हम में से ज़्यादातर लोग यह सोचकर नहीं खाते कि हम क्या खा रहे हैं। हम वही खाते हैं जो हमारे दिनचर्या में आसानी से फिट हो जाए — और जो फिट हो जाए, वह हमेशा पौष्टिक हो, ऐसा ज़रूरी नहीं। धीरे-धीरे, ये रोज़मर्रा की छोटी-छोटी पसंद हमारे सोच से ज़्यादा असर डालने लगती हैं।
भारत में आज १५–४९ वर्ष की उम्र की लगभग २४% महिलाएँ और २३% पुरुष ओवरवेट या मोटापे का सामना कर रहे हैं। बात सिर्फ़ वज़न की नहीं है—यह असंतुलन शरीर को ठीक से काम करने से भी रोकता है और पैंक्रियाटिक, कोलोरेक्टल और पेट के कैंसर जैसे कई कैंसर का ख़तरा बढ़ाता है। ये आँकड़े उन आदतों का नतीजा हैं जो हम हर दिन दोहराते हैं, क्योंकि शरीर सब याद रखता है—जिसे हम नज़रअंदाज़ करते हैं, जिस पर समझौता करते हैं, और जिसकी हम अनदेखी कर देते हैं।
पोषण सिर्फ़ थाली भरने तक सीमित नहीं है, यह उस ज़िंदगी को संभालता है जो उससे आगे चलती है। आज जो फैसले ‘छोटे’ लगते हैं, उन पर #LookAgain करें—क्योंकि वही आपके कल को आकार दे रहे हैं।
#WorldCancerDay #CancerSeJeetnaSambhavHai #FightCancer #SDG3 #TataTrusts
भारत में कैंसर की बढ़ती चुनौती पर बात करते हुए, टाटा ट्रस्ट्स के सी.ई.ओ सिद्धार्थ शर्मा कहते हैं कि इस समस्या से निपटने के लिए बीमारी से बचाव, समय पर जाँच और इलाज को सस्ता व सुलभ बनाना बहुत ज़रूरी है। इसके लिए सरकार का ज़्यादा निवेश और पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप अहम भूमिका निभा सकती है। यह बातचीत मनीकंट्रोल के विश्वनाथ पिल्ला के साथ हुई।
#WorldCancerDay पर प्रकाशित यह लेख बताता है कि टाटा ट्रस्ट्स कैसे सरकारों और सार्वजनिक संस्थानों के साथ मिलकर लोगों को केंद्र में रखकर कैंसर के इलाज की व्यवस्था को बेहतर बनाने पर काम कर रहे हैं—ताकि समय पर जाँच हो, इलाज लोगों के लिए आसान हो और देखभाल उनके घरों के क़रीब मिल सके, खासकर उन इलाक़ों में जहाँ सुविधाएँ कम हैं।
क्योंकि कैंसर से लड़ने में असली बदलाव तभी आएगा, जब अच्छी और भरोसेमंद इलाज की सुविधा हर व्यक्ति तक पहुँच सके।
पूरा लेख पढ़ने के लिए: https://tatatrusts.ticuat.com/media/media-reports/on-world-cancer-day-tata-trusts-ceo-flags-late-diagnosis-crisis-as-india-s-cancer-cases-set-to-surge-24-by-2030
#WorldCancerDay #CancerSeJeetnaSambhavHai #CancerCare #FightCancer #SDG3 #TataTrusts
अक्सर हम आसान रास्ता चुन लेते हैं—क्योंकि समय कम होता है, थकान होती है, या जो सबसे पास होता है वही ठीक लगता है। लेकिन रोज़ के ये छोटे फैसले धीरे-धीरे असर दिखाते हैं। कभी सोफ़े से उठना भारी लगने लगता है, तो कभी रोज़ का चलना-फिरना पहले जितना सहज नहीं रहता।
