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#शुभ बुधवार #🌞सुप्रभात सन्देश #🌞 Good Morning🌞 #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं #🕉️सनातन धर्म🚩
शुभ बुधवार - Yi | করু 35 फाल्गुन शुक्ल पक्ष नवमी বিম 2082 शुभ प्रभात बुधवार २५ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३२२ से आगे) ।। दोहा सं॰ ५४ ।l चौपाई सं॰ 3 ०l 11 6fushkatno परम क्रोध मीजहिं सब हाथा। आयसु पै न देहिं रघुनाथा।। ನ सोषहिं सिंधु सहित झष ब्याला। a पूरहिं न त भरि कुधर बिसाला।l से हाथ भावार्थः सब के सब अत्यंत क्रोध मीजते हैं। पर श्री रघुनाथजी उन्हें आज्ञा नहीं देते। हम मछलियों और साँपों सहित समुद्र को सोख लेेंगे। नहीं तो बड़े-बड़े पर्वतों से उसे भरकर पूर (पाट) देंगे। क्रमशः Yi | করু 35 फाल्गुन शुक्ल पक्ष नवमी বিম 2082 शुभ प्रभात बुधवार २५ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३२२ से आगे) ।। दोहा सं॰ ५४ ।l चौपाई सं॰ 3 ०l 11 6fushkatno परम क्रोध मीजहिं सब हाथा। आयसु पै न देहिं रघुनाथा।। ನ सोषहिं सिंधु सहित झष ब्याला। a पूरहिं न त भरि कुधर बिसाला।l से हाथ भावार्थः सब के सब अत्यंत क्रोध मीजते हैं। पर श्री रघुनाथजी उन्हें आज्ञा नहीं देते। हम मछलियों और साँपों सहित समुद्र को सोख लेेंगे। नहीं तो बड़े-बड़े पर्वतों से उसे भरकर पूर (पाट) देंगे। क्रमशः - ShareChat
#शुभ मंगलवार #🌞 Good Morning🌞 #🌞सुप्रभात सन्देश #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं #🕉️सनातन धर्म🚩
शुभ मंगलवार - f >स g్a फाल्गुन शुक्ल पक्ष सप्तमी शुभ प्रभात वि.सं. २०८२ मंगलवार २४ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३२२ से आगे) ।। दोहा सं॰ ५४ ।l ಖu1s zo 2 [[ 11 (uuనuui मैं सुना श्रवन दसकंधर। अस पदुम अठारह जूथप बंदर।। नाथ कटक महँ सो कपि नाहीं। ^ जीतै रन माहींIl তী ন तुम्हहि भावार्थः ्हे दशग्रीव! मैंने कानों से ऐसा सुना है कि अठारह पद्म तो अकेले वानरों के सेनापति हैं। हे उस सेना में ऐसा कोई वानर नहीं है, जो নাথ! आपको रण में न जीत सके। क्रमशः ٥٥٥ f >स g్a फाल्गुन शुक्ल पक्ष सप्तमी शुभ प्रभात वि.सं. २०८२ मंगलवार २४ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३२२ से आगे) ।। दोहा सं॰ ५४ ।l ಖu1s zo 2 [[ 11 (uuనuui मैं सुना श्रवन दसकंधर। अस पदुम अठारह जूथप बंदर।। नाथ कटक महँ सो कपि नाहीं। ^ जीतै रन माहींIl তী ন तुम्हहि भावार्थः ्हे दशग्रीव! मैंने कानों से ऐसा सुना है कि अठारह पद्म तो अकेले वानरों के सेनापति हैं। हे उस सेना में ऐसा कोई वानर नहीं है, जो নাথ! आपको रण में न जीत सके। क्रमशः ٥٥٥ - ShareChat
#शुभ सोमवार #🌞 Good Morning🌞 #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं #🌞सुप्रभात सन्देश #🕉️सनातन धर्म🚩
शुभ सोमवार - Yi | g్a ،٢٤٢ फाल्गुन शुक्ल पक्ष षष्ठी शुभ प्रभात বিম 2082 सोमवार २३ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३२० से आगे) ।। दोहा सं॰ ५४ ।। l] चौपाई सं॰ 1 ll 6fushkatno ए कपि सुग्रीव মন समाना। इन्ह सम कोटिन्ह गनइ को नाना।l राम कृपाँ अतुलित बल तिन्हहीं। 6  तृन समान त्रैलोकहि गनहीं Il भावार्थः ्ये सब वानर बल में सुग्रीव के समान हैं और इनके जैसे (एकन्दो नहीं) करोड़ों हैं, उन बहुत सो को गिन ही कौन सकता है। श्री रामजी की कृपा को तृण से उनमें अतुलनीय बल है। वे तीनों लोकों के समान (तुच्छ) समझते हैं। क्रमशः ٥٥٥ Yi | g్a ،٢٤٢ फाल्गुन शुक्ल पक्ष षष्ठी शुभ प्रभात বিম 2082 सोमवार २३ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३२० से आगे) ।। दोहा सं॰ ५४ ।। l] चौपाई सं॰ 1 ll 6fushkatno ए कपि सुग्रीव মন समाना। इन्ह सम कोटिन्ह गनइ को नाना।