mohd farhan
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#📚कविता-कहानी संग्रह #✍️ साहित्य एवं शायरी #📓 हिंदी साहित्य
📚कविता-कहानी संग्रह - "कितनी प्यारी लाइन है " आबाद चाहे शहर रखिए, मगर गाँव में भी घर रखिए। पुरखोंकीवो मिट्टी प्यारी, सदा उसकी भी ख़बर रखिए। "कितनी प्यारी लाइन है " आबाद चाहे शहर रखिए, मगर गाँव में भी घर रखिए। पुरखोंकीवो मिट्टी प्यारी, सदा उसकी भी ख़बर रखिए। - ShareChat
#📖 कविता और कोट्स✒️ #🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️ #👍स्पेशल शायरी🖋 #💞Heart touching शायरी✍️ #😒दर्द भरी शायरी🌸
📖 कविता और कोट्स✒️ - दाग़ देहलवी ले चला जान मेरी रूठ के जाना तेरा ऐसे आने से तो बेहतर था ना आना तेरा नसीरुद्दीन नसीर उन के अन्दाज़े करम उन पे वो आना दिल का हाय वो वक़्त वो बाते वो ज़माना दिल का दाग़ देहलवी ले चला जान मेरी रूठ के जाना तेरा ऐसे आने से तो बेहतर था ना आना तेरा नसीरुद्दीन नसीर उन के अन्दाज़े करम उन पे वो आना दिल का हाय वो वक़्त वो बाते वो ज़माना दिल का - ShareChat
#💞Heart touching शायरी✍️ #👍स्पेशल शायरी🖋 #🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️ #📖 कविता और कोट्स✒️ #✨उर्दू शायरी
💞Heart touching शायरी✍️ - पीरनसीरुद्दीननसीर उन की महफिल में नसीर उन के तबस्सुम ব্ধী রূমম देखते रह गये हम हाथ से जाना दिल का ಪೂಹಹಷಾ मुद्दत के ये ऐ दाग़ समझ मे आया @Tడ वही दाना है कहा जिस ने ना माना दिल का पीरनसीरुद्दीननसीर उन की महफिल में नसीर उन के तबस्सुम ব্ধী রূমম देखते रह गये हम हाथ से जाना दिल का ಪೂಹಹಷಾ मुद्दत के ये ऐ दाग़ समझ मे आया @Tడ वही दाना है कहा जिस ने ना माना दिल का - ShareChat
#बेहतरीन उर्दू शायरी✍️ #✨उर्दू शायरी #🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️
बेहतरीन उर्दू शायरी✍️ - अल्लामा इकबाल सुना था फ़रिश्ते जान लेते हैं खैर छोड़ो अब इंसान जान लेते हैं ೮೭೮೦೭;ಡt೬ ہےتیل ناج ناسنا با وڑوھچ मैं इस शहर ए॰मुनाफ़िक़ से तंग आ गया ছুঁ आओ किसी गाँव में कच्चा मकान लेते : ایگآ گنت ےقفانم رہش سا ںيہ وہ ہےتیی ناکم اچک ںیب لّؤاگ یسکوآ हेते नाशम्तं हैंने ख़ँतेाहैं बख़्शिशें जब फिर लोग क्यों इतना ادخ ےا ےی ھتاہ ےریت بج ںیششخب ںویک گول ہ ےتیی ناحتما انتا अल्लामा इकबाल सुना था फ़रिश्ते जान लेते हैं खैर छोड़ो अब इंसान जान लेते हैं ೮೭೮೦೭;ಡt೬ ہےتیل ناج ناسنا با وڑوھچ मैं इस शहर ए॰मुनाफ़िक़ से तंग आ गया ছুঁ आओ किसी गाँव में कच्चा मकान लेते : ایگآ گنت ےقفانم رہش سا ںيہ وہ ہےتیی ناکم اچک ںیب لّؤاگ یسکوآ हेते नाशम्तं हैंने ख़ँतेाहैं बख़्शिशें जब फिर लोग क्यों इतना ادخ ےا ےی ھتاہ ےریت بج ںیششخب ںویک گول ہ ےتیی ناحتما انتا - ShareChat
#✨उर्दू शायरी #बेहतरीन उर्दू शायरी✍️ #बेहतरीन उर्दू शायरी✍️