रिसर्च बताती है कि सीढ़ियाँ चढ़ना जैसे छोटे कदम भी उतने ही असरदार हो सकते हैं जितना रोज़ १०,००० कदम चलना। बदलाव बहुत बड़ा होना ज़रूरी नहीं, बस सोच-समझकर किया गया होना चाहिए।
इस #वर्ल्डकैंसरडे, #लुकअगेन—क्योंकि आपका शरीर आपके हर छोटे फैसले को याद रखता है। जो फैसले आज मामूली लगते हैं, वही कल बड़ी सेहत से जुड़ी परेशानियों की वजह बन सकते हैं।
और पढ़ने के लिए: https://www.tatatrusts.org/cancer-care-awareness-the-first-line-of-defence
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“ग्रामीण कनेक्टिविटी, स्किलिंग कार्यक्रम और कर्ज़ तक पहुंच पहले से ही नीति के एजेंडे में हैं। यह बजट गैर-कृषि रोजगार के लिए साफ़ लक्ष्य और फंडिंग तय कर सकता है, ताकि पलायन मजबूरी नहीं, बल्कि एक विकल्प बने,” ऐसा कहना है टाटा ट्रस्ट्स के सीईओ, श्री सिद्धार्थ शर्मा का।
केंद्रीय बजट से पहले, वे ग्रामीण भारत में आजीविका को मज़बूत करने के अवसर पर ज़ोर देते हैं। फसल विविधीकरण, किसान समूहों, सहायक आजीविकाओं और गैर-कृषि उद्यमों को समर्थन देकर, बजट स्थिर और सम्मानजनक रोज़गार पैदा कर सकता है। इससे समुदायों को मज़बूती मिलेगी और वे अपने भविष्य की बेहतर योजना बना सकेंगे।
पूरा लेख यहां पढ़ें:
https://tatatrusts.org/insights/opinions/putting-livelihoods-at-the-heart-of-the-union-budget-2026
#Budget2026 #UnionBudget #Development #SocialGood #TataTrusts
टाटा ट्रस्ट्स सुरक्षित पानी, स्वच्छता और साफ-सफाई तक बेहतर पहुँच सुनिश्चित कर रहे हैं, ताकि स्वस्थ और मजबूत समुदायों का निर्माण हो सके।
#InServiceOfTheNation #AnnualReport #WaSH #SDG6 #TataTrusts
जागरूकता से लेकर कार्य तक, टाटा ट्रस्ट्स अपने पोषण कार्यक्रमों के माध्यम से सभी तक स्वस्थ और विविध आहार की पहुँच सुनिश्चित कर रहे हैं और कुपोषण से लड़ते हुए एक स्वस्थ भारत की दिशा में काम कर रहे हैं।
#InServiceOfTheNation #AnnualReport #Nutrition #SDG2 #TataTrusts
भारत, जैसा हम आज जानते हैं, हौसले और संघर्ष की कहानियों से बना है। आज़ादी की हमारी यात्रा उस गहरी चाह से जन्मी है—एक ऐसे देश की कल्पना करने की आज़ादी, जहाँ बराबरी भेदभाव से ऊपर हो, जहाँ प्रगति बदलती परंपराओं के साथ कदम मिलाए। यह वही देश है जहाँ सपने आकार लेते हैं, और उन्हें ताक़त मिलती है हमारे संविधान में लिखे उन मूल्यों से जो हमारी आत्मा में बसे हैं।
दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र को आज सलाम करते हुए, टाटा ट्रस्ट्स एक न्यायपूर्ण, संवेदनशील और टिकाऊ भारत की नींव को मज़बूत करने के अपने संकल्प को दोहराते हैं।
गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ!