l राम कृपाँ अतुलित बल तिन्हहीं। 6  तृन समान त्रैलोकहि गनहीं Il भावार्थः ्ये सब वानर बल में सुग्रीव के समान हैं और इनके जैसे (एकन्दो नहीं) करोड़ों हैं, उन बहुत सो को गिन ही कौन सकता है। श्री रामजी की कृपा को तृण से उनमें अतुलनीय बल है। वे तीनों लोकों के समान (तुच्छ) समझते हैं। क्रमशः ٥٥٥ - ShareChat
#शुभ रविवार #🌞 Good Morning🌞 #🌞सुप्रभात सन्देश #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं #🕉️सनातन धर्म🚩
शुभ रविवार - BF , ج 35 ،٢٤٢ फाल्गुन शुक्ल पक्ष पंचमी शुभ प्रभात বিম 2082 रविवार २२ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३१९ से आगे) [I ಫ೯ 7o 54 [I 7 fDuahkanma द्विबिद मयंद नील नल अंगद गद बिकटासि। दधिमुख केहरि निसठ सठ जामवंत बलरासिII नील, भावार्थः द्विविद, मयंद, नल गद, विकटास्य, दधिमुख अंगद, केसरी, निशठ, शठ और जाम्बवान् ये মঞ্ী নল ব্ী যথি ৯1 क्रमशः BF , ج 35 ،٢٤٢ फाल्गुन शुक्ल पक्ष पंचमी शुभ प्रभात বিম 2082 रविवार २२ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३१९ से आगे) [I ಫ೯ 7o 54 [I 7 fDuahkanma द्विबिद मयंद नील नल अंगद गद बिकटासि। दधिमुख केहरि निसठ सठ जामवंत बलरासिII नील, भावार्थः द्विविद, मयंद, नल गद, विकटास्य, दधिमुख अंगद, केसरी, निशठ, शठ और जाम्बवान् ये মঞ্ী নল ব্ী যথি ৯1 क्रमशः - ShareChat
#शुभ शनिवार #🙏शुभ शनिवार 🌹 #🌞 Good Morning🌞 #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं #🌞सुप्रभात सन्देश
शुभ शनिवार - ذ ٢ 4 चतुर्थी फाल्गुन शुक्ल पक्ष 3]97 प्रभात वि.सं. २०८२ शनिवार २१ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३१८ से आगे) ।। दोहा सं॰ ५३ ।। [[ H[us <o 04 [[ 6fushkatno जेहिं पुर दहेउ हतेउ सुत तोरा। कपिन्ह महँ तेहि बलु थोरा।I सकल अमित नाम भट कठिन कराला। 6 अमित नाग बल बिपुल बिसाला।l आपके पुत्र भावार्थः जिसने नगर को जलाया और अक्षय कुमार को मारा, उसका बल तो सब वानरों में থ্রীভা ' है। असंख्य नामों वाले बड़े ही कठोर और भयंकर योद्धा हैं। उनमें असंख्य हाथियों का बल है और वे बड़े ही विशाल हैं। क्रमशः 4 ذ ٢ 4 चतुर्थी फाल्गुन शुक्ल पक्ष 3]97 प्रभात वि.सं. २०८२ शनिवार २१ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३१८ से आगे) ।। दोहा सं॰ ५३ ।। [[ H[us <o 04 [[ 6fushkatno जेहिं पुर दहेउ हतेउ सुत तोरा। कपिन्ह महँ तेहि बलु थोरा।I सकल अमित नाम भट कठिन कराला। 6 अमित नाग बल बिपुल बिसाला।l आपके पुत्र भावार्थः जिसने नगर को जलाया और अक्षय कुमार को मारा, उसका बल तो सब वानरों में থ্রীভা ' है। असंख्य नामों वाले बड़े ही कठोर और भयंकर योद्धा हैं। उनमें असंख्य हाथियों का बल है और वे बड़े ही विशाल हैं। क्रमशः 4 - ShareChat
#शुभ शुक्रवार #🌞 Good Morning🌞 #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं #🕉️सनातन धर्म🚩 #🌞सुप्रभात सन्देश
