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#🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🤲हदीस🕌 #🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲 इबादत #🤲 दुआएं
🤲इस्लाम की प्यारी बातें - जब बहनें ही अपने भाइयों का हक़ मारने लगें जायदाद का बँटवारा अल्लाह का बनाया हुआ अटल क़ानून है, इसमें अपनी मर्ज़ी से फेर-बदल करना अल्लाह को सीधी देना है ி है। बहन चाहे कितनी भी पढ़ी -लिखी हो या माँ-बप की लाडली, उसे बिलकुल नहीं मिलता कि वह का हिस्सा हड़प ले। 46 8$ भाइयों सख़्त पकड़ और हदीसः अल्लाह की हदेंः মুফ্ক গন-নিমা (4:14) सहीह (2453) बुख़ारी में सा़फ़ चेतावनी है कि जो अल्लाह अल्लाह के रसूल ক मुताबिक़, की तय की हुई सरहदों को पार करेगा, की एक ने फ़रमाया कि जिसने किसी बालिश्त (एक हाथ) ज़मीन भी उसे ऐसी आग में डाला जाएगा जहाँ वह हमेशा ज़लील और रुसवा होगा। ज़बरदस्ती ली, क़यामत के दिन सात ज़मीनों का उसके गले में पट्टे की बोझ विरासत के मामले में बेईमानी करना में से है जिसकी पकड़ बहुत तरह डाला जाएगा। गुनाहों उन सख़्त है। अगर कोई बहन भाई का नाहक़ क़ब्ज़ा करना सरासर जुल्म है और अल्लाह के यहाँ इसकी कोई हक़ दबाकर बैठती है, तो वह महज़ माफ़ी नहीं जब तक हक़दार को ज़मीन नहीं बल्कि अपनी आख़िरत बर्बाद कर रही है। उसका हक़ न मिल जाए। जब बहनें ही अपने भाइयों का हक़ मारने लगें जायदाद का बँटवारा अल्लाह का बनाया हुआ अटल क़ानून है, इसमें अपनी मर्ज़ी से फेर-बदल करना अल्लाह को सीधी देना है ி है। बहन चाहे कितनी भी पढ़ी -लिखी हो या माँ-बप की लाडली, उसे बिलकुल नहीं मिलता कि वह का हिस्सा हड़प ले। 46 8$ भाइयों सख़्त पकड़ और हदीसः अल्लाह की हदेंः মুফ্ক গন-নিমা (4:14) सहीह (2453) बुख़ारी में सा़फ़ चेतावनी है कि जो अल्लाह अल्लाह के रसूल ক मुताबिक़, की तय की हुई सरहदों को पार करेगा, की एक ने फ़रमाया कि जिसने किसी बालिश्त (एक हाथ) ज़मीन भी उसे ऐसी आग में डाला जाएगा जहाँ वह हमेशा ज़लील और रुसवा होगा। ज़बरदस्ती ली, क़यामत के दिन सात ज़मीनों का उसके गले में पट्टे की बोझ विरासत के मामले में बेईमानी करना में से है जिसकी पकड़ बहुत तरह डाला जाएगा। गुनाहों उन सख़्त है। अगर कोई बहन भाई का नाहक़ क़ब्ज़ा करना सरासर जुल्म है और अल्लाह के यहाँ इसकी कोई हक़ दबाकर बैठती है, तो वह महज़ माफ़ी नहीं जब तक हक़दार को ज़मीन नहीं बल्कि अपनी आख़िरत बर्बाद कर रही है। उसका हक़ न मिल जाए। - ShareChat
#🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲हदीस🕌 #🤲 दुआएं #🤲 इबादत #🤲इस्लाम की प्यारी बातें
🤲क़ुरान शरीफ़📗 - पर्दा एक जैसा नहीं होता, कुछ ढाँपना लिए हिफाज़त और हया के होता है और कुछ सिर्फ दिखावे के लिए. ! ! ! पर्दा एक जैसा नहीं होता, कुछ ढाँपना लिए हिफाज़त और हया के होता है और कुछ सिर्फ दिखावे के लिए. ! ! ! - ShareChat
#🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🤲 इबादत #🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲हदीस🕌 #🤲 दुआएं
