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#🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲हदीस🕌 #🤲 दुआएं #🤲 इबादत
🤲इस्लाम की प्यारी बातें - पैगम्बर मुहम्मद (g५३ ) ने फरमाया : "जब तुम सालन पकाओ तो उसमे पानी बढा दो और अपने पड़ोसी का ध्यान रखो I" (हदीस संग्रहः 2625)| मुस्लिम पैगम्बर मुहम्मद (g५३ ) ने फरमाया : "जब तुम सालन पकाओ तो उसमे पानी बढा दो और अपने पड़ोसी का ध्यान रखो I" (हदीस संग्रहः 2625)| मुस्लिम - ShareChat
#🤲 इबादत #🤲 दुआएं #🤲हदीस🕌 #🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🤲क़ुरान शरीफ़📗
🤲 इबादत - फ़रमाने मुस्तफाः Farmane Mustafa फ़रमाने मुस्तफा %६ (Farmane Mustafa नबी अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) ने फ़रमायाः "ऐसे लंगड़े जानवर की नकी जाए जिसका தளரி लंगड़ापन साफ़ ज़ाहिर हो, न ऐसे अंधे जानवर की जिसका अंधापन सा़फ ज़ाहिर हो, न ऐसे बीमार जानवर की जिसकी बीमारी साफ ज़ाहिर हो, और न ऐसे बेहद कमज़ोर जानवर की क़ुर्बानी की जाए जिसकी हड्डियों में गूदा न रहा हो। " अगीन (जामिअ तिर्मिज़ीः १४९७) paf & अक़ाम फ़रमाने मुस्तफाः Farmane Mustafa फ़रमाने मुस्तफा %६ (Farmane Mustafa नबी अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) ने फ़रमायाः "ऐसे लंगड़े जानवर की नकी जाए जिसका தளரி लंगड़ापन साफ़ ज़ाहिर हो, न ऐसे अंधे जानवर की जिसका अंधापन सा़फ ज़ाहिर हो, न ऐसे बीमार जानवर की जिसकी बीमारी साफ ज़ाहिर हो, और न ऐसे बेहद कमज़ोर जानवर की क़ुर्बानी की जाए जिसकी हड्डियों में गूदा न रहा हो। " अगीन (जामिअ तिर्मिज़ीः १४९७) paf & अक़ाम - ShareChat
#🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🤲हदीस🕌 #🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲 इबादत #🤲 दुआएं
🤲इस्लाम की प्यारी बातें - आज से ठीक सौ साल बाद, जब २१२६ आएगा , तो यकीनन हम में से कोई भी नहीं होगा। उस वक्त हमारी గెWf..!! कब्रें भी गंजान हिस्सों में कम हो கி इसलिए खुश रहा करें , हमने कौन सा यहां सदियां गुजारनी हैं। यह दुनिया एक आरज़ी ठिकाना है। हक का साथ दें , हसद छोड़ें और खुशियां बांटें। आज से ठीक सौ साल बाद, जब २१२६ आएगा , तो यकीनन हम में से कोई भी नहीं होगा। उस वक्त हमारी గెWf..!! कब्रें भी गंजान हिस्सों में कम हो கி इसलिए खुश रहा करें , हमने कौन सा यहां सदियां गुजारनी हैं। यह दुनिया एक आरज़ी ठिकाना है। हक का साथ दें , हसद छोड़ें और खुशियां बांटें। - ShareChat
#🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲हदीस🕌 #🤲 दुआएं #🤲 इबादत #🤲इस्लाम की प्यारी बातें
🤲क़ुरान शरीफ़📗 - बा अदब बा नसीब बे अदब बे नसीब एक बार जनाब बहलूल दाना किसी नख्लिस्तान में तशरीफ रखते थे- एक ताजिर का वहां से गुज़र हुआ- वो आपके पास  आया सलाम करके मुअद्दब सामने बैठ गया और इन्तिहाई गुज़ारिश कीः हुज़ूर   तिजारत की कौन सी ऐसी जिन्स अदब से खरीदूं  जिसमें बहुत नफा हो जनाब बहलूल ने फ़रमायाः- शुक़्रिया अदा किया और उल्टे क़दमों  काला कपडा ले लो ताजिरने उसने इलाक़ने में दस्तियाब चलता वापस चला गया- जाकर सियाह कपडा खरीद लिया- HIH कुछ दिनों बाद शहर का बहुत बड़ा आदमी इंतक़ाल कर लिए मातमी लिबास के सारा शहर सियाह कपड़े की TT- तलाश में निकल खड़ा हुआ,अब कपडा सारा उस ताजिर के पास ज़खीरा था तो अब उसने मुंहमांगे दामों फरोख्त किया  और इतना नफा कमाया जितना ज़िंदगी ना कमाया था और बहुत ही अमीर कबीर हो गया- कुछ अरसे बाद वो घोड़ पर सवार कहीं से ಶತ್ವಳಾ ವ जनाब पर बैठे बैठे बहलूल वहां तशरीफ रखते थे- वो वहीं  बोलाओ दीवाने अब की बार क्या 7 हज़रते बहलूल ने फ़रमायाः तरबूज़ लो दौलत से पूरे मुल्क से