विजय नगरकर Vijay Nagarkar
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विजय नगरकर Vijay Nagarkar
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हिंदी,मराठी, साहित्य, अनुवाद, संगीत, संस्कृत
किसी भी भाषा कार्यसाधक ज्ञान होना बहुत जरूरी है,जहां आप व्यवसाय,नौकरी करते है। चाहे भारतीय प्रशासन सेवा के उच्च अधिकारी हो अथवा साधारण ऑटो रिक्शावाला। अब महाराष्ट्र में हिंदी माध्यम से मराठी सीखिए। Auto rickshaw drivers who can read Hindi, may like to learn communicative Marathi by following this book ऑटोरिक्षा आणि टॅक्सीचालकांसाठी मराठी published by the University of Mumbai and Rajya Marathi Vikas Sanstha. It is available for free via this link archive.org/details/commu.… हिंदी माध्यम से मराठी सीखें #मराठी #हिंदी #😍देश भ्रमण #📗प्रेरक पुस्तकें📘 #💼सरकारी सेवा और योजना 👷
मराठी - ShareChat
🌏✨ जब ईरान के युद्ध में बॉलीवुड के हिंदी डायलॉग ने प्रवेश किया अप्रैल 2026 की दुनिया… जहाँ समुद्रों में तनाव है, जहाज़ों पर नज़रें टिकी हैं, और अचानक—मुंबई से उठती है एक चिंगारी, जो बारूद नहीं, मीम‑संस्कृति की है। होर्मुज जलडमरू मध्य की लहरें गंभीर हैं, पर मुंबई स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने इस गंभीरता को एक अनोखे अंदाज़ में छुआ— ऐसे जैसे किसी भू‑राजनीतिक मंच पर अचानक शाहरुख़ खान की एंट्री हो जाए। और फिर… एक वीडियो, लाल रंग की तेज़ रफ्तार नौकाएँ, और कैप्शन— “अभी तो सिर्फ ट्रेलर है, पिक्चर अभी बाकी है।” बस, इंटरनेट ने वही किया जो वह सबसे अच्छा करता है— इस क्षण को वायरल बना दिया। 🎬 बॉलीवुड क्यों? क्योंकि कूटनीति सिर्फ़ भाषणों और समझौतों से नहीं चलती, कभी‑कभी वह चलती है लोकप्रिय संस्कृति की धड़कनों पर। मुंबई में बैठे राजनयिकों ने भारत की डिजिटल नब्ज़ को छुआ— हिंग्लिश, मीम्स, फिल्मी संवाद, और वह चुटीला अंदाज़ जो हर भारतीय टाइमलाइन को घर जैसा लगता है। फिर आया दूसरा तीर— फिल्म धमाल का दृश्य, और भारतीय मीम्स को “GOAT” का ताज। कूटनीति ने जैसे कहा— “अगर बात कहनी है, तो उसी भाषा में कहो जिसे लोग दिल से समझते हैं।” 🌐 परदे के पीछे की कहानी यह सब मज़ाक नहीं था। समुद्र में नाकाबंदी, ऊर्जा आपूर्ति पर मंडराता साया, और दुनिया की चिंतित निगाहें— इन सबके बीच यह “ट्रेलर” एक संकेत भी था, एक शैली भी, और एक रणनीति भी। ✍️ डिजिटल हिंदी का नया अध्याय रोमन लिपि में लिखी हिंग्लिश— न तो पूरी हिंदी, न पूरी अंग्रेज़ी, पर दोनों का सबसे जीवंत संगम। यही भाषा आज मीम‑डिप्लोमेसी की राजदूत बन गई है। यह वही भाषा है जो अंतरराष्ट्रीय तनाव को भी एक पॉप‑कल्चर फ्रेम में रखकर लोगों तक पहुँचाती है— हल्की, पर असरदार। अनौपचारिक, पर यादगार। #ईरान #अमेरिका #युद्ध #मीम #हिंदी #बॉलीवुड #🤣गर्मी के चुटकुले और मीम्स🌞🥵 #🏚चुटकुलों का घर😜 #😂😜मुन्ना भाई मीम्स😂 #🎬 एक्शन मूवीज़
