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#🌞 Good Morning🌞 #🌜 शुभ संध्या🙏 #🌞सुप्रभात सन्देश #🙏शुभ दोपहर #👍All The Best
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#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏कर्म क्या है❓ #🕉️सनातन धर्म🚩 #❤️जीवन की सीख #👉 लोगों के लिए सीख👈
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - ShareChat
#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏 जय माँ दुर्गा 🙏 #🛕मंदिर दर्शन🙏
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - ShareChat
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#🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏कर्म क्या है❓ #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏गीता ज्ञान🛕
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01:57
#🙏कर्म क्या है❓ #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏गीता ज्ञान🛕 #bhakti
🙏कर्म क्या है❓ - कर्म करने से मिलेगी মক্চলনা ক্ী মসিল क गांव में लोगों के साथनसाथ पशु-्पक्षी और कई जानवर भी रहते थे। उस गांव में एक नदी भी थी और नदी किनारे पीपल का एक विशाल वृक्ष था। उस वृक्ष की ठंडी छांव में राहगीर और गांव वाले थोड़ा आराम कर लेते थे। वृक्ष  इतना विशाल था कि यह कई पक्षियों और मधुमक्खियों का घर था। इसी वृक्ष पर एक कबूतर का घोंसला और मधुमक्खी का छत्ता भी था। रानी मधुमक्खी के साथ छत्ते में कई सारी मधुमक्खियां रहती थीं। मधुमक्खियां पूरे दिन फूलों  मधुमक्खी को प्यास  पर मंडराने और शहद इकट्ठा करने में व्यस्त रहती थीं। एक दिन लगी और वह पानी पीने के लिए नदी किनारे गई। जैसे ही मधुमक्खी पानी पीने की कोशिश  करती है, धारा की लहर उसे बहा ले जाती। मधुमक्खी लगती डूबने है। लाख कोशिशों के भी वह पानी से बाद नहीं निकल पा रही थी। संयोग बस एक बूढ़े कबूतर की नजर उस  हुई मधुमक्खी पर ভুবনী पड़ी और वह डूबती हुई मधुमक्खी की मदद करने के लिए आगे कबूतर एक पेड़ आया| से एक बड़ा पत्ता तोड़ता है और मधुमक्खी की ओर उड़़ कर जाता है। कबूतर उस पत्ते को मधुमक्खी के पास रख देता है। मधुमक्खी उस पत्ते पर चढ़ जाती है और पानी से बाहर आकर अपने पंख है। कुछ ही समय में TI मधुमक्खी का पंख सूख जाता है और वह उड़कर अपनी जान बचाती है और सुरक्षित अपने छत्ते में वापस लौट जाती है। वह मन ही मन कबूतर का धन्यवाद करती है और सोचती है कभी मौका मिला तो कबूतर की मदद अवश्य करूंगी| कुछ ही दिनों बाद की बात है, रानी मधुमक्खी पेड़ की एक डाली पर बैठी होती है। तभी वह देखती है कि एक तीरंदाज कबूतर पर निशाना साधे हुए है। जान पर संकट आई देख कबूतर भागने की कोशिश करता है लेकिन एक बड़े बाज को अपने चारों ओर मंडराते हुए देखता है। वह खुद को दोनों तरफ से নিহবয खतरों में घिरा पाता है। रानी मधुमक्खी कबूतर की जान बचाने का करती है और वह तीरंदाज को जोर से डंक मार देती है। तीरंदाज तीर छोड़ देता है, लेकिन