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#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - 0 चतुराई चौपट करे ज्ञानी   गोते भोले भाले   लोगन को खाए; ೧೧ नारायण मिल আাৎ !! 0 चतुराई चौपट करे ज्ञानी   गोते भोले भाले   लोगन को खाए; ೧೧ नारायण मिल আাৎ !! - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गुरु महिमा😇 - 0 09ப -4  و CFTFLDUT  मका अहकार शरीर निर्मित हे। ಚCನನ वढ सामूरिकता के समुद मे जाए बिना समाप्त  नही ही सकता ६। -1 प्रूष्पशी िवकृपनद स्वामीण   Aaare মাল:  সামোনেক মন ` +r +71 9 आप खराव से खराव जगह भी हे॰ बुरे से बुरे लोगों के चीच मे भी हे तो भी आपका  चित्त अगर गुरु के ऊपर हे तो आपर्मे तो आयेगा, आपके आसपास में॰भी॰ 020 एक लाय्यात्मिल गागा बदताव आयेगा। Doa अनुष्ठान ादवस४२ /u गुठजैसा न आसर गुरूजैसा नमीत  गुरु कृपा से पाइए चचल मनपरजीत  की साकार अवतार   जपवावा स्वामी से निराकार तक की यात्रा ఏాపాాగాాగాగాగాాగాగా के संदेश की P आत्मा "নৈনতচন বদুবিলিন श्रृंखला है। 9-75Tர777 Munhai  प्रेम " आत्मा का मुल स्वभाव  ম্যা_দমবিিন্যমেল্যাI ೨೦ೂ5327455R47 होता हे निःस्वार्थ प्रेम सेकिसी  57/ भी आत्मा से जुड़ा " ஓர்சிஈனாசய் जासकता ीिय   0 61 बाबा स्वामी আামনিকমন  0 09ப -4  و CFTFLDUT  मका अहकार शरीर निर्मित हे। ಚCನನ वढ सामूरिकता के समुद मे जाए बिना समाप्त  नही ही सकता ६। -1 प्रूष्पशी िवकृपनद स्वामीण   Aaare মাল:  সামোনেক মন ` +r +71 9 आप खराव से खराव जगह भी हे॰ बुरे से बुरे लोगों के चीच मे भी हे तो भी आपका  चित्त अगर गुरु के ऊपर हे तो आपर्मे तो आयेगा, आपके आसपास में॰भी॰ 020 एक लाय्यात्मिल गागा बदताव आयेगा। Doa अनुष्ठान ादवस४२ /u गुठजैसा न आसर गुरूजैसा नमीत  गुरु कृपा से पाइए चचल मनपरजीत  की साकार अवतार   जपवावा स्वामी से निराकार तक की यात्रा ఏాపాాగాాగాగాగాాగాగా के संदेश की P आत्मा "নৈনতচন বদুবিলিন श्रृंखला है। 9-75Tர777 Munhai  प्रेम " आत्मा का मुल स्वभाव  ম্যা_দমবিিন্যমেল্যাI ೨೦ೂ5327455R47 होता हे निःस्वार्थ प्रेम सेकिसी  57/ भी आत्मा से जुड़ा " ஓர்சிஈனாசய் जासकता ीिय   0 61 बाबा स्वामी আামনিকমন - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - शरी हनुभान थादीसानी र्यना पाछणनी সনিsifমs sথil সল সলl HitJHথlleucluHrsi ్ -  [ { arx<lಭsu 00   م ل 0 {uyrii(hul 141  Vn 4 N4 W0WiWనulk JWIWi MAtIM 4( Mlal? शरी हनुभान थादीसानी र्यना पाछणनी সনিsifমs sথil সল সলl HitJHথlleucluHrsi ్ -  [ { arx<lಭsu 00   م ل 0 {uyrii(hul 141  Vn 4 N4 W0WiWనulk JWIWi MAtIM 4( Mlal? - ShareChat
#🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🧘सदगुरु जी🙏 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🙏गुरु महिमा😇 - फरवरी ?? भातिक संसार मे सदा प्रतिस्पर्धा का वातावरण वना रहता हे। कोई विद्यार्थी यदि किसी दसरे विद्यार्थी से अधिक पढाई कर ले तो उन विद्याथियों मे तुरन्त ईर्ष्या " उत्पन्न होने लगती है। কিল आध्यात्मिक जीवन ऐसा नही ह।  कदरन करले पर उपरवाला छीन ही लेता हर यदि कोई भक्त सोलह माला जप करता ह शी आरशख्स भीः মম आर वह किसी आर भक्त को चांसठ माला  जप करते हुए देख ले तो उसे ईष्या नही अपितु अत्यधिक आनन्द होता ह। भक्तों मे इस प्रकार  वक़्त का पासा कभी भी का कोई वैर होता ही नही।  पलट सकता है॰ इसलिए (थाशामद रपागाविन्द दाम गास्यर्म मदागन  वही सितम करजो नू शी सह सके। हर सुवह  ಎutitul lite ज़िंदगी हमें चुपके से याद दिलाती हे- कि सांसें चल रही हे तों उम्गीदें भी जिंदा हे! मैं उस भीड़ से दूर रहता हूं आज मुखुरा लेना  जहां लोग अपना होने का, शायद যর্মী মনয ব্যীনীন মা नाटक करते हैं. फरवरी ?? भातिक संसार मे सदा प्रतिस्पर्धा का वातावरण वना रहता हे। कोई विद्यार्थी यदि किसी दसरे विद्यार्थी से अधिक पढाई कर ले तो उन विद्याथियों मे तुरन्त ईर्ष्या " उत्पन्न होने लगती है। কিল आध्यात्मिक जीवन ऐसा नही ह।  कदरन करले पर उपरवाला छीन ही लेता हर यदि कोई भक्त सोलह माला जप करता ह शी आरशख्स भीः মম आर वह किसी आर भक्त को चांसठ माला  जप करते हुए देख ले तो उसे ईष्या नही अपितु अत्यधिक आनन्द होता ह। भक्तों मे इस प्रकार  वक़्त का पासा कभी भी का कोई वैर होता ही नही।  पलट सकता है॰ इसलिए (थाशामद रपागाविन्द दाम गास्यर्म मदागन  वही सितम करजो नू शी सह सके। हर सुवह  ಎutitul lite ज़िंदगी हमें चुपके से याद दिलाती हे- कि सांसें चल रही हे तों उम्गीदें भी जिंदा हे! मैं उस भीड़ से दूर रहता हूं आज मुखुरा लेना  जहां लोग अपना होने का, शायद যর্মী মনয ব্যীনীন মা नाटक करते हैं. - ShareChat
#🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇
🧘सदगुरु जी🙏 - Guutalta समझते हैं कि एकाग्रता का संबंध ब्रेइन से आप यानी मस्तिष्क से है। नहीं इसका संबंध आपके पेट आपका पेट ही गड़बड़़ है॰ तो से होता है। जब आपका मस्तिष्क भी गड़बड़ होगा ही! पेट गड़बड़ से मेरा आशय आपका खान- पान ही ठीक नहीं है। परम पूज्य श्री शिवकृपानंद स्वामीजी स्रोतः नवयुग की ओर ग्रंथ  Guutalta समझते हैं कि एकाग्रता का संबंध ब्रेइन से आप यानी मस्तिष्क से है। नहीं इसका संबंध आपके पेट आपका पेट ही गड़बड़़ है॰ तो से होता है। जब आपका मस्तिष्क भी गड़बड़ होगा ही! पेट गड़बड़ से मेरा आशय आपका खान- पान ही ठीक नहीं है। परम पूज्य श्री शिवकृपानंद स्वामीजी स्रोतः नवयुग की ओर ग्रंथ - ShareChat