🤣गर्मी के चुटकुले और मीम्स🌞🥵 - Consulate Genera. d 0 sRed bees of the #PersianGulf yeah, the fast missile boats are warming up. Funny how #Trump kept claiming #Irans navy was cfinished": now theyre about to find out how a swarm can pin you down real quick. Abhi toh sirf trailer hai, picture abhi baaki hai #HORMUZ 0 0:29 n Consulate Genera. d 0 sRed bees of the #PersianGulf yeah, the fast missile boats are warming up. Funny how #Trump kept claiming #Irans navy was cfinished": now theyre about to find out how a swarm can pin you down real quick. Abhi toh sirf trailer hai, picture abhi baaki hai #HORMUZ 0 0:29 n - ShareChat
*सचित्र संत महिपती ताहराबादकर* संत महिपती महाराजांनी देशभ्रमण करून महाराष्ट्राबाहेरील ११६ आणि महाराष्ट्रातील १६८ संतांची चरित्रे सुबोध व रसाळ वाणीत लिहून प्राचीन मराठी साहित्याचे भांडार समृद्ध केले, त्यांच्या या अलौकिक कार्याला या सचित्र पुस्तकाद्वारे लोकांपर्यंत पोहोचवण्याचा प्रयत्न करण्यात आला आहे. माझे हे पुस्तक सध्या उपलब्ध नाही. प्रकाशकाने व्यवसाय बंद केला आहे. पुस्तकाचे अधिकार माझ्याकडे आहेत. संत महिपती यांच्या कार्याची माहिती युवा पिढीला सचित्र पुस्तका द्वारे देण्यात यावी हा हेतू होता. डिजिटल युगात युवा पिढी ईबुक मोबाईल वर वाचण्यास अग्रक्रम देतात. त्यामुळे पुस्तक मोफत Archive Internet या जागतिक डिजिटल प्लॅटफॉर्म वर मी उपलब्ध करून दिले आहे. पुस्तिका विषयी : पुस्तकाचे नाव: सचित्र संत महिपती ताहराबादकर लेखक / संकल्पना: विजय प्रभाकर नगरकर चित्रकार: वसंत विटणकर प्रकाशक: बुकमीडिया पब्लिशिंग हाऊस (BookMedia Publishing House), पॉंडिचेरी, ६०५००१, भारत प्रकाशन वर्ष (कॉपीराईट): २०२० ISBN क्रमांक: 978-81-949137-0-2 पुस्तकाचे विवरण (Description): उद्देश आणि स्वरूप: हे एक सचित्र ई-पुस्तक (e-book) आहे, ज्यामध्ये महान संत चरित्रकार 'श्री महिपती ताहराबादकर' यांच्या जीवनकार्यावर आधारित आकर्षक चित्रमय मालिका (कॉमिक स्वरूपात) सादर करण्यात आली आहे. नवीन पिढीसाठी निर्मिती: आजच्या नवीन पिढीला इंटरनेट आणि मोबाईलच्या माध्यमातून संत महिपती महाराजांच्या महान कार्याचा परिचय सहज व्हावा, या उद्देशाने हे पुस्तक प्रकाशित करण्यात आले आहे चित्रांकन: या पुस्तकातील सर्व सुरेख आणि आकर्षक चित्रे अहिल्यानगरचे सुप्रसिद्ध चित्रकार श्री. वसंत विटणकर यांनी अथक परिश्रमाने रेखाटली आहेत. पुस्तक खालील लिंक वर मोफत उपलब्ध आहे.आपण ऑनलाईन वाचू शकता अथवा ईबुक,pdf डाउनलोड करू शकता. 🙏🙏🙏 *विजय प्रभाकर नगरकर* अहिल्यानगर महाराष्ट्र (संत महिपती महाराज परिवार सदस्य) vpnagarkar@gmail.com #संत #विठ्ठल #वारकरी #धर्म https://archive.org/details/sachitra-sant-mahipati
संत - Hfuగే నగౌ सचित्र विजय प्रभाकर नगरकर Hfuగే నగౌ सचित्र विजय प्रभाकर नगरकर - ShareChat