उसका निशाना चूक जाता है और कबूतर सुरक्षित स्थान पर उड़़ जाता है। इसलिए हमें हमेशा अच्छे कर्म  करते रहना चाहिए क्योंकि हमारे द्वारा किया गया अच्छा कार्य कभी न कभी हमें लाभ अवश्य पहुंचाता है। कर्म करने से मिलेगी মক্চলনা ক্ী মসিল क गांव में लोगों के साथनसाथ पशु-्पक्षी और कई जानवर भी रहते थे। उस गांव में एक नदी भी थी और नदी किनारे पीपल का एक विशाल वृक्ष था। उस वृक्ष की ठंडी छांव में राहगीर और गांव वाले थोड़ा आराम कर लेते थे। वृक्ष  इतना विशाल था कि यह कई पक्षियों और मधुमक्खियों का घर था। इसी वृक्ष पर एक कबूतर का घोंसला और मधुमक्खी का छत्ता भी था। रानी मधुमक्खी के साथ छत्ते में कई सारी मधुमक्खियां रहती थीं। मधुमक्खियां पूरे दिन फूलों  मधुमक्खी को प्यास  पर मंडराने और शहद इकट्ठा करने में व्यस्त रहती थीं। एक दिन लगी और वह पानी पीने के लिए नदी किनारे गई। जैसे ही मधुमक्खी पानी पीने की कोशिश  करती है, धारा की लहर उसे बहा ले जाती। मधुमक्खी लगती डूबने है। लाख कोशिशों के भी वह पानी से बाद नहीं निकल पा रही थी। संयोग बस एक बूढ़े कबूतर की नजर उस  हुई मधुमक्खी पर ভুবনী पड़ी और वह डूबती हुई मधुमक्खी की मदद करने के लिए आगे कबूतर एक पेड़ आया| से एक बड़ा पत्ता तोड़ता है और मधुमक्खी की ओर उड़़ कर जाता है। कबूतर उस पत्ते को मधुमक्खी के पास रख देता है। मधुमक्खी उस पत्ते पर चढ़ जाती है और पानी से बाहर आकर अपने पंख है। कुछ ही समय में TI मधुमक्खी का पंख सूख जाता है और वह उड़कर अपनी जान बचाती है और सुरक्षित अपने छत्ते में वापस लौट जाती है। वह मन ही मन कबूतर का धन्यवाद करती है और सोचती है कभी मौका मिला तो कबूतर की मदद अवश्य करूंगी| कुछ ही दिनों बाद की बात है, रानी मधुमक्खी पेड़ की एक डाली पर बैठी होती है। तभी वह देखती है कि एक तीरंदाज कबूतर पर निशाना साधे हुए है। जान पर संकट आई देख कबूतर भागने की कोशिश करता है लेकिन एक बड़े बाज को अपने चारों ओर मंडराते हुए देखता है। वह खुद को दोनों तरफ से নিহবয खतरों में घिरा पाता है। रानी मधुमक्खी कबूतर की जान बचाने का करती है और वह तीरंदाज को जोर से डंक मार देती है। तीरंदाज तीर छोड़ देता है, लेकिन उसका निशाना चूक जाता है और कबूतर सुरक्षित स्थान पर उड़़ जाता है। इसलिए हमें हमेशा अच्छे कर्म  करते रहना चाहिए क्योंकि हमारे द्वारा किया गया अच्छा कार्य कभी न कभी हमें लाभ अवश्य पहुंचाता है। - ShareChat
#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏कर्म क्या है❓ #bhakti #mahadev
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - भक्ति और सेवा नंदीनेभीकियाविषपान एकदिन पार्वती नेमहादेव से पूछा, ' आपको नंदी इतना  प्रियक्योंहै ? महादेवनेकहा ,  नंदी में सेवा और भक्ति दोनों का समन्वय है। उसके सेवा-्कर्म में शौर्य है। उसकी भक्ति में तप है॰ समर्पण है॰ निरंतर सूमिरन है॰ इसलिए नंदी मुझे प्राणवत प्रिय है। पार्वती नेशिवसेफिर पूछा, ' प्रभु ! भवित-भाव और  समर्पण तो आपके सभी भक्तों और गणों गें है।