Sonu Kumar
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डाकू सिस्टम, जज सिस्टम एवं जूरी सिस्टम में क्या अंतर है, और इनमे से कौनसा बेहतर है? . (1) डकैत : जब कोई व्यक्ति या व्यक्तियों का गिरोह हथियारों के बल पर किसी की संपत्ति का हरण करने को अपना पेशा बना ले तो वे डाकू है। डाकू सिस्टम में, ताकतवर आदमी कमजोर व्यक्ति की संपत्ति का हरण कर लेता है। बेरोजगारी, परिस्थिति, फितरत आदि के अतिरिक्त कई मामलो में बंदूक उठाने की एक बड़ी वजह अन्याय भी होता था। जब अदालतें ठीक से काम नहीं करती है तो अन्याय से पीड़ित लोग बागी होकर बंदूक उठा लेते है। ऐसे कई डाकू हुए जिन्होंने सिर्फ अन्याय की वजह से ही बंदूक उठायी, और बाद में वही उनका पेशा बन गया। . (2) जज सिस्टम : भारत की जज प्रणाली में जिला स्तर पर एक शेषन जज होता है, और जिले में सभी मामलो में दंड देने की शक्ति इस एक आदमी के पास होती है। राज्य में यह शक्ति हाई कोर्ट जज के पास होती है। हाई कोर्ट जज शेषन जज को प्रमोट कर सकता है, या उसे नौकरी से निकाल सकता है। सुप्रीम कोर्ट के जज के पास पॉवर है कि वह हाई कोर्ट जज को प्रमोट कर सके या नौकरी से निकाल सके। जो व्यक्ति एक बार जज बन जाता है, उसके पास विभिन्न स्तरों पर दंड देने की यह शक्ति आजीवन बनी रहती है। एक जज फैसले देने में कितनी ईमानदारी बरतता है, यह खुला रहस्य है। . (3) डकैत एवं जज सिस्टम में अंतर : . डाकुओ में डकैती डालने के कोई नियम नहीं होते किन्तु जिस व्यवस्था में वह काम करते है, उसके अनुसार अमूमन डाकूओ के निशाने पर हमेशा अमीर इंसान रहता है, और कई वजहों से वे गरीब को निशाना नहीं बनाते। यदि वे गरीब आदमियों को लूटेंगे तो आवश्यक धन इकट्ठा करने के लिए ज्यादा आदमियों को निशाना बनाना पड़ेगा, अत: उनकी लागत बढ़ जाएगी !! गरीब आदमीयों को लूटने से समुदाय उनके खिलाफ हो जायेगा। इससे मुखबिरों की संख्या बढ़ जायेगी और वो पकड़े जायेंगे। एक हथियार विहीन अमीर आदमी के पास ऐसा कोई मैकेनिज्म नहीं होता कि वह डाकू को दबा सके। अत: डाकू के लिए अमीर को लूटने में कम जोखिम रहता है। . लेकिन जज सिस्टम का डिजाइन ही कुछ ऐसा होता है कि जज बहुधा कमजोर आदमी को ही निशाना बनाते है। यदि जज ताकतवर आदमी से पैसा खींचने जाएगा तो उसका जोखिम बढ़ जाएगा। कैसे ? मान लीजिये, किसी साधारण आदमी का विवाद किसी मंत्री से हो जाता है, और जज को पता है कि गलती मंत्री की है। लेकिन मंत्री के खिलाफ फैसला देने से पहले जज सोचेगा कि, मंत्री किसी न किसी तरह से मुझे नुकसान पहुँचा सकता है। अत: जज ताकतवर आदमी यानी (मंत्री) के खिलाफ जाने का जोखिम नहीं उठाएगा। वह जानता है कि यदि मैं साधारण आदमी मेरा कुछ भी उखाड़ नहीं सकता !! अत: एक साधारण आदमी के खिलाफ फैसला देने में जज के लिए न्यूनतम जोखिम है। इसी तरह से मान लीजिये कि A एक 5,000 करोड़ की पार्टी है और उसका एक मामला अदालत में है। मान लीजिये कि इस मामले में हजारो जनसाधारण लोग वादी के रूप में है। तब भी जज A से पैसा ले लेगा और क़ानून की कोई न कोई नजीर निकालकर उसके पक्ष में डिग्री दे देगा !! क्योंकि जज जानता है