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#शुभ मंगलवार #जय बजरंगबली #🌞 Good Morning🌞 #🌞सुप्रभात सन्देश #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं
शुभ मंगलवार - f >स ج फाल्गुन कृष्ण पक्ष अष्टमी शुभ प्रभात वि.सं. २०८२ मंगलवार २० फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३०७ से आगे) दोहा सं॰ ५२१| M శాuకే o 03 I[ || 6fushkatno बहु प्रकार मारन कपि लागे। दीन पुकारत तदपि न त्यागे।। जो हमार हर नासा काना। 6  तेहि कोसलाधीस कै आना।l भावार्थः ्वानर उन्हें बहुत तरह से मारने लगे। वे दीन होकर पुकारते थे, फिर भी वानरों ने उन्हें नहीं छोड़ा। (तब दूतों ने पुकारकर कहा ) जो हमारे नाक॰्कान काटेगा , उसे कोसलाधीश श्री रामजी की सौगंध है। क्रमशः ٥٥٥ f >स ج फाल्गुन कृष्ण पक्ष अष्टमी शुभ प्रभात वि.सं. २०८२ मंगलवार २० फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३०७ से आगे) दोहा सं॰ ५२१| M శాuకే o 03 I[ || 6fushkatno बहु प्रकार मारन कपि लागे। दीन पुकारत तदपि न त्यागे।। जो हमार हर नासा काना। 6  तेहि कोसलाधीस कै आना।l भावार्थः ्वानर उन्हें बहुत तरह से मारने लगे। वे दीन होकर पुकारते थे, फिर भी वानरों ने उन्हें नहीं छोड़ा। (तब दूतों ने पुकारकर कहा ) जो हमारे नाक॰्कान काटेगा , उसे कोसलाधीश श्री रामजी की सौगंध है। क्रमशः ٥٥٥ - ShareChat
#?#शुभ सोमवार #🌹शुभ सोमवार #🌞 Good Morning🌞 #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं #🌞सुप्रभात सन्देश
🌹शुभ सोमवार - ٢ ج फाल्गुन कृष्ण पक्ष अष्टमी शुभ प्रभात বিম 2082 सोमवार ०९ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३०६ से आगे) // چ)87 3o 51// चौपाई सं॰ ०२ १l || 6fushkatno कह सुग्रीव सुनहु सब बानर। अंग भंग करि पठवहु निसिचर।। = सुनि सुग्रीव बचन कपि धाए। <  बाँधि कटक चहु पास फिराए।। भावार्थः सुग्रीव ने कहा- सब वानरों! सुनो, राक्षसों के अंगनभंग करके भेज दो। सुग्रीव के वचन सुनकर वानर दौड़े। दूतों को बाँधकर उन्होंने सेना के चारों ओर घुमाया। क्रमशः ٢ ج फाल्गुन कृष्ण पक्ष अष्टमी शुभ प्रभात বিম 2082 सोमवार ०९ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३०६ से आगे) // چ)87 3o 51// चौपाई सं॰ ०२ १l || 6fushkatno कह सुग्रीव सुनहु सब बानर। अंग भंग करि पठवहु निसिचर।। = सुनि सुग्रीव बचन कपि धाए। <  बाँधि कटक चहु पास फिराए।। भावार्थः सुग्रीव ने कहा- सब वानरों! सुनो, राक्षसों के अंगनभंग करके भेज दो। सुग्रीव के वचन सुनकर वानर दौड़े। दूतों को बाँधकर उन्होंने सेना के चारों ओर घुमाया। क्रमशः - ShareChat
#शुभ रविवार #🌞 Good Morning🌞 #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं #🌞सुप्रभात सन्देश #🕉️सनातन धर्म🚩