तरबूज़  वो भागा भागा गया और सारी लिए एक ही हप्ते में सब खराब हा गए और वो कौड़़ी खरीद खस्ताहाली में घूमते फिरते कोड़ी को मुहताज हो गया- इसी जनाब बहलूल से हो गई तो उसने कहाः  उसकी सकीप नुलमोक़स्ताथ नया किहयलूलतो स्जहना बब हलूलस्ने फ़रहाया  4 मैंने नहीं तेरे और अल्फाज़ ने किया सब जब तूने लहजों अदब से पूछा था तो मालामाल हो गया और जब गुस्ताखी की तो कंगाल हो गया   इसको कहते हैं बा अदब बा नसीब बे अदब बे नसीब बा अदब बा नसीब बे अदब बे नसीब एक बार जनाब बहलूल दाना किसी नख्लिस्तान में तशरीफ रखते थे- एक ताजिर का वहां से गुज़र हुआ- वो आपके पास  आया सलाम करके मुअद्दब सामने बैठ गया और इन्तिहाई गुज़ारिश कीः हुज़ूर   तिजारत की कौन सी ऐसी जिन्स अदब से खरीदूं  जिसमें बहुत नफा हो जनाब बहलूल ने फ़रमायाः- शुक़्रिया अदा किया और उल्टे क़दमों  काला कपडा ले लो ताजिरने उसने इलाक़ने में दस्तियाब चलता वापस चला गया- जाकर सियाह कपडा खरीद लिया- HIH कुछ दिनों बाद शहर का बहुत बड़ा आदमी इंतक़ाल कर लिए मातमी लिबास के सारा शहर सियाह कपड़े की TT- तलाश में निकल खड़ा हुआ,अब कपडा सारा उस ताजिर के पास ज़खीरा था तो अब उसने मुंहमांगे दामों फरोख्त किया  और इतना नफा कमाया जितना ज़िंदगी ना कमाया था और बहुत ही अमीर कबीर हो गया- कुछ अरसे बाद वो घोड़ पर सवार कहीं से ಶತ್ವಳಾ ವ जनाब पर बैठे बैठे बहलूल वहां तशरीफ रखते थे- वो वहीं  बोलाओ दीवाने अब की बार क्या 7 हज़रते बहलूल ने फ़रमायाः तरबूज़ लो दौलत से पूरे मुल्क से तरबूज़  वो भागा भागा गया और सारी लिए एक ही हप्ते में सब खराब हा गए और वो कौड़़ी खरीद खस्ताहाली में घूमते फिरते कोड़ी को मुहताज हो गया- इसी जनाब बहलूल से हो गई तो उसने कहाः  उसकी सकीप नुलमोक़स्ताथ नया किहयलूलतो स्जहना बब हलूलस्ने फ़रहाया  4 मैंने नहीं तेरे और अल्फाज़ ने किया सब जब तूने लहजों अदब से पूछा था तो मालामाल हो गया और जब गुस्ताखी की तो कंगाल हो गया   इसको कहते हैं बा अदब बा नसीब बे अदब बे नसीब - ShareChat
#🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🤲 इबादत #🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲हदीस🕌 #🤲 दुआएं
🤲इस्लाम की प्यारी बातें - नबी ३ की नसीहत '  तवळ्कुल का हक़ रसूलुल्लाह  ५६ ने फ़रमायाः ४अगर तुम अल्लाह तआला पर ऐसा भरोसा करो जैसा भरोसा करने का हक़ है, तो तुम्हें भी उसी तरह रोज़ी दी जाएगी जैसे परिंदों को दी जाती है ~ वे सुबह खाली पेट निकलते हैं और शाम को पेट भरकर लौटते हैं। " हदीसः तिर्मिज़ी (२३४४) , अन उमर बिन ख़त्ताब (रज़ि. ) नबी ३ की नसीहत '  तवळ्कुल का हक़ रसूलुल्लाह  ५६ ने फ़रमायाः ४अगर तुम अल्लाह तआला पर ऐसा भरोसा करो जैसा भरोसा करने का हक़ है, तो तुम्हें भी उसी तरह रोज़ी दी जाएगी जैसे परिंदों को दी जाती है ~ वे सुबह खाली पेट निकलते हैं और शाम को पेट भरकर लौटते हैं। " हदीसः तिर्मिज़ी (२३४४) , अन उमर बिन ख़त्ताब (रज़ि. ) - ShareChat
#🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲 इबादत #🤲 दुआएं #🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🤲हदीस🕌
🤲क़ुरान शरीफ़📗 - जज़ाकल्लाह खैर (JazakAllah Khair) B कब बोलेंः जब कोई आपके मतलबः अल्लाह आपको साथ भलाई करे या मदद करे। बेहतरीन बदला दे। ($ீ Thank ಹ೯ you' से बेहतर है)। बारकल्लाह (BarakAllah) 0 कब बोलें: जब किसी को मतलबः अल्लाह মুনাফকনান ঐ যা কিমী কী बरकत दे। इसमें সক্চলনা ঐষ্ট্র | जज़ाकल्लाह खैर (JazakAllah Khair) B कब बोलेंः जब कोई आपके मतलबः अल्लाह आपको साथ भलाई करे या मदद करे। बेहतरीन बदला दे। ($ீ Thank ಹ೯ you' से बेहतर है)। बारकल्लाह (BarakAllah) 0 कब बोलें: जब किसी को मतलबः अल्लाह মুনাফকনান ঐ যা কিমী কী बरकत दे। इसमें সক্চলনা ঐষ্ট্র | - ShareChat