कि, जन साधारण के पक्ष में फैसला देने में उसे कोई लाभ नहीं है। लेकिन A के खिलाफ फैसला देने से वह घूस की राशि से भी वंचित होगा एवं A के ऊँचे संपर्को के कारण भविष्य में जज के लिए जोखिम बढ़ जाएगा। . दुसरे शब्दों में, जज सिस्टम में अमीर आदमी के पास अपनी पहुँच एवं पैसे का इस्तेमाल करने का अवसर होता है। अत: जज बड़े आदमी पर कभी हाथ नहीं डालते। वे जानते है कि इससे हमारे लेने के देने पड़ सकते है। अत: जब किसी बड़े एवं छोटे आदमी की लड़ाई होगी तो जज स्वभाविक रूप से ताकतवर आदमी को छोड़ देगा और कमजोर की गर्दन मरोड़ देगा। चाहे कमजोर आदमियों की संख्या कितनी भी ज्यादा ही क्यों न हो। . लेकिन यदि किसी डाकू के सामने अमीर एवं गरीब आदमी का झगडा आएगा तो वह अमीर को लूट लेगा और गरीब आदमी को जाने देगा। वजह यह है कि एक तो डाकू अमीर आदमी से ज्यादा पैसा वसूल सकता है, और तिस पर भी अमीर आदमी के पास डाकू को दबाने का कोई मैकेनिज्म नहीं है। तो जब भी किसी क्षेत्र में डाकू पनप जाते थे तो पुलिस को उन्हें पकड़ने में काफी दिक्कत आती थी। क्योंकि वे आम नागरिको / गरीब आदमी को अमूमन कोई परेशानी नहीं देते थे और इस वजह से नागरिको का समर्थन उन्हें प्राप्त रहता था। . डाकुओ एवं जजों में दूसरा बड़ा फर्क यह है कि, डाकू यदि जन साधारण को ज्यादा लूटना शुरू करेगा तो नागरिक हथियार जुटा कर उसका प्रतिकार करना शुरू करेंगे। जबकि जज सिस्टम में यह लूट (जिसे घूसखोरी एवं भाई भतीजावाद के नाम से जाना जाता है) पूरी तरह से कानूनी होती है, और आदमी को गम खाकर बैठ जाना पड़ता है। यदि व्यक्ति जज पर घूसखोरी का आरोप लगाएगा तो जज अवमानना का आरोप बनाकर उसे जेल में डाल देंगे !! . (4) जूरी सिस्टम : जूरी सिस्टम में दंड देने की शक्ति लगातार विभिन्न लोगो में हस्तांतरित होती रहती है। जूरी सिस्टम में प्रत्येक मुकदमे के लिए 12 से 15 मतदाताओ का लॉटरी द्वारा चयन करके जूरी मंडल का गठन किया जाता है। जब जज मुकदमा सुनता है तो मुकदमे के बगल में बैठकर यह जूरी भी मुकदमा सुनती है। सभी पक्षों को सुनने एवं पेश किये गए सबूतों को देखने के बाद प्रत्येक जूरी सदस्य बंद लिफाफे में अपना फैसला दे देता है, और जूरी भंग हो जाती है। बहुमत द्वारा दिए फैसले को जूरी का फैसला माना जाता है। जज सिस्टम एवं जूरी सिस्टम में विस्तृत अंतर इस जवाब में देखा जा सकता है - Pawan Kumar Sharma का जवाब - न्याय की "जज व्यवस्था" और "जूरी व्यवस्था" में क्या प्रमुख अंतर है ? . [ वैसे जूरी सिस्टम एक कंसेप्ट है, और जूरी सिस्टम कितने बेहतर तरीके से काम करेगा यह इसके ड्राफ्ट पर निर्भर करता है। उदाहरण के लिए जूरी कोर्ट के प्रस्तावित ड्राफ्ट में अंतिम फैसला देने का अधिकार जज के पास ही है, और जूरी द्वारा दिए गए निर्णय की हैसियत परामर्शकारी है। इसके अलावा जूरी कोर्ट में जूरी मंडल को सिर्फ सरल मुकदमें सुनने का अधिकार दिया गया है, जटिल मुकदमो का नहीं। ] . (5) डाकू सिस्टम, जज सिस्टम और जूरी सिस्टम में से कौनसा बेहतर है ? वैसे डाकू सिस्टम अपने आप में कोई सिस्टम नहीं है, अत: यह लम्बे समय तक टिक नहीं सकता। वे सिर्फ बंदूक