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🔥 क्या वास्तव में हम काल के जाल में फँसे हुए हैं? 🔥 क्या आपने कभी सोचा है कि इस संसार में हर जीव दुख, बीमारी, तनाव और मृत्यु से क्यों गुजरता है? क्यों कोई भी मनुष्य अमर नहीं हो पाता? क्यों हर खुशी कुछ समय बाद दुख में बदल जाती है? 📖 संतों और शास्त्रों में बताया गया है कि यह संसार “काल” के अधीन है। इसीलिए इसे दुखों का लोक कहा गया है। संत रामपाल जी महाराज जी तत्वज्ञान द्वारा समझाते हैं कि यह संसार स्थायी सुख देने वाला स्थान नहीं है। यहाँ जन्म है तो मृत्यु भी निश्चित है। यहाँ मिलन है तो बिछड़ना भी निश्चित है। ⚠️ काल जीव को माया, मोह, लालच और भोगों में फँसाकर उसे जन्म-मरण के अंतहीन चक्र में घुमाता रहता है। मनुष्य सोचता है: धन मिलने से सुख मिलेगा बड़ा घर मिलने से शांति मिलेगी संसारिक उपलब्धियाँ जीवन सफल बना देंगी लेकिन फिर भी भीतर खालीपन बना रहता है। क्योंकि आत्मा की वास्तविक आवश्यकता परमात्मा की भक्ति है। 📚 शास्त्र बताते हैं कि: सच्ची शांति केवल सतभक्ति से प्राप्त होती है। बिना तत्वज्ञान के मनुष्य वास्तविक परमात्मा को पहचान नहीं पाता। संत रामपाल जी महाराज जी बताते हैं: ✅ पूर्ण परमात्मा कौन है ✅ मोक्ष कैसे मिलेगा ✅ जन्म-मरण से छुटकारा कैसे होगा ✅ काल के जाल से मुक्ति कैसे मिलेगी 🌿 जब मनुष्य सतभक्ति अपनाता है: मन शांत होने लगता है भय कम होने लगता है जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आते हैं आत्मा को वास्तविक सुख मिलने लगता है आज आवश्यकता है कि मनुष्य केवल अंधविश्वास नहीं, बल्कि शास्त्र आधारित तत्वज्ञान को समझे। 🙏 यह मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है। इसे केवल खाने-पीने और भोगों में न गँवाएँ। सच्चे ज्ञान को समझिए और अपने जीवन को सफल बनाइए। ✨ सतभक्ति अपनाओ ✨ काल के जाल से बचो ✨ मानव जीवन सफल बनाओ Follow SATLOKHANS on: Facebook | Instagram | YouTube | X(Twitter) | Threads #SatlokHans #SantRampalJiMaharaj #Kaal #Satbhakti #SpiritualKnowledge #🙏गीता ज्ञान🛕 #🙏गुरु महिमा😇 #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🥰मोटिवेशन वीडियो
🙏गीता ज्ञान🛕 - क्या वास्तव में हम XI कल SATLOK HANS सतलाक ऐस ক ডল ম फॅसे हुए हैं? संतों और शास्त्रों का गूढ़ रहस्य श्ीमद्ूगवदद्रीता अध्याय ११ श्लोक ३२ में गीता कहा गया है मोह, अध्याय ११ काल जीव को माया , "कालोडस्मि लोकक्षयकृत्. लालच और भोगों में फँसाकर अर्थात् मैं काल हूँ, लोकों का नाश करने वाला। उसे जन्म मरण के अंतहीन में घुमाता रहता है। चक्र दुखा का कारण क्या मनुष्य सोचता है हर जीव दुख, बीमारी , तनाव और मृत्यु से क्यों गुजरता है? कोई भी मनुष्य अमर नहीं हो पाता ? धन मिलने से सुख मिलेगा qi क्यों हर खुशी कुछ समय बाद दुख्न में बदल जाती है? নভা ঘং সিলন ম থানি সিলযী संसारिक उपलबिध्यों जीवन सफल बना देंगी क्योंकि यह संसार *काल' के अधीन है। लेकिन फिर भी भीतर खालीपन बना रहता है। यह संसार स्थायी सुख देने वाला स्थान नहीं है। क्योंकि आत्मा की वास्तविक आवश्यकता परमात्मा की भक्ति है। शास्त्र बताते हैं किः संत रामपाल जी महाराज जी बताते पूर्ण परमात्मा कौन है सच्ची शांति केवल सतभक्ति से