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#🪔वट सावित्री की शुभकामनाएं 🙏 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🌞 Good Morning🌞 #🙏रोजाना भक्ति स्टेट्स
🪔वट सावित्री की शुभकामनाएं 🙏 - हिंदू धर्म में गंगा दशहरा का विशेष स्थान है गंगा दशहरा और गंगा सप्तमी में क्या है अंतर? हिंदू धर्म में मां गंगा को केवल एक संयोग बन रहा है. आइए जानते हैं कि ये दोनों पर्व एक- दूसरे से कैसे नदी नहीं, बल्कि मोक्ष देने নালী देवी माना गया है. हर साल गंगा अलग हैं और इनका क्या महत्व मैया से जुड़े दो बड़े त्योहार मनाये है. साल २०२६ में गंगा दशहरा २५ जाते हैं गंगा सप्तमी और गंगा मई सोमवार को मनाया जाएगा. दशहरा. अक्सर लोग इन दोनों के खास बात यह है कि इस साल ज्येष्ठ महीने में अधिक मास (मलमास ) बीच के अंतर को लेकर उलझन में रहते हैं॰ साल २०२६ में गंगा दशहरा लग रहा है, जिससे इस दिन गंगा का महत्व और भी बढ़ने वाला है स्नान और दान- पुण्य करने का क्योंकि इस बार अधिक मास का फल कई गुना बढ़ जाएगा. 0 हिंदू धर्म में गंगा दशहरा का विशेष स्थान है गंगा दशहरा और गंगा सप्तमी में क्या है अंतर? हिंदू धर्म में मां गंगा को केवल एक संयोग बन रहा है. आइए जानते हैं कि ये दोनों पर्व एक- दूसरे से कैसे नदी नहीं, बल्कि मोक्ष देने নালী देवी माना गया है. हर साल गंगा अलग हैं और इनका क्या महत्व मैया से जुड़े दो बड़े त्योहार मनाये है. साल २०२६ में गंगा दशहरा २५ जाते हैं गंगा सप्तमी और गंगा मई सोमवार को मनाया जाएगा. दशहरा. अक्सर लोग इन दोनों के खास बात यह है कि इस साल ज्येष्ठ महीने में अधिक मास (मलमास ) बीच के अंतर को लेकर उलझन में रहते हैं॰ साल २०२६ में गंगा दशहरा लग रहा है, जिससे इस दिन गंगा का महत्व और भी बढ़ने वाला है स्नान और दान- पुण्य करने का क्योंकि इस बार अधिक मास का फल कई गुना बढ़ जाएगा. 0 - ShareChat
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🪔वट सावित्री की शुभकामनाएं 🙏 - प्रेमानंद महाराज की सीख शैतान नहीं, भगवान का दास बनने में है असली शक्ति किसी व्यक्ति के जीवन कहा कि॰ महाराज जी मेरी मां को 0asesrauTqcanfaui  भूतों ने परेशान कर रखा है और मैं जाती हैं तो वह सही उन भूतों पर शासन करना चाहता do हूं॰ इसलिए मुझे शैतानों का राजा ढूंढने की कोशिश करता रास्ता है. ऐसे समय में प्रेमानंद महाराज बना दिया जाए ' यह बात सुनकर के विचार और उनके दिए गए प्रेमानंद महाराज मुस्कुराते हुए सरल उपाय लोगों को समझने में बोले कि॰ भूतों के राजा तो भूतेश्वर मदद करते हैं कि उन्हें क्या करना भगवान शंकर हैं. भूतेश्वर भगवान चाहिए. उनकी बातें सिर्फ धार्मिक शंकर भूतों के ईश्वर हैं॰ इसलिए नहीं होतीं बल्कि जीवन को सही शैतान का राजा मत बनो बल्कि दिशा देने वाली होती है. यही कारण  देवताओं के राजा बनने की है कि लोग अपनी छोटी-बड़ी कोशिश करो. इस इच्छाप्राप्ति के महसूस करते हैं सामने एक अजीब तरह की बात इसी तरह की दुविधा लेकर एक कही, जिसको सुनकर प्रेमानंद लिए सिर्फ और सिर्फ भगवन नाम समस्याएं, मानसिक तनाव या दुविधाएं लेकर उनके पास जाते व्यक्ति प्रेमानंद महाराज के पास महाराज भी मुस्करा पडे़. दरअसल  जप करो़. भगवन नाम जब से सब पहुंचा. उस व्यक्ति ने महाराज जी के उस व्यक्ति ने प्रेमानंद महाराज से हैं और उनके मार्गदर्शन से राहत ठीक हो जाएगा. प्रेमानंद महाराज की सीख शैतान नहीं, भगवान का दास बनने में है असली शक्ति किसी व्यक्ति के जीवन कहा कि॰ महाराज जी मेरी मां को 0asesrauTqcanfaui  भूतों ने परेशान कर रखा है और मैं