के बल पर अपनी सत्ता बनाते है। यदि डाकूओ की संख्या बढ़ने लगी और उन्होंने बड़े पैमाने पर लूट पाट शुरू की तो जन साधारण अपनी सुरक्षा के लिए खुद का सशस्त्रीकरण करना शुरू कर देगा। और जैसे ही नागरिको के पास हथियार आते है डाकू जमा हो जाते है। तब डाकू राहजनी और मौका देखकर लूट खसोट तो कर सकते है, किन्तु एलानिया डकैती नहीं कर सकते। . चूंकि जज अपेक्षाकृत छोटे एवं कमजोर लोगो को लूटते है, अत: जज सिस्टम में ताकतवर लोग जजों से गठजोड़ बनाकर गलत वजहों से कारोबारी बढ़त एवं एकाधिकार बनाए रखने में सफल हो जाते है। यह एक बड़ी वजह है कि, ताकतवर लोग हमेशा जज सिस्टम की पैरोकारी करते है, ताकि जरूरत होने पर वे पैसा फेंक कर जजों को खरीद सके !! . जूरी सिस्टम में, दंड देने की शक्ति लगातार विभिन्न लोगो में हस्तांतरित होती रहती है, अत: ताकतवर लोगो द्वारा इस तरह का गठजोड़ बनाया नहीं जा सकता। अत: मेरे विचार में जूरी सिस्टम जज सिस्टम की तुलना में बेहतर तरीके से काम करता है। . न्याय प्रणाली को लेकर पेड मीडिया के प्रायोजको का एजेंडा है कि – भारत में जज सिस्टम चालू रहना चाहिए, अत: आप भारत की सभी पेड मीडिया पार्टियों एवं पेड मीडिया द्वारा खड़े किये गए ब्रांडेड नेताओं को जज सिस्टम के समर्थन में पायेंगे !! जूरी सिस्टम से उन्हें इतनी घृणा है कि वे इस पर बात करना तक पंसद नहीं करते !! . (6) शोले : . (1) ठाकुर गाँव वालो से कहता है – शंकर , गंगा कसम जब भी वक्त आया है तो हमने दरातियाँ पिघलाकर तलवारे बनायी है। . असल में, गब्बर गाँव वालो को इसीलिए लूट रहा था क्योंकि वे हथियार विहीन थे। ठाकुर उन्हें लड़ने के लिए जब तलवारे बनाने की चाबी देता है तो काशीराम पलट कर जवाब देता है कि – ठाकुर, बंदूक और तलवार की लड़ाई में तब भी जीतेगी तो बंदूक ही !! . पर चूंकि पेड मीडिया के प्रायोजक नागरिको को हथियारबंद करने के खिलाफ है, अत: पेड सलीम जावेद ने पटकथा में इस तथ्य को दर्ज नहीं किया था कि – सरकार नागरिको को बंदूके रखने की अनुमति नहीं दे रही है, लेकिन गब्बर को बंदूक रखने से रोक नहीं रही है, और इस वजह से रामगढ़ के वासी 2 बार टेक्स चुका रहे है। सरकार को भी और गब्बर को भी !! . (2) गब्बर जिस तरह से चौपाल पर आकर धान इकट्ठा करता था, उस समय के डाकू जन साधारण से इस तरह हफ्ता वसूली नही करते थे। ठाकुर की तिजौरी में काफी पैसे थे, और उसके परिवार की हत्या करने के बाद वह असहाय एवं अकेला था। लेकिन गब्बर उसे कभी लूटने नहीं गया !! . फ़िल्में आखिर फ़िल्में है, और इनका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं होता। लेकिन चूंकि फ़िल्में भी पेड मीडिया का हिस्सा है, अत: इनमें बहुत सफाई के साथ ऐसी सूचनाओं को समायोजित कर दिया जाता है, जो पेड मीडिया के प्रायोजको के अनुकूल हो। . ------------ . बहरहाल, हमारे लिए बुरी खबर यह है कि अमेरिका, ब्रिटेन एवं फ़्रांस के बाद अब चाइना भी धीरे धीरे जज सिस्टम को कमजोर करके जूरी सिस्टम की तरफ जा रहा है। इसी साल उन्होंने एसेसर* सिस्टम का दायरा विस्तृत कर दिया है। मतलब, छोटी इकाइयों को सरंक्षण मिलने से चाइना अब और भी और