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पधारो सा! 2 करोड़ लोगां क परिवार म थांको बहुत बहुत
#📒 मेरी डायरी ✨️.....✍️
📒 मेरी डायरी - संस्कृतिः एक नजर में कलश मुख्य जानकारी पक्ष हिंदूकुश  पर्वतमाला, चित्राल स्थान (पाकिस्तान) | स्वयं को सिकंदर महान के वंश सैनिकों का वंशज मानते हैं। प्राचीन जीववाद (Animism); धर्म গীয বুনতী ক্ষী দুতা|  प्रकृति भाषा कलाशा (Kalasha) जो एक प्राचीन दार्दिक भाषा है। चिलम जोशी (वसंत) , उचाव l6R (शरद) और चोमस (शीतकाल) संस्कृतिः एक नजर में कलश मुख्य जानकारी पक्ष हिंदूकुश  पर्वतमाला, चित्राल स्थान (पाकिस्तान) | स्वयं को सिकंदर महान के वंश सैनिकों का वंशज मानते हैं। प्राचीन जीववाद (Animism); धर्म গীয বুনতী ক্ষী দুতা|  प्रकृति भाषा कलाशा (Kalasha) जो एक प्राचीन दार्दिक भाषा है। चिलम जोशी (वसंत) , उचाव l6R (शरद) और चोमस (शीतकाल) - ShareChat
#📒 मेरी डायरी ..... ✍️
📒 मेरी डायरी - छप्पनिया अकाल (१८११-११००) के मुख्य तथ्यः नामकरणः यह विक्रमी संवत ११५६ (१८११-११०० ई. ) में पड़ा था, इसलिए इसे ' छप्पनिया काल' या 'छप्पनिया अकाल' कहा जाता है। प्रभावित क्षेत्रः राजस्थान (विशेषकर थार) , गुजरात (काठियावाड़) , मध्य प्रांत, बॉम्बे प्रेसीडेंसी और पंजाब का हिसार जिला प्रमुख रूप से प्रभावित थे। कारणः ग्रीष्मकालीन मानसून की पूर्ण विफलता, जिसके कारण भयंकर सूखा पड़ा। भयावहताः यह अकाल इतना भीषण था कि राजस्थान में लाखों लोगों की मौत भूख और प्यास से हो गई। पशुधन लगभग समाप्त हाे गया था। परिणामः इस अकाल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया था, जिससे उबरने में वर्षों लग गए। छप्पनिया अकाल (१८११-११००) के मुख्य तथ्यः नामकरणः यह विक्रमी संवत ११५६ (१८११-११०० ई. ) में पड़ा था, इसलिए इसे ' छप्पनिया काल' या 'छप्पनिया अकाल' कहा जाता है। प्रभावित क्षेत्रः राजस्थान (विशेषकर थार) , गुजरात (काठियावाड़) , मध्य प्रांत, बॉम्बे प्रेसीडेंसी और पंजाब का हिसार जिला प्रमुख रूप से प्रभावित थे। कारणः ग्रीष्मकालीन मानसून की पूर्ण विफलता, जिसके कारण भयंकर सूखा पड़ा। भयावहताः यह अकाल इतना भीषण था कि राजस्थान में लाखों लोगों की मौत भूख और प्यास से हो गई। पशुधन लगभग समाप्त हाे गया था। परिणामः इस अकाल ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया था, जिससे उबरने में वर्षों लग गए। - ShareChat
#☪ सूफी संगीत 🕌 💖💖💖🌹🌹🌹
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00:24
#🤲अल्लाह हु अक़बर 🕋🤲🤲🤲
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00:16
#☪ सूफी संगीत 🕌 ✨️✨️✨️
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00:44
#☪ सूफी संगीत 🕌 ✨️✨️✨️
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00:44
#🤲 इबादत 🕋 🤲🤲🤲🌙✨️
🤲 इबादत - २७वाँ रमज़ान का महत्व २७वीं रमज़ान को अक्सर शब-ए॰क़द्र (लैलतुल क़द्र ) माना जाता है। यह वह रात है जिसमें क़ुरआन शरीफ़ का नाज़िल होना शुरू हुआ| इस रात की इबादत का सवाब हज़ार महीनों की इबादत भी बढ़कर है। मुसलमान इस रात को नमाज़, दुआ, तिलावत और इस्तिग़फ़ार में गुज़ारते हैं। यह रात रहमत, मग़फ़िरत और निज़ात की रात कहलाती है। २७वाँ रमज़ान का महत्व २७वीं रमज़ान को अक्सर शब-ए॰क़द्र (लैलतुल क़द्र ) माना जाता है। यह वह रात है जिसमें क़ुरआन शरीफ़ का नाज़िल होना शुरू हुआ| इस रात की इबादत का सवाब हज़ार महीनों की इबादत भी बढ़कर है। मुसलमान इस रात को नमाज़, दुआ, तिलावत और इस्तिग़फ़ार में गुज़ारते हैं। यह रात रहमत, मग़फ़िरत और निज़ात की रात कहलाती है। - ShareChat
#☪ सूफी संगीत 🕌
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00:14
#😇 चाणक्य नीति 🙏🙏🙏
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00:19
#✋हस्तरेखा शास्त्र🌌 😜😜😜
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