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jay Shri Radhey Krishna 🙏🙏 jay Hind Jay Bharat
#🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏कर्म क्या है❓ #🙏गीता ज्ञान🛕
🕉️सनातन धर्म🚩 - ll সঠানরাল ক্রী ত্নিহ্া Il रखकर तो देख तेरे सब मार्ग न खोल दूँ तो कहना Il पर पैर मेरे मा्ग तो देख , कुबेर के भण्डार न खोल दूँ तो कहना ।l मेरे लिऐ खर्च ক্রংক্ मेरे लिए कडवे वचन सुनकर तो देख कृपा न बुरसे तो कहना Il मेरी तरफ आकर तो देख , तेरा ध्यान न रखूँ तो कहना ।। से करके तो देख तूझे मूल्यवान न बना दूँ तो कहना ।। সহী বান লীঘী मेरे चरित्र का मनन करके तो देख , ज्ञान के मोती तुझमें न भर दूँ तो कहना ।l देख तुम्हें सब बन्धनों से मुक्त न कर दूँ तो कहना Il मुझे अपना मददगार बनाकर तो तेरे जीवन में आनन्द के सागर न बहा दूँ तो कहना मेरे लिऐ आँसू बहाकर तो देख तुझे कीर्तिवान न बना दूँ तो कहना ।। मेरे लिऐ कुछ बनकर तो देख , मेरे मार्ग पर निकलकर तो देख तुझे शान्तीदूत न बना दूँ तो कहना ।l स्वंय को न्यौछावर करके तो देख,तुझे हीरा न बना दूँ तो कहना ।। कीर्तन करके तो ঠত্র, ,` जगत का विस्मरण न करा दूँ तो कहना ।l तू मेरा बनकर तो तेरा न बना दूँ तो कहना ।l देख ,  हर एक Premsherma যঙ | कृष्णा ll সঠানরাল ক্রী ত্নিহ্া Il रखकर तो देख तेरे सब मार्ग न खोल दूँ तो कहना Il पर पैर मेरे मा्ग तो देख , कुबेर के भण्डार न खोल दूँ तो कहना ।l मेरे लिऐ खर्च ক্রংক্ मेरे लिए कडवे वचन सुनकर तो देख कृपा न बुरसे तो कहना Il मेरी तरफ आकर तो देख , तेरा ध्यान न रखूँ तो कहना ।। से करके तो देख तूझे मूल्यवान न बना दूँ तो कहना ।। সহী বান লীঘী मेरे चरित्र का मनन करके तो देख , ज्ञान के मोती तुझमें न भर दूँ तो कहना ।l देख तुम्हें सब बन्धनों से मुक्त न कर दूँ तो कहना Il मुझे अपना मददगार बनाकर तो तेरे जीवन में आनन्द के सागर न बहा दूँ तो कहना मेरे लिऐ आँसू बहाकर तो देख तुझे कीर्तिवान न बना दूँ तो कहना ।। मेरे लिऐ कुछ बनकर तो देख , मेरे मार्ग पर निकलकर तो देख तुझे शान्तीदूत न बना दूँ तो कहना ।l स्वंय को न्यौछावर करके तो देख,तुझे हीरा न बना दूँ तो कहना ।। कीर्तन करके तो ঠত্র, ,` जगत का विस्मरण न करा दूँ तो कहना ।l तू मेरा बनकर तो तेरा न बना दूँ तो कहना ।l देख ,  हर एक Premsherma যঙ | कृष्णा - ShareChat
#🪔नरसिम्हा जयंती 🦁 #🕉️सनातन धर्म🚩 #👏भगवान विष्णु😇 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏 देवी दर्शन🌸
🪔नरसिम्हा जयंती 🦁 - सर्वतोमुखम्। ऊँ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्।। नरसिंह जी की पावन जयंती पर भगवान हार्दिक शुभकामनाएं सर्वतोमुखम्। ऊँ उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्यु मृत्युं नमाम्यहम्।। नरसिंह जी की पावन जयंती पर भगवान हार्दिक शुभकामनाएं - ShareChat