"सिलेंडर" एक आदमी राजनीति की आग लगता है एक आदमी अपना चूल्हा जलाता है एक तीसरा आदमी भी है जो न आग लगाता है, न चूल्हा जलाता है वह सिर्फ़ चूल्हे से खेलता है मैं पूछता हूँ— ‘यह तीसरा आदमी कौन है?’ मेरे देश की संसद मौन है। (स्व धूमिल से क्षमा मांगते हुए) © विजय नगरकर #गैस #युद्ध #राजनीति #सिलेंडर #📚कविता-कहानी संग्रह #🌸 सत्य वचन #✍️ साहित्य एवं शायरी #ईरान
📚कविता-कहानी संग्रह - Hp Indane Bharatgas GAS HP 6 ನ೮e Hp Indane Bharatgas GAS HP 6 ನ೮e - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #🌸 सत्य वचन #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह
❤️जीवन की सीख - जीने लगो तो करना फूल ज़िंदगी के हवाले जाने लगो तो करना बीज धरती के हवाले अमृता प्रीतम Follow us: @swamimsahitya जीने लगो तो करना फूल ज़िंदगी के हवाले जाने लगो तो करना बीज धरती के हवाले अमृता प्रीतम Follow us: @swamimsahitya - ShareChat
#❤️जीवन की सीख #गीत #गाना #फिल्म
❤️जीवन की सीख - एक अकेला इस शहर में, रात में और दोपहर में आब-ओ-दाना ढूँढता है, आशियाना ढूँढता है एक अकेला इस शहर में , रात में और दोपहर में आब-ओ-दाना ढूँढता है, आशियाना ढूँढता है एक अकेला इस शहर में... दिन खाली खाली बर्तन है॰ दिन खाली खाली बर्तन है, और रात है जैसे अंधा कुआँ इन सूनी अंधेरी आँखों में, आँसू की जगह आता है धुआँ जीने की वजह तो कोई नहीं, मरने का बहाना ढूँढता है ढूँढता है...ढूँढता है एक अकेला इस शहर में, रात में और दोपहर में आब ओन्दाना ढूँढता है, आशियाना ढूँढता है एक अकेला इस शहर में... इन उम्र से लंबी सडकों को. इन उम्र से लंबी सडकों को, मंजिल पे पहुँचते देखा नहीं बस दौड़ती फिरती 8, तो देखा नहीं हमने रहती  ठहरते इस अजनबी से शहर में, जाना पहचाना ढूँढता है 8...88 एक अकेला इस शहर में, रात में और दोपहर में आबनओन्दाना ढूँढता है, आशियाना ढूँढता है एक अकेला इस शहर में Music By: অমনব Movie: uRiaT (1977) Lyrics Byः गुलज़ार साहब Ris Performed Byः भूपेंद्र Editing Byः उमेश मोतीरामाणी एक अकेला इस शहर में, रात में और दोपहर में आब-ओ-दाना ढूँढता है, आशियाना ढूँढता है एक अकेला इस शहर में , रात में और दोपहर में आब-ओ-दाना ढूँढता है, आशियाना ढूँढता है एक अकेला इस शहर में... दिन खाली खाली बर्तन है॰ दिन खाली खाली बर्तन है, और रात है जैसे अंधा कुआँ इन सूनी अंधेरी आँखों में, आँसू की जगह आता है धुआँ जीने की वजह तो कोई नहीं, मरने का बहाना ढूँढता है ढूँढता है...ढूँढता है एक अकेला इस शहर में, रात में और दोपहर में आब ओन्दाना ढूँढता है, आशियाना ढूँढता है एक अकेला इस शहर में... इन उम्र से लंबी सडकों को. इन उम्र से लंबी सडकों को, मंजिल पे पहुँचते देखा नहीं बस दौड़ती फिरती 8, तो देखा नहीं हमने रहती  ठहरते इस अजनबी से शहर में, जाना पहचाना ढूँढता है 8...88 एक अकेला इस शहर में, रात में और दोपहर में आबनओन्दाना ढूँढता है, आशियाना ढूँढता है एक अकेला इस शहर में Music By: অমনব Movie: uRiaT (1977) Lyrics Byः गुलज़ार साहब Ris Performed Byः भूपेंद्र Editing Byः उमेश मोतीरामाणी - ShareChat
