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#🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🤲 इबादत #🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲हदीस🕌 #🤲 दुआएं
🤲इस्लाम की प्यारी बातें - "कभी अल्लाह को याद करके रो लिया करें!" रसूलुल्लाह #४& ने फ़रमायाः "सात तरह के लोगों को अल्लाह तआला उस दिन अपने साये में पनाह देगा जिस दिन उसके साये के अलावा और कोई साया नहीं होगाः (उनमें से एक) वह आदमी जिसने तन्हाई में अल्लाह को याद किया तो उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।" 66 ६६०, सहीह मुस्लिमः १०३१) बुखारीः "कभी अल्लाह को याद करके रो लिया करें!" रसूलुल्लाह #४& ने फ़रमायाः "सात तरह के लोगों को अल्लाह तआला उस दिन अपने साये में पनाह देगा जिस दिन उसके साये के अलावा और कोई साया नहीं होगाः (उनमें से एक) वह आदमी जिसने तन्हाई में अल्लाह को याद किया तो उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।" 66 ६६०, सहीह मुस्लिमः १०३१) बुखारीः - ShareChat
#🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🤲हदीस🕌 #🤲 दुआएं #🤲 इबादत #🤲क़ुरान शरीफ़📗
🤲इस्लाम की प्यारी बातें - व रिज़्क़ बढ़ाने का तरीक़ा 39, रज़ियल्लाहु अन्हु से हज़रत अनस रिवायत है कि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि जो शख़्स चाहे कि परवरदिगारे आलम उसकी उम्र में बरकत अता फ़रमाये और उसका रिज़क़ बढ़ा दे तो उसको चाहिए कि अपने माँ बाप के साथ अच्छा सुलूक करे और अपने रिश्तह दारों से तअल्लुक़ात बनाये रखे। दुर्रे मन्सूर जिल्द 4 सफ़हा १७३ व रिज़्क़ बढ़ाने का तरीक़ा 39, रज़ियल्लाहु अन्हु से हज़रत अनस रिवायत है कि हुज़ूर सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया कि जो शख़्स चाहे कि परवरदिगारे आलम उसकी उम्र में बरकत अता फ़रमाये और उसका रिज़क़ बढ़ा दे तो उसको चाहिए कि अपने माँ बाप के साथ अच्छा सुलूक करे और अपने रिश्तह दारों से तअल्लुक़ात बनाये रखे। दुर्रे मन्सूर जिल्द 4 सफ़हा १७३ - ShareChat
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🤲इस्लाम की प्यारी बातें - #aగT एक सालेह अपनी दुआं करते थे कि ऐ आस्मानों को ज़मीन पर गिरने से रोकने वाले ! मुझ से दुन्या को रोक ले। यानी (मुझे दुन्या न दे) हज़रते मुहम्मद बिन मुन्कदिर ८lc JlJ AUI ةخد  का कौल है कि क़ियामत के दिन ऐसे शख़्स भी होंगे जिन्हों ने ज़िन्दगी के दिन रोज़ों में और रातें ड़बादत में होंगी, राहे खुदा में मालो दौलत ख़र्च किया गुज़ारी होगा, राहे खुदा में जिहाद किया होगा और मुन्करात से अपना दामन बचाया होगा मगर उन के बारे में कहा जाएगाः और येह वोह हैं जिन्हों ने रब की हक़ीर कर्दा चीज़ को बहुत बड़ा समझा था और रब की बा अज़मत चीज़ों को इन्हों ने हकीर समझा था, ज़रा सोचो तो सही हम में कितने ऐसे हैं जो में मुब्तला नहीं हैं मुसीबत इस इलावा अर्जी के कोहे गिरां का गुनाहों बार भी हमारी गर्दनों पर मौजूद है। मुकाशफ़तुल कुलुब २३२ #aగT एक सालेह अपनी दुआं करते थे कि ऐ आस्मानों को ज़मीन पर गिरने से रोकने वाले ! मुझ से दुन्या को रोक ले। यानी (मुझे दुन्या न दे) हज़रते मुहम्मद बिन मुन्कदिर ८lc JlJ AUI ةخد  का कौल है कि क़ियामत के दिन ऐसे शख़्स भी होंगे जिन्हों ने ज़िन्दगी के दिन रोज़ों में और रातें ड़बादत में होंगी, राहे खुदा में मालो दौलत ख़र्च किया गुज़ारी होगा, राहे खुदा में जिहाद किया होगा और मुन्करात से अपना दामन बचाया होगा मगर उन के बारे में कहा जाएगाः और येह वोह हैं जिन्हों ने रब की हक़ीर कर्दा चीज़ को बहुत बड़ा समझा था और रब की बा अज़मत चीज़ों को इन्हों ने हकीर समझा था, ज़रा सोचो तो सही हम में कितने ऐसे हैं जो में मुब्तला नहीं हैं मुसीबत इस इलावा अर्जी के कोहे गिरां का गुनाहों बार भी हमारी गर्दनों पर मौजूद है। मुकाशफ़तुल कुलुब २३२ - ShareChat
