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*_!! रात्रिकालीन वंदन !!_*
*_मनोजवं मारुततुल्यवेगं जितेन्द्रियं बुद्धिमतां वरिष्ठम्। वातात्मजं वानरयूथमुख्यं श्रीरामदूतं शरणं प्रपद्ये॥_*
*_कोणस्थः पिंगलो बभ्रुः कृष्णो रौद्रान्तको यमः। सौरिः शनैश्चरो मन्दः पिप्पलाश्रयसंस्थितः॥_*
*_ॐ नमो हनुमते रुद्रावताराय सर्वशत्रुसंहारणाय सर्वरोगहराय सर्ववशीकरणाय रामदूताय स्वाहा।_*
*_ॐ काकध्वजाय विद्महे खड्गहस्ताय धीमहि। तन्नो सौरिः प्रचोदयात्॥_*
*_!! मौन: जब चुप्पी चीख से भी अधिक बोलती है !!_*
*_✍🏻सुरेंद्र अरोडा की लेखनी द्वारा, चिंतन योग्य एक विचारोत्तेजक पोस्ट।✍🏻_*
*_☝🏻मित्रों, सुबह मैंने "मौन" से संबंधीत एक परिच्छेद ( पैराग्राफ ) लिखा था। निम्नलिखित पोस्ट उसी परिच्छेद का विस्तृत रूप है।हम अक्सर ‘शोर’ को कोलाहल समझते हैं—"ट्रैफिक की आवाज़, भीड़ का हुड़दंग, या ऊँचे स्वर में बहस।" लेकिन क्या कभी आपने उस मौन को महसूस किया है जो किसी मर्मांतक घटना के बाद छा जाता है? "वह मौन जो कमरे में नहीं, बल्कि सीने में उतर जाता है।" वह मौन जो शब्दों से नहीं, बल्कि भावनाओं से फटता है। यह मौन चीख से भी अधिक चीखता है—बिना स्वर के, पर पूरी ताकत से।_*
*_मौन कोई खालीपन नहीं, सबसे गहरा भराव है। जब हम कहते हैं "वहाँ सन्नाटा पसर गया", तो असल में वहाँ सन्नाटा कुछ कह रहा होता है। जहाँ शब्द मर जाते हैं, "वहाँ अर्थ अपने चरम पर पहुँचता है।" एक प्रेमी का बिना कहे समझ लेना, एक पीड़ित की आँखों में जमी व्यथा, एक असफल प्रयास के बाद का ठहराव—"ये सब शब्दों से परे के संसार के द्वार हैं।" जो बोलकर थक गया, उसका मौन समर्पण नहीं, अंतिम विद्रोह है।_*
*_समाज अक्सर "मौन को कमज़ोरी समझता है।" पर जब कोई व्यक्ति, जिसने बार-बाल बोलकर, समझाकर, चिल्लाकर, चीखकर भी सुना नहीं गया, अचानक चुप हो जाता है—"तब समझो, वह विद्रोह कर रहा है।" यह वह मौन है जो ‘अब और नहीं’ का अंतिम बयान होता है। जब प्रश्न न पूछा जाए, तो असहमति का तीर और जब रिश्ते चुप हो जाएँ, तो दीवार तोड़ने वाला शोर।_*
*_किसी बैठक में या रिश्ते में जब सवाल पूछने से ही मना कर दिया जाए, तो उस चुप्पी में एक तीखा तीर छुपा होता है—"असहमति का, जो बिना शब्दों के ही लगता है।" और जब दो लोगों के बीच बातचीत थम जाती है, "जब बिना कहे सब कुछ कह दिया जाता है," तो वह मौन हर उस दीवार से अधिक कर्णभेदी होता है जो आवाज से नहीं, बल्कि सन्नाटे से गिरती है।सच्चा संवाद शब्दों में नहीं, मौन की गोद में पनपता है। जो लोग एक-दूसरे को सच में समझते हैं, "उन्हें हर बात कहने की ज़रूरत नहीं पड़ती।" एक नज़र, एक साँस, एक ठहराव ही काफी होता है। पर जहाँ यही मौन संवाद मर जाता है, "वहाँ वह तोप की गूंज बन जाता है"—विनाशकारी, अपरिवर्तनीय।_*
*_गहरा मौन ही सबसे यादगार और तीखा संदेश छोड़ता है। कोई भी चीख भूल जाती है, लेकिन वह मौन जो किसी सत्य के साथ खड़ा हो, "वह दशकों तक याद रहता है।" चाहे वह किसी शहीद की "अंतिम चुप्पी हो, किसी माँ का बेटे से मिलने के बाद का सन्नाटा, या किसी कलाकार का बिना प्रदर्शन किए ही मचा दिया गया असर।_* 👌🏻🤔
*_🙏🏻शनिवार, सप्ताहांत रात्रि की सुंदर, मधुर एवं सौम्य मंगलमय बेला में, आप सभी मित्रजनों को भगवान बजरंगबली जी तथा श्री शनिदेव जी का आशीर्वाद प्राप्त हो। आपके जीवन में प्रेम, सद्भावना और सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह निरंतर बना रहे। मंगलमय भगवान आपके भंडारे भरपूर रखें, आपको सुख, शांति और समृद्धि प्रदान करें तथा आप सदैव खुश रहें। इन्हीं शुभकामनाओं के साथ – सुमंगलम, स्नेहिल रात्रि वंदन, मित्रों। आप एवं आपके समस्त पारिवारजनों को अक्षय तृतीय तथा भगवान परशुराम जयंती की अग्रिम ढेरों बधाइयां और हार्दिक शुभकामनाएं। यदि यह पोस्ट आपको अच्छी लगी हो, तो कृपया इसे अपने सभी परिचितों के साथ साझा करें। धन्यवाद सहित, आपका अपना, डॉ० सुरेंद्र अरोडा 9780077479🙏🏻_*
*_विशेष :-_*
*_☝🏻मित्रों, हम सबको आवाज़ देना सिखाया जाता है, "पर मौन में डूबकर सुनना नहीं।" शोर से बहस जीती जा सकती है, "पर मौन से सच्चाई उजागर होती है।" तो अगली बार जब आप सन्नाटा देखें, उसे खाली मत समझिए। "वह शायद आपसे ज़्यादा कह रहा है," जितना कोई दस पन्नों की चिट्ठी कह सकती है। ज्यादा ना लिखते हुए, पोस्ट को यहीं समाप्त करता हूं। यदि पोस्ट लिखते समय भूलवश व्याकरण संबंधी या अन्य कोई त्रुटि रह गई हो, तो कृपया क्षमा कर दीजिएगा।_*👏🏻
*_!! ┈┉❀꧁ Զเधॆ Զเधॆ ꧂❀┉┈ !!_*
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