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भारत की पारंपरिक फसलें: संपूर्ण जानकारी (हिंदी) भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ प्राचीन काल से ही जलवायु, मिट्टी और ऋतु के अनुसार विभिन्न पारंपरिक फसलें उगाई जाती रही हैं। ये फसलें कम पानी में भी अच्छी उपज देती हैं और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती हैं। 1. धान (चावल) धान भारत की सबसे पुरानी और प्रमुख पारंपरिक फसल है। यह मुख्य रूप से खरीफ मौसम में उगाई जाती है। मुख्य राज्य: पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु विशेषता: भारत में हजारों देशी धान की किस्में पाई जाती हैं। 2. गेहूं गेहूं रबी मौसम की पारंपरिक फसल है। यह उत्तर भारत में सदियों से उगाई जा रही है। मुख्य राज्य: पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश उपयोग: आटा, रोटी, दलिया 3. ज्वार ज्वार मोटे अनाज (Millets) में शामिल है और भारत की सबसे पुरानी फसलों में से एक है। विशेषता: कम पानी में उगने वाली फसल मुख्य राज्य: महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना 4. बाजरा बाजरा शुष्क क्षेत्रों की पारंपरिक फसल है। पोषण: आयरन और फाइबर से भरपूर मुख्य राज्य: राजस्थान, गुजरात, हरियाणा 5. रागी (मंडुआ) रागी दक्षिण भारत की प्राचीन फसल है। लाभ: कैल्शियम से भरपूर, हड्डियों के लिए लाभकारी मुख्य राज्य: कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तराखंड 6. दलहन फसलें भारत में अरहर, चना, मूंग, उड़द जैसी दलहन फसलें पारंपरिक रूप से उगाई जाती रही हैं। लाभ: मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती हैं मुख्य राज्य: मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र 7. तिलहन फसलें सरसों, तिल और मूंगफली भारत की पारंपरिक तिलहन फसलें हैं। उपयोग: तेल उत्पादन मुख्य राज्य: उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात 8. गन्ना गन्ना प्राचीन काल से भारत में उगाया जा रहा है। उपयोग: गुड़ और चीनी मुख्य राज्य: उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार 9. कपास कपास भारत की पारंपरिक नकदी फसल है। उपयोग: वस्त्र उद्योग मुख्य राज्य: गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना 10. देशी सब्जियाँ और कंद फसलें अरबी, शकरकंद, जिमीकंद और कद्दू जैसी सब्जियाँ पारंपरिक खेती का हिस्सा रही हैं। पारंपरिक फसलों का महत्व कम लागत में खेती कम पानी और रसायन की आवश्यकता जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक सहनशील स्वास्थ्य के लिए लाभकारी जैव विविधता का संरक्षण #Educational निष्कर्ष भारत की पारंपरिक फसलें न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं, बल्कि भविष्य की टिकाऊ खेती का आधार भी हैं। इनका संरक्षण और पुनः उपयोग आज की बड़ी आवश्यकता है।
