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#🙏 भक्ति #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱
🙏 भक्ति - बाप के पास जो वक्खर (सामान) "मीठे बच्चे ر সিলা ঔ, নুস বমী है, उसका पूरा ही अन्त तुम्हें धारण करो और कराओ" प्रश्नः- त्रिकालदर्शी बाप ड्रामा के आदि-मध्य अन्त को जानते हुए भी कल की बात आज नहीं बताते हैं f? बच्चे अगर मैं पहले से ही कहते ওন২:- নানা दूँ तो ड्रामा का मजा ही निकल जाए। यह लॉ बता नहीं कहता। सब कुछ जानते हुए मैं भी ड्रामा के वश हूँ। सुना नहीं सकता, इसलिए क्या होगा पहले तुम उसकी चिंता छोड़ दो। बाप के पास जो वक्खर (सामान) "मीठे बच्चे ر সিলা ঔ, নুস বমী है, उसका पूरा ही अन्त तुम्हें धारण करो और कराओ" प्रश्नः- त्रिकालदर्शी बाप ड्रामा के आदि-मध्य अन्त को जानते हुए भी कल की बात आज नहीं बताते हैं f? बच्चे अगर मैं पहले से ही कहते ওন২:- নানা दूँ तो ड्रामा का मजा ही निकल जाए। यह लॉ बता नहीं कहता। सब कुछ जानते हुए मैं भी ड्रामा के वश हूँ। सुना नहीं सकता, इसलिए क्या होगा पहले तुम उसकी चिंता छोड़ दो। - ShareChat
#🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏 भक्ति
🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 - सेवाधारी का कर्तव्य है निरन्तर सेवा में रहना चाहे मंसा सेवा हो, चाहे वाचा वा कर्मणा सेवा हो। सेवाधारी कभी भी सेवा को अपने से अलग नहीं समझते। जिनकी बुद्धि में सदा सेवा की लगन है उनकी लौकिक बदलकर ईश्वरीय সবৃনি रहती हो जाती है। सेवाधारी घर को घर नहीं সবৃনি समझते लेकिन सेवास्थान समझकर चलते हैं। सेवाधारी का मुख्य गुण है त्याग। त्याग বাল ؟ में तपस्वीमूर्त होकर रहते हैं जिससे सेवा সবৃনি स्वतः होती है। स्लोगनः-अपने संस्कारों को दिव्य बनाना है तो मन-बुद्धि को बाप के आगे समर्पित कर दो। सेवाधारी का कर्तव्य है निरन्तर सेवा में रहना चाहे मंसा सेवा हो, चाहे वाचा वा कर्मणा सेवा हो। सेवाधारी कभी भी सेवा को अपने से अलग नहीं समझते। जिनकी बुद्धि में सदा सेवा की लगन है उनकी लौकिक बदलकर ईश्वरीय সবৃনি रहती हो जाती है। सेवाधारी घर को घर नहीं সবৃনি समझते लेकिन सेवास्थान समझकर चलते हैं। सेवाधारी का मुख्य गुण है त्याग। त्याग ؟ में तपस्वीमूर्त होकर रहते हैं जिससे सेवा সবৃনি स्वतः होती है। स्लोगनः-अपने संस्कारों को दिव्य बनाना है तो मन-बुद्धि को बाप के आगे समर्पित कर दो। - ShareChat
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🙏गीता ज्ञान🛕 - নুম তানন কা इस समय सभा सीताय रावण की शोक वाटिका में हैं। यह सारी ர सागर के बीच में लंका है। अभी सब रावण की जेल में लिए पडे़े हैं। सर्व की करने के बाप आये सद्गति हैं। सब शोक वाटिका में हैं। स्वर्ग में है सुख, नर्क में है दुःख। इसको शोक वाटिका कहेंगे। वह है अशोक, स्वर्ग। बहुत बड़ा अन्तर है। तुम बच्चों को कोशिश कर बाप को याद करना चाहिए तो खशी নুম তানন কা इस समय सभा सीताय रावण की शोक वाटिका में हैं। यह सारी ர सागर के बीच में लंका है। अभी सब रावण की जेल में लिए पडे़े हैं। सर्व की करने के बाप आये सद्गति हैं। सब शोक वाटिका में हैं। स्वर्ग में है सुख, नर्क में है दुःख। इसको शोक वाटिका कहेंगे। वह है अशोक, स्वर्ग। बहुत बड़ा अन्तर है। तुम बच्चों को कोशिश कर बाप को याद करना चाहिए तो खशी - ShareChat
#🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 #🙏 भक्ति #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 - यह है पारलौकिक आत्माओं का बाप। आत्माओं से ही बात करते हैं। उनको बच्चे-बच्चे कहने की प्रैक्टिस हो जाती है। भल शरीर बच्ची का है परन्तु आत्मायें तो सब बच्चे ही हैं। हर आत्मा वारिस है अर्थात् वर्सा लेने की हकदार है। बाप आकर कहते हैं बच्चों तुम हर एक को वर्सा लेने का हक है। बेहद के बाप को बहुत याद करना है, इसमें ही मेहनत है। बाबा परमधाम से आये हैं हमको पढ़ाने। साधू-्सन्त तो अपने घर से आते हैं वा कोई गाँवड़े से आते हैं। बाबा तो परमधाम से आये हैं हमको यह किसको मालूम नहीं है। बेहद का बाप पढ़ाने। वही पतितःपावन गॉड फादर है। उनको ओशन ऑफ नॉलेज भी कहते हैं, अथॉरिटी है ना। कौन सी नॉलेज है? ईश्वरीय नॉलेज है। बाप है मनुष्य का बीज रूप। सत-चित् आनंद स्वरूप। सृष्टि उनकी बड़ी भारी महिमा है। उनके पास यह वक्खर (सामग्री) है। कोई के पास दुकान होता है, कहेंगे हमारी दकान में यह-्यह वैरायटी है। बाप भी कहते यह है पारलौकिक आत्माओं का बाप। आत्माओं से ही बात करते हैं। उनको बच्चे-बच्चे कहने की प्रैक्टिस हो जाती है। भल शरीर बच्ची का है परन्तु आत्मायें तो सब बच्चे ही हैं। हर आत्मा वारिस है अर्थात् वर्सा लेने की हकदार है। बाप आकर कहते हैं बच्चों तुम हर एक को वर्सा लेने का हक है। बेहद के बाप को बहुत याद करना है, इसमें ही मेहनत है। बाबा परमधाम से आये हैं हमको पढ़ाने। साधू-्सन्त तो अपने घर से आते हैं वा कोई गाँवड़े से आते हैं। बाबा तो परमधाम से आये हैं हमको यह किसको मालूम नहीं है। बेहद का बाप पढ़ाने। वही पतितःपावन गॉड फादर है। उनको ओशन ऑफ नॉलेज भी कहते हैं, अथॉरिटी है ना। कौन सी नॉलेज है? ईश्वरीय नॉलेज है। बाप है मनुष्य का बीज रूप। सत-चित् आनंद स्वरूप। सृष्टि उनकी बड़ी भारी महिमा है। उनके पास यह वक्खर (सामग्री) है। कोई के पास दुकान होता है, कहेंगे हमारी दकान में यह-्यह वैरायटी है। बाप भी कहते - ShareChat
#🙏 भक्ति #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙
🙏 भक्ति - यदि संगठन में हर एक, एक दो के मददगार, शुभचिंतक बनकर रहें तो सहयोग की शक्ति का घेराव बहुत कमाल कर सकता है। आपस में एक दो के शुभचिंतक सहयोगी बनकर रहो तो माया की हिम्मत नहीं जो इस घेराव के अन्दर आ सके। लेकिन संगठन में सहयोग की शक्ति तब आयेगी जब यह दृढ़ संकल्प करेंगे कि चाहे कितनी भी बाते सहन करना पडे़ लेकिन सामना करके दिखायेंगे , विजयी बनकर दिखायेंगे| स्लोगनः-कोई भी इच्छा, अच्छा बनने नहीं देगी , इसलिए इच्छा मात्रम् अविद्या बनो। यदि संगठन में हर एक, एक दो के मददगार, शुभचिंतक बनकर रहें तो सहयोग की शक्ति का घेराव बहुत कमाल कर सकता है। आपस में एक दो के शुभचिंतक सहयोगी बनकर रहो तो माया की हिम्मत नहीं जो इस घेराव के अन्दर आ सके। लेकिन संगठन में सहयोग की शक्ति तब आयेगी जब यह दृढ़ संकल्प करेंगे कि चाहे कितनी भी बाते सहन करना पडे़ लेकिन सामना करके दिखायेंगे , विजयी बनकर दिखायेंगे| स्लोगनः-कोई भी इच्छा, अच्छा बनने नहीं देगी , इसलिए इच्छा मात्रम् अविद्या बनो। - ShareChat