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🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - Cಣ ओर दुःख यह दीनों अवस्था के ऊपर सुख #মান ৮1 रश्ी शिवकृपानंद स्वामीणी  C-ಣ Medirarion s abovo is abovo both the states ol happiness and sorrow Shree Shivkrupanand Swamil Cಣ ओर दुःख यह दीनों अवस्था के ऊपर सुख #মান ৮1 रश्ी शिवकृपानंद स्वामीणी  C-ಣ Medirarion s abovo is abovo both the states ol happiness and sorrow Shree Shivkrupanand Swamil - ShareChat
#🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🧘सदगुरु जी🙏 - परम पूज्य श्री शिवकृपानंदस्वामी जी  हिमालयन समर्पण ध्यान योग 59 की मदद करके, वास्तव মনুষ্প {గ में, अपनी ही मदद करता रहता है, अपने लिए ही मार्ग बनाता रहता है हिमालयन समर्पण थ्यान योग अपने लिए ही रास्ता बनाता रहता है। मनुष्य ओर पशु पक्षी में आहार निद्रा  মথুন येःसबतो॰मारहीहे आत्मा भय पशुओं मे भी समान ही हे पक्षियो मे भी आत्मा तोहोती हीह केवल मनुष्य के शरीरकी सरचना इस प्रकारकी ह कि वह उपासना साथना भक्ति करके हिमालय का समर्पण योग भाग॰ २ अपने जीवन काल मेंही मोक्ष की स्थिति पा सकता ऐ। अगर मनुष्य जन्म में॰शी आत्मा उद्देश्य नहीं करती ह पूर्ण  तो उसका मनुष्य देह थारण करना व्यर्थ श्री शिवकृपानंदखवामी जी पूज्य ही हे। क्योकि मनुष्य ध्यान कर सकता परम ह और नियमित ध्यान साधना करके मोक्ष की स्थिति पासकता हे। हिमालय का समर्पण योग भाग  ४ परम पज्य श्री शिवकपानदसव परम पूज्य श्री शिवकृपानंदस्वामी जी  हिमालयन समर्पण ध्यान योग 59 की मदद करके, वास्तव মনুষ্প {గ में, अपनी ही मदद करता रहता है, अपने लिए ही मार्ग बनाता रहता है हिमालयन समर्पण थ्यान योग अपने लिए ही रास्ता बनाता रहता है। मनुष्य ओर पशु पक्षी में आहार निद्रा  মথুন येःसबतो॰मारहीहे आत्मा भय पशुओं मे भी समान ही हे पक्षियो मे भी आत्मा तोहोती हीह केवल मनुष्य के शरीरकी सरचना इस प्रकारकी ह कि वह उपासना साथना भक्ति करके हिमालय का समर्पण योग भाग॰ २ अपने जीवन काल मेंही मोक्ष की स्थिति पा सकता ऐ। अगर मनुष्य जन्म में॰शी आत्मा उद्देश्य नहीं करती ह पूर्ण  तो उसका मनुष्य देह थारण करना व्यर्थ श्री शिवकृपानंदखवामी जी पूज्य ही हे। क्योकि मनुष्य ध्यान कर सकता परम ह और नियमित ध्यान साधना करके मोक्ष की स्थिति पासकता हे। हिमालय का समर्पण योग भाग  ४ परम पज्य श्री शिवकपानदसव - ShareChat
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🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - (e बुद्ि का मार्ग ओर  का मार्ग दोनो एकदम থান विरुद दिशा मे चलते हे। बुद्वि सदेव ही निरीक्षण  करती हे भाव सदेत ' अनुभूति' करता हे शिवकृपानंद स्वामीजी  n सबसे बड़ी सामूहिक शक्ति लिए होता है समुद्र। सभी नदियाँ वहाँ जाकर अपना स्वयं का , नदी का आस्तित्व को देती है ओर स्ववं शी समुद्र कहलाती है।।बाबा स्वामी जी। 