भारत की पारंपरिक फसलें: संपूर्ण जानकारी (हिंदी) भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहाँ प्राचीन काल से ही जलवायु, मिट्टी और ऋतु के अनुसार विभिन्न पारंपरिक फसलें उगाई जाती रही हैं। ये फसलें कम पानी में भी अच्छी उपज देती हैं और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी मानी जाती हैं। 1. धान (चावल) धान भारत की सबसे पुरानी और प्रमुख पारंपरिक फसल है। यह मुख्य रूप से खरीफ मौसम में उगाई जाती है। मुख्य राज्य: पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु विशेषता: भारत में हजारों देशी धान की किस्में पाई जाती हैं। 2. गेहूं गेहूं रबी मौसम की पारंपरिक फसल है। यह उत्तर भारत में सदियों से उगाई जा रही है। मुख्य राज्य: पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश उपयोग: आटा, रोटी, दलिया 3. ज्वार ज्वार मोटे अनाज (Millets) में शामिल है और भारत की सबसे पुरानी फसलों में से एक है। विशेषता: कम पानी में उगने वाली फसल मुख्य राज्य: महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना 4. बाजरा बाजरा शुष्क क्षेत्रों की पारंपरिक फसल है। पोषण: आयरन और फाइबर से भरपूर मुख्य राज्य: राजस्थान, गुजरात, हरियाणा 5. रागी (मंडुआ) रागी दक्षिण भारत की प्राचीन फसल है। लाभ: कैल्शियम से भरपूर, हड्डियों के लिए लाभकारी मुख्य राज्य: कर्नाटक, तमिलनाडु, उत्तराखंड 6. दलहन फसलें भारत में अरहर, चना, मूंग, उड़द जैसी दलहन फसलें पारंपरिक रूप से उगाई जाती रही हैं। लाभ: मिट्टी की उर्वरता बढ़ाती हैं मुख्य राज्य: मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र 7. तिलहन फसलें सरसों, तिल और मूंगफली भारत की पारंपरिक तिलहन फसलें हैं। उपयोग: तेल उत्पादन मुख्य राज्य: उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात 8. गन्ना गन्ना प्राचीन काल से भारत में उगाया जा रहा है। उपयोग: गुड़ और चीनी मुख्य राज्य: उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, बिहार 9. कपास कपास भारत की पारंपरिक नकदी फसल है। उपयोग: वस्त्र उद्योग मुख्य राज्य: गुजरात, महाराष्ट्र, तेलंगाना 10. देशी सब्जियाँ और कंद फसलें अरबी, शकरकंद, जिमीकंद और कद्दू जैसी सब्जियाँ पारंपरिक खेती का हिस्सा रही हैं। पारंपरिक फसलों का महत्व कम लागत में खेती कम पानी और रसायन की आवश्यकता जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक सहनशील स्वास्थ्य के लिए लाभकारी जैव विविधता का संरक्षण निष्कर्ष भारत की पारंपरिक फसलें न केवल हमारी सांस्कृतिक विरासत हैं, बल्कि भविष्य की टिकाऊ खेती का आधार भी हैं। इनका संरक्षण और पुनः उपयोग आज की बड़ी आवश्यकता है। #Educational
नए साल की सुबह थी। शहर अभी पूरी तरह जागा नहीं था, लेकिन चाय की दुकानों से उठती भाप और अख़बार की खड़खड़ाहट बता रही थी कि एक और साल शुरू हो चुका है। रोहित अपनी बालकनी में खड़ा था। मोबाइल पर रात की बधाइयों के संदेश अभी भी चमक रहे थे, पर उसका मन शांत नहीं था। पिछला साल उसके लिए आसान नहीं रहा था। नौकरी चली गई, कुछ रिश्ते टूट गए और आत्मविश्वास भी कहीं पीछे छूट गया। रात बारह बजे उसने भी दूसरों की तरह “हैप्पी न्यू ईयर” लिखा था, लेकिन दिल से नहीं। सुबह उसने एक छोटा सा फैसला किया। बड़े वादों की जगह छोटे कदम। वह नीचे उतरकर पास के पार्क में टहलने गया। ठंडी हवा #Educational ने जैसे उसके भीतर जमी उदासी को थोड़ा ढीला कर दिया। एक बूढ़े माली को पौधों में पानी देते देख वह रुक गया। माली मुस्कराया और बोला, “हर साल पौधे नए नहीं होते, पर हर साल उन्हें संभालना नया होता है।” रोहित को बात समझ आ गई। नया साल जादू नहीं लाता, मौका देता है। उसने घर लौटकर रिज़्यूमे खोला, एक कॉल किया और खुद से कहा—आज से शुरुआत है। नई नहीं, लेकिन सच्ची।