Puppetry Credit: Thakar Adivasi Kala Aangan Museum & Art gallery
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सबसे यादगार यात्राएँ जगहों से नहीं, लोगों से बनती हैं। जब सफ़र सिर्फ़ देखने तक सीमित न रहकर लोगों की ज़िंदगी, उनकी संस्कृति और कहानियों से जुड़ता है, तभी किसी जगह की असली पहचान सामने आती है।
इस #नेशनल टूरिज़्म डे, हम ऐसे टूरिज़्म को सेलिब्रेट करते हैं जो सिर्फ़ एक्सप्लोर करने से आगे बढ़कर लोगों, संस्कृति और उन्हें सहारा देने वाले इकोसिस्टम से जुड़ता है। ऐसा सफ़र हमें नई सोच देता है और यह भी सिखाता है कि यात्रा ज़िम्मेदारी के साथ कैसे की जाए।
इस आपसी जुड़ाव में, ट्रैवल एक साझा अनुभव बन जाता है—जहाँ स्थानीय समुदाय अपनी आजीविका बना सकते हैं, अपनी विरासत को संभाल सकते हैं और अपने इलाक़ों की जैव-विविधता की रक्षा कर सकते हैं।
टाटा ट्रस्ट्स ऐसे ही सफ़रों का समर्थन करते हैं, जो भागीदारी और साझा प्रगति पर आधारित हों—ताकि हम मिलकर एक ज़्यादा समावेशी भविष्य बना सकें।
#nationaltourismday #MakingAnImpact #Progress #InclusiveGrowth #TataTrusts
कम उम्र से ही कई लड़कियों की पहचान उनके लिए तय कर दी जाती है—उम्मीदों, भूमिकाओं और धारणाओं के ज़रिये—ठीक उसी वक्त जब वे खुद को समझना शुरू ही करती हैं।
यहीं शिक्षा एक बड़ा बदलाव लाती है। यह लड़कियों को सवाल करने, चीज़ें समझने और तयशुदा दायरों से आगे खुद को देखने की जगह देती है।
अर्ली चाइल्डहुड एजुकेशन (ई.सी.ई) और इंटीग्रेटेड अप्रोच टू टेक्नोलॉजी इन एजुकेशन (आई.टी.ई) जैसी पहलों के ज़रिये, टाटा ट्रस्ट्स बचपन से लेकर किशोरावस्था तक सीखने की पूरी यात्रा को मज़बूत बनाने पर काम करते हैं—ताकि लड़कियाँ अलग तरह से सोच सकें, बेहतर सीख सकें और सीखने का अनुभव उनके लिए मायने रखे। मेनस्ट्रुअल हाइजीन को लेकर समझ बढ़ाकर और पीरियड्स को सेहत का एक सामान्य संकेत मानने वाली बातचीत को आगे बढ़ाकर, ट्रस्ट्स लड़कियों को खुद को समझने, स्वीकार करने और अपनी पहचान पर भरोसा करने में मदद करते हैं।
इन्हीं कोशिशों के ज़रिये, टाटा ट्रस्ट्स ऐसे माहौल बना रहे हैं जहाँ लड़कियाँ बिना किसी पूर्वाग्रह के, अपनी पहचान खुद गढ़ना सीख सकें।
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भारत में ब्रिटिश राज के समय जन्मे सर रतन टाटा आज़ादी की लड़ाई से दूर नहीं थे। न्याय के लिए खड़े होने और देश के काम आने का जो विश्वास उनके भीतर था, उसी ने उन्हें भारत की स्वतंत्रता की यात्रा में एक शांत लेकिन अहम भूमिका निभाने वाला व्यक्ति बनाया। उनके इस योगदान को मानते हुए महात्मा गांधी ने उनकी उदारता का ज़िक्र किया और लिखा कि इससे आंदोलन को नई ताक़त मिली।
देशभक्त होने के साथ-साथ सर रतन टाटा कला और विरासत के भी बड़े क़द्रदान थे। पाटलिपुत्र में हुई पहली पुरातात्विक खुदाई को उन्होंने आर्थिक सहयोग दिया—जिससे अशोक के सिंहासन कक्ष की खोज संभव हो पाई।
आज उनकी जयंती पर, समाज के प्रति ज़िम्मेदारी के रूप में परोपकार में उनका विश्वास हमें याद दिलाता है कि देने की सोच कितनी दूर तक असर डाल सकती है। यही सोच आज भी टाटा ट्रस्ट्स के काम को दिशा देती है, जो पूरे देश में समुदायों को सशक्त बना रहे हैं।
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