ज्यादा बेहतर एवं ज्यादा सस्ती तकनिकी वस्तुओ का उत्पादन करने लगेगा। और इससे भारत एवं चीन के बीच शक्ति अनुपात और भी बिगड़ेगा !! . (*) एसेसर सिस्टम जूरी सिस्टम का ही एक चिल्लर वर्जन है। मतलब यह कमजोर जूरी प्रथा की एक किस्म है। लेकिन तब भी यह जज सिस्टम जैसे बदतर सिस्टम से कई गुना बेहतर है। . How a people’s jury system is opening up China’s courts . #🇮🇳 देशभक्ति #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🌷शुभ रविवार
जैसे-जैसे ड्रोन और मिसाइल सस्ते होते जा रहे हैं, भारत को बंदूकें खरीदने में पैसा खर्च करने की ज़रूरत है, न कि 4 मंज़िला से ऊँची इमारतें बनाने की। भारत, मुंबई समेत सभी भारतीय शहरों में - जगह की कमी नहीं है। मैं दोहराता हूँ - मुंबई समेत सभी शहरों में भारत में जगह की कमी नहीं है। और हमारे पास अच्छी एंटी मिसाइल या एंटी ड्रोन टेक्नोलॉजी नहीं है। और ड्रोन और मिसाइल सस्ते और सस्ते होते जाएँगे। चीन या USA या तुकीये पाकिस्तान और बांग्लादेश को ड्रोन और मिसाइल बेच सकते हैं। चीन श्रीलंका में बेस बना रहा है। इसलिए बेहतर है कि हम करोड़ों भारतीयों को बंदूकें, गोलियाँ और बम बनाना सिखाने पर पैसा खर्च करें और कम ऊँची 4 मंज़िला बिल्डिंग में रहें, न कि महँगी मल्टीस्टोरी बिल्डिंग बनाएँ। #🇮🇳 देशभक्ति #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🌷शुभ रविवार
#🌷शुभ रविवार #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🚘नया दिन नया व्लॉग🧳 #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🇮🇳 देशभक्ति
🌷शुभ रविवार - वोट वापसी CM और SP नागरिकों का सबसे ज्यादा नुकसान मुख्यमंत्री अधीक्षक करते हैं मुख्यमंत्री और जिला gf कोई भी गलत कानून छाप सकता है और उस बलपूर्वक लागू करवाने का गलत कानून को पुलिस अधीक्षक करता है इसलिए काम जिला सबसे पहले वोट  वापसी मुख्यमंत्री और वोट वापसी जिला पुलिस अधीक्षक ( SP ) कानून लागू होनी चाहिए | tinyurl com/Manifestooo प्रस्ताबित बोट बापसी पासयुक का नमूना  वोटवापसी CM और वोटवापसी SP वोट वापसी इन 2 कानून मात्र से काफी समस्याएं Ig$ RTR आंदोलन से जुड़े সমাদ ক্ীণী ( बोट वापसी धन वापसी पासबुक जिले के मतदाता के लिए 9969800187 More Detail Right to Recall Party 8452036906 9887742837 Hr Nn : 50 4#/201#-2/19/0'1'51- वोट वापसी CM और SP नागरिकों का सबसे ज्यादा नुकसान मुख्यमंत्री अधीक्षक करते हैं मुख्यमंत्री और जिला gf कोई भी गलत कानून छाप सकता है और उस बलपूर्वक लागू करवाने का गलत कानून को पुलिस अधीक्षक करता है इसलिए काम जिला सबसे पहले वोट  वापसी मुख्यमंत्री और वोट वापसी जिला पुलिस अधीक्षक ( SP ) कानून लागू होनी चाहिए | tinyurl com/Manifestooo प्रस्ताबित बोट बापसी पासयुक का नमूना  वोटवापसी CM और वोटवापसी SP वोट वापसी इन 2 कानून मात्र से काफी समस्याएं Ig$ RTR आंदोलन से जुड़े সমাদ ক্ীণী ( बोट वापसी धन वापसी पासबुक जिले के मतदाता के लिए 9969800187 More Detail Right to Recall Party 8452036906 9887742837 Hr Nn : 50 4#/201#-2/19/0'1'51- - ShareChat