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🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 - माठ बच्च - अल्फ आरबकायाद कराता रमणीक बन जायेंगे , बाप भी रमणीक है तो उनके बच्चे भी रमणीक होने चाहिए" प्रश्नः- देवताओं के चित्रों की कशिश सभी को क्यों होती है? उनमें कौन सा विशेष गुण है? उत्तरः- देवतायें बहुत रमणीक और पवित्र हैं। रमणीकता के कारण उनके चित्रों की भी कशिश होती है। देवताओं में पवित्रता का विशेष गुण है, जिस गुण के कारण ही अपवित्र मनुष्य रहते झुकते हैं। रमणीक वही बनते जिनमें सर्व दैवी गुण हैं, जो सदा खूश रहते हैं। माठ बच्च - अल्फ आरबकायाद कराता रमणीक बन जायेंगे , बाप भी रमणीक है तो उनके बच्चे भी रमणीक होने चाहिए" प्रश्नः- देवताओं के चित्रों की कशिश सभी को क्यों होती है? उनमें कौन सा विशेष गुण है? उत्तरः- देवतायें बहुत रमणीक और पवित्र हैं। रमणीकता के कारण उनके चित्रों की भी कशिश होती है। देवताओं में पवित्रता का विशेष गुण है, जिस गुण के कारण ही अपवित्र मनुष्य रहते झुकते हैं। रमणीक वही बनते जिनमें सर्व दैवी गुण हैं, जो सदा खूश रहते हैं। - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #🙏 भक्ति #🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙
🙏गीता ज्ञान🛕 - आप महान आत्माआ का हर मसा सकल्प हर आत्मा के प्रति मधुर हो, महान हो। जैसे बाप का स्वभाव सदा हर आत्मा के प्रति कल्याण वा रहम भावना का है, हर एक को ऊंचा उठाने का, मधुरता और निर्माणता का है। ऐसे अपना स्वभाव बनाओ। अगर तेज़ बोलने का, आवेश में आने का स्वभाव है तो यह भी ब्राह्मण जीवन में बहुत बड़ा विघ्न है। अब ऐसे स्वभाव का परिवर्तन करो। आप महान आत्माआ का हर मसा सकल्प हर आत्मा के प्रति मधुर हो, महान हो। जैसे बाप का स्वभाव सदा हर आत्मा के प्रति कल्याण वा रहम भावना का है, हर एक को ऊंचा उठाने का, मधुरता और निर्माणता का है। ऐसे अपना स्वभाव बनाओ। अगर तेज़ बोलने का, आवेश में आने का स्वभाव है तो यह भी ब्राह्मण जीवन में बहुत बड़ा विघ्न है। अब ऐसे स्वभाव का परिवर्तन करो। - ShareChat
#🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏 भक्ति #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 - वरदानः- स्वय का सवाधारा समझकर और झुकने सर्व को झुकाने वाले निमित्त और नम्रचित भव निमित्त उसे कहा जाता जो अपने हर संकल्प वा हर कर्म को बाप के आगे अर्पण कर देता है। निमित्त बनना अर्थात् अर्पण होना और नम्रचित वह है जो झुकता है, जितना संस्कारों में , संकल्पों में आपके आगे झुकेगी। झुकना विश्व झुकेंगे उतना अर्थात् झुकाना। यह संकल्प भी न हो कि दूसरे भी हमारे आगे कुछ तो झुकें। जो सच्चे सेवाधारी होते हैं - वह सदैव झुकते हैं। कभी अपना रोब नहीं दिखाते। स्लोगनः- अब समस्या स्वरूप नहीं, समाधान स्वरूप बनो। वरदानः- स्वय का सवाधारा समझकर और झुकने सर्व को झुकाने वाले निमित्त और नम्रचित भव निमित्त उसे कहा जाता जो अपने हर संकल्प वा हर कर्म को बाप के आगे अर्पण कर देता है। निमित्त बनना अर्थात् अर्पण होना और नम्रचित वह है जो झुकता है, जितना संस्कारों में , संकल्पों में आपके आगे झुकेगी। झुकना विश्व झुकेंगे उतना अर्थात् झुकाना। यह संकल्प भी न हो कि दूसरे भी हमारे आगे कुछ तो झुकें। जो सच्चे सेवाधारी होते हैं - वह सदैव झुकते हैं। कभी अपना रोब नहीं दिखाते। स्लोगनः- अब समस्या स्वरूप नहीं, समाधान स्वरूप बनो। - ShareChat
#🙏 भक्ति #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏🏻 भक्ति संदेश 😇