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🤲इस्लाम की प्यारी बातें - Sura e Ahzaab Ayat 41, 42 ईमान वालो अल्लाह का ज़िक्र बहुत ज़्यादा किया करो और सुबह व शाम इसकी तसबीह किया करो Sura e Ahzaab Ayat 41, 42 ईमान वालो अल्लाह का ज़िक्र बहुत ज़्यादा किया करो और सुबह व शाम इसकी तसबीह किया करो - ShareChat
#🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🤲 दुआएं #🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲 इबादत #🤲हदीस🕌
🤲इस्लाम की प्यारी बातें - ज़ुबान की हिफाज़त रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः ४बंदा एक बात कह देता है, जिसकी वजह से वह जहन्नम में इतनी दूर गिरता है जितनी दूरी पूरब और पश्चिम के बीच है।" ६४७७, सहीह मुस्लिमः २९८८) (सहीह बुख़ारीः ज़ुबान छोटी होती है,  बहुत बड़े होते हैं। लेकिन इसके असर एक गलत लफ़्ज़ इंसान को नुकसान में डाल है, और एक अच्छा लफ़्ज़ जन्नत का सकता रास्ता बना सकता है। ज़ुबान की हिफाज़त रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमायाः ४बंदा एक बात कह देता है, जिसकी वजह से वह जहन्नम में इतनी दूर गिरता है जितनी दूरी पूरब और पश्चिम के बीच है।" ६४७७, सहीह मुस्लिमः २९८८) (सहीह बुख़ारीः ज़ुबान छोटी होती है,  बहुत बड़े होते हैं। लेकिन इसके असर एक गलत लफ़्ज़ इंसान को नुकसान में डाल है, और एक अच्छा लफ़्ज़ जन्नत का सकता रास्ता बना सकता है। - ShareChat
#🤲 इबादत #🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲हदीस🕌 #🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🤲 दुआएं
🤲 इबादत - अल्लाह किससे नाराज़ होता है? हम सब चाहते हैं कि अल्लाह हमसे खुश रहे, लेकिन कुछ आदतें ऐसी होती हैं जो उसे नापसंद हैं। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः " अल्लाह को वह इंसान पसंद नहीं जो घमंड करता है। " घमंड इंसान को सच्चाई से दूर कर देता है और  दूसरों को समझने की आदत बना देता है। इसी तरह झूठ छोटा बोलना, का हक मारना और लोगों को तकलीफ देना TRI ये सब ऐसे काम हैं जो अल्लाह को नाराज़ करते हैं। इसलिए हमेशा अपने दिल को साफ रखें और अपने व्यवहार को बेहतर बनाएं। क्योंकि. . अल्लाह की नाराज़गी से बड़ा कोई नुकसान नहीं।  अल्लाह! हमें उन कामों से बचा जो तुझे नापसंद हैं। 3ITHIనI अल्लाह किससे नाराज़ होता है? हम सब चाहते हैं कि अल्लाह हमसे खुश रहे, लेकिन कुछ आदतें ऐसी होती हैं जो उसे नापसंद हैं। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम ने फ़रमायाः " अल्लाह को वह इंसान पसंद नहीं जो घमंड करता है। " घमंड इंसान को सच्चाई से दूर कर देता है और  दूसरों को समझने की आदत बना देता है। इसी तरह झूठ छोटा बोलना, का हक मारना और लोगों को तकलीफ देना TRI ये सब ऐसे काम हैं जो अल्लाह को नाराज़ करते हैं। इसलिए हमेशा अपने दिल को साफ रखें और अपने व्यवहार को बेहतर बनाएं। क्योंकि. . अल्लाह की नाराज़गी से बड़ा कोई नुकसान नहीं।  अल्लाह! हमें उन कामों से बचा जो तुझे नापसंद हैं। 3ITHIనI - ShareChat
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🤲इस्लाम की प्यारी बातें - एक शख़्स अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) की ! मैंने बहुत बड़ा  बारगाह में हाज़िर हुआ और अर्ज कीः "या रसूलुल्लाह!  गुनाह किया है, क्या मेरे लिए तौबा है?" आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) ने इरशाद फ़रमायाः "क्या वालिदा (माँ ) हैं२" उसने अर्ज कियाः " नहीं। " आप (सल्लल्लाहु तुम्हारी ` खाला (मौसी ) हैं?" अलैहि वसल्लम ) ने फ़रमायाः "क्या तुम्हारी  उसने अर्ज कियाः "जी हाँ। " आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) ने फ़रमायाः "फिर उनके साथ अच्छा सुलूक (व्यवहार ) करो!" जामिआ तिरमिज़ी , जिल्द १, हदीसः १९८७) एक शख़्स अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) की ! मैंने बहुत बड़ा  बारगाह में हाज़िर हुआ और अर्ज कीः "या रसूलुल्लाह!  