फिर नंदी की भक्त में ऐसा क्या विशेष है ? महादेव ने पार्वती को उत्तर देते हुए कहा, ' नंदी को  अपने पिता ऋषि शिलाद सेयह पता चला कि वह अल्पायु है।यह विचार कर नंदी भुवन नदी के किनारे  साधना करने लगा | उसके सुमिरन में अटूट लगन और कोटि सुमिरन पूर्ण हुए॰ तो मैं एकचित्तता थी। जब एक प्रकट होकर दर्शन देने को विवश हो गया। जानती हो सुमिरन गें इतना मग्न था कि मुझसे वर वह साधना मांगने काउसे ध्यान ही नहीं रहा। उसे साधनारत इच्छा, कोई मति, कोई आकांक्षा नहीं । नंदी मेरी इच्छा  मेरी आज्ञा , मेरे आदर्शों का वाहक बन गया है, इसलिए छोड़कर मैं अंतर्धान हो गया। ऐसा ही एक बार और हुआ| तीसरी बार जब मैं प्रकट हुआ, तो मैंने ही अपना  वह मेरा वाहन है। पार्वती नेकहा, ` सत्यहैप्रभु ! नंदीकी भक्ति साधना  वरद हस्त उठाकर उसे वर-प्राप्ति के लिए प्रेरित किया।  जानती हो देवी , तब भी नंदी ने दीर्घ आयु का वर नहीं  और समर्पण तो अनुपम है। अब उसके सेवा या कर्म  शौर्य को भी तो विशेषता बताइए। मांगा। अपनी अखंड साधना का एक हो फल चाहा। महादेव ने कहा, ' तुम्हें स्मरण है देवी, समुद्र मंथन उसकी चाह थी - केवल मेरा सान्निध्य ! नंदी ने मुझसे !समुद्रको मथते मथते अमृत  मांगा,   हे महादेव ! मुझे अपनी अलौकिक संगति का कोवह असाधारण घटना से पहले हलाहल विष निकला था। संसार के त्राण के वर दो। अपना प्रेममय सान्निध्य और स्वामित्व दो।मैं परंतु विषपान करते  दास भाव से आपके संग रहना चाहता हूं। मेरा हृदय " लिए मुझे उसका पान करना पड़ा  हुए विष को कुछ बूंदें धरा पर गिर गईं। इन बूंदों के अन्य कोई अभीप्सा नहीं रखता ।  कुप्रभाव से पृथ्वी त्राहि-त्राहि करने लगी थी। तभी मेरे मैंने प्रसन्नहोकर उसे अपना अविनाशी वाहन और  नंदी ने अपनो जिह्वा से उन विष-बिंदुओं को चाट परम गण घोषित कर दिया। ' पार्वती नेजिज्ञासावश फिर लिया।' देवों ने व्यग्र होकर कारण पूछा। नंदी ने कहा  प्रश्न किया ` किंतु वाहन ही क्यों, महादेव ? कोई अन्य  मेरे स्वामो ने प्यालाभर विष पान किया।क्या मैं सेवक মুসিক্ষা নযা নম্কী?' महादेव ने मुस्कराते हुए कहा,  ` देवी ! वाहन का  होकर कुछ बूंदें ग्रहण नहों कर सकता ? ' सो॰ ऐसा " समर्पण अद्वितीय होता है।नंदी का मन इतना समर्पित है नंदी का कर्म-शौर्य ! कि मैं सदा उस पर आरूढ़ रहता हूं।उसकी अपनी कोई (TI. भक्ति और सेवा नंदीनेभीकियाविषपान एकदिन पार्वती नेमहादेव से पूछा, ' आपको नंदी इतना  प्रियक्योंहै ? महादेवनेकहा ,  नंदी में सेवा और भक्ति दोनों का समन्वय है। उसके सेवा-्कर्म में शौर्य है। उसकी भक्ति में तप है॰ समर्पण है॰ निरंतर सूमिरन है॰ इसलिए नंदी मुझे प्राणवत प्रिय है। पार्वती नेशिवसेफिर पूछा, ' प्रभु ! भवित-भाव और  समर्पण तो आपके सभी भक्तों और गणों गें है।फिर नंदी की भक्त में ऐसा क्या विशेष है ? महादेव ने पार्वती को उत्तर देते हुए कहा, ' नंदी को  अपने पिता ऋषि शिलाद सेयह पता चला कि वह अल्पायु है।