🙏 भक्ति - वरदानः- स्वयं को सेवाधारी समझकर 3k झुकने सर्व को झुकाने वाले निमित्त और नम्रचित भव निमित्त उसे कहा जाता जो अपने हर संकल्प वा हर कर्म को बाप के आगे अर्पण कर देता है। निमित्त बनना अर्थात् अर्पण होना और नम्रचित वह है जो झुकता है, जितना संस्कारों में, संकल्पों में आगे झुकेगी। झुकना विश्व झुकेंगे आपके ওননা अर्थात् झुकाना। यह संकल्प भी न हो कि दूसरे भी हमारे आगे कुछ तो झुकें। जो सच्चे सेवाधारी होते हैं - वह सदैव झुकते हैं। कभी अपना रोब नहीं दिखाते। स्लोगनः- अब समस्या स्वरूप नहीं, समाधान स्वरूप बनो। वरदानः- स्वयं को सेवाधारी समझकर 3k झुकने सर्व को झुकाने वाले निमित्त और नम्रचित भव निमित्त उसे कहा जाता जो अपने हर संकल्प वा हर कर्म को बाप के आगे अर्पण कर देता है। निमित्त बनना अर्थात् अर्पण होना और नम्रचित वह है जो झुकता है, जितना संस्कारों में, संकल्पों में आगे झुकेगी। झुकना विश्व झुकेंगे आपके ওননা अर्थात् झुकाना। यह संकल्प भी न हो कि दूसरे भी हमारे आगे कुछ तो झुकें। जो सच्चे सेवाधारी होते हैं - वह सदैव झुकते हैं। कभी अपना रोब नहीं दिखाते। स्लोगनः- अब समस्या स्वरूप नहीं, समाधान स्वरूप बनो। - ShareChat
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🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 - तुम ठण्डे पड़ जाते हो लेने में। बच्चे कहते हैं, बाबा माया के तूफान आते हैं। हाँ, पद भी बहुत ऊंचा पाना है। स्वर्ग के मालिक बनते हो, यह कम बात है मेहनत करनी है। श्रीमत पर चलते रहो। क्या! तो वक्खर जो मिलता है वह फिर औरों को भी देना पडे़। दान करना पड़े। पवित्र बनना है तो 5 विकारों মক্কনন का दान जरूर देना है। करनी है। बाप को याद करना है, तब ही कट उतरेगी| मुख्य है याद। प्रतिज्ञा भल करो कि बाबा हम विकार में कभी नहीं जायेंगे , किसी पर क्रोध नहीं करेंगे। परन्तु याद में जरूर रहना है। नहीं तो इतने पाप कैसे विनाश होंगे। बाकी नॉलेज तो बड़ी सहज है। ८४ जन्म का चक्र कैसे लगाया है, यह किसको भी तुम समझा मेहनत सकते हो। बाकी याद की यात्रा में 81 भारत का प्राचीन योग मशहूर है। क्या ज्ञान देते हैं? मनमनाभव अर्थात् मामेकम् याद करो तो तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे। तुम गाते भी थे कि आप जब आयेंगे तो और संग तोड़ एक संग जोड़ेंगे। तूम पर तुम ठण्डे पड़ जाते हो लेने में। बच्चे कहते हैं, बाबा माया के तूफान आते हैं। हाँ, पद भी बहुत ऊंचा पाना है। स्वर्ग के मालिक बनते हो, यह कम बात है मेहनत करनी है। श्रीमत पर चलते रहो। क्या! तो वक्खर जो मिलता है वह फिर औरों को भी देना पडे़। दान करना पड़े। पवित्र बनना है तो 5 विकारों মক্কনন का दान जरूर देना है। करनी है। बाप को याद करना है, तब ही कट उतरेगी| मुख्य है याद। प्रतिज्ञा भल करो कि बाबा हम विकार में कभी नहीं जायेंगे , किसी पर क्रोध नहीं करेंगे। परन्तु याद में जरूर रहना है। नहीं तो इतने पाप कैसे विनाश होंगे। बाकी नॉलेज तो बड़ी सहज है। ८४ जन्म का चक्र कैसे लगाया है, यह किसको भी तुम समझा मेहनत सकते हो। बाकी याद की यात्रा में 81 भारत का प्राचीन योग मशहूर है। क्या ज्ञान देते हैं? मनमनाभव अर्थात् मामेकम् याद करो तो तुम्हारे विकर्म विनाश होंगे। तुम गाते भी थे कि आप जब आयेंगे तो और संग तोड़ एक संग जोड़ेंगे। तूम पर - ShareChat