🌟 फ़र्डिनान्ड शेवाल कौन थे? Ferdinand Cheval (फर्डिनान्ड शेवाल) एक साधारण फ्रेंच डाकिए (मेलमैन) थे, जिनका जन्म 19 अप्रैल 1836 को फ्रांस के Drôme इलाके में हुआ था। उन्होंने औपचारिक शिक्षा बहुत कम प्राप्त की थी और जिंदगी में सामान्य काम करते थे, लेकिन उन्होंने अपने सपने और कल्पना को सच्चाई में बदल दिया। � Wikipedia 🏰 Palais Idéal — उनका अद्वितीय “आइडियल पैलेस” 🧱 शुरुआत एक दिन 1879 में अपने डाक के रूट पर चलते हुए, Cheval का पैर एक अजीब-सी आकार की पत्थर पर ठोकर खाकर गिर पड़ा। उस पत्थर के आकार ने उन्हें बहुत प्रेरित किया। � Le Palais Idéal du Facteur Cheval अगले दिन उन्होंने उसी तरह के कई पत्थर इकट्ठा किए और घर ले आएँ। इन्हीं पत्थरों से उन्होंने अपना सपना एक महल जैसा ढांचा बनाने का निर्णय लिया। � Wikipedia 👷 निर्माण की कहानी उन्होंने 1879 से 1912 तक लगभग 33 साल तक एकल-हाथ यह महल बनाया। � Wikipedia +1 रोज़ डाक बाँटते समय, 30-40 किलोमीटर पैदल चलकर, वे रास्ते में चुने हुए प्राकृतिक पत्थरों को wheelbarrow (टोकरी) में भरकर अपने घर लाते थे। � Le Palais Idéal du Facteur Cheval रात में तेल की लैंप की रोशनी में भी वे लगातार काम करते थे। � Atlas Obscura उन्होंने पत्थरों को चूने, मोर्टार और सीमेंट से जोड़कर महल की दीवारें, गलियाँ, गुफाएँ और टावर बनाए। � Atlas Obscura 🏛️ पैलेस की खास बातें ✨ अनोखी शैली Palais Idéal (आइडियल पैलेस) यह कोई पारंपरिक महल नहीं है — यह एक कल्पनाशील, फैंटेसी-जैसा, naïve art (उन अनुभूत कला) का अद्भुत उदाहरण है: स्थापत्य शैली में हिन्दू मंदिर, मिस्र, यूरोपीय महल, अरब मस्जिद जैसे कई प्रभाव दिखते हैं। � Paris Secret यहाँ जानवरों, दैत्य-मूर्ति, ग्रोथ और पथरें गहराई-से तराशी हुई हैं। � Atlas Obscura पूरी संरचना लगभग 26 मीटर लंबी और 12 मीटर ऊँची है। � Wikipedia 🧠 प्रेरणा और कला Cheval ने इस पर कई कविताएँ और उद्धरण खुद ही खुदाई करके लिखे जैसे: “The work of one man” यानी “एक व्यक्ति का कार्य”। � Atlas Obscura उनका संदेश था कि संघर्ष, कल्पना और मेहनत से कोई भी असंभव लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। � Atlas Obscura 📜 महत्त्व और मान्यता यह अनूठी रचना आज France के Hauterives (ड्रोम विभाग) में है और एक प्रसिद्ध ऐतिहासिक स्मारक के रूप में संरक्षित है। � Wikipedia 1969 में इसे Historic Monument (ऐतिहासिक स्मारक) घोषित किया गया। � Wikipedia यह दुनिया भर से पर्यटकों को आकर्षित करता है और कला प्रेमियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। � Atlas Obscura 🪦 शेवाल की बाकी रचनाएँ इस पैलेस के अलावा उन्होंने अपने स्वयं के लिए एक अद्वितीय #Educational कब्र (tomb/memorial) भी बनाया, जिसे later cemetery में स्थापित किया गया। � avignon-et-provence.com 🧠 संक्षेप में 📌 Ferdinand Cheval एक साधारण डाकिया था, जिसने बिना किसी औपचारिक कला या वास्तुकला की शिक्षा के 33 साल तक अकेले एक अद्भुत स्वप्न-महल बनाया। � 📌 यह महल Palais Idéal नाम से जाना जाता है और आज भी कला-प्रेमियों के लिए एक प्रेरणा है। �
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हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य के एक महान कवि थे, जिन्हें विशेष रूप से उनकी कृति “मधुशाला” के लिए जाना जाता है। उनका योगदान हिंदी कविता को नई पहचान देने में बहुत महत्वपूर्ण रहा है। संक्षिप्त जीवन परिचय पूरा नाम: हरिवंश राय श्रीवास्तव जन्म: 27 नवम्बर 1907, प्रयागराज (उत्तर प्रदेश) निधन: 18 जनवरी 2003, मुंबई पिता: प्रताप नारायण श्रीवास्तव माता: सरस्वती देवी शिक्षा हरिवंश राय बच्चन जी ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की। बाद में उन्होंने इंग्लैंड के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पीएच.डी. की उपाधि हासिल की। उनकी शोध हिंदी कवि डब्ल्यू. बी. यीट्स पर आधारित थी। साहित्यिक योगदान हरिवंश राय बच्चन को छायावादोत्तर युग का प्रमुख कवि माना जाता है। उनकी भाषा सरल, भावपूर्ण और आम जनमानस से जुड़ी हुई थी। प्रमुख रचनाएँ: मधुशाला मधुबाला मधुकलश निशा निमंत्रण एकांत संगीत अगेय गीत क्या भूलूँ क्या याद करूँ (आत्मकथा) सम्मान और पुरस्कार पद्म भूषण (1976) साहित्य अकादमी पुरस्कार उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कई साहित्यिक सम्मान परिवार पत्नी: तेजी बच्चन पुत्र: अमिताभ बच्चन (प्रसिद्ध अभिनेता), अजीताभ बच्चन विशेष बात हरिवंश राय बच्चन ने हिंदी कविता को दार्शनिक गहराई के साथ-साथ लोकप्रियता भी दिलाई। उनकी “मधुशाला” आज भी युवाओं और साहित्य प्रेमियों में समान रूप से #Educational
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लोहड़ी पर्व की संपूर्ण जानकारी (कॉपीराइट फ्री) लोहड़ी भारत का एक प्रमुख लोक पर्व है, जो मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली के कुछ हिस्सों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार हर वर्ष 13 जनवरी को मनाया जाता है और सर्दियों के अंत तथा फसल के मौसम की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। लोहड़ी का महत्व लोहड़ी का पर्व सूर्य देवता और अग्नि देवता को समर्पित होता है। इस दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करने वाले होते हैं, जिससे दिन लंबे और रातें छोटी होने लगती हैं। किसान वर्ग के लिए यह त्योहार विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह रबी की फसल के पकने का संकेत देता है। लोहड़ी से जुड़ी मान्यताएँ लोहड़ी का संबंध लोकनायक दुल्ला भट्टी से भी जोड़ा जाता है, जिन्हें पंजाब का रॉबिन हुड कहा जाता है। कहा जाता है कि उन्होंने गरीब लड़कियों की रक्षा की और उनके विवाह में सहायता की। इसलिए लोहड़ी के गीतों में आज भी दुल्ला भट्टी का नाम लिया जाता है। लोहड़ी कैसे मनाई जाती है लोहड़ी की शाम लोग खुले स्थान पर अलाव (आग) जलाते हैं और उसके चारों ओर घूमकर मूंगफली, रेवड़ी, तिल, गुड़, पॉपकॉर्न आदि अग्नि में अर्पित करते हैं। यह अग्नि को धन्यवाद देने और सुख-समृद्धि की कामना करने का प्रतीक है। लोग पारंपरिक गीत गाते हैं, भांगड़ा और गिद्धा करते हैं और एक-दूसरे को लोहड़ी की शुभकामनाएँ देते हैं। लोहड़ी के पारंपरिक व्यंजन इस दिन सरसों का साग और मक्के की रोटी, तिल-गुड़ से बने व्यंजन, रेवड़ी और गजक विशेष रूप से खाए जाते हैं। बच्चों और नवविवाहितों के लिए विशेष महत्व जिन परिवारों में नवविवाहित दंपती या नवजात शिशु होता है, उनके लिए पहली लोहड़ी बहुत खास मानी जाती है और इसे बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। लोहड़ी का संदेश लोहड़ी हमें एकता, कृतज्ञता, परिश्रम और प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश देती है। यह पर्व सामाजिक मेल-जोल और खुशियों को साझा करने का प्रतीक है। #festival