प्राप्त होती है। मोक्ष कैसे मिलेगा बिना तत्वज्ञान के मनुष्य वास्तविक जन्म मरण से छुटकारा कैसे होगा परमात्मा को पहचान नहीं पाता | কাল ক নাল ম সুকিি কম সিলযী जब मनुष्य सतभक्ति अपनाता ' यह मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है। इसे केवल खाने पीने और भोगों में न गँवाएं। जीवन में सकारात्मक आत्मा को वास्तविक मन शांत সয় কস सच्चे ज्ञान को समझिए होने लगता है परिवर्तन आते हैं सुख मिलने लगता है होने लगता है और अपने जीवन को सफल बनाइए। सतभक्ति अपनाओ मानव जीवन सफल बनाओ काल के जाल से बचो Follow SATLOKHANS on: क्या वास्तव में हम XI कल SATLOK HANS सतलाक ऐस ক ডল ম फॅसे हुए हैं? संतों और शास्त्रों का गूढ़ रहस्य श्ीमद्ूगवदद्रीता अध्याय ११ श्लोक ३२ में गीता कहा गया है मोह, अध्याय ११ काल जीव को माया , "कालोडस्मि लोकक्षयकृत्. लालच और भोगों में फँसाकर अर्थात् मैं काल हूँ, लोकों का नाश करने वाला। उसे जन्म मरण के अंतहीन में घुमाता रहता है। चक्र दुखा का कारण क्या मनुष्य सोचता है हर जीव दुख, बीमारी , तनाव और मृत्यु से क्यों गुजरता है? कोई भी मनुष्य अमर नहीं हो पाता ? धन मिलने से सुख मिलेगा qi क्यों हर खुशी कुछ समय बाद दुख्न में बदल जाती है? নভা ঘং সিলন ম থানি সিলযী संसारिक उपलबिध्यों जीवन सफल बना देंगी क्योंकि यह संसार *काल' के अधीन है। लेकिन फिर भी भीतर खालीपन बना रहता है। यह संसार स्थायी सुख देने वाला स्थान नहीं है। क्योंकि आत्मा की वास्तविक आवश्यकता परमात्मा की भक्ति है। शास्त्र बताते हैं किः संत रामपाल जी महाराज जी बताते पूर्ण परमात्मा कौन है सच्ची शांति केवल सतभक्ति से प्राप्त होती है। मोक्ष कैसे मिलेगा बिना तत्वज्ञान के मनुष्य वास्तविक जन्म मरण से छुटकारा कैसे होगा परमात्मा को पहचान नहीं पाता | কাল ক নাল ম সুকিি কম সিলযী जब मनुष्य सतभक्ति अपनाता ' यह मानव जीवन अत्यंत दुर्लभ है। इसे केवल खाने पीने और भोगों में न गँवाएं। जीवन में सकारात्मक आत्मा को वास्तविक मन शांत সয় কস सच्चे ज्ञान को समझिए होने लगता है परिवर्तन आते हैं सुख मिलने लगता है होने लगता है और अपने जीवन को सफल बनाइए। सतभक्ति अपनाओ मानव जीवन सफल बनाओ काल के जाल से बचो Follow SATLOKHANS on: - ShareChat
🔥 काल कौन है? गीता अध्याय 11 का रहस्यमयी ज्ञान 🔥 क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान श्रीकृष्ण जी के शरीर में प्रवेश करके बोलने वाला “काल” कौन था? गीता अध्याय 11 श्लोक 32 में स्वयं कहा गया — 📖 “मैं बढ़ा हुआ काल हूँ और सबको खाने के लिए आया हूँ…” यह ज्ञान साधारण नहीं है। यह मानव जीवन, जन्म-मरण और इस संसार के वास्तविक रहस्य को उजागर करता है। आज पूरी दुनिया सुख, शांति और मोक्ष की खोज में भटक रही है, लेकिन शास्त्रों का वास्तविक ज्ञान न होने के कारण मनुष्य सत्य से दूर होता जा रहा है। ⚠️ मांसाहार, हिंसा, नशा और पाप कर्म — ये सब जीव को दुख, भय और जन्म-मरण के चक्र में फँसाए रखते हैं। 📖 पवित्र बाइबल में भी स्पष्ट संकेत मिलता है कि पूर्ण परमात्मा ने मनुष्य के भोजन के लिए बीजदार पौधे और फल दिए, न कि जीव हत्या। 🌿 सच्ची भक्ति दया सिखाती है। 🌿 सच्चा ज्ञान जीवों पर करुणा सिखाता है। 