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#🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙
🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 - सम्मुख ह। भाक्त माग म जा गात ह ता आख ऊपर करके कहते हैं - तुम मात-पिता.... हे भगवान कह याद करते हैं। भगवान जब कहते हैं तो शिवलिंग को भी याद नहीं करते। तोते मिसल ऐसे ही गाते लिए भी ऐसे नहीं कह हैं। लक्ष्मी नारायण के सकते, यह तो महाराजा ्महारानी हैं। उनका बच्चा ही मात-पिता कहेंगे , बन्धु नहीं कहेंगे। भक्त लोग गाते हैं पतित ्पावन, परन्तु यह बुद्धि में नहीं आता कि शिवलिंग होगा, ऐसे ही सिर्फ कह देते हैं - हे भगवान! हे भगवान किसने कहा, किसको कहा? कुछ भी पता नहीं| अगर यह ज्ञान होता मैं आत्मा हूँ, उनको बुलाता हूँ तो यह समझें कि वह निराकार परमात्मा है। उनका रूप ही लिंग है। यथार्थ रीति कोई बाप को याद नहीं करते। उनसे प्राप्ति क्या होगी, कब होगी यह कुछ भी नहीं जानते। तुम सम्मुख ह। भाक्त माग म जा गात ह ता आख ऊपर करके कहते हैं - तुम मात-पिता.... हे भगवान कह याद करते हैं। भगवान जब कहते हैं तो शिवलिंग को भी याद नहीं करते। तोते मिसल ऐसे ही गाते लिए भी ऐसे नहीं कह हैं। लक्ष्मी नारायण के सकते, यह तो महाराजा ्महारानी हैं। उनका बच्चा ही मात-पिता कहेंगे , बन्धु नहीं कहेंगे। भक्त लोग गाते हैं पतित ्पावन, परन्तु यह बुद्धि में नहीं आता कि शिवलिंग होगा, ऐसे ही सिर्फ कह देते हैं - हे भगवान! हे भगवान किसने कहा, किसको कहा? कुछ भी पता नहीं| अगर यह ज्ञान होता मैं आत्मा हूँ, उनको बुलाता हूँ तो यह समझें कि वह निराकार परमात्मा है। उनका रूप ही लिंग है। यथार्थ रीति कोई बाप को याद नहीं करते। उनसे प्राप्ति क्या होगी, कब होगी यह कुछ भी नहीं जानते। तुम - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓ #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻 भक्ति संदेश 😇
🙏कर्म क्या है❓ - "मीठे बच्चे - अभी तुम शूद्र घराने से निकल ब्राह्मण घराने में आये हो, बाप ने ब्रह्मा मुख से में रहो" तुम्हें एडाप्ट किया है - तो इसी खुशी प्रश्नः :कौन सा गुह्य राज़, ब्राह्मण कुल वाले बच्चे ही समझ सकते हैं? उत्तरः- निराकार शिवबाबा हमारा पिता है और यह ब्रह्मा हमारी माता है। निराकार भगवान कैसे मात-पिता, बन्धु-सखा बनते हैं, यह गुह्य गुप्त राज़ ब्राह्मण कुल के बच्चे ही समझ सकते हैं। उसमें भी जो दैवी कुल में ऊंच पद पाने वाले हैं वही यह राज़ यथार्थ रीति समझेंगे । "मीठे बच्चे - अभी तुम शूद्र घराने से निकल ब्राह्मण घराने में आये हो, बाप ने ब्रह्मा मुख से में रहो" तुम्हें एडाप्ट किया है - तो इसी खुशी प्रश्नः :कौन सा गुह्य राज़, ब्राह्मण कुल वाले बच्चे ही समझ सकते हैं? उत्तरः- निराकार शिवबाबा हमारा पिता है और यह ब्रह्मा हमारी माता है। निराकार भगवान कैसे मात-पिता, बन्धु-सखा बनते हैं, यह गुह्य गुप्त राज़ ब्राह्मण कुल के बच्चे ही समझ सकते हैं। उसमें भी जो दैवी कुल में ऊंच पद पाने वाले हैं वही यह राज़ यथार्थ रीति समझेंगे । - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏कर्म क्या है❓