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विश्व हिंदी दिवस (World Hindi Day) विश्व हिंदी दिवस हर वर्ष 10 जनवरी को मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य हिंदी भाषा को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देना और विश्व भर में हिंदी के महत्व को रेखांकित करना है। यह दिवस भारत सहित कई देशों में बसे हिंदी प्रेमियों को एक साझा मंच प्रदान करता है। 📅 विश्व हिंदी दिवस की शुरुआत विश्व हिंदी दिवस पहली बार 10 जनवरी 2006 को मनाया गया था। इस दिन का चयन इसलिए किया गया क्योंकि 10 जनवरी 1975 को नागपुर (महाराष्ट्र) में पहला विश्व हिंदी सम्मेलन आयोजित हुआ था। उसी ऐतिहासिक सम्मेलन की स्मृति में हर साल 10 जनवरी को यह दिवस मनाया जाता है। 🗣️ हिंदी भाषा का महत्व हिंदी विश्व की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषाओं में से एक है। यह न केवल भारत की राजभाषा है, बल्कि कई देशों जैसे नेपाल, फिजी, मॉरीशस, सूरीनाम, त्रिनिदाद और टोबैगो आदि में भी हिंदी या उससे जुड़ी भाषाएँ बोली जाती हैं। हिंदी हमारी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक मूल्यों की वाहक है। 🎯 विश्व हिंदी दिवस का उद्देश्य हिंदी भाषा को वैश्विक पहचान दिलाना विदेशी धरती पर हिंदी के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना नई पीढ़ी को हिंदी भाषा से जोड़ना हिंदी साहित्य और संस्कृति को अंतरराष्ट्रीय मंच देना 🏛️ कैसे मनाया जाता है इस अवसर पर भारत के विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावासों, स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न संस्थानों द्वारा: हिंदी कवि सम्मेलन निबंध प्रतियोगिता भाषण कार्यक्रम #Educational हिंदी कार्यशालाएँ आदि का आयोजन किया जाता है। 🌐 विश्व स्तर पर हिंदी आज डिजिटल माध्यम, सोशल मीडिया, फिल्मों और साहित्य के कारण हिंदी विश्व के कोने-कोने तक पहुँच रही है। विश्व हिंदी दिवस इसी बढ़ते प्रभाव का प्रतीक है। ✨ निष्कर्ष विश्व हिंदी दिवस हमें अपनी मातृभाषा पर गर्व करने और उसे अपनाने की प्रेरणा देता है। हिंदी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि हमारी पहचान और आत्मा है। इसे सहेजना और आगे बढ़ाना हम सभी की जिम्मेदारी है।
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प्रवासी भारतीय दिवस (Pravasi Bharatiya Diwas) प्रवासी भारतीय दिवस हर वर्ष 9 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन उन भारतीयों को सम्मान देने के लिए मनाया जाता है जो भारत से बाहर रहते हुए भी अपनी मेहनत, प्रतिभा और कार्यों से भारत का नाम रोशन कर रहे हैं। इस दिवस का उद्देश्य प्रवासी भारतीयों को भारत के विकास से जोड़ना और उनके योगदान को पहचान देना है। 9 जनवरी को ही क्यों मनाया जाता है? 