✨उर्दू शायरी - अल्लामा इकबाल ज़माने की जहालत का आलम तो देख इक़बाल , क़ीमती चादरें बेजान क़ब्रों पे, और ज़िंदा इज़्ज़तें बे-हिजाब फिरती हैं। لابقا هکیدوت ملاعاک تلاہج یےنسابز ےپ ںوربق ناج ےب ںیرداچ یتسمیق ہ یترھپ باجح ےب ںیتزع ہدنز روا अल्लामा इकबाल ज़माने की जहालत का आलम तो देख इक़बाल , क़ीमती चादरें बेजान क़ब्रों पे, और ज़िंदा इज़्ज़तें बे-हिजाब फिरती हैं। لابقا هکیدوت ملاعاک تلاہج یےنسابز ےپ ںوربق ناج ےب ںیرداچ یتسمیق ہ یترھپ باجح ےب ںیتزع ہدنز روا - ShareChat
#💞Heart touching शायरी✍️ #बेहतरीन उर्दू शायरी✍️ #🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️ #✨उर्दू शायरी
💞Heart touching शायरी✍️ - अल्लामा इकबाल शौक ही नहीं रहा खुद को साबित करें अब तो आपने जो समझ लिया वही हैं हम ںیرک تباثوک دوخ اہر ںیہن یہا قوش ںیہ یہو ایل ھبجحمسوج ےن پآوت با মিলঠী ज़िंदगी की भीड़ में 33 हज़ारों जाओ हमसे बेहतर मिले तो किस्मत पर नाज़ करना ںیڑیھب یک یگدنز ںیہمت _ںیلہ ںورازہ انرک زانرپ تمسقوت ےلسرتہب ےمہؤاج अल्लामा इकबाल शौक ही नहीं रहा खुद को साबित करें अब तो आपने जो समझ लिया वही हैं हम ںیرک تباثوک دوخ اہر ںیہن یہا قوش ںیہ یہو ایل ھبجحمسوج ےن پآوت با মিলঠী ज़िंदगी की भीड़ में 33 हज़ारों जाओ हमसे बेहतर मिले तो किस्मत पर नाज़ करना ںیڑیھب یک یگدنز ںیہمت _ںیلہ ںورازہ انرک زانرپ تمسقوت ےلسرتہب ےمہؤاج - ShareChat
#💞Heart touching शायरी✍️ #🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️ #rahat indori shayari
💞Heart touching शायरी✍️ - सहृन ईदौटी कभी दिमाग़ कभी दिल कभी नज़र में रहो ये सब तुम्हारे ही घर हैं किसी भी घर में रहो غابد یهل وہر یرظن یهجب لد یهب وہر ںیرھ یهب یس یرھ یہ ےراہمت بس जला न लो कहीं हमदर्दियों में अपना वजूद गली में आग लगी हो तो अपने घर में रहो ) ;|, دوجو انپا ںیب لویدردمہ ںیہکو ;೮ Tc3  وہر ںیرھ ےنیا तुम्हें पता ये चले घर की राहतें क्या हैं हमारी तरह अगर चार दिन सफ़र में रहो ہایک ںیتحار یکرھ ےلچ ەیەتپ ںیہمت Tia C/e CA */ ور है अब ये हाल कि दर दर भटकते 8 ग़मों से मैं ने कहा था कि मेरे घर में रहो یہ ےتسرھپ ےتکٹھب ردردەک لاحہی با ےہس ےریم ەکاھت اہک ےنںیب ے ںومغ YzU किसी को ज़ख़्म दिए हैं किसी को फूल दिए बुरी हो चाहे भली हो मगर ख़बर में रहो يد لوهپوک یسل ہ ید مخزوک یسک ںیربخ رگنوہ یلھب ےہاچوہ یرب सहृन ईदौटी कभी दिमाग़ कभी दिल कभी नज़र में रहो ये सब तुम्हारे ही घर हैं किसी भी घर में रहो غابد یهل وہر یرظن یهجب لد یهب وہر ںیرھ یهب یس یرھ یہ ےراہمت بس जला न लो कहीं हमदर्दियों में अपना वजूद गली में आग लगी हो तो अपने घर में रहो ) ;|, دوجو انپا ںیب لویدردمہ ںیہکو ;೮ Tc3  وہر ںیرھ ےنیا तुम्हें पता ये चले घर की राहतें क्या हैं हमारी तरह अगर चार दिन सफ़र में रहो ہایک ںیتحار یکرھ ےلچ ەیەتپ ںیہمت Tia C/e CA */ ور है अब ये हाल कि दर दर भटकते 8 ग़मों से मैं ने कहा था कि मेरे घर में रहो یہ ےتسرھپ ےتکٹھب ردردەک لاحہی با ےہس ےریم ەکاھت اہک ےنںیب ے ںومغ YzU किसी को ज़ख़्म दिए हैं किसी को फूल दिए बुरी हो चाहे भली हो मगर ख़बर में रहो يد لوهپوک یسل ہ ید مخزوک یسک ںیربخ رگنوہ یلھب ےہاچوہ یرب - ShareChat