#✍मेरे पसंदीदा लेखक #❤️जीवन की सीख #📖जीवन का लक्ष्य🤔 #🌸 सत्य वचन
✍मेरे पसंदीदा लेखक - कविताएँ और साहित्य  ekavitaaayein सवाल यह नहीं कि सुंदर कौन है। सवाल यह है कि हम सुंदर किसे मानते हैं। गोरख पांडेय कविताएँ और साहित्य  ekavitaaayein सवाल यह नहीं कि सुंदर कौन है। सवाल यह है कि हम सुंदर किसे मानते हैं। गोरख पांडेय - ShareChat
एलन मस्क के कृत्रिम बुद्धि आधारित ग्रोक ने अब विकिपीडिया के तर्ज पर ग्रोकपीडिया का निर्माण किया है । मेरे लिए यह गौरव है कि मेरा इंग्रजी में परिचय ग्रोकपीडिया में शामिल किया गया है। इसमें ऑनलाइन 20 लिंक का संदर्भ भी दिया गया है। ( लिंक कमेंट बॉक्स में प्रदान की गई है) https://grokipedia.com/page/Vijay_Prabhakar_Nagarkar #😇 चाणक्य नीति #✍मेरे पसंदीदा लेखक #📚कविता-कहानी संग्रह #📗प्रेरक पुस्तकें📘
#📓 हिंदी साहित्य #सुविचार #सुविचार
📓 हिंदी साहित्य - सिर्फ़ पानी व पसीने में बड़ा अंतर है एक पत्थर व नगीने में बड़ा अंतर है घड़ियों की तरह वक्त बिताने वालों মুন साँस लेने में व जीने में बड़ा अंतर है दाउदयनानु हस सिर्फ़ पानी व पसीने में बड़ा अंतर है एक पत्थर व नगीने में बड़ा अंतर है घड़ियों की तरह वक्त बिताने वालों মুন साँस लेने में व जीने में बड़ा अंतर है दाउदयनानु हस - ShareChat
"हिंदी के विकास में हिंदीतर" जयराम फगरे: हिंदी प्रचार-प्रसार को समर्पित एक 'कर्मयोगी' हिंदी भाषा के प्रचार और प्रसार के लिए अपना संपूर्ण जीवन निस्वार्थ भाव से समर्पित करने वाले श्री जयराम फगरे भारतीय भाषाई सेवा के एक जाज्वल्यमान नक्षत्र हैं। महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, पुणे के निदेशक के रूप में कार्यरत श्री फगरे ने आज (12 जनवरी, 2026) अपने जीवन के 96वें वर्ष में कदम रखा है। उनके इस दीर्घायु और कर्मठ जीवन का उद्देश्य केवल और केवल हिंदी भाषा को जन-जन तक पहुँचाना रहा है। जीवन परिचय और प्रारंभिक संघर्ष जयराम फगरे का जन्म 12 जनवरी, 1931 को रत्नागिरी जिले के मूर्तवंडे गाँव में एक साधारण परिवार में हुआ था। उनकी शिक्षा और कर्मभूमि पुणे रही, जहाँ उनकी नियुक्ति नूतन मराठी विद्यालय (N.M.V.) में हिंदी शिक्षक के रूप में हुई। एक शिक्षक के रूप में उन्होंने न केवल छात्रों को भाषा सिखाई, बल्कि अपने संगठन कौशल के बल पर शिक्षक आंदोलनों का नेतृत्व भी किया। उनके व्यक्तित्व पर स्वामी विवेकानंद, कर्मवीर भाऊराव पाटिल और महात्मा गांधी के विचारों का गहरा प्रभाव है। हिंदी के लिए संगठनात्मक योगदान जयराम फगरे का नाम महाराष्ट्र में हिंदी प्रचार के पर्याय के रूप में जाना जाता है। उनके संगठनात्मक कार्यों की यात्रा