शुभ रविवार - ٢ ج फाल्गुन कृष्ण पक्ष सप्तमी शुभ प्रभात वि.सं. २०८२ रविवार ०८ फरवरी २०२६ रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३०५ से आगे) // چ)87 3o 51// =luis =o 01 11 || 6fushkatno प्रगट बखानहिं राम सुभाऊ। अति सप्रेम गा बिसरि दुराऊ।। रिपु के दूत कपिन्ह तब जाने। 6<  सकल बाँधि कपीस पहिं आने।। भावार्थः फिर वे प्रकट रूप में भी अत्यंत प्रेम के साथ श्री रामजी के स्वभाव की बड़ाई करने लगे भूल गया। सब वानरों ने वेश) उन्हें दुराव (कपट जाना कि ये शत्रु के दूत हैं और वे उन सबको बाँधकर सुग्रीव के पास ले आए। क्रमशः ٥ ٥ ٢ ج फाल्गुन कृष्ण पक्ष सप्तमी शुभ प्रभात वि.सं. २०८२ रविवार ०८ फरवरी २०२६ रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३०५ से आगे) // چ)87 3o 51// =luis =o 01 11 || 6fushkatno प्रगट बखानहिं राम सुभाऊ। अति सप्रेम गा बिसरि दुराऊ।। रिपु के दूत कपिन्ह तब जाने। 6<  सकल बाँधि कपीस पहिं आने।। भावार्थः फिर वे प्रकट रूप में भी अत्यंत प्रेम के साथ श्री रामजी के स्वभाव की बड़ाई करने लगे भूल गया। सब वानरों ने वेश) उन्हें दुराव (कपट जाना कि ये शत्रु के दूत हैं और वे उन सबको बाँधकर सुग्रीव के पास ले आए। क्रमशः ٥ ٥ - ShareChat
#शुभ शनिवार #🙏शुभ शनिवार 🌹 #happy rose day #🌞 Good Morning🌞 #🕉️सनातन धर्म🚩
शुभ शनिवार - f >स g్a फाल्गुन कृष्ण पक्ष षष्ठी 3]97 प्रभात वि.सं. २०८२ शनिवार ०७ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३०४ से आगे) I[ dI6T ఖo 5111 6fushkatno तिन्ह देखे धरें कपट कपि देह। सकल चरित सराहहिं सरनागत पर नेह।। हृदयँ प्रभु गुन भावार्थः कपट से वानर का शरीर धारण कर में प्रभु उन्होंने सब लीलाएँ देखीं। वे अपने हृदय के गुणों की और शरणागत पर उनके स्नेह की सराहना करने लगे। क्रमशः 7٥٥ f >स g్a फाल्गुन कृष्ण पक्ष षष्ठी 3]97 प्रभात वि.सं. २०८२ शनिवार ०७ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३०४ से आगे) I[ dI6T ఖo 5111 6fushkatno तिन्ह देखे धरें कपट कपि देह। सकल चरित सराहहिं सरनागत पर नेह।। हृदयँ प्रभु गुन भावार्थः कपट से वानर का शरीर धारण कर में प्रभु उन्होंने सब लीलाएँ देखीं। वे अपने हृदय के गुणों की और शरणागत पर उनके स्नेह की सराहना करने लगे। क्रमशः 7٥٥ - ShareChat
#शुभ शुक्रवार #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं #🌞 Good Morning🌞 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🌞सुप्रभात सन्देश
शुभ शुक्रवार - ظ ج 39 फाल्गुन कृष्ण पक्ष पंचमी वि.सं. २०८२ शुभ प्रभात शुक्रवार ०६ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३०३ से आगे) ।। दोहा सं॰ ५० ।। [I H[us :o 04 [[ (uuనuui प्रथम प्रनाम कीन्ह सिरु नाई। बैठे पुनि तट दर्भ डसाई।I जबहिं बिभीषन प्रभु पहिं आए। 6  पाछें रावन दूत पठाए।। भावार्थः उन्होंने पहले सिर नवाकर प्रणाम किया। फिर किनारे पर कुश बिछाकर बैठ गए। इधर ज्यों ही विभीषणजी प्रभु के पास आए थे, त्यों ही रावण ने उनके पीछे दूत भेजे थे। क्रमशः HH ظ ج 39 फाल्गुन कृष्ण पक्ष पंचमी वि.सं. २०८२ शुभ प्रभात शुक्रवार ०६ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३०३ से आगे) ।। दोहा सं॰ ५० ।। [I H[us :o 04 [[ (uuనuui प्रथम प्रनाम कीन्ह सिरु नाई। बैठे पुनि तट दर्भ डसाई।I जबहिं बिभीषन प्रभु पहिं आए। 6  पाछें रावन दूत पठाए।। भावार्थः उन्होंने पहले सिर नवाकर प्रणाम किया। फिर किनारे पर कुश बिछाकर बैठ गए। इधर ज्यों ही विभीषणजी प्रभु के पास आए थे, त्यों ही रावण ने उनके पीछे दूत भेजे थे। क्रमशः HH - ShareChat