यह विचार कर नंदी भुवन नदी के किनारे  साधना करने लगा | उसके सुमिरन में अटूट लगन और कोटि सुमिरन पूर्ण हुए॰ तो मैं एकचित्तता थी। जब एक प्रकट होकर दर्शन देने को विवश हो गया। जानती हो सुमिरन गें इतना मग्न था कि मुझसे वर वह साधना मांगने काउसे ध्यान ही नहीं रहा। उसे साधनारत इच्छा, कोई मति, कोई आकांक्षा नहीं । नंदी मेरी इच्छा  मेरी आज्ञा , मेरे आदर्शों का वाहक बन गया है, इसलिए छोड़कर मैं अंतर्धान हो गया। ऐसा ही एक बार और हुआ| तीसरी बार जब मैं प्रकट हुआ, तो मैंने ही अपना  वह मेरा वाहन है। पार्वती नेकहा, ` सत्यहैप्रभु ! नंदीकी भक्ति साधना  वरद हस्त उठाकर उसे वर-प्राप्ति के लिए प्रेरित किया।  जानती हो देवी , तब भी नंदी ने दीर्घ आयु का वर नहीं  और समर्पण तो अनुपम है। अब उसके सेवा या कर्म  शौर्य को भी तो विशेषता बताइए। मांगा। अपनी अखंड साधना का एक हो फल चाहा। महादेव ने कहा, ' तुम्हें स्मरण है देवी, समुद्र मंथन उसकी चाह थी - केवल मेरा सान्निध्य ! नंदी ने मुझसे !समुद्रको मथते मथते अमृत  मांगा,   हे महादेव ! मुझे अपनी अलौकिक संगति का कोवह असाधारण घटना से पहले हलाहल विष निकला था। संसार के त्राण के वर दो। अपना प्रेममय सान्निध्य और स्वामित्व दो।मैं परंतु विषपान करते  दास भाव से आपके संग रहना चाहता हूं। मेरा हृदय " लिए मुझे उसका पान करना पड़ा  हुए विष को कुछ बूंदें धरा पर गिर गईं। इन बूंदों के अन्य कोई अभीप्सा नहीं रखता ।  कुप्रभाव से पृथ्वी त्राहि-त्राहि करने लगी थी। तभी मेरे मैंने प्रसन्नहोकर उसे अपना अविनाशी वाहन और  नंदी ने अपनो जिह्वा से उन विष-बिंदुओं को चाट परम गण घोषित कर दिया। ' पार्वती नेजिज्ञासावश फिर लिया।' देवों ने व्यग्र होकर कारण पूछा। नंदी ने कहा  प्रश्न किया ` किंतु वाहन ही क्यों, महादेव ? कोई अन्य  मेरे स्वामो ने प्यालाभर विष पान किया।क्या मैं सेवक মুসিক্ষা নযা নম্কী?' महादेव ने मुस्कराते हुए कहा,  ` देवी ! वाहन का  होकर कुछ बूंदें ग्रहण नहों कर सकता ? ' सो॰ ऐसा " समर्पण अद्वितीय होता है।नंदी का मन इतना समर्पित है नंदी का कर्म-शौर्य ! कि मैं सदा उस पर आरूढ़ रहता हूं।उसकी अपनी कोई (TI. - ShareChat
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#☝आज का ज्ञान #😇 जीवन की प्रेरणादायी सीख
☝आज का ज्ञान - ಹEi लालची राजा राजा मिडास को लालच आ गई और उसने देवता से इच्छा व्यक्त की कि वह जिस भी चीज को छुए वह सोने में बदल  जाए। हालांकि डायोनिसस जानता था कि यह एक दिन राजा की परेशानियों का कारण बनेग फिर भी उसने इच्छा पूरी मिडास प्राचीन ग्रीस में नाम का एक बहुत धनी राजा रहता उसकी एक सुंदर बेटी भी थी जिसे वह सबसे अधिक कर दी। मिडास बहुत खुश हुआ और बगीचे व महल में 24 इधर उधर की चीजों को छूकर उन्हें सोने में बदलने लगा। प्यार करता था।