🤲इस्लाम की प्यारी बातें - जन्नती जहन्नामियों से पूछेंगे َرَقَس يِف مُککَلَس اًم तुम जहन्नम मे कैसे पहुंचे . َنیِّلَصُمْلا َنِم ُكَن مَل اوُلاَق वह कहेंगे हम नमाज पढ़ने वालों में से नहीं थे- Aloron Suroh A Mudossir Agot 42 43 या अल्लाह हमें नमाज का पाबंद बना दे जन्नती जहन्नामियों से पूछेंगे َرَقَس يِف مُککَلَس اًم तुम जहन्नम मे कैसे पहुंचे . َنیِّلَصُمْلا َنِم ُكَن مَل اوُلاَق वह कहेंगे हम नमाज पढ़ने वालों में से नहीं थे- Aloron Suroh A Mudossir Agot 42 43 या अल्लाह हमें नमाज का पाबंद बना दे - ShareChat
#🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🤲हदीस🕌 #🤲 दुआएं #🤲 इबादत #🤲क़ुरान शरीफ़📗
🤲इस्लाम की प्यारी बातें - नमाज़ में " आमीन  कब और कैसे कहें? हम नमाज़ में " आमीन " कहते हैं, लेकिन क्या हमें पता है कि इसे कब और कैसे कहना चाहिए? ल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः तो तुम उजब इमाम शवला द्दाल्लीन' कहे, आमीन ' कहो, जिसकी ` आमीन ' फरिश्तों की ` आमीन ' के साथ मिल जाए, उसके पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं। " (सहीह ؟: 780, #66 410) बुख़ारीः यानी "आमीन " कहना बहुत बड़ा सवाब वाला अमल है। ४आमीन " सूरह फातिहा के बाद कहा जाता है जब "वला द्दाल्लीन " खत्म हो। इसे दिल से और ध्यान के साथ कहें, जल्दी या लापरवाही से नहीं। अगर जमाअत में नमाज़ हो, तो इमाम के साथ "आमीन " कहना चाहिए। क्योंकि.. की माफी का कारण बन सकती है। एक सही " आमीन " T ऐ अल्लाह! हमें नमाज़ के हर हिस्से को सही तरीके से करने की तौफ़ीक़ दे और हमारी नमाज़ों को कबूल फरमा। आमीन।  नमाज़ में " आमीन  कब और कैसे कहें? हम नमाज़ में " आमीन " कहते हैं, लेकिन क्या हमें पता है कि इसे कब और कैसे कहना चाहिए? ल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः तो तुम उजब इमाम शवला द्दाल्लीन' कहे, आमीन ' कहो, जिसकी ` आमीन ' फरिश्तों की ` आमीन ' के साथ मिल जाए, उसके पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं। " (सहीह ؟: 780, #66 410) बुख़ारीः यानी "आमीन " कहना बहुत बड़ा सवाब वाला अमल है। ४आमीन " सूरह फातिहा के बाद कहा जाता है जब "वला द्दाल्लीन " खत्म हो। इसे दिल से और ध्यान के साथ कहें, जल्दी या लापरवाही से नहीं। अगर जमाअत में नमाज़ हो, तो इमाम के साथ "आमीन " कहना चाहिए। क्योंकि.. की माफी का कारण बन सकती है। एक सही " आमीन " T ऐ अल्लाह! हमें नमाज़ के हर हिस्से को सही तरीके से करने की तौफ़ीक़ दे और हमारी नमाज़ों को कबूल फरमा। आमीन। - ShareChat
#🤲 दुआएं #🤲 इबादत #🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🤲हदीस🕌
🤲 दुआएं - खड़े होकर पेशाब ना करें ٍمَلشَو ُّيِبَّنلا َنَأ مُکَثَدَح ْنَم : ثَلاَق َةَشِئاَع ْنَع ناگ .اًَدِعاَق َّالِإ ُلوُبَي َناَگام هوُقَّدَصُت َالَف اًمِئاَق ُلوبَي हजरत आयशा रज़ी अल्लाहू अन्हा फरमाती है कि , कोई यह कहे कि नबी ए करीम तुमसे R सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खड़े होकर पेशाब किया करते थे. तो तुम उसकी बात को सच ना मानो. आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बैठकर पेशाब क्या करते थे। तिर्मीजी शरीफ हदीस नंबर १२ खड़े होकर पेशाब ना करें ٍمَلشَو ُّيِبَّنلا َنَأ مُکَثَدَح ْنَم : ثَلاَق َةَشِئاَع ْنَع ناگ .اًَدِعاَق َّالِإ ُلوُبَي َناَگام هوُقَّدَصُت َالَف اًمِئاَق ُلوبَي हजरत आयशा रज़ी अल्लाहू अन्हा फरमाती है कि , कोई यह कहे कि नबी ए करीम तुमसे R सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम खड़े होकर पेशाब किया करते थे. तो तुम उसकी बात को सच ना मानो. आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम बैठकर पेशाब क्या करते थे। तिर्मीजी शरीफ हदीस नंबर १२ - ShareChat
