Babita Chaudhary (Poet)
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सभी मेरी मौलिक रचनाएं है.. "राही" जिंदगी की ✍️🌸
#"राही" की कविताएं #✍️ साहित्य एवं शायरी #🙏 प्रेरणादायक विचार #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख
"राही" की कविताएं - बड़े बोल ना बोल कभी तू "राही" पल में जाने क्या हो जाए पल में  मिट्टी बन जाए सोना और सोना पल में मिट्टी हो जाए। बबिता चौधरी " राही "औ बड़े बोल ना बोल कभी तू "राही" पल में जाने क्या हो जाए पल में  मिट्टी बन जाए सोना और सोना पल में मिट्टी हो जाए। बबिता चौधरी " राही "औ - ShareChat
#🙏 प्रेरणादायक विचार #👍मोटिवेशनल कोट्स✌ #✍️ साहित्य एवं शायरी #"राही" की कविताएं #❤️जीवन की सीख
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#✍️ साहित्य एवं शायरी #"राही" की कविताएं #🌸 सत्य वचन #❤️जीवन की सीख #📖Whatsapp शायरी
✍️ साहित्य एवं शायरी - आजकल.. बेटी ही पराई नहीं होती बेटे भी पराए हो जाते। Ud छोड़ कर अपना घर आंगन वे किसी दूजे देश चले जाते | घर सूना आंगन सूना কীলী নিবালী মুনী ৪্ী আানী राह तकती निगाहें मात पिता की पर फिर वे लौट कर घर नहीं आते। ये मर्ज़ी है या मजबूरी वे जाने या दिल उनका टूट जाते हैं सपने किसी के पर कुछ सपनों के पीछे भागते चले जाते | बबिता चौधरी " राही " आजकल.. बेटी ही पराई नहीं होती बेटे भी पराए हो जाते। Ud छोड़ कर अपना घर आंगन वे किसी दूजे देश चले जाते | घर सूना आंगन सूना কীলী নিবালী মুনী ৪্ী আানী राह तकती निगाहें मात पिता की पर फिर वे लौट कर घर नहीं आते। ये मर्ज़ी है या मजबूरी वे जाने या दिल उनका टूट जाते हैं सपने किसी के पर कुछ सपनों के पीछे भागते चले जाते | बबिता चौधरी " राही " - ShareChat
#"राही" की कविताएं #✍️ साहित्य एवं शायरी #🌸 सत्य वचन #📖Whatsapp शायरी #❤️जीवन की सीख
"राही" की कविताएं - आजकल बेटी ही पराई नहीं होती बेटेभी पराए हो जाते छोड़ कर अपना घरआंगन  किसी दूजे देश चले जाते | जब बबिता चौधरी " राही' आजकल बेटी ही पराई नहीं होती बेटेभी पराए हो जाते छोड़ कर अपना घरआंगन  किसी दूजे देश चले जाते | जब बबिता चौधरी " राही' - ShareChat
#"राही" की कविताएं #✍️ साहित्य एवं शायरी #❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #📖Whatsapp शायरी
"राही" की कविताएं - जीवन में क्या सही और क्या गलत.. जिंदगी हमें   खुद समझाती है। और जहां होती है মতিল কমাঠী ಷ೯ 541 ತ್ತ೯ हाथ पकड़  ले जाती है। सब लेख लिखे होते है  पहले ही... जिंदगी तोबस राह हमें दिखाती है। यहां जो होना है होता है वही जिंदगी भी [ कुछ नही   कर पाती है! यह जीवन तो है बस एक खेल "राही. जिंदगी हरपल यही तो हमें समझाती है बबिता चौधरी " राही " जीवन में क्या सही और क्या गलत.. जिंदगी हमें   खुद समझाती है। और जहां होती है মতিল কমাঠী ಷ೯ 541 ತ್ತ೯ हाथ पकड़  ले जाती है। सब लेख लिखे होते है  पहले ही... जिंदगी तोबस राह हमें दिखाती है। यहां जो होना है होता है वही जिंदगी भी [ कुछ नही   कर पाती है! यह जीवन तो है बस एक खेल "राही. जिंदगी हरपल यही तो हमें समझाती है बबिता चौधरी " राही " - ShareChat