#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🕉️सनातन धर्म🚩
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - जो यह कहता है कि मैं ज्ञानी हूं और बहुत कुछ जानता हूंउसे यह समझ लेना चाहिए कि वह घोर अज्ञान के अंधकार में भटक रहा है। ज्ञान का अहकार एक युवा साधक ब्रह्मनिष्ठ संत पथिक जी महाराज  जानने का बोध ज्ञान की गुरुता का सर्वोपरि सम्मान के सत्संग के लिए पहुंचे। वह बातचीत के दौरान है।वह परमात्मा के प्रति समर्पण भी है। बार -बार कहते थे, मैं बहुृत धनी परिवार से हूं| मैंने 1 उन्होंने आगे कहा, ज्ञान का अहंकार किसी उच्च शिक्षा प्राप्त की है और गीता, महाभारत सीखने   नहीं   देता। पुराणों कुछ विनम्रतापूर्वक   खुद आदि का अध्ययन किया है। मानव संत पथिक जी ने कहा, यदि वास्तव में जिज्ञासा अज्ञानी  সাদ সানণ্য সান तत्वदर्शी की शरण लेता है, वही लेकर आए होे और धर्म ्अध्यात्म का मर्म समझने की तृष्णा है, तो सबसे पहले इस अहंकार का त्याग  आत्मा परमात्मा व ज्ञान अज्ञान करो कि तुम बहुत बड़े विद्वान होे। अहंकार के रहते के भेद को जान सकता   हे। II तुम्हें   कोई कुछ नहीं सिखा सकता। ज्ञान  जिसकी   बुद्धि स्थिर है और কা Hy अहंकार जिज्ञासा के लिए जिसका मन कहीं अटका नहीं शत्रु है। उन्होंने कुछ क्षण रुककर कहा, उपनिषद में ऋषि  है, ऐसा विनयी जिज्ञासु ही ज्ञान घोषित करते हैं-जो यह कहता है कि मैं ज्ञानी हूं और के सागर में गोते लगाकर मोती ढूंढ सकता है। सबसे पहले किसी भी प्रकार के अहंकार से शून्य हो जाना बहुत कुछ जानता हूं॰ उसे यह समझ लेना चाहिए जरूरी है। कि वह घोर अज्ञान के अंधकार में भटक रहा है।न जो यह कहता है कि मैं ज्ञानी हूं और बहुत कुछ जानता हूंउसे यह समझ लेना चाहिए कि वह घोर अज्ञान के अंधकार में भटक रहा है। ज्ञान का अहकार एक युवा साधक ब्रह्मनिष्ठ संत पथिक जी महाराज  जानने का बोध ज्ञान की गुरुता का सर्वोपरि सम्मान के सत्संग के लिए पहुंचे। वह बातचीत के दौरान है।वह परमात्मा के प्रति समर्पण भी है। बार -बार कहते थे, मैं बहुृत धनी परिवार से हूं| मैंने 1 उन्होंने आगे कहा, ज्ञान का अहंकार किसी उच्च शिक्षा प्राप्त की है और गीता, महाभारत सीखने   नहीं   देता। पुराणों कुछ विनम्रतापूर्वक   खुद आदि का अध्ययन किया है। मानव संत पथिक जी ने कहा, यदि वास्तव में जिज्ञासा अज्ञानी  সাদ সানণ্য সান तत्वदर्शी की शरण लेता है, वही लेकर आए होे और धर्म ्अध्यात्म का मर्म समझने की तृष्णा है, तो सबसे पहले इस अहंकार का त्याग  आत्मा परमात्मा व ज्ञान अज्ञान करो कि तुम बहुत बड़े विद्वान होे। अहंकार के रहते के भेद को जान सकता   हे। II तुम्हें   कोई कुछ नहीं सिखा सकता। ज्ञान  जिसकी   बुद्धि स्थिर है और কা Hy अहंकार जिज्ञासा के लिए जिसका मन कहीं अटका नहीं शत्रु है। उन्होंने कुछ क्षण रुककर कहा, उपनिषद में ऋषि  है, ऐसा विनयी जिज्ञासु ही ज्ञान घोषित करते हैं-जो यह कहता है कि मैं ज्ञानी हूं और के सागर में गोते लगाकर मोती ढूंढ सकता है। सबसे पहले किसी भी प्रकार के अहंकार से शून्य हो जाना बहुत कुछ जानता हूं॰ उसे यह समझ लेना चाहिए जरूरी है। कि वह घोर अज्ञान के अंधकार में भटक रहा है।न - ShareChat
#🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #bhakti
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00:15
#🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #👏भगवान विष्णु😇
🕉️सनातन धर्म🚩 - ೩ ೩ कहते हैं तुम प्रभ किसी का कुछ नहीं बिगाड़ना , मैं तुम्हारा oremsna कुछ नहीं बिगड़ने दूगा| ೩ ೩ कहते हैं तुम प्रभ किसी का कुछ नहीं बिगाड़ना , मैं तुम्हारा oremsna कुछ नहीं बिगड़ने दूगा| - ShareChat
#🕉️सनातन धर्म🚩 #🌊गंगा सप्तमी 🌸 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏 देवी दर्शन🌸
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00:30
#🌊गंगा सप्तमी 🌸 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🕉️सनातन धर्म🚩
🌊गंगा सप्तमी 🌸 - गगा सप्तमी की हार्दिक शुभकामनाएं माँ गंगा की कृपा से आपके जीवन में शांति, सुख और समृद्धि बनी रहे। हर हर गंगे! [ 3 गगा सप्तमी की हार्दिक शुभकामनाएं माँ गंगा की कृपा से आपके जीवन में शांति, सुख और समृद्धि बनी रहे। हर हर गंगे! [ 3 - ShareChat
#🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🔊सुन्दर कांड🕉️ #🔱🚩🕉हनु हनु मते नमः🕉🚩🔱#
🙏🌺जय बजरंगबली🌺🙏 - ShareChat
00:14
#🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏कर्म क्या है❓ #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #bhakti
🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स - उत्तरा ने श्रीकृष्ण से निवेदन किया 'हे प्रभु मेरी रक्षा कीजिए। जैसे ही ब्रह्मास्त्र का श्रीकृष्ण " ने अपनी योगमाया से उसे शांत कर दिया। प्रचंड प्रभाव वहां पहुंचा श्रीकृष्ण से प्रार्थना पौराणिक कथा के अनुसार उत्तरा भयभीत और fT माया से गर्भस्थ के चारों ओर एक सुदृढ़, अदृश्य व्याकुल अवस्था में दौड़ती हुई उस स्थान पर पहुंची, कवच निर्मित कर दिया। जैसे ही ब्रह्मास्त्र का प्रचंड जहां श्रीकृष्ण, पांचों पांडव तथा माता कुंती उपस्थित प्रभाव वहां पहुंचा , श्रीकृष्ण ने अपनी योगमाया से उसे शिशु थे। उत्तरा ने करुण स्वर में श्रीकृष्ण से निवेदन किया, शांत कर दिया और ক্ষী हे प्रभु R मेरी रक्षा कीजिए। अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र का पूर्णतः  रखा। इस अद्वितीय लीला को देखकर सभी  प्रहार मेरे गर्भ पर किया है। मेरे पति अभिमन्यु वीरगति  हो चुके हैं और मेरे गर्भ में उनकी संतान पल  को प्राप्त उपस्थित जन भावविभोर हा उठे रही है। यह भयानक अस्त्र उस निर्दोष शिशु  और उन्होंने श्रद्धापूर्वक