंजीर है नाम जो मीरा ने जपा है नाम जो मीठे रस की खीर है नाम जो सूरदास ने गाया নাম তী মন ব্ধী মলীননা ৪৫া ঐ नाम जो बृज रज समाया नाम जो कष्ट इस तन के मिटा दे नाम जो कलयुग को हराए नाम जो पानी भोजन हवा है नाम जो राह सब दिखाए नाम जो हर रोग की दवा है नाम जो आंसू आंखों का नाम जो पाप से बचाए नाम जो शब्द कानों का नाम जो सत्कर्म कराए नाम जो सांस हरजीवकी विष्णु महेश है जो ब्रह्मा नाम जो चाबी जीवन की जो तीनों लोकों में श्रेष्ठ है नाम जो जीवन का आधार है नाम जो भव से पार ले जाए नाम जो नौका खेवनहार है नाम जो परमात्मा से मिलाए - ShareChat
#✍मेरे पसंदीदा लेखक #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #🙏कर्म क्या है❓ #📚कविता-कहानी संग्रह
✍मेरे पसंदीदा लेखक - नहीं -नहीं , नहीं -नहीं , uTq gUu फिर ऐसी दशा क्यों? धर्म कर्म है अजीब ये संसार सागर जात पात अंतर इनमें भूला है दिया जन्म जिसने उसे ठुकरा दिया घर परिवार दौलत से क्यों रो रहा है? उसे बेगाना किया रिश्तों की पवित्रता कलंकित हुई क्या रुलाया किसी ने? मर्यादा को जैसे क्या मारा किसी ने? भूल ही गई নমা মনামা ক্রিমী ন? हुए थोड़ा बड़े तो 4za क्या चुराया किसी ने? নামনা आए चार पैसे तो क्या छीना किसी ने? अहंकार में डूबा क्या भगाया किसी ने? भाई भाई में क्या जलाया किसी ने? आखिर बंटवारा हुआ तात मात का  डुबोया किसी ने? নমা वृद्धाश्रम आसियाना हुआ मैं श्रेष्ठ तुम लायक नहीं काबिल रचना कोई समझता नहीं # एन के प्रजापति जैसे कपसते सभी  जैसे दुश्मन ` মর্মী नहीं -नहीं , नहीं -नहीं , uTq gUu फिर ऐसी दशा क्यों? धर्म कर्म है अजीब ये संसार सागर जात पात अंतर इनमें भूला है दिया जन्म जिसने उसे ठुकरा दिया घर परिवार दौलत से क्यों रो रहा है? उसे बेगाना किया रिश्तों की पवित्रता कलंकित हुई क्या रुलाया किसी ने? मर्यादा को जैसे क्या मारा किसी ने? भूल ही गई নমা মনামা ক্রিমী ন? हुए थोड़ा बड़े तो 4za क्या चुराया किसी ने? নামনা आए चार पैसे तो क्या छीना किसी ने? अहंकार में डूबा क्या भगाया किसी ने? भाई भाई में क्या जलाया किसी ने? आखिर बंटवारा हुआ तात मात का  डुबोया किसी ने? নমা वृद्धाश्रम आसियाना हुआ मैं श्रेष्ठ तुम लायक नहीं काबिल रचना कोई समझता नहीं # एन के प्रजापति जैसे कपसते सभी  जैसे दुश्मन ` মর্মী - ShareChat
#📚कविता-कहानी संग्रह #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक
📚कविता-कहानी संग्रह - TIPS & TRICKS रखो विश्वास तो सही है सभी करो अभ्यास तो नहीं होगी गलती कभी इन्हें दोस्त बनाओ पुस्तकें बार बार फिर दोहराओ बैठ सखा संग वार्ता करना शिक्षक से फिर साझा करना तनिक मात्र संदेह ना रखना ध्यान वंदना करते रहना TIPS & TRICKS रखो विश्वास तो सही है सभी करो अभ्यास तो नहीं होगी गलती कभी इन्हें दोस्त बनाओ पुस्तकें बार बार फिर दोहराओ बैठ सखा संग वार्ता करना शिक्षक से फिर साझा करना तनिक मात्र संदेह ना रखना ध्यान वंदना करते रहना - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏कर्म क्या है❓ #👌 दोहे #📓 हिंदी साहित्य #📚कविता-कहानी संग्रह
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - मन मन का ना भेद मिटा संकीर्ण धरा में ये सिमटा बीच भंवर जीवन अटका छोड़ पंथ राहों में भटका खोजत खोजत यूं मिला शीत नीर से खाली मटका जड़ से चेतन बुद्धि विवेक हरि को ढूंढें तन अनेक में बंधा ये पिंजरा সামা 9াম स्वर्ण को देता फेंक भजन हाय हाय का मंत्र जपे योग साधना क्यों रमे चकाचौंध में खोया पंछी चैत्र वैशाख ज्येष्ठ तपे भाव भावना भाग्य बनाया नहीं लालसा को अपनाया লীন तपस्या छोड़ी माया ब्रह्म स्वरूप को पाई काया सोना चांदी हीरे मोती करोंड़ों बोली इनकी लगती राधा बल्लभ श्याम के आगे कीमत सारी शून्य ही रहती मन मन का ना भेद मिटा संकीर्ण धरा में ये सिमटा बीच भंवर जीवन अटका छोड़ पंथ राहों में भटका खोजत खोजत यूं मिला शीत नीर से खाली मटका जड़ से चेतन बुद्धि विवेक हरि को ढूंढें तन अनेक में बंधा ये पिंजरा সামা 9াম स्वर्ण को देता फेंक भजन हाय हाय का मंत्र जपे योग साधना क्यों रमे चकाचौंध में खोया पंछी चैत्र वैशाख ज्येष्ठ तपे भाव भावना भाग्य बनाया नहीं लालसा को अपनाया লীন तपस्या छोड़ी माया ब्रह्म स्वरूप को पाई काया सोना चांदी हीरे मोती करोंड़ों बोली इनकी लगती राधा बल्लभ श्याम के आगे कीमत सारी शून्य ही रहती - ShareChat