शुभ शुक्रवार - ক  g్a নূনীয়া फाल्गुन शुक्ल पक्ष বিম 2082 शुभ प्रभात शुक्रवार २० फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३२७ से आगे) ।। दोहा सं॰ ५३ ।। [[ శTqIకే so 03 [[ 6fushkatno पूँछिहु नाथ राम कटकाई। बदन कोटि सत बरनि न जाई।। = नाना बरन भालु कपि धारी।   बिकटानन बिसाल भयकारीIl भावार्थः ्हे नाथ! आपने श्री रामजी की सेना पूछी, सो वह तो सौ करोड़ मुखों से भी वर्णन नहीं की जा सकती। अनेकों रंगों के भालु और वानरों की सेना है, जो भयंकर मुख वाले, विशाल शरीर वाले और भयानक हैं। क्रमशः ক  g్a নূনীয়া फाल्गुन शुक्ल पक्ष বিম 2082 शुभ प्रभात शुक्रवार २० फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३२७ से आगे) ।। दोहा सं॰ ५३ ।। [[ శTqIకే so 03 [[ 6fushkatno पूँछिहु नाथ राम कटकाई। बदन कोटि सत बरनि न जाई।। = नाना बरन भालु कपि धारी।   बिकटानन बिसाल भयकारीIl भावार्थः ्हे नाथ! आपने श्री रामजी की सेना पूछी, सो वह तो सौ करोड़ मुखों से भी वर्णन नहीं की जा सकती। अनेकों रंगों के भालु और वानरों की सेना है, जो भयंकर मुख वाले, विशाल शरीर वाले और भयानक हैं। क्रमशः - ShareChat
#शुभ गुरुवार #🌞सुप्रभात सन्देश #🌞 Good Morning🌞 #🌅 सूर्योदय शुभकामनाएं #🕉️सनातन धर्म🚩
शुभ गुरुवार - ظ g్a 30 फाल्गुन शुक्ल पक्ष द्वितीया शुभ Idv 2082 प्रभात गुरुवार १९ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३१६ से आगे) ।। दोहा सं॰ ५३ ।। चौपाई सं॰ ०२ $l [| 6fushkatno रावन दूत हमहि सुनि काना। कपिन्ह बाँधि दीन्हें दुख नाना।I = श्रवन नासिका काटैं लागे। 1@ दीन्हें हम त्यागे।l राम सपथ چ ٤d भावार्थः ्हम रावण हैं, यह कानों से सुनकर वानरों ने हमें बाँधकर बहुत कष्ट दिए, यहाँ तक कि वे हमारे नाक॰्कान काटने लगे। श्री रामजी की शपथ दिलाने पर कहीं उन्होंने हमको छोड़ा। क्रमशः பu ظ g్a 30 फाल्गुन शुक्ल पक्ष द्वितीया शुभ Idv 2082 प्रभात गुरुवार १९ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३१६ से आगे) ।। दोहा सं॰ ५३ ।। चौपाई सं॰ ०२ $l [| 6fushkatno रावन दूत हमहि सुनि काना। कपिन्ह बाँधि दीन्हें दुख नाना।I = श्रवन नासिका काटैं लागे। 1@ दीन्हें हम त्यागे।l राम सपथ چ ٤d भावार्थः ्हम रावण हैं, यह कानों से सुनकर वानरों ने हमें बाँधकर बहुत कष्ट दिए, यहाँ तक कि वे हमारे नाक॰्कान काटने लगे। श्री रामजी की शपथ दिलाने पर कहीं उन्होंने हमको छोड़ा। क्रमशः பu - ShareChat
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शुभ गुरुवार - ظ g్a 30 फाल्गुन शुक्ल पक्ष द्वितीया शुभ Idv 2082 प्रभात गुरुवार १९ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३१६ से आगे) ।। दोहा सं॰ ५३ ।। चौपाई सं॰ ०२ $l [| 6fushkatno रावन दूत हमहि सुनि काना। कपिन्ह बाँधि दीन्हें दुख नाना।I = श्रवन नासिका काटैं लागे। 1@ दीन्हें हम त्यागे।l राम सपथ چ ٤d भावार्थः ्हम रावण हैं, यह कानों से सुनकर वानरों ने हमें बाँधकर बहुत कष्ट दिए, यहाँ तक कि वे हमारे नाक॰्कान काटने लगे। श्री रामजी की शपथ दिलाने पर कहीं उन्होंने हमको छोड़ा। क्रमशः பu ظ g్a 30 फाल्गुन शुक्ल पक्ष द्वितीया शुभ Idv 2082 प्रभात गुरुवार १९ फरवरी २०२६ श्री रामचरितमानस पञ्चम सोपान "सुंदरकाण्ड" (गतांक सं॰ ३१६ से आगे) ।। दोहा सं॰ ५३ ।। चौपाई सं॰ ०२ $l [| 6fushkatno रावन दूत हमहि सुनि काना। कपिन्ह बाँधि दीन्हें दुख नाना।I = श्रवन नासिका काटैं लागे। 1@ दीन्हें हम त्यागे।l राम सपथ چ ٤d भावार्थः ्हम रावण हैं, यह कानों से सुनकर वानरों ने हमें बाँधकर बहुत कष्ट दिए, यहाँ तक कि वे हमारे नाक॰्कान काटने लगे। श्री रामजी की शपथ दिलाने पर कहीं उन्होंने हमको छोड़ा। क्रमशः பu - ShareChat
#👏भगवान विष्णु की अद्भुत लीला😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🕉️सनातन धर्म🚩 #🙏गीता ज्ञान🛕
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