#शुभ गुरुवार #🌞 Good Morning🌞 #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं #🕉️सनातन धर्म🚩 #🌞सुप्रभात सन्देश
शुभ गुरुवार - ظ 47 39 फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्थी शुभ Idv 2082 प्रभात गुरुवार ०५ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३०२ से आगे) ।। दोहा सं॰ ५० ।। [I H[us :o 03 [I (uuనuui सुनत बिहसि बोले रघुबीरा। ऐसेहिं करब धरहु मन धीराII अस कहि प्रभु अनुजहि समुझाई। ر सिंधु समीप गए रघुराई ।। भावार्थः ्यह सुनकर श्री रघुवीर हँसकर बोले- ऐसे ही करेंगे , मन में धीरज रखो। ऐसा कहकर छोटे भाई को समझाकर प्रभु श्री रघुनाथजी समुद्र के समीप गए। क्रमशः ظ 47 39 फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्थी शुभ Idv 2082 प्रभात गुरुवार ०५ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३०२ से आगे) ।। दोहा सं॰ ५० ।। [I H[us :o 03 [I (uuనuui सुनत बिहसि बोले रघुबीरा। ऐसेहिं करब धरहु मन धीराII अस कहि प्रभु अनुजहि समुझाई। ر सिंधु समीप गए रघुराई ।। भावार्थः ्यह सुनकर श्री रघुवीर हँसकर बोले- ऐसे ही करेंगे , मन में धीरज रखो। ऐसा कहकर छोटे भाई को समझाकर प्रभु श्री रघुनाथजी समुद्र के समीप गए। क्रमशः - ShareChat
#शुभ बुधवार #श्री गणेश #🌞 Good Morning🌞 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं
शुभ बुधवार - ظ g్a 35 নূনীয়া फाल्गुन कृष्ण पक्ष शुभ वि.सं. २०८२ प्रभात 2026 फरवरी gaR 04| श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३०१ से आगे) ।। दोहा सं॰ ५० ।। [[ Hೆu1s <o 02 [[ 6fushkatno नाथ दैव कर कवन भरोसा। सोषिअ सिंधु करिअ मन रोसा।। F कादर मन कहुँ एक अधारा। ^ दैव दैव आलसी पुकारा।l भावार्थः (लक्ष्मणजी ने कहा ) हे नाथ! दैव का कौन भरोसा! मन में क्रोध कीजिए (ले आइए) और समुद्र को सुखा डालिए। यह दैव तो कायर के मन का एक आधार (तसल्ली देने का उपाय) है। आलसी लोग ही दैव ्दैव पुकारा करते हैं। क्रमशः 1٥٥ ظ g్a 35 নূনীয়া फाल्गुन कृष्ण पक्ष शुभ वि.सं. २०८२ प्रभात 2026 फरवरी gaR 04| श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३०१ से आगे) ।। दोहा सं॰ ५० ।। [[ Hೆu1s <o 02 [[ 6fushkatno नाथ दैव कर कवन भरोसा। सोषिअ सिंधु करिअ मन रोसा।। F कादर मन कहुँ एक अधारा। ^ दैव दैव आलसी पुकारा।l भावार्थः (लक्ष्मणजी ने कहा ) हे नाथ! दैव का कौन भरोसा! मन में क्रोध कीजिए (ले आइए) और समुद्र को सुखा डालिए। यह दैव तो कायर के मन का एक आधार (तसल्ली देने का उपाय) है। आलसी लोग ही दैव ्दैव पुकारा करते हैं। क्रमशः 1٥٥ - ShareChat
#शुभ मंगलवार #जय बजरंगबली #🌞 Good Morning🌞 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं
शुभ मंगलवार - Yi| = फाल्गुन कृष्ण पक्ष द्वितीया शुभ प्रभात वि.सं. २०८२ मंगलवार ०३ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३०० से आगे) दोहा सं॰ ५० ।l || [[ Hೆu1s <o 01 [[ 6fushkatno सखा कही तुम्ह नीति उपाई। करिअ दैव जौं होइ सहाई। मंत्र न यह लछिमन मन भावा। राम बचन सुनि अति दुख पावा।l ಘ  भावार्थः (श्री रामजी ने कहा- ) हे सखा! तुमने अच्छा उपाय बताया। यही किया जाए॰ यदि दैव सहायक हों। यह सलाह लक्ष्मणजी के मन को अच्छी नहीं लगी। श्री रामजी के वचन सुनकर तो उन्होंने बहुत ही दुःख पाया। क्रमशः Yi| = फाल्गुन कृष्ण पक्ष द्वितीया शुभ प्रभात वि.