जाती हैं तो वह सही उन भूतों पर शासन करना चाहता do हूं॰ इसलिए मुझे शैतानों का राजा ढूंढने की कोशिश करता रास्ता है. ऐसे समय में प्रेमानंद महाराज बना दिया जाए ' यह बात सुनकर के विचार और उनके दिए गए प्रेमानंद महाराज मुस्कुराते हुए सरल उपाय लोगों को समझने में बोले कि॰ भूतों के राजा तो भूतेश्वर मदद करते हैं कि उन्हें क्या करना भगवान शंकर हैं. भूतेश्वर भगवान चाहिए. उनकी बातें सिर्फ धार्मिक शंकर भूतों के ईश्वर हैं॰ इसलिए नहीं होतीं बल्कि जीवन को सही शैतान का राजा मत बनो बल्कि दिशा देने वाली होती है. यही कारण  देवताओं के राजा बनने की है कि लोग अपनी छोटी-बड़ी कोशिश करो. इस इच्छाप्राप्ति के महसूस करते हैं सामने एक अजीब तरह की बात इसी तरह की दुविधा लेकर एक कही, जिसको सुनकर प्रेमानंद लिए सिर्फ और सिर्फ भगवन नाम समस्याएं, मानसिक तनाव या दुविधाएं लेकर उनके पास जाते व्यक्ति प्रेमानंद महाराज के पास महाराज भी मुस्करा पडे़. दरअसल  जप करो़. भगवन नाम जब से सब पहुंचा. उस व्यक्ति ने महाराज जी के उस व्यक्ति ने प्रेमानंद महाराज से हैं और उनके मार्गदर्शन से राहत ठीक हो जाएगा. - ShareChat
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🪔वट सावित्री की शुभकामनाएं 🙏 - गरुड़ पुराण में छिपा है रहस्य  कैसा होता है यमलोक का रास्ता? महत्वपूर्ण चरण माना गया है. कहा  रुड़ पुराण के अनुसार, 0| जाता है कि जिन लोगों ने जीवन मृत्यु के बाद आत्मा को में बुरे कर्म किए होते हैं उनके लिए यमलोक तक पहुंचने के i से गुजरना पड़ता लिए १६ नगरों यह नदी बेहद भयावह रूप ले लेती है. यह यात्रा किसी सामान्य रास्ते है. उसे पार करना बहुत कष्टदायक की तरह नहीं होती हैे. इस रास्ते में हो जाता है. वहीं॰ जिन लोगों ने आत्मा को थकान, प्यास और कई अच्छे और पुण्य कर्म किए होते हैं उन्हें इस नदी को पार करने में कम  तरह के कष्टों का अनुभव करना पडता हे. इन कष्टों को बाहरी सजा कठिनाई होती है. यह दरअसल नहीं माना गया है बल्कि यह एक प्रतीक है, जो यह बताता है कि व्यक्ति के अपने कर्मो का प्रतिबिंब कठिन बनती है. इसे ऐसे समझ করব 3াণকী মিথনি নম কমন & जीवन के ही आगे आने वाली சி বুলীনিত্রী কী সামাল যা होते हैं. यानी जीवन में जैसे कर्म  सकते हैं कि जेसे किसी लंबी यात्रा  गरुड़ पुराण के मुताबिक इस मुश्किल  বিন্যুদ किए जाते हैं, उसी के अनुसार में आपकी तैयारी और व्यवहार यात्रा में वैतरणी नदी को बनाते हैं. गरुड़ पुराण में  ೯' आत्मा की यह यात्रा आसान या मायने रखते हैँ वैसे ही यहां आपके पार करना सबसे कठिन और को वह देवता माना गया है गरुड़ पुराण में छिपा है रहस्य  कैसा होता है यमलोक का रास्ता? महत्वपूर्ण चरण माना गया है. कहा  रुड़ पुराण के अनुसार, 0| जाता है कि जिन लोगों ने जीवन मृत्यु के बाद आत्मा को में बुरे कर्म किए होते हैं उनके लिए यमलोक तक पहुंचने के i से गुजरना पड़ता लिए १६ नगरों यह नदी बेहद भयावह रूप ले लेती है. यह यात्रा किसी सामान्य रास्ते है. उसे पार करना बहुत कष्टदायक की तरह नहीं होती हैे. इस रास्ते में हो जाता है. वहीं॰ जिन लोगों ने आत्मा को थकान, प्यास और कई अच्छे और पुण्य कर्म किए होते हैं उन्हें इस नदी को पार करने में कम  तरह के कष्टों का अनुभव करना पडता हे. इन कष्टों को बाहरी सजा कठिनाई होती है. यह दरअसल नहीं माना गया है बल्कि यह एक प्रतीक है, जो यह बताता है कि व्यक्ति के अपने कर्मो का प्रतिबिंब कठिन बनती है. इसे ऐसे समझ করব 3াণকী মিথনি নম কমন & जीवन के ही आगे आने वाली சி বুলীনিত্রী কী সামাল যা होते हैं. यानी जीवन में जैसे कर्म  सकते हैं कि जेसे किसी लंबी यात्रा  गरुड़ पुराण के मुताबिक इस मुश्किल  বিন্যুদ किए जाते हैं, उसी के अनुसार में आपकी तैयारी और व्यवहार यात्रा में वैतरणी नदी को बनाते हैं. गरुड़ पुराण में  ೯' आत्मा की यह यात्रा आसान या मायने रखते हैँ वैसे ही यहां आपके पार करना सबसे कठिन और को वह देवता माना गया है - ShareChat