9 जनवरी 1915 को महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत वापस लौटे थे। उन्होंने विदेश में रहते हुए भी भारतीयों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया। इसी ऐतिहासिक घटना की याद में यह दिन चुना गया। प्रवासी भारतीय कौन होते हैं? जो भारतीय नागरिक या भारतीय मूल के लोग रोज़गार, व्यापार, शिक्षा या अन्य कारणों से विदेशों में रहते हैं, उन्हें प्रवासी भारतीय कहा जाता है। आज दुनिया के लगभग हर देश में भारतीय समुदाय मौजूद है। प्रवासी भारतीय दिवस का उद्देश्य प्रवासी भारतीयों के योगदान को सम्मान देना भारत और प्रवासी भारतीयों के बीच संबंध मजबूत करना निवेश, शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति में सहयोग बढ़ाना युवा प्रवासी भारतीयों को भारत से जोड़ना आयोजन इस अवसर पर भारत सरकार द्वारा सम्मेलन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और विचार-विमर्श आयोजित किए जाते हैं। कुछ प्रवासी भारतीयों को उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए प्रवासी भारतीय सम्मान पुरस्कार भी दिया जाता है। महत्व प्रवासी भारतीय भारत की संस्कृति, परंपरा और मूल्यों को विदेशों में फैलाते हैं। वे आर्थिक, सामाजिक और तकनीकी विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। प्रवासी भारतीय दिवस उनके योगदान को याद करने और उन्हें सम्मान देने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। निष्कर्ष प्रवासी भारतीय दिवस हमें यह याद दिलाता है कि भले ही भारतीय दुनिया के किसी भी कोने में हों, उनका दिल और योगदान हमेशा भारत से जुड़ा रहता है। यह दिन वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान को और मजबूत करता है। #Educational
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नेशनल व्हिप्ड क्रीम डे (National Whipped Cream Day) नेशनल व्हिप्ड क्रीम डे हर साल 5 जनवरी को मनाया जाता है। यह दिन खास तौर पर मीठे खाने के शौकीनों के लिए होता है। व्हिप्ड क्रीम का उपयोग केक, पेस्ट्री, आइसक्रीम, कॉफी, हॉट चॉकलेट और कई मिठाइयों को सजाने व स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है। व्हिप्ड क्रीम क्या है? व्हिप्ड क्रीम दूध की मलाई (फ्रेश क्रीम) को अच्छी तरह फेंटकर बनाई जाती है। फेंटने पर इसमें हवा भर जाती है, जिससे यह हल्की, मुलायम और फूली हुई बन जाती है। कई बार इसमें थोड़ी चीनी और वैनिला एसेंस मिलाकर इसका स्वाद और खुशबू बढ़ाई जाती है। इतिहास व्हिप्ड क्रीम का उपयोग कई सौ सालों से होता आ रहा है। माना जाता है कि इसका प्रयोग सबसे पहले यूरोप में हुआ था। समय के साथ यह दुनिया भर में लोकप्रिय हो गई और आज यह लगभग हर बेकरी और कैफे में इस्तेमाल की जाती है। इस दिन को कैसे मनाएं? घर पर केक या मिठाई बनाकर उस पर व्हिप्ड क्रीम डालें कॉफी या हॉट चॉकलेट में व्हिप्ड क्रीम का आनंद लें बच्चों के साथ आसान डेज़र्ट बनाएं सोशल मीडिया पर अपने पसंदीदा डेज़र्ट की तस्वीर साझा करें रोचक तथ्य व्हिप्ड क्रीम खाने को न केवल सुंदर बनाती है बल्कि स्वाद भी दोगुना कर देती है यह मीठे के साथ-साथ कुछ ठंडे ड्रिंक्स में भी खूब पसंद की जाती है सही तरीके से फेंटी गई क्रीम कुछ समय तक अपना आकार बनाए रखती है निष्कर्ष नेशनल व्हिप्ड क्रीम डे हमें छोटे-छोटे स्वादिष्ट पलों का आनंद लेना सिखाता है। यह दिन मिठास, खुशी और रचनात्मकता से जुड़ा हुआ है। अपने परिवार और दोस्तों के साथ मिलकर इस दिन को मीठे व्यंजनों के साथ खास बनाया जा सकता है। #Educational
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