🙏गीता ज्ञान🛕 - जो एक जैसे मणके हैं, एक की ही लगन और एकरस स्थिति में स्थित, एक की मत पर चलने वाले हैं, आपस में संकल्पों में भी एकमत हैं, वही माला में पिरोये जाते हैं। लेकिन एकमत का वातावरण तब बनेगा जब समाने की शक्ति होगी। यदि कोई बात में भिन्नता हो जाती है तो उस भिन्नता को समाओ तब आपस में एकता से समीप आयेंगे और सबके आगे दृष्टान्त रूप बनेंगे। स्लोगनः-' हर संकल्प , वाणी और कर्म में रूहानियत धारण करो तब सर्विस में रौनक 3ர1 जो एक जैसे मणके हैं, एक की ही लगन और एकरस स्थिति में स्थित, एक की मत पर चलने वाले हैं, आपस में संकल्पों में भी एकमत हैं, वही माला में पिरोये जाते हैं। लेकिन एकमत का वातावरण तब बनेगा जब समाने की शक्ति होगी। यदि कोई बात में भिन्नता हो जाती है तो उस भिन्नता को समाओ तब आपस में एकता से समीप आयेंगे और सबके आगे दृष्टान्त रूप बनेंगे। स्लोगनः-' हर संकल्प , वाणी और कर्म में रूहानियत धारण करो तब सर्विस में रौनक 3ர1 - ShareChat
#🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 - कोई भी दर्दनाक सीन देखते हुए नथिंग न्यु, जिन्हें यह नथिंग न्यू का पाठ पक्का है वह घबरा नहीं सकते। क्या हुआ, कैसे हुआ, यह हुआ... समाचार देखते भी ड्रामा की बनी हुई भावी को সুনন, शक्तिशाली बन देखते और औरों को भी शक्ति নন বলী| वाले घबराते और आप एकरस दुनिया स्थिति में रह उन आत्माओं में शक्ति भरते। जो भी सम्पर्क में आये, उसे शक्तियों का, शान्ति का दान देते चलो। 8:11 pm कोई भी दर्दनाक सीन देखते हुए नथिंग न्यु, जिन्हें यह नथिंग न्यू का पाठ पक्का है वह घबरा नहीं सकते। क्या हुआ, कैसे हुआ, यह हुआ... समाचार देखते भी ड्रामा की बनी हुई भावी को সুনন, शक्तिशाली बन देखते और औरों को भी शक्ति নন বলী| वाले घबराते और आप एकरस दुनिया स्थिति में रह उन आत्माओं में शक्ति भरते। जो भी सम्पर्क में आये, उसे शक्तियों का, शान्ति का दान देते चलो। 8:11 pm - ShareChat
#🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙
🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 - "#84< तुम ब्रह्मा मुख वंशावली ब्राह्मण 5 ही बाप द्वारा ज्ञान का तीसरा नेत्र 8, নুদ্ক मिला है, तुम अभी ईश्वरीय गोद में हो" प्रश्नः- अद्वैत राज्य, जहाँ दूसरा कोई धर्म नहीं, उस राज्य की स्थापना का आधार क्या है? उत्तरः- योगबल। बाहुबल से कभी भी अद्वैत राज्य की स्थापना हो नहीं सकती। वैसे क्रिश्चियन के पास इतनी शक्ति है जो अगर आपस में मिल जाएं तो सारे विश्व पर राज्य कर सकते हैं, परन्तु यह लॉ नहीं कहता। विश्व पर एक राज्य की स्थापना करन बाप का ही काम है। "#84< तुम ब्रह्मा मुख वंशावली ब्राह्मण 