0 Thentellectual path and the emovonel parh go in abso urely opposire directionss Tho ntellecr alwny oosorves nnd in pocr Thuile Leellngs and emotians ulvrays Lead t S0TUaIPperiences मृत्यु इतनी डरावनी व Shreo Shiw mupanana Swamil कष्टदायक नहीं होती , जितना मृत्यु का डर कष्टदायक होता है। मृत्यु तो कब आती है उसका मनुष्य को भी पता नहीं चलता है। ।बाबा स्वामी जी। (e बुद्ि का मार्ग ओर  का मार्ग दोनो एकदम থান विरुद दिशा मे चलते हे। बुद्वि सदेव ही निरीक्षण  करती हे भाव सदेत ' अनुभूति' करता हे शिवकृपानंद स्वामीजी  n सबसे बड़ी सामूहिक शक्ति लिए होता है समुद्र। सभी नदियाँ वहाँ जाकर अपना स्वयं का , नदी का आस्तित्व को देती है ओर स्ववं शी समुद्र कहलाती है।।बाबा स्वामी जी। 0 Thentellectual path and the emovonel parh go in abso urely opposire directionss Tho ntellecr alwny oosorves nnd in pocr Thuile Leellngs and emotians ulvrays Lead t S0TUaIPperiences मृत्यु इतनी डरावनी व Shreo Shiw mupanana Swamil कष्टदायक नहीं होती , जितना मृत्यु का डर कष्टदायक होता है। मृत्यु तो कब आती है उसका मनुष्य को भी पता नहीं चलता है। ।बाबा स्वामी जी। - ShareChat
#🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇
🧘सदगुरु जी🙏 - Expectation is the root of all heartache: वक़्त का पासा कभी भी We suffer not always because of what happens; but because of what we पलट सकता है, इसलिए expected to happen We build stories in जो तू hope our minds affach to outcomes; वही सितम कर and when reality chooses @ different it hurts भी सह सके। path; eautiful life @ FB/ BuddhismPageFB| परमात्मा की वाई फाई इतनी हाई_ फाई है कि जहाँ भी ध्यान करो जगह नेटवर्क आता है ! बातों से दिए गए तानों के जख्म बडे गहरे होते है.. दोस्त.. कत्ल भी हो जाते हैं और खंजर भी 6 f47.. परिवारका हाथ चलिए लोगों के पैर uer? V पकड़ने कीजरूरत a ua f..!! कितना बड़ा हेःयह ज़रूरी नहीं॰ E घर कितना खुशहाल ह४यही मायने रखता हे। कदरन करने पर उपरवाला छीन ही लेता हे॰ आपके जीवन नेखुशिया ही खुशियां वक्त भी औरशख्स भी॰ होआरघरमेसुखसमृद्धि बनी रहे यही ईश्वरसेकामना हमेरी Expectation is the root of all heartache: वक़्त का पासा कभी भी We suffer not always because of what happens; but because of what we पलट सकता है, इसलिए expected to happen We build stories in जो तू hope our minds affach to outcomes; वही सितम कर and when reality chooses @ different it hurts भी सह सके। path; eautiful life @ FB/ BuddhismPageFB| परमात्मा की वाई फाई इतनी हाई_ फाई है कि जहाँ भी ध्यान करो जगह नेटवर्क आता है ! बातों से दिए गए तानों के जख्म बडे गहरे होते है.. दोस्त.. कत्ल भी हो जाते हैं और खंजर भी 6 f47.. परिवारका हाथ चलिए लोगों के पैर uer? V पकड़ने कीजरूरत a ua f..!! कितना बड़ा हेःयह ज़रूरी नहीं॰ E घर कितना खुशहाल ह४यही मायने रखता हे। कदरन करने पर उपरवाला छीन ही लेता हे॰ आपके जीवन नेखुशिया ही खुशियां वक्त भी औरशख्स भी॰ होआरघरमेसुखसमृद्धि बनी रहे यही ईश्वरसेकामना हमेरी - ShareChat
#🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #🙏आध्यात्मिक गुरु🙏 #🧘सदगुरु जी🙏 #☝अनमोल ज्ञान
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - शलत लग அளாகூசி शशर्मिदा नही होते॰ ब्ही लोग केवल ঐআাম নী৪ সন&ঁ ర फरवरी ?0 ऐसा देखा जाता है की अलग ्अलग समय मे इस जगत में अलग अलग गुण बढ़ जाते हैं। कभी सत्त्वगुण ढ जाता है तो संसार मे देवताओं का शासन हो जाता ढ। कभी रजोगुण और तमोगुण बढ़ जाते हैं तो असुरों और यक्ष राक्षसों का साम्राज्य हो जाता ह। और पुनः सत्त्वगुण बढ़ जाने पर फिर देवताओं का राज्य हो जाता है। इस तरह भगवान सभी जीवों के प्रति समान भाव प्रकट रते हें और किसी से पक्षपात नही करते। श्रीश्रीमद राधागाविन्द दास गार्वामी महाराज  संगीत, जैसे जैज़, आकस्मिक रूपसेरचा गया भी आत्मा से जुड़ाव को प्रोत्साहित कर सकता 81 सहजता और वर्तमान में रहनेकी इसमें प्रेरणा होती है। संगीतकार जब इस प्रवाह में होते हैं॰ तोवे एक ऐसे स्रोत से जुड़ते हैंजो मन के नियंत्रण सेपरे होता है। यह प्रवाह एक आध्यात्मिक अनुभव के है॰ जहाँ आत्मा समा और संगीत केबीच कीसीमाएँ मिट जाती हें और आत्मा की शुद्ध अभिव्यक्ति प्रकट होती है। श्रीजी १० २ २०२६ यूंतो शब्दों के मतलब कई निकलते है मगरभावनाओं का मतलब सिर्फ़ एक होत़ा है, अपनत्व, सेह परवाह || शलत लग அளாகூசி शशर्मिदा नही होते॰ ब्ही लोग केवल ঐআাম নী৪ সন&ঁ ర फरवरी ?0 ऐसा देखा जाता है की अलग ्अलग समय मे इस जगत में अलग अलग गुण बढ़ जाते हैं। कभी सत्त्वगुण ढ जाता है तो संसार मे देवताओं का शासन हो जाता ढ। कभी रजोगुण और तमोगुण बढ़ जाते हैं तो असुरों और यक्ष राक्षसों का साम्राज्य हो जाता ह। और पुनः सत्त्वगुण बढ़ जाने पर फिर देवताओं का राज्य हो जाता है। इस तरह भगवान सभी जीवों के प्रति समान भाव प्रकट रते हें और किसी से पक्षपात नही करते। श्रीश्रीमद राधागाविन्द दास गार्वामी महाराज  संगीत, जैसे जैज़, आकस्मिक रूपसेरचा गया भी आत्मा से जुड़ाव को प्रोत्साहित कर सकता 81 सहजता और वर्तमान में रहनेकी इसमें प्रेरणा होती है। संगीतकार जब इस प्रवाह में होते हैं॰ तोवे एक ऐसे स्रोत से जुड़ते हैंजो मन के नियंत्रण सेपरे होता है। यह प्रवाह एक आध्यात्मिक अनुभव के है॰ जहाँ आत्मा समा और संगीत केबीच कीसीमाएँ मिट जाती हें और आत्मा की शुद्ध अभिव्यक्ति प्रकट होती है। श्रीजी १० २ २०२६ यूंतो शब्दों के मतलब कई निकलते है मगरभावनाओं का मतलब सिर्फ़ एक होत़ा है, अपनत्व, सेह परवाह || - ShareChat