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🤲इस्लाम की प्यारी बातें - रात को जल्दी सोने का फायदा क्या है? आजकल लोग देर रात तक जागते हैं, और सुबह उठना मुश्किल हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं जल्दी सोने का कितना फायदा है? रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ईशा के बाद देर तक जागना पसंद नहीं करते थे। (66 568) बुख़ारीः यानी रात को जल्दी सोना एक अच्छी आदत है। जब इंसान जल्दी सोता है, तो फज्र की नमाज़ आसानी से पढ़ता है और दिन की शुरुआत ताजगी से होती है। नींद पूरी होने से सेहत भी बेहतर रहती है और दिमाग भी शांत रहता है। इसलिए देर रात जागने की आदत छोड़ें और जल्दी सोने की कोशिश करें। क्योंकि... जल्दी सोना अच्छी जिँदगी की शुरुआत है। ऐ अल्लाह! हमें अच्छी आदतें अपनाने की तौफ़ीक़ दे और हमें सही दिनचर्या अता फरमा। आमीन। रात को जल्दी सोने का फायदा क्या है? आजकल लोग देर रात तक जागते हैं, और सुबह उठना मुश्किल हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं जल्दी सोने का कितना फायदा है? रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ईशा के बाद देर तक जागना पसंद नहीं करते थे। (66 568) बुख़ारीः यानी रात को जल्दी सोना एक अच्छी आदत है। जब इंसान जल्दी सोता है, तो फज्र की नमाज़ आसानी से पढ़ता है और दिन की शुरुआत ताजगी से होती है। नींद पूरी होने से सेहत भी बेहतर रहती है और दिमाग भी शांत रहता है। इसलिए देर रात जागने की आदत छोड़ें और जल्दी सोने की कोशिश करें। क्योंकि... जल्दी सोना अच्छी जिँदगी की शुरुआत है। ऐ अल्लाह! हमें अच्छी आदतें अपनाने की तौफ़ीक़ दे और हमें सही दिनचर्या अता फरमा। आमीन। - ShareChat
#🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲हदीस🕌 #🤲 इबादत #🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🤲 दुआएं
🤲क़ुरान शरीफ़📗 - फरमाने 8R7I )ALISH2 फरमाने मुस्तफाः (Farmane Mustafa  , हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर ( रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) ने फ़रमायाः "जिस शख़्स की नमाज़ एनअस्र फौत (क़ज़ा ) हो गई, तो गोया उसके घर वाले और माल ओ दौलत सब लुट गए।" (मुअत्ता इमाम मालिकः २०) फरमाने 8R7I )ALISH2 फरमाने मुस्तफाः (Farmane Mustafa  , हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर ( रज़ियल्लाहु अन्हुमा) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) ने फ़रमायाः "जिस शख़्स की नमाज़ एनअस्र फौत (क़ज़ा ) हो गई, तो गोया उसके घर वाले और माल ओ दौलत सब लुट गए।" (मुअत्ता इमाम मालिकः २०) - ShareChat
#🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🤲 इबादत #🤲 दुआएं #🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲हदीस🕌
🤲इस्लाम की प्यारी बातें - नेकी : इमाम अली (अ.स. ) फ़रमाते हैंः नेकी वो है जिससे तुम्हारे नफ़्स को तस्कीन और दिल को इत्मीनान हासिल हो, और गुनाह वो है जिससे अंदर बेचैनी और सीने तुम्हारे గౌగెగ में इज़्तेराब पैदा हो नेकी : इमाम अली (अ.स. ) फ़रमाते हैंः नेकी वो है जिससे तुम्हारे नफ़्स को तस्कीन और दिल को इत्मीनान हासिल हो, और गुनाह वो है जिससे अंदर बेचैनी और सीने तुम्हारे గౌగెగ में इज़्तेराब पैदा हो - ShareChat
#🤲इस्लाम की प्यारी बातें
🤲इस्लाम की प्यारी बातें - islamic qaurlraza মনমী নভা মালনাং বী ৯ जिसके अकाउंट में रोज़ाना पांच वक़्त की नमाज़ जमा हो रही है Beshaq_ 1@ islamic qaurlraza মনমী নভা মালনাং বী ৯ जिसके अकाउंट में रोज़ाना पांच वक़्त की नमाज़ जमा हो रही है Beshaq_ 1@ - ShareChat