सं. २०८२ मंगलवार ०३ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३०० से आगे) दोहा सं॰ ५० ।l || [[ Hೆu1s <o 01 [[ 6fushkatno सखा कही तुम्ह नीति उपाई। करिअ दैव जौं होइ सहाई। मंत्र न यह लछिमन मन भावा। राम बचन सुनि अति दुख पावा।l ಘ  भावार्थः (श्री रामजी ने कहा- ) हे सखा! तुमने अच्छा उपाय बताया। यही किया जाए॰ यदि दैव सहायक हों। यह सलाह लक्ष्मणजी के मन को अच्छी नहीं लगी। श्री रामजी के वचन सुनकर तो उन्होंने बहुत ही दुःख पाया। क्रमशः - ShareChat
#जय महाकाल #शुभ सोमवार #🌞 Good Morning🌞 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं
जय महाकाल - ظ फाल्गुन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा 3]97 प्रभात বিম 2082 ^90 सोमवार ०२ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ २९९ से आगे) ೩ೆ೯ :o 50 [[ || 6fushkaeno $ प्रभु तुम्हार कुलगुर जलधि कहिहि उपाय बिचारि।। बिनु प्रयास सागर तरिहि सकल भालु कपि धारि।। भावार्थः ्हे प्रभु! समुद्र आपके कुल में बड़े (पूर्वज) हैं, वे विचारकर उपाय बतला देंगे। तब रीछ और वानरों की सारी सेना बिना ही परिश्रम के समुद्र के पार उतर जाएगी| क्रमशः ٥٥ ٥ ظ फाल्गुन कृष्ण पक्ष प्रतिपदा 3]97 प्रभात বিম 2082 ^90 सोमवार ०२ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ २९९ से आगे) ೩ೆ೯ :o 50 [[ || 6fushkaeno $ प्रभु तुम्हार कुलगुर जलधि कहिहि उपाय बिचारि।। बिनु प्रयास सागर तरिहि सकल भालु कपि धारि।। भावार्थः ्हे प्रभु! समुद्र आपके कुल में बड़े (पूर्वज) हैं, वे विचारकर उपाय बतला देंगे। तब रीछ और वानरों की सारी सेना बिना ही परिश्रम के समुद्र के पार उतर जाएगी| क्रमशः ٥٥ ٥ - ShareChat
#शुभ रविवार #🙏माघ पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं #🕉️सनातन धर्म🚩 #🌞 Good Morning🌞
शुभ रविवार - ظ माघ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा 3]97 प्रभात वि.सं. २०८२ रविवार ०१ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ २९८ से आगे) ।। दोहा सं॰ ४९ ।। [[ శuIకే ఖo 01 [[ 6fushkaeno ! कह लंकेस सुनहु रघुनायक। कोटि सिंधु सोषक तव सायक।। ನ जद्यपि तदपि नीति असि गाई। <  बिनय करिअ सागर सन जाई।I भावार्थः विभीषणजी ने कहा- हे रघुनाथजी! सुनिए यद्यपि आपका एक बाण ही करोड़़ों समुद्रों को सोखने वाला है (सोख सकता है), तथापि नीति ऐसी कही गई है (उचित यह होगा) कि (पहले) जाकर समुद्र से प्रार्थना की जाए। क्रमशः ٥٥٥ ظ माघ शुक्ल पक्ष पूर्णिमा 3]97 प्रभात वि.सं. २०८२ रविवार ०१ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ २९८ से आगे) ।। दोहा सं॰ ४९ ।। [[ శuIకే ఖo 01 [[ 6fushkaeno ! कह लंकेस सुनहु रघुनायक। कोटि सिंधु सोषक तव सायक।। ನ जद्यपि तदपि नीति असि गाई। <  बिनय करिअ सागर सन जाई।I भावार्थः विभीषणजी ने कहा- हे रघुनाथजी! सुनिए यद्यपि आपका एक बाण ही करोड़़ों समुद्रों को सोखने वाला है (सोख सकता है), तथापि नीति ऐसी कही गई है (उचित यह होगा) कि (पहले) जाकर समुद्र से प्रार्थना की जाए। क्रमशः ٥٥٥ - ShareChat