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![santrampaljimaharaj - का श्लोक 9 अध्याय दिच्यम 44-4 एवम यः aेत्ति तत्वतः V೦L. देहम, पनः, जन्म एति माम एति सः अर्जन।। ాా अनुवादः ( अर्जुन। अर्जुन! (गे। गेरे । जन्ग। जन्म (च॰ कर्म (दिव्यम्) दिव्य भर्थात् मलोकिक ्हे॰ [ক4] (यः) जो मनृष्य ( तत्त्वतः ) तत्वसे येत्ति) ।एयम्) डिस L Cm जान लेता है।सः ) बह ( देहम) शरीरको (त्यकचा) त्यागवर (पुनः) ।फिर ( जन्म। जन्मको (न एाते) प्राप्त न्हा हांता कितु जो मुडा काल को तत्य नहीं जानते ( माम्। मुडो हो (एति। प्राप्त तोता हे। (९) ೯-: अर्जुन! गैरे जन्म ओर कर्म दिव्य अर्थान् अलीकिक इस प्रकार जो मनुष्य तत्यसे जान लेता ह यह शरीरको त्यागकर फिर जन्मको माप्त नही ठोता कित जो काल को तत्व रा नर्ही जानते मुझ ही गराप्त हाता हे। गीता जी का ज्ञान किसने बोला ? श्लोक 9 में कहा है कि हे अर्जुन मेरे जन्म और कर्म गीता अध्याय दिव्य हैं भावार्थ है कि काल ब्रह्म अन्य के शरीर में प्रवेश करके श्री कृष्ण " कार्य करता है जैसे जी ने प्रतिज्ञा कर रखी थी ೯ ಶ್ಷ कि मैं महाभारत में किसी को मारने के लिए शस्त्र भी नही उठाऊँगा | श्री कृष्ण में काल ब्रह्म ने प्रवेश होकर रथ का पहिया उठाकर अनेकों सैनिकों को मार डाला पाप श्री कृष्ण जी के जिम्मे कर दिए प्रतिज्ञा भी समाप्त करके कलंकित किया। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज निःशुल्क पायें पवित्र पुस्तक अपना नाम, पूरा पता भेजें নান যযা +91 7496801823 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD.ORG SAINT RAMPAL JI MAHARAJ का श्लोक 9 अध्याय दिच्यम 44-4 एवम यः aेत्ति तत्वतः V೦L. देहम, पनः, जन्म एति माम एति सः अर्जन।। ాా अनुवादः ( अर्जुन। अर्जुन! (गे। गेरे । जन्ग। जन्म (च॰ कर्म (दिव्यम्) दिव्य भर्थात् मलोकिक ्हे॰ [ক4] (यः) जो मनृष्य ( तत्त्वतः ) तत्वसे येत्ति) ।एयम्) डिस L Cm जान लेता है।सः ) बह ( देहम) शरीरको (त्यकचा) त्यागवर (पुनः) ।फिर ( जन्म। जन्मको (न एाते) प्राप्त न्हा हांता कितु जो मुडा काल को तत्य नहीं जानते ( माम्। मुडो हो (एति। प्राप्त तोता हे। (९) ೯-: अर्जुन! गैरे जन्म ओर कर्म दिव्य अर्थान् अलीकिक इस प्रकार जो मनुष्य तत्यसे जान लेता ह यह शरीरको त्यागकर फिर जन्मको माप्त नही ठोता कित जो काल को तत्व रा नर्ही जानते मुझ ही गराप्त हाता हे। गीता जी का ज्ञान किसने बोला ? श्लोक 9 में कहा है कि हे अर्जुन मेरे जन्म और कर्म गीता अध्याय दिव्य हैं भावार्थ है कि काल ब्रह्म अन्य के शरीर में प्रवेश करके श्री कृष्ण " कार्य करता है जैसे जी ने प्रतिज्ञा कर रखी थी ೯ ಶ್ಷ कि मैं महाभारत में किसी को मारने के लिए शस्त्र भी नही उठाऊँगा | श्री कृष्ण में काल ब्रह्म ने प्रवेश होकर रथ का पहिया उठाकर अनेकों सैनिकों को मार डाला पाप श्री कृष्ण जी के जिम्मे कर दिए प्रतिज्ञा भी समाप्त करके कलंकित किया। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज निःशुल्क पायें पवित्र पुस्तक अपना नाम, पूरा पता भेजें নান যযা +91 7496801823 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD.ORG SAINT RAMPAL JI MAHARAJ - ShareChat santrampaljimaharaj - का श्लोक 9 अध्याय दिच्यम 44-4 एवम यः aेत्ति तत्वतः V೦L. देहम, पनः, जन्म एति माम एति सः अर्जन।। ాా अनुवादः ( अर्जुन। अर्जुन! (गे। गेरे । जन्ग। जन्म (च॰ कर्म (दिव्यम्) दिव्य भर्थात् मलोकिक ्हे॰ [ক4] (यः) जो मनृष्य ( तत्त्वतः ) तत्वसे येत्ति) ।