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🤲इस्लाम की प्यारी बातें - पैगम्बर मुहम्मद (g५३ ) ने फरमाया : "जब तुम सालन पकाओ तो उसमे पानी बढा दो और अपने पड़ोसी का ध्यान रखो I" (हदीस संग्रहः 2625)| मुस्लिम पैगम्बर मुहम्मद (g५३ ) ने फरमाया : "जब तुम सालन पकाओ तो उसमे पानी बढा दो और अपने पड़ोसी का ध्यान रखो I" (हदीस संग्रहः 2625)| मुस्लिम - ShareChat
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🤲 इबादत - फ़रमाने मुस्तफाः Farmane Mustafa फ़रमाने मुस्तफा %६ (Farmane Mustafa नबी अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) ने फ़रमायाः "ऐसे लंगड़े जानवर की नकी जाए जिसका தளரி लंगड़ापन साफ़ ज़ाहिर हो, न ऐसे अंधे जानवर की जिसका अंधापन सा़फ ज़ाहिर हो, न ऐसे बीमार जानवर की जिसकी बीमारी साफ ज़ाहिर हो, और न ऐसे बेहद कमज़ोर जानवर की क़ुर्बानी की जाए जिसकी हड्डियों में गूदा न रहा हो। " अगीन (जामिअ तिर्मिज़ीः १४९७) paf & अक़ाम फ़रमाने मुस्तफाः Farmane Mustafa फ़रमाने मुस्तफा %६ (Farmane Mustafa नबी अकरम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) ने फ़रमायाः "ऐसे लंगड़े जानवर की नकी जाए जिसका தளரி लंगड़ापन साफ़ ज़ाहिर हो, न ऐसे अंधे जानवर की जिसका अंधापन सा़फ ज़ाहिर हो, न ऐसे बीमार जानवर की जिसकी बीमारी साफ ज़ाहिर हो, और न ऐसे बेहद कमज़ोर जानवर की क़ुर्बानी की जाए जिसकी हड्डियों में गूदा न रहा हो। " अगीन (जामिअ तिर्मिज़ीः १४९७) paf & अक़ाम - ShareChat
#🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🤲हदीस🕌 #🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲 इबादत #🤲 दुआएं
🤲इस्लाम की प्यारी बातें - आज से ठीक सौ साल बाद, जब २१२६ आएगा , तो यकीनन हम में से कोई भी नहीं होगा। उस वक्त हमारी గెWf..!! कब्रें भी गंजान हिस्सों में कम हो கி इसलिए खुश रहा करें , हमने कौन सा यहां सदियां गुजारनी हैं। यह दुनिया एक आरज़ी ठिकाना है। हक का साथ दें , हसद छोड़ें और खुशियां बांटें। आज से ठीक सौ साल बाद, जब २१२६ आएगा , तो यकीनन हम में से कोई भी नहीं होगा। उस वक्त हमारी గెWf..!! कब्रें भी गंजान हिस्सों में कम हो கி इसलिए खुश रहा करें , हमने कौन सा यहां सदियां गुजारनी हैं। यह दुनिया एक आरज़ी ठिकाना है। हक का साथ दें , हसद छोड़ें और खुशियां बांटें। - ShareChat
#🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲हदीस🕌 #🤲 दुआएं #🤲 इबादत #🤲इस्लाम की प्यारी बातें
