उमंग सुल्लेरे लेखक
ShareChat
click to see wallet page
@umangsullere
umangsullere
उमंग सुल्लेरे लेखक
@umangsullere
जनपद महोबा उत्तर प्रदेश contact 927708122
#✍मेरे पसंदीदा लेखक #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #🆕 ताजा अपडेट
✍मेरे पसंदीदा लेखक - "भगवद् गीता है ये जीवन, करुणा भरी कुरान" युध्द महाभारत हम सब है॰ ये जग की पहचान अपने से हम लड़़ना सीखे, जीते तो भगवान m उमंग सुल्लेरे लेखक की कलम से.. "भगवद् गीता है ये जीवन, करुणा भरी कुरान" युध्द महाभारत हम सब है॰ ये जग की पहचान अपने से हम लड़़ना सीखे, जीते तो भगवान m उमंग सुल्लेरे लेखक की कलम से.. - ShareChat
अपना भाई बुंदेलखंड का योगी सत्यनाथ #योगी #yogi #umang #✍मेरे पसंदीदा लेखक #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🆕 ताजा अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #📗प्रेरक पुस्तकें📘
✍मेरे पसंदीदा लेखक - ShareChat
00:58
यह कविता जीवन के कर्मों और उनके फल के बारे में है। इसमें लेखक उमंग सुल्लेरे ने जीवन के तीन पहलुओं - अतीत, भविष्य और वर्तमान - पर विचार किया है। कविता का संदेश है कि हमें अपने वर्तमान पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यही हमारे हाथ में है। कविता की पंक्तियों का अर्थ: 1. *शुभाशुभ कर्मों के संग, रहते अनगिन जीवन इनमें अपनी अपनी बारी आती, फिर खुलता भाग्य पिटारा है*: अच्छे और बुरे कर्मों के साथ जीवन चलता है, और हर किसी की अपनी बारी आती है जब उसका भाग्य खुलता है। 2. *जगभर हो रहा हलचल, हम हम' अहं निहारा है*: दुनिया में बहुत कुछ हो रहा है, लेकिन हम अपने अहंकार को देख रहे हैं। 3. *अतीत न भविष्य हमारा किन्तु वर्तमान हमारा है*: अतीत और भविष्य हमारे नियंत्रण में नहीं हैं, लेकिन वर्तमान हमारे हाथ में है। #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🆕 ताजा अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️
✍मेरे पसंदीदा लेखक - शुभाशुभ कर्मों के संग , रहते अनगिन जीवन इनर्मे अपनी अपनी बारी आती, फिर खुलता भाग्य पिटारा हे जगभर हो रहा हलचल , हम हम अहं निहारा हे किन्तु अतीत न भविष्य हमारा वतमान मारा ह उमंग सुल्लेरे लेखक जनपद महोबा उत्तर प्रदेश शुभाशुभ कर्मों के संग , रहते अनगिन जीवन इनर्मे अपनी अपनी बारी आती, फिर खुलता भाग्य पिटारा हे जगभर हो रहा हलचल , हम हम अहं निहारा हे किन्तु अतीत न भविष्य हमारा वतमान मारा ह उमंग सुल्लेरे लेखक जनपद महोबा उत्तर प्रदेश - ShareChat
यह कविता जीवन के कर्मों और उनके फल के बारे में है। इसमें लेखक उमंग सुल्लेरे ने जीवन के तीन पहलुओं - अतीत, भविष्य और वर्तमान - पर विचार किया है। कविता का संदेश है कि हमें अपने वर्तमान पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यही हमारे हाथ में है। कविता की पंक्तियों का अर्थ: 1. *शुभाशुभ कर्मों के संग, रहते अनगिन जीवन इनमें अपनी अपनी बारी आती, फिर खुलता भाग्य पिटारा है*: अच्छे और बुरे कर्मों के साथ जीवन चलता है, और हर किसी की अपनी बारी आती है जब उसका भाग्य खुलता है। 2. *जगभर हो रहा हलचल, हम हम' अहं निहारा है*: दुनिया में बहुत कुछ हो रहा है, लेकिन हम अपने अहंकार को देख रहे हैं। 3. *अतीत न भविष्य हमारा किन्तु वर्तमान हमारा है*: अतीत और भविष्य हमारे नियंत्रण में नहीं हैं, लेकिन वर्तमान हमारे हाथ में है। #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #🆕 ताजा अपडेट #🌐 राष्ट्रीय अपडेट