श्रीकृष्ण का ಹTl जीवन समाप्त कर की स्तुति को। तब श्रीकृष्ण ने कृपया पांडव वंश की Arun रक्षा करें। ' और गंभीर वाणी में कहा, मधुर उत्तरा की हृदयविदारक विनती सुनकर कुंती और भक्त अटूट विश्वास के पांडवों ने भी हाथ जोड़कर श्रीकृष्ण से प्रार्थना की कि साथ मेरा आश्रय ग्रहण करते हैं वे इस  विश्वास को रक्षा करना ही मेरा कर्तव्य है ।' इस संकट से उसकी रक्षा करें। तब श्रीकृष्ण ने नेत्र उनक சிதன से सूक्ष्म  मूंद लिए और दिव्य शक्ति 731 करुणा   और रूप धारण कर प्रकार भगवान उत्तरा के गर्भ में प्रवेश किया। उन्होंने अपनी अद्भुत भक्तवत्सलता का दिव्य प्रमाण प्रस्तुत किया।  उत्तरा ने श्रीकृष्ण से निवेदन किया 'हे प्रभु मेरी रक्षा कीजिए। जैसे ही ब्रह्मास्त्र का श्रीकृष्ण " ने अपनी योगमाया से उसे शांत कर दिया। प्रचंड प्रभाव वहां पहुंचा श्रीकृष्ण से प्रार्थना पौराणिक कथा के अनुसार उत्तरा भयभीत और fT माया से गर्भस्थ के चारों ओर एक सुदृढ़, अदृश्य व्याकुल अवस्था में दौड़ती हुई उस स्थान पर पहुंची, कवच निर्मित कर दिया। जैसे ही ब्रह्मास्त्र का प्रचंड जहां श्रीकृष्ण, पांचों पांडव तथा माता कुंती उपस्थित प्रभाव वहां पहुंचा , श्रीकृष्ण ने अपनी योगमाया से उसे शिशु थे। उत्तरा ने करुण स्वर में श्रीकृष्ण से निवेदन किया, शांत कर दिया और ক্ষী हे प्रभु R मेरी रक्षा कीजिए। अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र का पूर्णतः  रखा। इस अद्वितीय लीला को देखकर सभी  प्रहार मेरे गर्भ पर किया है। मेरे पति अभिमन्यु वीरगति  हो चुके हैं और मेरे गर्भ में उनकी संतान पल  को प्राप्त उपस्थित जन भावविभोर हा उठे रही है। यह भयानक अस्त्र उस निर्दोष शिशु  और उन्होंने श्रद्धापूर्वक श्रीकृष्ण का ಹTl जीवन समाप्त कर की स्तुति को। तब श्रीकृष्ण ने कृपया पांडव वंश की Arun रक्षा करें। ' और गंभीर वाणी में कहा, मधुर उत्तरा की हृदयविदारक विनती सुनकर कुंती और भक्त अटूट विश्वास के पांडवों ने भी हाथ जोड़कर श्रीकृष्ण से प्रार्थना की कि साथ मेरा आश्रय ग्रहण करते हैं वे इस  विश्वास को रक्षा करना ही मेरा कर्तव्य है ।' इस संकट से उसकी रक्षा करें। तब श्रीकृष्ण ने नेत्र उनक சிதன से सूक्ष्म  मूंद लिए और दिव्य शक्ति 731 करुणा   और रूप धारण कर प्रकार भगवान उत्तरा के गर्भ में प्रवेश किया। उन्होंने अपनी अद्भुत भक्तवत्सलता का दिव्य प्रमाण प्रस्तुत किया। - ShareChat
#🙏परशुराम जयंती🪔📿 #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स #🙏कर्म क्या है❓ #🕉️सनातन धर्म🚩