एक देवता डायोनिसस के वफादार सेटायर सिलनस मिडास के बगीचे में बेहोश हो गया। मिडास का जब उसने एक सेब उठाया तो वह चमकदार सोने के सेब मानना था कि सैटायर उसके लिए सौभाग्य लाते हैं॰ इसलिए मिडास में बदल गया। सभी दरबारी बहुत प्रसन्न हा गए। इतना खुश पहले कभी नहीं हुआ था। अपनी खुशी में उसने  उसने अपने परिवार के मना करने के बाद भी सिलनस को अपने महल में तब तक आराम करने दियाजब तक वह अपनी बेटी को भी गले लगा लिया, यह भूलकर कि वह जिस भी चीज को छुएगा वह सोने में बदल जाएगी! परिणाम  फिर से जाग नहीं गया। जब देतवा डायोनिसस को सिलनस उसकी बेटी एक निर्जीव सोने की मूर्ति में तब्दील हो के प्रति मिडास के इस दयालु ঠ ব্রাং ম এনা নলা; নী कार्य स्वरूप हुआ। अब वह खाना भी नहीं खा पा उसने धनी राजा को एक वरदान देने का फैेसला किया। गई। राजा बहुत दुखी  रहा था क्योंकि खाने को हाथ लगाते ही वह भी सोने का होजाता था। अपनी इस गलती का एहसास होने पर राजा बहुत उदास होगया और देवता डायोनिसस के पास दौड़ा और अपनी बेटी को बचाने की विनती की। उसकी पूरी करते हुए डायोनिसस ने इच्छ। उससे वरदान वापस ले लिया। इसके बाद जो वस्तु जैसी थी वैसी ही होे गई। राजा की बेटी भी वापस इंसान बन गई। ওস নিন মিভাস কী সনক নিল বামা था कि ज्यादा लालच ठीक नहीं है। अब राजा जो उसके पास था॰ उसी में खुश रहने लगा। ಹEi लालची राजा राजा मिडास को लालच आ गई और उसने देवता से इच्छा व्यक्त की कि वह जिस भी चीज को छुए वह सोने में बदल  जाए। हालांकि डायोनिसस जानता था कि यह एक दिन राजा की परेशानियों का कारण बनेग फिर भी उसने इच्छा पूरी मिडास प्राचीन ग्रीस में नाम का एक बहुत धनी राजा रहता उसकी एक सुंदर बेटी भी थी जिसे वह सबसे अधिक कर दी। मिडास बहुत खुश हुआ और बगीचे व महल में 24 इधर उधर की चीजों को छूकर उन्हें सोने में बदलने लगा। प्यार करता था।एक देवता डायोनिसस के वफादार सेटायर सिलनस मिडास के बगीचे में बेहोश हो गया। मिडास का जब उसने एक सेब उठाया तो वह चमकदार सोने के सेब मानना था कि सैटायर उसके लिए सौभाग्य लाते हैं॰ इसलिए मिडास में बदल गया। सभी दरबारी बहुत प्रसन्न हा गए। इतना खुश पहले कभी नहीं हुआ था। अपनी खुशी में उसने  उसने अपने परिवार के मना करने के बाद भी सिलनस को अपने महल में तब तक आराम करने दियाजब तक वह अपनी बेटी को भी गले लगा लिया, यह भूलकर कि वह जिस भी चीज को छुएगा वह सोने में बदल जाएगी! परिणाम  फिर से जाग नहीं गया। जब देतवा डायोनिसस को सिलनस उसकी बेटी एक निर्जीव सोने की मूर्ति में तब्दील हो के प्रति मिडास के इस दयालु ঠ ব্রাং ম এনা নলা; নী कार्य स्वरूप हुआ। अब वह खाना भी नहीं खा पा उसने धनी राजा को एक वरदान देने का फैेसला किया। गई। राजा बहुत दुखी  रहा था क्योंकि खाने को हाथ लगाते ही वह भी सोने का होजाता था। अपनी इस गलती का एहसास होने पर राजा बहुत उदास होगया और देवता डायोनिसस के पास दौड़ा और अपनी बेटी को बचाने की विनती की। उसकी पूरी करते हुए डायोनिसस ने इच्छ। उससे वरदान वापस ले लिया। इसके बाद जो वस्तु जैसी थी वैसी ही होे गई। राजा की बेटी भी वापस इंसान बन गई। ওস নিন মিভাস কী সনক নিল বামা था कि ज्यादा लालच ठीक नहीं है। अब राजा जो उसके पास था॰ उसी में खुश रहने लगा। - ShareChat