मुख्य रूप से निम्नलिखित पड़ावों से गुजरी है: * राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा: वर्ष 1966 में वे वर्धा स्थित इस प्रतिष्ठित समिति की कार्यकारिणी के सदस्य चुने गए। * निदेशक पद: वर्ष 2001 में उन्होंने महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, पुणे के संचालक (निदेशक) के रूप में पदभार संभाला। * परीक्षा और कार्यशालाएँ: उन्होंने महाराष्ट्र के अनेक जिलों के स्कूलों का दौरा कर समिति द्वारा आयोजित की जाने वाली हिंदी परीक्षाओं का प्रचार किया। आज उनके प्रयासों से हजारों विद्यार्थी हिंदी की परीक्षा देते हैं। वे प्रतिवर्ष हिंदी शिक्षकों के लिए कार्यशालाओं का आयोजन भी करते हैं। * हिंदी साहित्य सम्मेलन: वर्ष 2003 में पुणे में उनके नेतृत्व में एक विशाल हिंदी साहित्य सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें उन्होंने एक हजार पूर्व छात्रों को आमंत्रित कर हिंदी के प्रति नई चेतना जागृत की थी। प्रकाशित पुस्तकें और संपादन साहित्यिक और शैक्षिक क्षेत्र में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण है। उन्होंने निम्नलिखित महत्वपूर्ण पुस्तकों का संपादन किया है: * ऊर्जावान विभूतियाँ (Urjavan Vibhutiyan) * बापू की बातें (Bapu ki Baatein) * मराठी-हिंदी शब्दकोश (एक अत्यंत उपयोगी भाषाई सेतु) इसके अतिरिक्त, वे समिति द्वारा प्रकाशित होने वाली द्वैमासिक पत्रिका 'समिति संवाद' के संपादक के रूप में भी कार्य देख रहे हैं। पुरस्कार और सम्मान हिंदी के प्रति उनकी निष्ठा और सेवाओं को देखते हुए उन्हें कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा गया है: * पुणे महानगरपालिका द्वारा 'आदर्श शिक्षक पुरस्कार'। * मध्य प्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, भोपाल द्वारा 'हिंदी सेवा' पुरस्कार। * हिंदी साहित्य अकादमी, मुंबई द्वारा विशेष पुरस्कार। * साहित्य सम्मेलन का 'हिंदी गौरव पुरस्कार'। * शिवशाहीर बाबासाहेब पुरंदरे के हाथों 'जीवन गौरव पुरस्कार' (Life Time Achievement Award)। * प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुणे प्रवास के दौरान उन्हें 'पुणेरी पगड़ी' पहनाकर सम्मानित किया था। निष्कर्ष 96 वर्ष की आयु में भी जयराम फगरे का उत्साह युवाओं जैसा है। वे आज भी नियमित रूप से समिति के पुणे कार्यालय में उपस्थित रहकर अपना कार्य करते हैं। उनका जीवन अनुशासन, संयम, विनम्रता और हिंदी के प्रति अगाध प्रेम का प्रतीक है। महाराष्ट्र में हिंदी और मराठी संस्कृतियों को जोड़ने में उनकी भूमिका एक सेतु के समान है। #हिंदी #मराठी_हिंदी #महाराष्ट्र_राष्ट्रभाषा_सभा #पुणे #hindi Jayram Fagare जन्म दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएँ,सर 💐🙏 #📚एजुकेशनल ज्ञान📝 #📓 हिंदी साहित्य #📰GK & करेंट अफेयर्स Students💡
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