🤲क़ुरान शरीफ़📗 - बा अदब बा नसीब बे अदब बे नसीब एक बार जनाब बहलूल दाना किसी नख्लिस्तान में तशरीफ रखते थे- एक ताजिर का वहां से गुज़र हुआ- वो आपके पास  आया सलाम करके मुअद्दब सामने बैठ गया और इन्तिहाई गुज़ारिश कीः हुज़ूर   तिजारत की कौन सी ऐसी जिन्स अदब से खरीदूं  जिसमें बहुत नफा हो जनाब बहलूल ने फ़रमायाः- शुक़्रिया अदा किया और उल्टे क़दमों  काला कपडा ले लो ताजिरने उसने इलाक़ने में दस्तियाब चलता वापस चला गया- जाकर सियाह कपडा खरीद लिया- HIH कुछ दिनों बाद शहर का बहुत बड़ा आदमी इंतक़ाल कर लिए मातमी लिबास के सारा शहर सियाह कपड़े की TT- तलाश में निकल खड़ा हुआ,अब कपडा सारा उस ताजिर के पास ज़खीरा था तो अब उसने मुंहमांगे दामों फरोख्त किया  और इतना नफा कमाया जितना ज़िंदगी ना कमाया था और बहुत ही अमीर कबीर हो गया- कुछ अरसे बाद वो घोड़ पर सवार कहीं से ಶತ್ವಳಾ ವ जनाब पर बैठे बैठे बहलूल वहां तशरीफ रखते थे- वो वहीं  बोलाओ दीवाने अब की बार क्या 7 हज़रते बहलूल ने फ़रमायाः तरबूज़ लो दौलत से पूरे मुल्क से तरबूज़  वो भागा भागा गया और सारी लिए एक ही हप्ते में सब खराब हा गए और वो कौड़़ी खरीद खस्ताहाली में घूमते फिरते कोड़ी को मुहताज हो गया- इसी जनाब बहलूल से हो गई तो उसने कहाः  उसकी सकीप नुलमोक़स्ताथ नया किहयलूलतो स्जहना बब हलूलस्ने फ़रहाया  4 मैंने नहीं तेरे और अल्फाज़ ने किया सब जब तूने लहजों अदब से पूछा था तो मालामाल हो गया और जब गुस्ताखी की तो कंगाल हो गया   इसको कहते हैं बा अदब बा नसीब बे अदब बे नसीब बा अदब बा नसीब बे अदब बे नसीब एक बार जनाब बहलूल दाना किसी नख्लिस्तान में तशरीफ रखते थे- एक ताजिर का वहां से गुज़र हुआ- वो आपके पास  आया सलाम करके मुअद्दब सामने बैठ गया और इन्तिहाई गुज़ारिश कीः हुज़ूर   तिजारत की कौन सी ऐसी जिन्स अदब से खरीदूं  जिसमें बहुत नफा हो जनाब बहलूल ने फ़रमायाः- शुक़्रिया अदा किया और उल्टे क़दमों  काला कपडा ले लो ताजिरने उसने इलाक़ने में दस्तियाब चलता वापस चला गया- जाकर सियाह कपडा खरीद लिया- HIH कुछ दिनों बाद शहर का बहुत बड़ा आदमी इंतक़ाल कर लिए मातमी लिबास के सारा शहर सियाह कपड़े की TT- तलाश में निकल खड़ा हुआ,अब कपडा सारा उस ताजिर के पास ज़खीरा था तो अब उसने मुंहमांगे दामों फरोख्त किया  और इतना नफा कमाया जितना ज़िंदगी ना कमाया था और बहुत ही अमीर कबीर हो गया- कुछ अरसे बाद वो घोड़ पर सवार कहीं से ಶತ್ವಳಾ ವ जनाब पर बैठे बैठे बहलूल वहां तशरीफ रखते थे- वो वहीं  बोलाओ दीवाने अब की बार क्या 7 हज़रते बहलूल ने फ़रमायाः तरबूज़ लो दौलत से पूरे मुल्क से तरबूज़  वो भागा भागा गया और सारी लिए एक ही हप्ते में सब खराब हा गए और वो कौड़़ी खरीद खस्ताहाली में घूमते फिरते कोड़ी को मुहताज हो गया- इसी जनाब बहलूल से हो गई तो उसने कहाः  उसकी सकीप नुलमोक़स्ताथ नया किहयलूलतो स्जहना बब हलूलस्ने फ़रहाया  4 मैंने नहीं तेरे और अल्फाज़ ने किया सब जब तूने लहजों अदब से पूछा था तो मालामाल हो गया और जब गुस्ताखी की तो कंगाल हो गया   इसको कहते हैं बा अदब बा नसीब बे अदब बे नसीब - ShareChat
#🤲इस्लाम की प्यारी बातें
🤲इस्लाम की प्यारी बातें - islamic qaurlraza মনমী নভা মালনাং বী ৯ जिसके अकाउंट में रोज़ाना पांच वक़्त की नमाज़ जमा हो रही है Beshaq_ 1@ islamic qaurlraza মনমী নভা মালনাং বী ৯ जिसके अकाउंट में रोज़ाना पांच वक़्त की नमाज़ जमा हो रही है Beshaq_ 1@ - ShareChat