5 ही बाप द्वारा ज्ञान का तीसरा नेत्र 8, নুদ্ক मिला है, तुम अभी ईश्वरीय गोद में हो" प्रश्नः- अद्वैत राज्य, जहाँ दूसरा कोई धर्म नहीं, उस राज्य की स्थापना का आधार क्या है? उत्तरः- योगबल। बाहुबल से कभी भी अद्वैत राज्य की स्थापना हो नहीं सकती। वैसे क्रिश्चियन के पास इतनी शक्ति है जो अगर आपस में मिल जाएं तो सारे विश्व पर राज्य कर सकते हैं, परन्तु यह लॉ नहीं कहता। विश्व पर एक राज्य की स्थापना करन बाप का ही काम है। - ShareChat
#🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻 भक्ति संदेश 😇
🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 - ज्ञान का तीसरा नेत्र दे रहे हैं। आत्मा तुमको बाप यह भी किसको पता नहीं है। का रूप क्या है बाप कहते हैं तुम आत्मा न अंगुष्ठे मिसल हो, न अखण्ड ज्योति मिसल हो। स्टार होे, बिन्दी নুম নী मिसल। मैं भी आत्मा बिन्दी हूँ, परन्तु मैं पुनर्जन्म में नहीं आता हूँ। मेरी महिमा ही अलग है, मैं सुप्रीय होने के कारण जन्म-्मरण के चक्र में नहीं आता हूँ। तुम आत्मायें शरीर में आती हो। तो ८४ जन्म लेती हो, मैं इस शरीर में प्रवेश करता हूँ। यह लोन लिया हुआ है। बाप समझाते हैं तुम भी आत्मा - हो। परन्तु तुम अपने को रियलाइज़ नहीं करते हो कि हम आत्मा हैं, आत्मा ही बाप को याद करती है। दुःख में हमेशा याद करते हैं, हे भगवान, हे रहमदिल बाबा रहम करो। रहम माँगते हो क्योंकि नॉलेजफुल, ब्लिसफुल, प्योरिटी फुल वह बाप ही है। ज्ञान में भी फुल है। ज्ञान का सागर है। मनुष्य को रह महिमा टे नहीं सकते हैं। ٦٢ ٦ ज्ञान का तीसरा नेत्र दे रहे हैं। आत्मा तुमको बाप यह भी किसको पता नहीं है। का रूप क्या है बाप कहते हैं तुम आत्मा न अंगुष्ठे मिसल हो, न अखण्ड ज्योति मिसल हो। स्टार होे, बिन्दी নুম নী मिसल। मैं भी आत्मा बिन्दी हूँ, परन्तु मैं पुनर्जन्म में नहीं आता हूँ। मेरी महिमा ही अलग है, मैं सुप्रीय होने के कारण जन्म-्मरण के चक्र में नहीं आता हूँ। तुम आत्मायें शरीर में आती हो। तो ८४ जन्म लेती हो, मैं इस शरीर में प्रवेश करता हूँ। यह लोन लिया हुआ है। बाप समझाते हैं तुम भी आत्मा - हो। परन्तु तुम अपने को रियलाइज़ नहीं करते हो कि हम आत्मा हैं, आत्मा ही बाप को याद करती है। दुःख में हमेशा याद करते हैं, हे भगवान, हे रहमदिल बाबा रहम करो। रहम माँगते हो क्योंकि नॉलेजफुल, ब्लिसफुल, प्योरिटी फुल वह बाप ही है। ज्ञान में भी फुल है। ज्ञान का सागर है। मनुष्य को रह महिमा टे नहीं सकते हैं। ٦٢ ٦ - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙
🙏गीता ज्ञान🛕 - सिर्फ एक भारतवासियों की बात है, तुम पहले शिव की भक्ति करते थे। अव्यभिचारी भक्ति की फिर देवताओं की भक्ति शुरू की, फिर नीचे उतरते যী নুস देवी-देवता बन रहे होे, जो आये। अब फिर थोड़ा पढ़ते हैं वह प्रजा में चले जायेंगे। जो अच्छी रीति पढ़ते पढ़ाते हैं, वह राजाई में आयेंगे। प्रजा तो ढेर बनती है। एक महाराजा की लाखों करोड़़ों करते ही हो के अन्दाज में प्रजा होगी। तुम पुरुषार्थ कल्प पहले मुआफिक। से पता पड़ जाता पुरुषार्थ ৯ ক্ি মালা ম ব্রীন-ব্ীন সান নাল ৯1 সতা ম নী कोई गरीब, कोई साहूकार बनते हैं। भक्ति मार्ग में ईश्वर अर्थ दान करते हैं। क्यों ईश्वर के पास नहीं है क्या? या तो कहते हैं, श्रीकृष्ण अर्पणम्। परन्तु अर्पणम्, वास्तव में होता है ईश्वर মনুষ্ম তা ক্তুত্ত जन्म में मिलता है। एक करते हैं उनका फल दूसरे लिए मिल जाता है। अब बाप कहते हैं - मैं जन्म के हूँ, तुमको २१ जन्म का वर्सा देने। मेरे अर्थ आया डायरेक्ट कछ भी करते हो तो २१ जन्म के लिए सिर्फ एक भारतवासियों की बात है, तुम पहले शिव की भक्ति करते थे। अव्यभिचारी भक्ति की फिर देवताओं की भक्ति शुरू की, फिर नीचे उतरते যী নুস देवी-देवता बन रहे होे, जो आये। अब फिर थोड़ा पढ़ते हैं वह प्रजा में चले जायेंगे। जो अच्छी रीति पढ़ते पढ़ाते हैं, वह राजाई में आयेंगे। प्रजा तो ढेर बनती है। एक महाराजा की लाखों करोड़़ों करते ही हो के अन्दाज में प्रजा होगी। तुम पुरुषार्थ कल्प पहले मुआफिक। से पता पड़ जाता पुरुषार्थ ৯ ক্ি মালা ম ব্রীন-ব্ীন সান নাল ৯1 সতা ম নী कोई गरीब, कोई साहूकार बनते हैं। भक्ति मार्ग में ईश्वर अर्थ दान करते हैं। क्यों ईश्वर के पास नहीं है क्या? या तो कहते हैं, श्रीकृष्ण अर्पणम्। परन्तु अर्पणम्, वास्तव में होता है ईश्वर মনুষ্ম তা ক্তুত্ত जन्म में मिलता है। एक करते हैं उनका फल दूसरे लिए मिल जाता है। अब बाप कहते हैं - मैं जन्म के हूँ, तुमको २१ जन्म का वर्सा देने। मेरे अर्थ आया डायरेक्ट कछ भी करते हो तो २१ जन्म के लिए - ShareChat
#🙏कर्म क्या है❓ #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 #🙏गीता ज्ञान🛕
🙏कर्म क्या है❓ - तुम यह रूहानी हॉस्पिटल कम युनिवर्सिटी खोलते जाओ , जहाँ से सब एवरहेल्दी, एवरवेल्दी बनेंगे , इनसे बहुत इनकम होती है। योग से हेल्थ और चक्र को जानने से वेल्थ। तो घर-्घर में ऐसी युनिवर्सिटी कम हॉस्पिटल खोलते जाओ। बड़ा आदमी है तो बड़ा खोले, जहाँ बहुत आ सकें। बोर्ड पर लिख दो। जैसे नेचर-क्योर वाले लिखते हैं। बाप सारी दुनिया की नेचर बदल प्योर बना देते हैं। इस समय सभी को एवरहेल्दी, एवरवेल्दी इमप्योर हैं। सारी दुनिया बनाने वाला बाप है, जो अब तुम बच्चों को पढ़ा रहे हैं। तम हो मोस्ट र्स्व चिल्डेन। अच्वा | तुम यह रूहानी हॉस्पिटल कम युनिवर्सिटी खोलते जाओ , जहाँ से सब एवरहेल्दी, एवरवेल्दी बनेंगे , इनसे बहुत इनकम होती है। योग से हेल्थ और चक्र को जानने से वेल्थ। तो घर-्घर में ऐसी युनिवर्सिटी कम हॉस्पिटल खोलते जाओ। बड़ा आदमी है तो बड़ा खोले, जहाँ बहुत आ सकें। बोर्ड पर लिख दो। जैसे नेचर-क्योर वाले लिखते हैं। बाप सारी दुनिया की नेचर बदल प्योर बना देते हैं। इस समय सभी को एवरहेल्दी, एवरवेल्दी इमप्योर हैं। सारी दुनिया बनाने वाला बाप है, जो अब तुम बच्चों को पढ़ा रहे हैं। तम हो मोस्ट र्स्व चिल्डेन। अच्वा | - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏कर्म क्या है❓