#बेहतरीन उर्दू शायरी✍️ #🖋ग़ालिब की शायरी #🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️ #👍स्पेशल शायरी🖋 #😒दर्द भरी शायरी🌸
बेहतरीन उर्दू शायरी✍️ - मिर्ज़ा ग़ालिब बे वजाह नही रोता कोई इश्क़ मे ग़ालिब जिसे खुद से बढ़कर चाहो वो रुलाता ज़रूर है अहमद फराज़ मेरे आसूं पोछ कर बस ये बता दो मुझे रुलाने वाले ही अक़्सर क्यों याद आते हैं अल्लामा इक़बाल दिल से रोते हैं लोग मोहब्बत की याद मे इक़बाल ज़िन्दगी जन्नत हो जाती अगर इतने आंसु इबादत मे बहा देते मिर्ज़ा ग़ालिब बे वजाह नही रोता कोई इश्क़ मे ग़ालिब जिसे खुद से बढ़कर चाहो वो रुलाता ज़रूर है अहमद फराज़ मेरे आसूं पोछ कर बस ये बता दो मुझे रुलाने वाले ही अक़्सर क्यों याद आते हैं अल्लामा इक़बाल दिल से रोते हैं लोग मोहब्बत की याद मे इक़बाल ज़िन्दगी जन्नत हो जाती अगर इतने आंसु इबादत मे बहा देते - ShareChat
#🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️ #👍स्पेशल शायरी🖋 #बेहतरीन उर्दू शायरी✍️
🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️ - থীsা अजनबी" रहने दो मुझे. 31q I मैंने हर बार "ख़ास " बनकर, ग़ैर होना महसूस किया है। থীsা अजनबी" रहने दो मुझे. 31q I मैंने हर बार "ख़ास " बनकर, ग़ैर होना महसूस किया है। - ShareChat
#💞Heart touching शायरी✍️ #बेहतरीन उर्दू शायरी✍️ #👍स्पेशल शायरी🖋 #🖋ग़ालिब की शायरी #🎙️मशहूर शायरों की शायरी✍️
💞Heart touching शायरी✍️ - जौन ऐलिया मरना तो इस जहान में कोई हादसा नही इस दौरे ना ग्वार में जीना कमाल है अहमद फरीद क्यों हम को सुनाते हो जहन्नम के अफसाने इस दौर में जिने की सज़ा कम तो नही मिर्ज़ा ग़ालिब ना जाने कौन सी शिकायतो के हम शिकार हो गए जितना दिल सा़फ रखा उतने गुनाहगार हो गए इफ्तेहार आरीफ ख़्वाब की तरह बिखर जाने को जी चाहता है ऐसी तन्हाई के मर जाने को जी चाहता है इसरार ज़ैदी यक़ीन जान के तेरा वुजूद है मुझ से ये मान ले के अगर में नही तो तु भी नही जौन ऐलिया मरना तो इस जहान में कोई हादसा नही इस दौरे ना ग्वार में जीना कमाल है अहमद फरीद क्यों हम को सुनाते हो जहन्नम के अफसाने इस दौर में जिने की सज़ा कम तो नही मिर्ज़ा ग़ालिब ना जाने कौन सी शिकायतो के हम शिकार हो गए जितना दिल सा़फ रखा उतने गुनाहगार हो गए इफ्तेहार आरीफ ख़्वाब की तरह बिखर जाने को जी चाहता है ऐसी तन्हाई के मर जाने को जी चाहता है इसरार ज़ैदी यक़ीन जान के तेरा वुजूद है मुझ से ये मान ले के अगर में नही तो तु भी नही - ShareChat