🙏परशुराम जयंती🪔📿 - दरबारियों ने पवनपुत्र से पूछा कि क्या हृदय में श्रीराम बसते हैं? हनुमान जी तुम्हारे ने बिना संकोच अपनी छाती को चीरकर प्रभु और माता सीता के दर्शन करा दिए। मन में बसे श्रीराम पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीराम या नहीं। जिस वस्तु में मेरे आराध्य का वास नहीं लंका विजय के बाद अयोध्या लोटे, तो उनका वह मेरे लिए व्यर्थ हैे। दरबार में सभी यह सुनकर स्तब्ध रह गए। किसी  राज्याभिषेक हुआ| इसी अवसर पर माता सीता ने कि॰क्या तुम्हारे शरीर में ने पूछा सोचा कि क्यों न अपने सबसे प्रिय सेवक व भक्त हनुमान को कुछ विशेष भेंट दी जाए। माता सीता ने # श्रीराम का वास हे? हनुमान अनमोल मोतियों का हार अपने गले से उतारकर ने निःसंकोच अपनी छाती हनुमान जी को भेंट की। हनुमान जी ने भी विनम्रता चीरकर दिखा दिया। सभी I में स्वतां से हार को स्वीकार कर लिया। लेकिन कुछ ही क्षण  देखा कि उनके हृदय बाद उन्होंने ऐसा कार्य किया, जिसे देखकर पूरा श्रीराम ओर माता अतयात्रा विराजमान हें।यह दृश्य देखकर दरबार स्तब्ध रह गया। उन्होंने उस हार को हाथ में लेकर हर मोती को दरबार भावविभोर हो उठा| तोड़ना शुरू कर दिया। कुछ दरबारी स्वयं को रोक नाती सीता और भगवान  राम स्वयं हनुमान जी की इस अद्भुत भक्ति से भाव- नहीं पाए और उन्होंने बजरंगबली से इसका कारण पूछा। हनुमान जी ने विनम्रता से उत्तर दिया, ' में देख विभोर हा उठे। हनुमान केवल एक सेवक नहीं हूं किँ इन मोतियों में मेरे प्रभु श्रीराम का वास है बल्कि सच्चे अर्थों मेँ परम भक्त थे। रहा दरबारियों ने पवनपुत्र से पूछा कि क्या हृदय में श्रीराम बसते हैं? हनुमान जी तुम्हारे ने बिना संकोच अपनी छाती को चीरकर प्रभु और माता सीता के दर्शन करा दिए। मन में बसे श्रीराम पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान श्रीराम या नहीं। जिस वस्तु में मेरे आराध्य का वास नहीं लंका विजय के बाद अयोध्या लोटे, तो उनका वह मेरे लिए व्यर्थ हैे। दरबार में सभी यह सुनकर स्तब्ध रह गए। किसी  राज्याभिषेक हुआ| इसी अवसर पर माता सीता ने कि॰क्या तुम्हारे शरीर में ने पूछा सोचा कि क्यों न अपने सबसे प्रिय सेवक व भक्त हनुमान को कुछ विशेष भेंट दी जाए। माता सीता ने # श्रीराम का वास हे? हनुमान अनमोल मोतियों का हार अपने गले से उतारकर ने निःसंकोच अपनी छाती हनुमान जी को भेंट की। हनुमान जी ने भी विनम्रता चीरकर दिखा दिया। सभी I में स्वतां से हार को स्वीकार कर लिया। लेकिन कुछ ही क्षण  देखा कि उनके हृदय बाद उन्होंने ऐसा कार्य किया, जिसे देखकर पूरा श्रीराम ओर माता अतयात्रा विराजमान हें।यह दृश्य देखकर दरबार स्तब्ध रह गया। उन्होंने उस हार को हाथ में लेकर हर मोती को दरबार भावविभोर हो उठा| तोड़ना शुरू कर दिया। कुछ दरबारी स्वयं को रोक नाती सीता और भगवान  राम स्वयं हनुमान जी की इस अद्भुत भक्ति से भाव- नहीं पाए और उन्होंने बजरंगबली से इसका कारण पूछा। हनुमान जी ने विनम्रता से उत्तर दिया, ' में देख विभोर हा उठे। हनुमान केवल एक सेवक नहीं हूं किँ इन मोतियों में मेरे प्रभु श्रीराम का वास है बल्कि सच्चे अर्थों मेँ परम भक्त थे। रहा - ShareChat