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#🌙 गुड नाईट
🌙 गुड नाईट - खुशियों केलिए साधन की नहनीं संतोष की जरूरत होती है। ೧೦೫೦ आपको सुखद रात्रि की কামনা ক মাথ शुभख्व खुशियों केलिए साधन की नहनीं संतोष की जरूरत होती है। ೧೦೫೦ आपको सुखद रात्रि की কামনা ক মাথ शुभख्व - ShareChat
#🌙 गुड नाईट
🌙 गुड नाईट - जो नहीं मिला , बस उसी की चाहत रहती है, और जो पास है॰ उसकी कदर कहाँ होती है। इंसान की फितरत भी अजीब है, जो मिला उसे भूल जाता है, जो नहीं मिला उसी में दिल लगाता है। शूभ रात्रिः ईश्वर आपको शांत मन, मधुर स्वप्न और सुखद सुबह प्रदान करें। जो नहीं मिला , बस उसी की चाहत रहती है, और जो पास है॰ उसकी कदर कहाँ होती है। इंसान की फितरत भी अजीब है, जो मिला उसे भूल जाता है, जो नहीं मिला उसी में दिल लगाता है। शूभ रात्रिः ईश्वर आपको शांत मन, मधुर स्वप्न और सुखद सुबह प्रदान करें। - ShareChat
#🌙 गुड नाईट
🌙 गुड नाईट - समय, जब विपरीत sl84q प्रभाव और पैसा नहीं ೩್ स्वभाव और संबंध काम आते हैं समय, जब विपरीत sl84q प्रभाव और पैसा नहीं ೩್ स्वभाव और संबंध काम आते हैं - ShareChat
#🌙 गुड नाईट
🌙 गुड नाईट - !! ೩೫f ! Good NIGH है ध्राभ्नु अपना आशीर्वाद मेरे समस्न परिवार और मेरे मित्रों पर स्दैव बानाए रखना..!! !! ೩೫f ! Good NIGH है ध्राभ्नु अपना आशीर्वाद मेरे समस्न परिवार और मेरे मित्रों पर स्दैव बानाए रखना..!! - ShareChat
☯️🕉️🌳🌹🛕🌝🛕🌻🌳🕉️☯️ *_!! रात्रिकालीन वंदन !!_* *_मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥_* *_कोणस्थः पिंगलो बभ्रुः कृष्णो रौद्रान्तको यमः। सौरिः शनैश्चरो मन्दः पिप्पलाश्रयसंस्थितः॥_* *_ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।_* *_ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि। तन्नो सौरिः प्रचोदयात्॥_* *_!! मौन: जब चुप्पी चीख से भी अधिक बोलती है !!_* *_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा, चिंतन योग्य एक विचारोत्तेजक पोस्ट।✍🏻_* *_☝🏻मित्रों, सुबह मैंने "मौन" से संबंधीत एक परिच्छेद ( पैराग्राफ ) लिखा था। निम्नलिखित पोस्ट उसी परिच्छेद का विस्तृत रूप है।हम अक्सर ‘शोर’ को कोलाहल समझते हैं—"ट्रैफिक की आवाज़, भीड़ का हुड़दंग, या ऊँचे स्वर में बहस।" लेकिन क्या कभी आपने उस मौन को महसूस किया है जो किसी मर्मांतक घटना के बाद छा जाता है? "वह मौन जो कमरे में नहीं, बल्कि सीने में उतर जाता है।" वह मौन जो शब्दों से नहीं, बल्कि भावनाओं से फटता है। यह मौन चीख से भी अधिक चीखता है—बिना स्वर के, पर पूरी ताकत से।_* *_मौन कोई खालीपन नहीं, सबसे गहरा भराव है। जब हम कहते हैं "वहाँ सन्नाटा पसर गया", तो असल में वहाँ सन्नाटा कुछ कह रहा होता है। जहाँ शब्द मर जाते हैं, "वहाँ अर्थ अपने चरम पर पहुँचता है।" एक प्रेमी का बिना कहे समझ लेना, एक पीड़ित की आँखों में जमी व्यथा, एक असफल प्रयास के बाद का ठहराव—"ये सब शब्दों से परे के संसार के द्वार हैं।" जो बोलकर थक गया, उसका मौन समर्पण नहीं, अंतिम विद्रोह है।_* *_समाज अक्सर "मौन को कमज़ोरी समझता है।" पर जब कोई व्यक्ति, जिसने बार-बाल बोलकर, समझाकर, चिल्लाकर, चीखकर भी सुना नहीं गया, अचानक चुप हो जाता है—"तब समझो, वह विद्रोह कर रहा है।" यह वह मौन है जो ‘अब और नहीं’ का अंतिम बयान होता है। जब प्रश्न न पूछा जाए, तो असहमति का तीर और जब रिश्ते चुप हो जाएँ, तो दीवार तोड़ने वाला शोर।_* *_किसी बैठक में या रिश्ते में जब सवाल पूछने से ही मना कर दिया जाए, तो उस चुप्पी में एक तीखा तीर छुपा होता है—"असहमति का, जो बिना शब्दों के ही लगता है।" और जब दो लोगों के बीच बातचीत थम जाती है, "जब बिना कहे सब कुछ कह दिया जाता है," तो वह मौन हर उस दीवार से अधिक कर्णभेदी होता है जो आवाज से नहीं, बल्कि सन्नाटे से गिरती है।