पत्र,13अगस्त 2026
प्रिय,तुम्हारे मोह से कभी निकल पाऊंगा या नहीं, यह नहीं पता, लेकिन इतना ज़रूर जानता हूं कि सदैव तुम्हें सहेज कर रखूंगा। मेरी बातों में मत आना, मैं झूठा हूं और बेवजह बड़ी-बड़ी बातें करता हूं। मैं जानता हूं, बड़ी-बड़ी बातें करने से पहले इंसान को एक सफल इंसान बनना पड़ता है, अपनी एक हस्ती बनानी होती है। मेरी तो अभी बुनियाद ही साफ नहीं है। मैं तो अभी उसी दौर में हूं, जहाँ हमेशा से था। मुझमें आगे बढ़ने की हिम्मत कभी नहीं आई, हमेशा अपनी कमजोरी को पकड़ कर बैठा रहा, कभी उसे पार पाने की कोशिश नहीं की।
मैं चाहता तो तुम्हें पा सकता था।
मैं चाहता तो तुमसे अपना दुःख साझा कर सकता था।पर मेरी महान बनने की जुर्रत ने मुझे तुमसे दूर कर दिया।मैं बेहद खुश हूं, ऐसा तुम्हें लगना चाहिए ताकि तुम्हारा अस्तित्व हमेशा प्रसन्नचित्त बना रहे। तुम्हारी लड़ाई बेहद गहरी और बड़ी है, मेरी लड़ाई बेहद सतही और छोटी है। मेरी लड़ाई जीवन की छोटी कमियां हैं जैसे नौकरी, पैसे, ज़िम्मेदारियां। और तुम्हारी लड़ाई सीधे अस्तित्व से है, ईश्वर से है और होने से है।मेरा इंतज़ार मत करना, मेरी जड़ों को मत देखना, मेरी कमियां मत गिनना, मेरी ओर मत देखना।मैं तुम्हें सहेजना जानता हूं,पर कभी सहेज नहीं पाऊंगा।
मैं तुम्हें अपना मानता हूं, पर कभी अपना नहीं पाऊंगा।मैं तुम्हें चाहता हूं, पर कभी चाहत दे नहीं पाऊंगा।मैं बात-बात पर रो जाता हूं, पर मैं तुम्हें रुला नहीं पाऊंगा।बहुत कुछ है जो मैं तुम्हें कह सकता हूं, पर कभी सुना नहीं पाऊंगा।मैं घुट रहा हूं, लेकिन इसी घुटन में मेरी अस्तित्व की पुकार है।
मेरी वीरानी में ही मेरी सहूलियत है और मेरा अस्तित्व हमेशा तुम्हारे आकाश से जुड़ा रहेगा।
हमारा जहां अलग हो सकता है, पर आकाश वही रहेगा।
रोहन जैन ✍🏿✍🏿
#good morning