एयम्) डिस L Cm जान लेता है।सः ) बह ( देहम) शरीरको (त्यकचा) त्यागवर (पुनः) ।फिर ( जन्म। जन्मको (न एाते) प्राप्त न्हा हांता कितु जो मुडा काल को तत्य नहीं जानते ( माम्। मुडो हो (एति। प्राप्त तोता हे। (९) ೯-: अर्जुन! गैरे जन्म ओर कर्म दिव्य अर्थान् अलीकिक इस प्रकार जो मनुष्य तत्यसे जान लेता ह यह शरीरको त्यागकर फिर जन्मको माप्त नही ठोता कित जो काल को तत्व रा नर्ही जानते मुझ ही गराप्त हाता हे। गीता जी का ज्ञान किसने बोला ? श्लोक 9 में कहा है कि हे अर्जुन मेरे जन्म और कर्म गीता अध्याय दिव्य हैं भावार्थ है कि काल ब्रह्म अन्य के शरीर में प्रवेश करके श्री कृष्ण " कार्य करता है जैसे जी ने प्रतिज्ञा कर रखी थी ೯ ಶ್ಷ कि मैं महाभारत में किसी को मारने के लिए शस्त्र भी नही उठाऊँगा | श्री कृष्ण में काल ब्रह्म ने प्रवेश होकर रथ का पहिया उठाकर अनेकों सैनिकों को मार डाला पाप श्री कृष्ण जी के जिम्मे कर दिए प्रतिज्ञा भी समाप्त करके कलंकित किया। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज निःशुल्क पायें पवित्र पुस्तक अपना नाम, पूरा पता भेजें নান যযা +91 7496801823 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD.ORG SAINT RAMPAL JI MAHARAJ का श्लोक 9 अध्याय दिच्यम 44-4 एवम यः aेत्ति तत्वतः V೦L. देहम, पनः, जन्म एति माम एति सः अर्जन।। ాా अनुवादः ( अर्जुन। अर्जुन! (गे। गेरे । जन्ग। जन्म (च॰ कर्म (दिव्यम्) दिव्य भर्थात् मलोकिक ्हे॰ [ক4] (यः) जो मनृष्य ( तत्त्वतः ) तत्वसे येत्ति) ।एयम्) डिस L Cm जान लेता है।सः ) बह ( देहम) शरीरको (त्यकचा) त्यागवर (पुनः) ।फिर ( जन्म। जन्मको (न एाते) प्राप्त न्हा हांता कितु जो मुडा काल को तत्य नहीं जानते ( माम्। मुडो हो (एति। प्राप्त तोता हे। (९) ೯-: अर्जुन! गैरे जन्म ओर कर्म दिव्य अर्थान् अलीकिक इस प्रकार जो मनुष्य तत्यसे जान लेता ह यह शरीरको त्यागकर फिर जन्मको माप्त नही ठोता कित जो काल को तत्व रा नर्ही जानते मुझ ही गराप्त हाता हे। गीता जी का ज्ञान किसने बोला ? श्लोक 9 में कहा है कि हे अर्जुन मेरे जन्म और कर्म गीता अध्याय दिव्य हैं भावार्थ है कि काल ब्रह्म अन्य के शरीर में प्रवेश करके श्री कृष्ण " कार्य करता है जैसे जी ने प्रतिज्ञा कर रखी थी ೯ ಶ್ಷ कि मैं महाभारत में किसी को मारने के लिए शस्त्र भी नही उठाऊँगा | श्री कृष्ण में काल ब्रह्म ने प्रवेश होकर रथ का पहिया उठाकर अनेकों सैनिकों को मार डाला पाप श्री कृष्ण जी के जिम्मे कर दिए प्रतिज्ञा भी समाप्त करके कलंकित किया। जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज निःशुल्क पायें पवित्र पुस्तक अपना नाम, पूरा पता भेजें নান যযা +91 7496801823 SPIRITUAL LEADER SANT RAMPAL JI @SAINTRAMPALJIM SUPREMEGOD.ORG SAINT RAMPAL JI MAHARAJ - ShareChat](https://cdn4.sharechat.com/bd5223f_s1w/compressed_gm_40_img_576574_24364237_1760610575075_sc.jpg?tenant=sc&referrer=user-profile-service%2FrequestType50&f=075_sc.jpg)