गुनाह किया है, क्या मेरे लिए तौबा है?" आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) ने इरशाद फ़रमायाः "क्या वालिदा (माँ ) हैं२" उसने अर्ज कियाः " नहीं। " आप (सल्लल्लाहु तुम्हारी ` खाला (मौसी ) हैं?" अलैहि वसल्लम ) ने फ़रमायाः "क्या तुम्हारी  उसने अर्ज कियाः "जी हाँ। " आप (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ) ने फ़रमायाः "फिर उनके साथ अच्छा सुलूक (व्यवहार ) करो!" जामिआ तिरमिज़ी , जिल्द १, हदीसः १९८७) - ShareChat
#🤲इस्लाम की प्यारी बातें #🤲क़ुरान शरीफ़📗 #🤲हदीस🕌 #🤲 दुआएं #🤲 इबादत
🤲इस्लाम की प्यारी बातें - नमाज़ देर से पढ़ने का नुकसान [ಿ ಗ हम में से कई लोग नमाज़ को टालते रहते हैं ॰थोडी देर में पढ लेँगे... और फिर वह देर आदत बन जाती है। अल्लाह तआला क़ुरआन में फ़रमाता हैः "बर्बादी है उन नमाज़ियों के लिए, जो अपनी नमाज़ से गाफ़िल हैं। " नमाज़ को देर से पढ़ना दिल को धीरे-्धीरे कमजोर कर देता है, और इंसान इबादत से दूर होने लगता है। नमाज़ का असली मक़सद यह है कि हम वक्त पर अल्लाह के सामने खड़े हों, न कि उसे टालते रहें। इसलिए कोशिश करें कि नमाज़ को उसके वक्त पर ही अदा करें, क्योंकि यही असली पाबंदी है। ऐ अल्लाह! हमें नमाज़ को उसके सही वक्त पर अदा करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन। नमाज़ देर से पढ़ने का नुकसान [ಿ ಗ हम में से कई लोग नमाज़ को टालते रहते हैं ॰थोडी देर में पढ लेँगे... और फिर वह देर आदत बन जाती है। अल्लाह तआला क़ुरआन में फ़रमाता हैः "बर्बादी है उन नमाज़ियों के लिए, जो अपनी नमाज़ से गाफ़िल हैं। " नमाज़ को देर से पढ़ना दिल को धीरे-्धीरे कमजोर कर देता है, और इंसान इबादत से दूर होने लगता है। नमाज़ का असली मक़सद यह है कि हम वक्त पर अल्लाह के सामने खड़े हों, न कि उसे टालते रहें। इसलिए कोशिश करें कि नमाज़ को उसके वक्त पर ही अदा करें, क्योंकि यही असली पाबंदी है। ऐ अल्लाह! हमें नमाज़ को उसके सही वक्त पर अदा करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन। - ShareChat
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🤲इस्लाम की प्यारी बातें - जिब्राइल अपनी असली" जब 3Iగ? सूरत में हुजूर  ने जिब्राइल को उनकी असली सूरत में दो बार देखा.. पहली बार जब वह आसमान के किनारे ६०० पर थे जो पूरे उफुक पर थे. उनके (आसमान के किनारे) को भर रहे थे.. हुजूर धय ने फ़रमाया. . की मैने जिब्राइल को उनकी असली सूरत में देखा ! जिस सूरत में अल्लाह ने उन्हें पैदा किया था.. ! और वो नज़ारा इतना अज़ीम था कि आसमान नूर से भर गया था..!! पूरा रोजाना इस्लामिक बातें जानने के लिए हमें फॉलो करें जिब्राइल अपनी असली" जब 3Iగ? सूरत में हुजूर  ने जिब्राइल को उनकी असली सूरत में दो बार देखा.. पहली बार जब वह आसमान के किनारे ६०० पर थे जो पूरे उफुक पर थे. उनके (आसमान के किनारे) को भर रहे थे.. हुजूर धय ने फ़रमाया. . की मैने जिब्राइल को उनकी असली सूरत में देखा ! जिस सूरत में अल्लाह ने उन्हें पैदा किया था.. ! और वो नज़ारा इतना अज़ीम था कि आसमान नूर से भर गया था..!! पूरा रोजाना इस्लामिक बातें जानने के लिए हमें फॉलो करें - ShareChat
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🤲इस्लाम की प्यारी बातें - islamic qaurlraza মনমী নভা মালনাং বী ৯ जिसके अकाउंट में रोज़ाना पांच वक़्त की नमाज़ जमा हो रही है Beshaq_ 1@ islamic qaurlraza মনমী নভা মালনাং বী ৯ जिसके अकाउंट में रोज़ाना पांच वक़्त की नमाज़ जमा हो रही है Beshaq_ 1@ - ShareChat