🌿 सतभक्ति ही आत्मा को शांति देती है। संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा बताए गए तत्वज्ञान से आज लाखों लोग मांसाहार, नशा, बुराइयाँ छोड़कर शांतिमय जीवन जी रहे हैं। ✨ जब मनुष्य शास्त्रों को सही तरीके से समझता है, तभी उसे पता चलता है कि मानव जीवन का वास्तविक उद्देश्य क्या है। 📚 पवित्र पुस्तक “ज्ञान गंगा” में ऐसे अनेक गूढ़ रहस्यों का प्रमाण सहित वर्णन है। यह पुस्तक बिल्कुल निःशुल्क प्राप्त करें और अपने जीवन को सही दिशा दें। 🙏 सतभक्ति अपनाइए 🙏 जीव दया कीजिए 🙏 मानव जीवन सफल बनाइए Follow SATLOKHANS on: 📘 Facebook | 📸 Instagram | ▶️ YouTube | 🧵 Threads | ❌ X(Twitter) #SatlokHans #SantRampalJiMaharaj #GitaGyan #Satbhakti #SpiritualKnowledge #🙏गुरु महिमा😇 #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #🥰मोटिवेशन वीडियो
🙏गुरु महिमा😇 - गीता अध्याय ११ श्लोक ३२ वाला ब्रह्म (काल) श्री कूष्ण जी के शरीर में प्रवेश करके कह रहा है कि मैंकाल हूँ 3i %d *1 खाने के लिए आया हूँ। यह मेरा वास्तविक रूप है, इसको तेरे अतिरिक्त न तो कौन है काल? कोई पहले देख सका तथा न कोई आगे देख सकता है अर्थात ?ಲ वेदों में वर्णित यज्ञ - जाप-् तप तथा ऊँ नाम आदि की विधि जानने के लिए अवश्य देखें से मेरे इस वास्तविक स्वरूप के दर्शन नहीं हो सकते DUan सधना।l ज्ञांगा (गीता अध्याय ११ स्लोक ४८) um F Hmrrnu: 07:30 pm(IST) निःशुल्क पायें पवित्र पुस्तक FREE [28 अपना नाम, पूरा पता भेजें ज्ञान गंगा +91 7496801823 ahm auट drnitn m ಫHdನruರn crrnrmr nrm೯ SATLOKHANS Follow on गीता अध्याय ११ श्लोक ३२ वाला ब्रह्म (काल) श्री कूष्ण जी के शरीर में प्रवेश करके कह रहा है कि मैंकाल हूँ 3i %d *1 खाने के लिए आया हूँ। यह मेरा वास्तविक रूप है, इसको तेरे अतिरिक्त न तो कौन है काल? कोई पहले देख सका तथा न कोई आगे देख सकता है अर्थात ?ಲ वेदों में वर्णित यज्ञ - जाप-् तप तथा ऊँ नाम आदि की विधि जानने के लिए अवश्य देखें से मेरे इस वास्तविक स्वरूप के दर्शन नहीं हो सकते DUan सधना।l ज्ञांगा (गीता अध्याय ११ स्लोक ४८) um F Hmrrnu: 07:30 pm(IST) निःशुल्क पायें पवित्र पुस्तक FREE [28 अपना नाम, पूरा पता भेजें ज्ञान गंगा +91 7496801823 ahm auट drnitn m ಫHdನruರn crrnrmr nrm೯ SATLOKHANS Follow on - ShareChat
क्या वास्तव में भविष्यवाणियों में बताए गए संकेत आज के समय से मेल खाते हैं? 🤔 “कलयुग में सतयुग की शुरुआत” भाग 6 में शास्त्रों, भविष्यवाणियों और तत्वज्ञान के आधार पर किया गया है एक अद्भुत खुलासा। जानिए — 🔹 श्रीकृष्ण जी से जुड़े रहस्य 🔹 16 महाकला युक्त शक्तियों का वर्णन 🔹 वर्तमान समय में चल रही आध्यात्मिक घटनाओं का गहरा सत्य 🔹 और कौन है वह तत्वदर्शी संत जो शास्त्रों के अनुसार पूर्ण ज्ञान दे रहा है? संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा बताए गए आध्यात्मिक ज्ञान को सुनकर लाखों लोगों का जीवन बदल रहा है। यदि आप भी सत्य को प्रमाण सहित समझना चाहते हैं, तो यह विशेष सत्संग अवश्य देखें। 🙏✨ 📺 देखें : “कलयुग में सतयुग की शुरुआत – भाग 6” सिर्फ़ Factful Debates YouTube Channel पर। #SantRampalJiMaharaj #FactfulDebates #SpiritualKnowledge #KalyugMeSatyug #TrueKnowledge #🙏गीता ज्ञान🛕 #❤️जीवन की सीख #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇
🙏गीता ज्ञान🛕 - भविष्य मालिका के अनुसार , श्रीकृष्ण तो केवल एक महाकला से युक्त थे। फिर सारी सृष्टि के रचयिता १६ महाकला युक्त ? जगन्ाथ महाप्रभु का वर्तमान अवतार कौन है जानने के लिए देखिए कलयुग में सतयुग की शुरुआत - 0[0[ 6 जहाँ शास्त्रों , भविष्यवाणियों और तत्वज्ञान के आधार पर किया गया है अददुत खुलासा। संत रामपाल जी महाराज देखिए अभी Factful Debates YOUTUBE CHANNEL @FactfulDebates fnictfulnebutes भविष्य मालिका के अनुसार , श्रीकृष्ण तो केवल एक महाकला से युक्त थे। फिर सारी सृष्टि के रचयिता १६ महाकला युक्त ? जगन्ाथ महाप्रभु का वर्तमान अवतार कौन है जानने के लिए देखिए कलयुग में सतयुग की शुरुआत - 0[0[ 6 जहाँ शास्त्रों , भविष्यवाणियों और तत्वज्ञान के आधार पर किया गया है अददुत खुलासा। संत रामपाल जी महाराज देखिए अभी Factful Debates YOUTUBE CHANNEL @FactfulDebates fnictfulnebutes - ShareChat
मनुष्य जीवन का असली उद्देश्य केवल धन कमाना या सुख भोगना नहीं, बल्कि परमात्मा की प्राप्ति करना है। 🙏 जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज जी मानव समाज को सत्य भक्ति, नशा मुक्त जीवन, दहेज मुक्त समाज और आपसी भाईचारे का संदेश दे रहे हैं। संत जी बताते हैं कि किसी भी धर्मग्रंथ को आँख बंद करके नहीं मानना चाहिए, बल्कि तर्क और प्रमाण के आधार पर सत्य को पहचानना चाहिए। सच्ची भक्ति ही मनुष्य जीवन को सफल बना सकती है। ✨ आइए, जाति-पाति और ऊँच-नीच के भेदभाव को मिटाकर एक ऐसे समाज का निर्माण करें जहाँ प्रेम, शांति और मानवता हो। 🌍❤️ सतभक्ति अपनाओ, जीवन सफल बनाओ। #🙏🏻आध्यात्मिकता😇 #🙏गुरु महिमा😇 #❤️जीवन की सीख #🙏गीता ज्ञान🛕 #🥰मोटिवेशन वीडियो #SatlokHans #SantRampalJiMaharaj #SatBhakti #SpiritualKnowledge #Humanity #TrueWorship
🙏🏻आध्यात्मिकता😇 - जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी TERR[3T मनुष्य जीवन का मूल उद्देश्य परमात्मा की प्राप्ति करना है। परमात्मा न तो हमारा जन्म लेता है, न ही मरता है। वह सदा से है, सदा रहेगा , वही सर्व का मालिक है। किसी भी धर्मग्रंथ को आँख मूंदकर मत मानो , तर्क और प्रमाण से परखो , जो सत्य हो उसे अपनाओ। संत रामपाल जी महाराज जाति-पाति और ऊँच ्नीच का भेदभाव उद्देश्य है - एक ऐसा समाज बनाना का को तोड़ता है, हमें एकजुट होकर समाज जहां सब सुखी हों , नशा मुक्त हों, सतभक्ति करनी चाहिए। दहेज मुक्त हों और परमात्मा की भक्ति करें। सतभक्ति अपनाओ , जीवन सफल बनाओ। जगतगुरू तत्वदर्शी संत रामपाल जी TERR[3T मनुष्य जीवन का मूल उद्देश्य परमात्मा की प्राप्ति करना है। परमात्मा न तो हमारा जन्म लेता है, न ही मरता है। वह सदा से है, सदा रहेगा , वही सर्व का मालिक है। किसी भी धर्मग्रंथ को आँख मूंदकर मत मानो , तर्क और प्रमाण से परखो , जो सत्य हो उसे अपनाओ। संत रामपाल जी महाराज जाति-पाति और ऊँच ्नीच का भेदभाव उद्देश्य है - एक ऐसा समाज बनाना का को तोड़ता है, हमें एकजुट होकर समाज जहां सब सुखी हों , नशा मुक्त हों, सतभक्ति करनी चाहिए। दहेज मुक्त हों और परमात्मा की भक्ति करें। सतभक्ति अपनाओ , जीवन सफल बनाओ। - ShareChat
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