🙏गीता ज्ञान🛕 - "#84< सुख-शान्ति का वरदान एक बाप से ही मिलता है, कोई देहधारी से नहीं , बाबा आये हैं - तुम्हें मुक्ति जीवनमुक्ति की राह दिखाने" प्रश्नः- बाप के साथ जाने और सतयुग आदि में आने का पुरुषार्थ क्या है? उत्तरः- बाप के साथ जाना है तो पूरा पवित्र लिए बनना है। सतयुग आदि में आने के और बुद्धियोग तोड़ एक बाप की याद में रहना है। संग आत्म-्अभिमानी जरूर बनना है। एक बाप की मत पर चलेंगे तो ऊंच पद का अधिकार मिल जायेगा| "#84< सुख-शान्ति का वरदान एक बाप से ही मिलता है, कोई देहधारी से नहीं , बाबा आये हैं - तुम्हें मुक्ति जीवनमुक्ति की राह दिखाने" प्रश्नः- बाप के साथ जाने और सतयुग आदि में आने का पुरुषार्थ क्या है? उत्तरः- बाप के साथ जाना है तो पूरा पवित्र लिए बनना है। सतयुग आदि में आने के और बुद्धियोग तोड़ एक बाप की याद में रहना है। संग आत्म-्अभिमानी जरूर बनना है। एक बाप की मत पर चलेंगे तो ऊंच पद का अधिकार मिल जायेगा| - ShareChat
#🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏🏻 भक्ति संदेश 😇 #🤗शुभकामनाएं वीडियो📱 #🙏श्रीमद्भागवत गीता📙 #🙏कर्म क्या है❓
🙏गीता ज्ञान🛕 - भारत शिवालय था, शिवबाबा की स्थापना की हुई थी। बाप स्वर्ग बनाते हैं फिर रावण नर्क बनाते हैं। लिए रावण श्राप देते हैं, बाप २१ जन्म के वर्सा देते हैं। अब तुम हर एक बाप को ही याद करो, कोई भी देहधारी को नहीं। देहधारी को भगवान नहीं ೩೯ कहा जाता। भगवान तो एक ही है। बाप तो का वर्सा देते हैं फिर रावण श्रापित बना देते हैं। इस है। अब इस समय भारत श्रापित है, बहुत दुःखी रावण पर जीत पानी है। गाया भी जाता है दे दान तो छूटे ग्रहण। वो ग्रहण जो लगता है वह तो पृथ्वी का परछाया है। अब बाप कहते हैं तुम्हारे ऊपर 5 विकारों रूपी रावण का ग्रहण है। यह 5 विकार दान में दे देने हैं। पहला तो दान दो कि हम कभी विकार में नहीं जायेंगे। यह काम-कटारी ही मनुष्य को पतित बनाती है। अच्छा। भारत शिवालय था, शिवबाबा की स्थापना की हुई थी। बाप स्वर्ग बनाते हैं फिर रावण नर्क बनाते हैं। लिए रावण श्राप देते हैं, बाप २१ जन्म के वर्सा देते हैं। अब तुम हर एक बाप को ही याद करो, कोई भी देहधारी को नहीं। देहधारी को भगवान नहीं ೩೯ कहा जाता। भगवान तो एक ही है। बाप तो का वर्सा देते हैं फिर रावण श्रापित बना देते हैं। इस है। अब इस समय भारत श्रापित है, बहुत दुःखी रावण पर जीत पानी है। गाया भी जाता है दे दान तो छूटे ग्रहण। वो ग्रहण जो लगता है वह तो पृथ्वी का परछाया है। अब बाप कहते हैं तुम्हारे ऊपर 5 विकारों रूपी रावण का ग्रहण है। यह 5 विकार दान में दे देने हैं। पहला तो दान दो कि हम कभी विकार में नहीं जायेंगे। यह काम-कटारी ही मनुष्य को पतित बनाती है। अच्छा। - ShareChat