writer manoj.
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@manoj161150143
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पिंगल साहित्यिक संस्था ✍️
#💔दर्द भरी कहानियां #💓 दिल के अल्फ़ाज़
💔दर्द भरी  कहानियां - মুক্কুন ক্কা ট . মমলা নী वरना ज़िंदगी तो हर कोई काट रहा है মুক্কুন ক্কা ট . মমলা নী वरना ज़िंदगी तो हर कोई काट रहा है - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #💔दर्द भरी कहानियां
✍️ साहित्य एवं शायरी - कलयुग का एक ही नियम है जितना अटूट विश्वास होगा उतना ही खतरनाक धोखा होगा। कलयुग का एक ही नियम है जितना अटूट विश्वास होगा उतना ही खतरनाक धोखा होगा। - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍ आदर्श कोट्स
✍️ साहित्य एवं शायरी - वक़्त जब कोड़े मारना शुरू करता है, तब लंगड़े घोड़े़ भी दौड़ने लगते हैं.. वक़्त जब कोड़े मारना शुरू करता है, तब लंगड़े घोड़े़ भी दौड़ने लगते हैं.. - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍ आदर्श कोट्स
✍️ साहित्य एवं शायरी - के दाम मिलते हैं, তুলামী आज़ादी की कीमत पड़ती है। चुकानी के दाम मिलते हैं, তুলামী आज़ादी की कीमत पड़ती है। चुकानी - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #✍ आदर्श कोट्स
✍️ साहित्य एवं शायरी - संघर्ष थकाता जरूर है लेकिन हमें बाहर से सुंदर और अंदर से मजबूत बनाता है संघर्ष थकाता जरूर है लेकिन हमें बाहर से सुंदर और अंदर से मजबूत बनाता है - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी #💔दर्द भरी कहानियां
✍️ साहित्य एवं शायरी - कभी कभी रास्ते नही , खुद को बदल लेना बेहतर होता है .! कभी कभी रास्ते नही , खुद को बदल लेना बेहतर होता है .! - ShareChat
#💔दर्द भरी कहानियां #✍️ साहित्य एवं शायरी
💔दर्द भरी  कहानियां - कुछ गलतियों से सीख मिली है कि, अपनों को उतना ही अपना मानो जितना वो तुम्हें मानते हैं। कुछ गलतियों से सीख मिली है कि, अपनों को उतना ही अपना मानो जितना वो तुम्हें मानते हैं। - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - जीवन का अधिकांश हिस्सा , हम दिमाग़ में जीते हैं। 0 9 3 जीवन का अधिकांश हिस्सा , हम दिमाग़ में जीते हैं। 0 9 3 - ShareChat
#✍️ साहित्य एवं शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - सत्ता को कुछ भी उतना शक्तिशाली नहीं बनाता जितना कि हमारी चुप्पी। सत्ता को कुछ भी उतना शक्तिशाली नहीं बनाता जितना कि हमारी चुप्पी। - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️
📖 कविता और कोट्स✒️ - मन की बातें मन ही जाने। बुनता रहता ताने-बाने। । सुनता बिल्कुल नहीं हमारी। इसे पडोसन लगती प्यारी।| इसको मैं कैसे समझाऊँ। राम करो कुछ समझ न पाऊँ। । तेरी भक्ति में हूँ डूबा। दिलवा दो मुझको महबूबा। | মনীত मन की बातें मन ही जाने। बुनता रहता ताने-बाने। । सुनता बिल्कुल नहीं हमारी। इसे पडोसन लगती प्यारी।| इसको मैं कैसे समझाऊँ। राम करो कुछ समझ न पाऊँ। । तेरी भक्ति में हूँ डूबा। दिलवा दो मुझको महबूबा। | মনীত - ShareChat