लीला का प्रसंग:
धन्ना जाट इतने भोले भक्त थे कि उन्होंने भगवान को जबरदस्ती खाना खिलाने की जिद की। भगवान उनकी सरलता पर ऐसे रीझे कि जब धन्ना भक्ति में लीन रहते, तो स्वयं भगवान उनके खेत में हल चलाते और फसल काटते थे। यहाँ तक कि धन्ना ने अनजाने में जो सूखे बीज बोए थे, भगवान की कृपा से उनमें से बेशकीमती मोती और अनाज की ऐसी फसल हुई कि पूरा गांव दंग रह गया।
व्याख्या:
प्रथम पंक्ति: 'धन्ना जाट' एक अत्यंत सरल और भोले किसान थे, जिनकी भक्ति में कोई दिखावा नहीं था। जब वे भगवान की भक्ति में लीन (खो) जाते, तो उन्हें संसार की सुध नहीं रहती थी। यहाँ 'सुजान' शब्द उनकी उसी आत्मिक श्रेष्ठता और चतुरता को दर्शाता है, जिसने साक्षात ईश्वर को अपना बना लिया।
द्वितीय पंक्ति: भक्त की तन्मयता देख प्रभु से रहा न गया। धन्ना भक्ति में डूबे रहे और उनके हिस्से का कर्म (खेती-बाड़ी) स्वयं भगवान ने संभाल लिया। साक्षात जगत के स्वामी ने अपने हाथों में 'लाठी और दरांती' थाम ली और एक साधारण मजदूर की तरह धन्ना के खेत की फसल काटी।
निष्कर्ष: यह लीला सिद्ध करती है कि ईश्वर को पाने के लिए वेदों का ज्ञान अनिवार्य नहीं है, केवल एक निश्छल और पवित्र हृदय ही काफी है। जब भक्त पूरी तरह भगवान पर आश्रित हो जाता है, तो उसके सांसारिक कार्यों का भार स्वयं प्रभु अपने कंधों पर उठा लेते हैं। #🙏शाम की आरती🪔