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#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - अकड़ तो सब में होती है पार्थ झुकता बहीं है जिसे रिश्ते की फिक्र हो !! अकड़ तो सब में होती है पार्थ झुकता बहीं है जिसे रिश्ते की फिक्र हो !! - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - तुम स्वयं पर संदेह कर रहने हौ, क्षमता से डरे हुए हैं! जबकि अन्य लोग तुम्हारी तुम स्वयं पर संदेह कर रहने हौ, क्षमता से डरे हुए हैं! जबकि अन्य लोग तुम्हारी - ShareChat
#📒 मेरी डायरी
📒 मेरी डायरी - भारी पड़ रही है মানী f77.. दुनिया की तरह हम भी काश जरा चालाक होते.. ! भारी पड़ रही है মানী f77.. दुनिया की तरह हम भी काश जरा चालाक होते.. ! - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - श्री कृष्ण कहते हैं इंसान की असली पहचान, नहीं होती। पैसे या ताक़त के वक्त उसका मुसीबत बर्ताव बताता है कि॰वो कौन है। श्री कृष्ण कहते हैं इंसान की असली पहचान, नहीं होती। पैसे या ताक़त के वक्त उसका मुसीबत बर्ताव बताता है कि॰वो कौन है। - ShareChat
#📒 मेरी डायरी
📒 मेरी डायरी - जिधर की हवा है चल पड़ते हैं॰ कुछ लोग उधर होता है !! हालांकि ये काम कचरे का जिधर की हवा है चल पड़ते हैं॰ कुछ लोग उधर होता है !! हालांकि ये काम कचरे का - ShareChat
#❤️जीवन की सीख
❤️जीवन की सीख - 3[ तो हमेशा से जानती है कि सही क्या है..३ चुनौती तो मन को समझाने की होती है 3[ तो हमेशा से जानती है कि सही क्या है..३ चुनौती तो मन को समझाने की होती है - ShareChat
#📒 मेरी डायरी
📒 मेरी डायरी - कर्म किसी को माफ नहीं करता, अगर तो रोना भी पड़ेगा ७७० रुलाय कर्म किसी को माफ नहीं करता, अगर तो रोना भी पड़ेगा ७७० रुलाय - ShareChat
#❤️Love You ज़िंदगी ❤️
❤️Love You ज़िंदगी ❤️ - मुझे आज तक समझ नहीं आया... उन्होंने कभी मुझे रोका नहीं, पर मैं कभी खुलकर चल नहीं पाई. किसी चीज़ के लिए मना भी नहीं किया, पर मैं कभी खुलकर खरीद नहीं पाई...  सुनी गई, हर जगह मेरी बात पर मेरी बात कभी पूरी हो नहीं पाई॰ मेरी ज़िद भी पूरी हुई, पर वो खुशी कभी महसूस हो नहीं पाई॰ কক্ন ২ট - "जो तेरा मन करे, वो कर..." पर मैं कर क्यों नहीं पाई...? कहते रहे = "खुलकर जी..." पर मैं खुलकर जी क्यों नहीं पाई...? शायद रोक किसी ने नहीं लगाई, मैंने खुद को कभी दी ही नहीं. . पर इजाज़त मुझे आज तक समझ नहीं आया... उन्होंने कभी मुझे रोका नहीं, पर मैं कभी खुलकर चल नहीं पाई. किसी चीज़ के लिए मना भी नहीं किया, पर मैं कभी खुलकर खरीद नहीं पाई...  सुनी गई, हर जगह मेरी बात पर मेरी बात कभी पूरी हो नहीं पाई॰ मेरी ज़िद भी पूरी हुई, पर वो खुशी कभी महसूस हो नहीं पाई॰ কক্ন ২ট - "जो तेरा मन करे, वो कर..." पर मैं कर क्यों नहीं पाई...? कहते रहे = "खुलकर जी..." पर मैं खुलकर जी क्यों नहीं पाई...? शायद रोक किसी ने नहीं लगाई, मैंने खुद को कभी दी ही नहीं. . पर इजाज़त - ShareChat
#📒 मेरी डायरी
📒 मेरी डायरी - मैं थोड़ी अनजान सी हूँ॰.. कभी हालातों से हारी, तो कभी खुद की पहचान सी हूँ। में छुपा समंदर, कभी चुप्पी  तो कभी शब्दों की तूफ़ान सी हूँ। कभी पिंजरे में सिमटी ख्वाहिश, तो कभी खुला आसमान सी हूँ। लिए मजबूत दिखती, कभी सबके तो कभी अंदर से परेशान सी हूँ। में मुस्कुरा देती हूँ॰ 9٨5 থরীভা सुनसान सी हूँ। पर सच में मैं हर रोज़ खुद को & समझती पर हर रोज़ थोड़ी नई बन जाती हूँ॰. शायद इसलिए.. # 34 से ही थोड़ी अनजान सी हूँ। ge मैं थोड़ी अनजान सी हूँ॰.. कभी हालातों से हारी, तो कभी खुद की पहचान सी हूँ। में छुपा समंदर, कभी चुप्पी  तो कभी शब्दों की तूफ़ान सी हूँ। कभी पिंजरे में सिमटी ख्वाहिश, तो कभी खुला आसमान सी हूँ। लिए मजबूत दिखती, कभी सबके तो कभी अंदर से परेशान सी हूँ। में मुस्कुरा देती हूँ॰ 9٨5 থরীভা सुनसान सी हूँ। पर सच में मैं हर रोज़ खुद को & समझती पर हर रोज़ थोड़ी नई बन जाती हूँ॰. शायद इसलिए.. # 34 से ही थोड़ी अनजान सी हूँ। ge - ShareChat
#📒 मेरी डायरी
📒 मेरी डायरी - आज फिर 3 बजे. आज फिर नींद नहीं आई। आंखें बंद थीं पर दिमाग शांत नहीं था। कुछ चेहरे बार-बार सामने आते रहे, कुछ बातें. जो कभी पूरी नहीं हो पाईं। मैंने किसी को खोया नहीं, बस खुद का एक हिस्सा वहीं कहीं छोड़ आई। रही रात बार-बार पूछती "सच में ठीक हो? " और मैं हर बार चुप ही रही... क्योंकि सुबह फिर वही मुस्कान पहननी है इसलिए रात में थोड़ा और टूट जाना पड़ा।  आज फिर 3 बजे. आज फिर नींद नहीं आई। आंखें बंद थीं पर दिमाग शांत नहीं था। कुछ चेहरे बार-बार सामने आते रहे, कुछ बातें. जो कभी पूरी नहीं हो पाईं। मैंने किसी को खोया नहीं, बस खुद का एक हिस्सा वहीं कहीं छोड़ आई। रही रात बार-बार पूछती "सच में ठीक हो? " और मैं हर बार चुप ही रही... क्योंकि सुबह फिर वही मुस्कान पहननी है इसलिए रात में थोड़ा और टूट जाना पड़ा। - ShareChat