सच्चा संवाद शब्दों में नहीं, मौन की गोद में पनपता है। जो लोग एक-दूसरे को सच में समझते हैं, "उन्हें हर बात कहने की ज़रूरत नहीं पड़ती।" एक नज़र, एक साँस, एक ठहराव ही काफी होता है। पर जहाँ यही मौन संवाद मर जाता है, "वहाँ वह तोप की गूंज बन जाता है"—विनाशकारी, अपरिवर्तनीय।_* *_गहरा मौन ही सबसे यादगार और तीखा संदेश छोड़ता है। कोई भी चीख भूल जाती है, लेकिन वह मौन जो किसी सत्य के साथ खड़ा हो, "वह दशकों तक याद रहता है।" चाहे वह किसी शहीद की "अंतिम चुप्पी हो, किसी माँ का बेटे से मिलने के बाद का सन्नाटा, या किसी कलाकार का बिना प्रदर्शन किए ही मचा दिया गया असर।_* 👌🏻🤔 *_🙏🏻शनिवार, सप्ताहांत रात्रि की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगलमय बेला में, आप सभी मित्रजनों को भगवान बजरंगबली जी तथा श्री शनिदेव जी का आशीर्वाद प्राप्त हो। आपके जीवन में प्रेम, सद्भावना और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह निरंतर बना रहे। मंगलमय भगवान आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें तथा आप सदैव खुश रहें। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ – सुमंगलम, स्नेहिल रात्रि वंदन, मित्रों। आप एवं आपके समस्त पारिवारजनों को अक्षय तृतीय तथा भगवान परशुराम जयंती की अग्रिम ढेरों बधाइयां और हार्दिक शुभकामनाएं। यदि यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो, तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों के साथ साझा करें। धन्यवाद सहित, आपका अपना, डॉ० सुरेंद्र अरोडा 9780077479🙏🏻_* *_विशेष :-_* *_☝🏻मित्रों, हम सबको आवाज़ देना सिखाया जाता है, "पर मौन में डूबकर सुनना नहीं।" शोर से बहस जीती जा सकती है, "पर मौन से सच्चाई उजागर होती है।" तो अगली बार जब आप सन्नाटा देखें, उसे खाली मत समझिए। "वह शायद आपसे ज़्यादा कह रहा है," जितना कोई दस पन्नों की चिट्ठी कह सकती है। ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भूलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻 *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🌈😴🌈💐🌴🕉️☯️ #🌙 गुड नाईट
#🙏शुभ दोपहर
🙏शुभ दोपहर - ShareChat
☯️🕉️🌳🌹🛕🌝🛕🌻🌳🕉️☯️ *_!! रात्रि: कालीन वंदन !!_* *_मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥_* *_कोणस्थः पिंगलो बभ्रुः कृष्णो रौद्रान्तको यमः। सौरिः शनैश्चरो मन्दः पिप्पलाश्रयसंस्थितः॥_* *_ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।_* *_ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि। तन्नो सौरिः प्रचोदयात्॥_* *_!! अक्षय तृतीया: केवल पर्व नहीं, परशुराम के व्यक्तित्व का पुनर्स्मरण !!_* *_✍🏻सुरेंद्र अरोड़ा की लेखनी द्वारा, परशुराम जयंती की पूर्व संध्या पर विशेष।✍🏻_* *_👉🏻 मित्रों, "19 अप्रैल, रविवार यानी कल अक्षय तृतीया के पावन पर्व के दिन हम भगवान परशुराम जी की जयंती मनाने जा रहे हैं।" भगवान परशुराम जी को भगवान विष्णु का छठा अवतार माना जाता है। वे उन संत चिरंजीवी महापुरुषों में से एक हैं, "जो पौराणिक मान्यताओं के अनुसार आज भी पृथ्वी पर सदेह उपस्थित हैं।" उनका जन्म अधर्म का विनाश करने और धर्म की स्थापना करने के उद्देश्य से हुआ था। भगवान परशुराम जी का जन्म "महर्षि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र के रूप में हुआ था।" उन्हें शास्त्रों और शस्त्रों दोनों का प्रकांड विद्वान माना जाता है। उनका नाम मूलतः ‘राम’ था, लेकिन भगवान शिव की घोर तपस्या के बाद जब उन्हें ‘परशु’ ( खास आकार की कुल्हाड़ी ) प्राप्त हुई, तब वे ‘परशुराम’ कहलाए। उनका व्यक्तित्व ब्राह्मणों का शांत चित्त और क्षत्रियों का शौर्य – एक अद्भुत संगम है।