#👩महिला दिवस की शुभकामनाएं🤩🤗 #📜महिला दिवस कोट्स✍️💭 #👩नारी शक्ति💪🙎‍♀️ #✍️ साहित्य एवं शायरी #📖Whatsapp शायरी
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#👩महिला दिवस की शुभकामनाएं🤩🤗 #👩नारी शक्ति💪🙎‍♀️ #📜महिला दिवस कोट्स✍️💭 #"राही" की कविताएं #✍️ साहित्य एवं शायरी
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#👩नारी शक्ति💪🙎‍♀️ #📜महिला दिवस कोट्स✍️💭 #"राही" की कविताएं #✍️ साहित्य एवं शायरी #🌸 सत्य वचन
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#📜महिला दिवस कोट्स✍️💭 #👩नारी शक्ति💪🙎‍♀️ #✍️ साहित्य एवं शायरी #"राही" की कविताएं #🌸 सत्य वचन
📜महिला दिवस कोट्स✍️💭 - "औरत इस जीवन में. कभी मां तो कभी बहन বননী হুঁl कभी मैं बेटी खोकर खुद की पहचान"मैं" कभी यहां बीवी बनती हूं! अक्सर मैं भूल जाती हूं वजूद को भी यहां खुद के रिश्तों की भीड़ में भी "मैं" बस यहां बेगानी बनती हूं! निभाती हूं हर जिम्मेदारी हरदम दिलों जान से यहां जीवन की हर कहानी में "मैं" "राही" एक किरदार बनती हू! ননিনা "২" "औरत इस जीवन में. कभी मां तो कभी बहन বননী হুঁl कभी मैं बेटी खोकर खुद की पहचान"मैं" कभी यहां बीवी बनती हूं! अक्सर मैं भूल जाती हूं वजूद को भी यहां खुद के रिश्तों की भीड़ में भी "मैं" बस यहां बेगानी बनती हूं! निभाती हूं हर जिम्मेदारी हरदम दिलों जान से यहां जीवन की हर कहानी में "मैं" "राही" एक किरदार बनती हू! ননিনা "২" - ShareChat
#📜महिला दिवस कोट्स✍️💭 #👩नारी शक्ति💪🙎‍♀️ #"राही" की कविताएं #✍️ साहित्य एवं शायरी #🌸 सत्य वचन
📜महिला दिवस कोट्स✍️💭 - आज की नारी नारी हूं॰ 4 आज की भारतीय इस जीवन को जीना जानती हूं ! जीवन में क्या सही क्या गलत हर चीज का मतलब जानती हूं ! आधुनिकता के रंग में रंगी हूं पर॰ अपने संस्कारों को भी मानती हूं ! शामिल हूं जिंदगी की दौड़ में #".. पर जिंदगी की कीमत जानती हूं ! माना चाहती हूं आजाद सी जिंदगी . चाहती हूं ! पर अपनों का साथ भी इस जीवन में बढ़ना है आगे मुझे पर परिवार की अहमियत जानती हूं ! आज खुद की पहचान भी जरूरी है. मैं तो राही बस इतना ही जानती हूं! 6" बबिता आज की नारी नारी हूं॰ 4 आज की भारतीय इस जीवन को जीना जानती हूं ! जीवन में क्या सही क्या गलत हर चीज का मतलब जानती हूं ! आधुनिकता के रंग में रंगी हूं पर॰ अपने संस्कारों को भी मानती हूं ! शामिल हूं जिंदगी की दौड़ में #".. पर जिंदगी की कीमत जानती हूं ! माना चाहती हूं आजाद सी जिंदगी . चाहती हूं ! पर अपनों का साथ भी इस जीवन में बढ़ना है आगे मुझे पर परिवार की अहमियत जानती हूं ! आज खुद की पहचान भी जरूरी है. मैं तो राही बस इतना ही जानती हूं! 6" बबिता - ShareChat