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🕉️सनातन धर्म🚩 - हर कण और हर व्यक्ति में है ईश्वरश कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को इसी तरह एक बार गुरु नानक देव सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव को  हरिद्वार गए। वहां लोगों को गंगा किनारे पूर्व मे अर्घ्य देते देखा। वे इसके उलट जयंती मनाई जातो है। इस पर्व को प्रकाश  7 पर्व या गुरु पर्व भी कहा जाता है। इस पश्चिम में जल देने लगे। लोगों ने पूछा-  कर रहे हैं? गुरु नानक देव ने पूर्णिमा को गुरु नानक देव का S५५वां आपःक्य पूछा, आप क्या कर रहे है? जवाव प्रकाश पर्व मनाया जाएगा। मिला, हम पूर्वजों को जल दे रहे हैं। गुरु " गुरु नानक देव एक महान समाज  नानक देव बोले॰ मैं पंजाब में खेतों को सुधारक , धर्म सुधारक और सच्चे योगी थे।  गुरु नानक  पानी दे रहा हूं। लोग बोले- इतनी दूर " उनका एक प्रसंग प्रचलित है। आजीविका के उन्हें कुछ अनुभूति हुई। वह तौलते जाते  पानी खेतों तक कैसे जाएगा? इस पर गुरु - लिए बहनोई जैराम जीके जरिये वे सुल्तानपुर लोधी के नवाब के शाही भंडार  नानक देव बोले॰ जव पानी पूर्वजों तक थे और १३ के बाद तेरा फिर तेरा और কী বরত্রে কনে লযা থ | বব্ধ না ন নালু  सब तेरा ही तेरा कहते गए। इस घटना के जा सकता है॰तो यह खेतों तक क्यो नही बाद वह मानने लगे किजो कुछ है, वह  तोलकर  जाएगा ? मानो तो ईश्वर यहां मौजूद हर  से अनाज ग्राहक को दे रहे थे तो १३ पर पहुंचे तो । गिनते गिनते जब ११, १२  परमव्रह्म का है॰ मेरा क्या है? और हर व्यक्त में है। कण हर कण और हर व्यक्ति में है ईश्वरश कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को इसी तरह एक बार गुरु नानक देव सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव को  हरिद्वार गए। वहां लोगों को गंगा किनारे पूर्व मे अर्घ्य देते देखा। वे इसके उलट जयंती मनाई जातो है। इस पर्व को प्रकाश  7 पर्व या गुरु पर्व भी कहा जाता है। इस पश्चिम में जल देने लगे। लोगों ने पूछा-  कर रहे हैं? गुरु नानक देव ने पूर्णिमा को गुरु नानक देव का S५५वां आपःक्य पूछा, आप क्या कर रहे है? जवाव प्रकाश पर्व मनाया जाएगा। मिला, हम पूर्वजों को जल दे रहे हैं। गुरु " गुरु नानक देव एक महान समाज  नानक देव बोले॰ मैं पंजाब में खेतों को सुधारक , धर्म सुधारक और सच्चे योगी थे।  गुरु नानक  पानी दे रहा हूं। लोग बोले- इतनी दूर " उनका एक प्रसंग प्रचलित है। आजीविका के उन्हें कुछ अनुभूति हुई। वह तौलते जाते  पानी खेतों तक कैसे जाएगा? इस पर गुरु - लिए बहनोई जैराम जीके जरिये वे सुल्तानपुर लोधी के नवाब के शाही भंडार  नानक देव बोले॰ जव पानी पूर्वजों तक थे और १३ के बाद तेरा फिर तेरा और কী বরত্রে কনে লযা থ | বব্ধ না ন নালু  सब तेरा ही तेरा कहते गए। इस घटना के जा सकता है॰तो यह खेतों तक क्यो नही बाद वह मानने लगे किजो कुछ है, वह  तोलकर  जाएगा ? मानो तो ईश्वर यहां मौजूद हर  से अनाज ग्राहक को दे रहे थे तो १३ पर पहुंचे तो । गिनते गिनते जब ११, १२  परमव्रह्म का है॰ मेरा क्या है? और हर व्यक्त में है। कण - ShareChat
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