_* *_मित्रों, भगवान परशुराम जी का जीवन न्याय के प्रति उनके अटूट समर्पण को दर्शाता है। "जब हैहय वंश के राजा कार्तवीर्य अर्जुन (सहस्रार्जुन) ने अपनी शक्ति के अहंकार में ऋषि जमदग्नि का अपमान किया और कामधेनु गाय का अपहरण किया," तब परशुराम जी ने अकेले ही उस अत्याचारी सत्ता का विनाश किया। उन्होंने पृथ्वी को इक्कीस बार उन राजाओं से मुक्त किया, "जिन्होंने अपनी शक्ति का दुरुपयोग जनता के शोषण के लिए किया था।" यह संघर्ष किसी जाति के विरुद्ध नहीं, "बल्कि अधर्म और अहंकार के विरुद्ध था।" भगवान परशुराम जी केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि परम त्यागी भी थे। उन्होंने संपूर्ण पृथ्वी को जीतकर "महर्षि कश्यप को दान में दे दिया और स्वयं "महेंद्र पर्वत पर तपस्या के लिए चले गए।" उनकी यह दानवीरता सिखाती है कि शक्ति का अंतिम लक्ष्य भोग नहीं, बल्कि "त्याग और धर्म " की स्थापना होना चाहिए।_* *_मित्रों, यह संघर्ष किसी जाति के विरुद्ध नहीं, "बल्कि अधर्म और अहंकार के विरुद्ध था।" लेकिन क्या हम यह मान लें कि अहंकार केवल राजा या क्षत्रिय तक सीमित था ? क्या जब शक्ति का दुरुपयोग किसी भी वर्ग, समुदाय या संस्था द्वारा किया जाता है, "तो क्या परशुराम जैसा प्रतिरोध उतना ही धार्मिक नहीं हो जाता ?" दूसरी ओर, प्रश्न यह भी है कि जब प्रतिरोध स्वयं एक नई पद्धति का अहंकार बन जाए, "तो उसे कौन रोकेगा ?" परशुराम जी ने स्वयं को सत्ता से अलग कर त्याग का मार्ग चुना – यह इस बात का संकेत है कि "सच्चा न्याय निरन्तर आत्मालोचन के बिना अधूरा है।" भगवान परशुराम जी केवल एक योद्धा ही नहीं, बल्कि परम त्यागी भी थे। उन्होंने संपूर्ण पृथ्वी को जीतकर "महर्षि कश्यप को दान में दे दिया और स्वयं महेंद्र पर्वत पर तपस्या के लिए चले गए।" उनकी यह दानवीरता सिखाती है कि शक्ति का अंतिम लक्ष्य भोग नहीं, "बल्कि त्याग और धर्म की स्थापना होना चाहिए।"_*👌🏻 *_🙏🏻शनिवार, सप्ताहांत रात्रि की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगलमय बेला में, आप सभी मित्रजनों को भगवान बजरंगबली जी तथा श्री शनिदेव जी का आशीर्वाद प्राप्त हो। आपके जीवन में प्रेम, सद्भावना और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह निरंतर बना रहे। मंगलमय भगवान आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें तथा आप सदैव खुश रहें। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ – सुमंगलम, स्नेहिल रात्रि वंदन, मित्रों। आप एवं आपके समस्त पारिवारजनों को भगवान परशुराम जयंती की अग्रिम ढेरों बधाइयां और हार्दिक शुभकामनाएं। यदि यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो, तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों के साथ साझा कर पुण्य लाभ अर्जित करें। धन्यवाद सहित, आपका अपना, डॉ० सुरेंद्र अरोडा 9780077479🙏🏻_* *_विशेष :-_* *_☝🏻 मित्रों, भगवान परशुराम जी का जीवन हमें सिखाता है कि "शक्ति और ज्ञान का संतुलन ही समाज को सही दिशा दे सकता है।" उनकी जयंती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि "अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और अपने मूल्यों की रक्षा करने का संकल्प लेने का दिन है।" यह दिन हमें यह भी याद दिलाता है कि सच्ची वीरता निर्बलों की रक्षा में है, न कि अपने अहंकार की सिद्धि में। परशुराम जी की कुल्हाड़ी प्रतीक है – "अत्याचार का सिर काटकर धर्म की डाली को हरा-भरा करने का।" इसलिए इस अक्षय तृतीया, हम अपने भीतर के परशुराम को जगाएँ। ज्यादा न लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूँ। यदि पोस्ट लिखते समय भूलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻 *_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_* ☯️🕉️🌴🌾🌈😴🌈💐🌴🕉️☯️ #🌙 गुड नाईट