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - शुभाशुभ कर्मों के संग , रहते अनगिन जीवन इनर्मे अपनी अपनी बारी आती, फिर खुलता भाग्य पिटारा हे जगभर हो रहा हलचल , हम हम अहं निहारा हे किन्तु अतीत न भविष्य हमारा वतमान मारा ह उमंग सुल्लेरे लेखक जनपद महोबा उत्तर प्रदेश शुभाशुभ कर्मों के संग , रहते अनगिन जीवन इनर्मे अपनी अपनी बारी आती, फिर खुलता भाग्य पिटारा हे जगभर हो रहा हलचल , हम हम अहं निहारा हे किन्तु अतीत न भविष्य हमारा वतमान मारा ह उमंग सुल्लेरे लेखक जनपद महोबा उत्तर प्रदेश - ShareChat
#✍मेरे पसंदीदा लेखक #📗प्रेरक पुस्तकें📘
✍मेरे पसंदीदा लेखक - "लील गई योजनाओं की मछली राजकोष का घड़ा आज भी रीता है লমবধ उमंग सुल्लेरे 4 "लील गई योजनाओं की मछली राजकोष का घड़ा आज भी रीता है লমবধ उमंग सुल्लेरे 4 - ShareChat
#🎙सामाजिक समस्या #🆕 ताजा अपडेट #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️ #✍मेरे पसंदीदा लेखक
🎙सामाजिक समस्या - "लील गई योजनाओं की मछली राजकोष का घडा आज भी रीता है लेखक उमंग सुल्लेरे Lrmn J 7re "लील गई योजनाओं की मछली राजकोष का घडा आज भी रीता है लेखक उमंग सुल्लेरे Lrmn J 7re - ShareChat
यह एक प्रसिद्ध लेखक उमंग सुल्लेरे की क़लम से लिखी गई पंक्ति है "राजनीति में प्यासें हो जाने के सिवा कुछ नहीं मिलता है" इस पंक्ति में राजनीति की वास्तविकता को दर्शाया गया है, जिसमें अक्सर लोगों की उम्मीदें और आक़ासे अधूरी रह जाती हैं। #🎙सामाजिक समस्या
🎙सामाजिक समस्या - यह एक प्रसिद्ध लेखक उमंग की क़लम से लिखी गई पंक्ति है S "राजनीति में प्यासें हो जाने के सिवा कुछ नहीं मिलता है" इस पंक्ति में राजनीति की बास्तबिकता को दर्शाया गया है, जिसमें अक्सर लोगों की उम्मीदें और आक़ासे अधूरी रह जाती हैं। यह एक प्रसिद्ध लेखक उमंग की क़लम से लिखी गई पंक्ति है S "राजनीति में प्यासें हो जाने के सिवा कुछ नहीं मिलता है" इस पंक्ति में राजनीति की बास्तबिकता को दर्शाया गया है, जिसमें अक्सर लोगों की उम्मीदें और आक़ासे अधूरी रह जाती हैं। - ShareChat
यह एक प्रसिद्ध लेखक उमंग सुल्लेरे की क़लम से लिखी गई पंक्ति है "राजनीति में प्यासें हो जाने के सिवा कुछ नहीं मिलता है" इस पंक्ति में राजनीति की वास्तविकता को दर्शाया गया है, जिसमें अक्सर लोगों की उम्मीदें और आक़ासे अधूरी रह जाती हैं। #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #🌐 राष्ट्रीय अपडेट #✍मेरे पसंदीदा लेखक #🆕 ताजा अपडेट #🎙सामाजिक समस्या
📗प्रेरक पुस्तकें📘 - यह एक प्रसिद्ध लेखक उमंग की क़लम से लिखी गई पंक्ति है S "राजनीति में प्यासें हो जाने के सिवा कुछ नहीं मिलता है" इस पंक्ति में राजनीति की बास्तबिकता को दर्शाया गया है, जिसमें अक्सर लोगों की उम्मीदें और आक़ासे अधूरी रह जाती हैं। यह एक प्रसिद्ध लेखक उमंग की क़लम से लिखी गई पंक्ति है S "राजनीति में प्यासें हो जाने के सिवा कुछ नहीं मिलता है" इस पंक्ति में राजनीति की बास्तबिकता को दर्शाया गया है, जिसमें अक्सर लोगों की उम्मीदें और आक़ासे अधूरी रह जाती हैं। - ShareChat
#🌐 राष्ट्रीय अपडेट #🆕 ताजा अपडेट #📢 ताज़ा खबर 🗞️
🌐 राष्ट्रीय अपडेट - ShareChat
01:17