दुनिया में शांति स्थापित करने के लिए शक्ति का संतुलन अत्यंत आवश्यक है l शक्ति का संतुलन करने के लिए नागरिकों के पास अधिक से अधिक ताकत देने वाले कानून की आवश्यकता है l अमेरिका में नागरिकों को ताकत देने वाले अच्छे कानून लागू होने के कारण अन्य देशों के मुकाबले वहां का शक्ति बहुत ज्यादा बढ़ गया है l इसीलिए वह किसी भी देश से युद्ध करने के लिए तैयार रहता है जबरदस्ती हमला करता है, युद्ध होते हैं युद्ध से बचाव के लिए शक्ति का संतुलन कायम करने की आवश्यकता है l भारत के बचाव के लिए भारत के सभी सज्जन नागरिकों को बंदूक रखने की आवश्यकता है उसके लिए सभी मतदाताओं को लाइसेंस की मांग करनी चाहिए l कर्नाटक राज्य के कोडागु जिले का कुर्ग बंदूक कानून जनमत संग्रह करवाने के लिए प्रधानमंत्री को लिखित निर्देश पत्र भेजना चाहिए @highlight PMO India #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🇮🇳 देशभक्ति #🚘नया दिन नया व्लॉग🧳 #🌷शुभ रविवार
#🚘नया दिन नया व्लॉग🧳 #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🌷शुभ रविवार #🇮🇳 देशभक्ति #❤️Love You ज़िंदगी ❤️
🚘नया दिन नया व्लॉग🧳 - https://tinyurl com/JuryCourt03 Visit :- की गुंडागिरी से परेशान आ चुके हैं ? पुलिस क्या आप क्या आपको थाने में जाने में भय लगता है ? क्या पुलिस आपके साथ बदतमीजी से व्यवहार करती है ? चाहते हैं कि पुलिस दादागीरी बंद हो ? क्या क्या आप चाहते हैं पुलिस थानों का भ्रष्टाचार कम हो जाए ? आप क्या आप चाहते हैं पुलिस घूस लेना बंद करें ? क्या आप चाहते हैं पुलिस विभाग का भ्रष्टाचार खत्म हो ? तो आज ही JuryCourt की मांग उठाए For MoreDetail - 7827286338 99898 001875| 8452036906, 988777428371 https://tinyurl com/JuryCourt03 Visit :- की गुंडागिरी से परेशान आ चुके हैं ? पुलिस क्या आप क्या आपको थाने में जाने में भय लगता है ? क्या पुलिस आपके साथ बदतमीजी से व्यवहार करती है ? चाहते हैं कि पुलिस दादागीरी बंद हो ? क्या क्या आप चाहते हैं पुलिस थानों का भ्रष्टाचार कम हो जाए ? आप क्या आप चाहते हैं पुलिस घूस लेना बंद करें ? क्या आप चाहते हैं पुलिस विभाग का भ्रष्टाचार खत्म हो ? तो आज ही JuryCourt की मांग उठाए For MoreDetail - 7827286338 99898 001875| 8452036906, 988777428371 - ShareChat
ईरानी जहाज़ भारत सरकार के निमंत्रण पर भारत के नौसैनिक क्षेत्र में प्रवेश किया था। . इसके बावजूद मोदी अमेरिका की कार्रवाई का समर्थन कर रहे हैं। . यह काफी शर्मनाक है। . और मोदी, रागा और अरके अभी भी कानून बनाने या प्राइवेट मेंबर बिल लाने से इनकार कर रहे हैं ताकि FB, YT, Twi आदि को बाहर निकाला जा सके। . हमें जवाबी कार्रवाई के रूप में सभी अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनियों को बाहर निकाल देना चाहिए। #💓 मोहब्बत दिल से #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #🌷शुभ रविवार #🇮🇳 देशभक्ति
💓 मोहब्बत दिल से - Right to Recall PM law RTR Prime Minister law draft RRPIndiain Narendra Modi just surrendered the Indian Ocean to USA and Israel PM is Compromised 1 Fire! Dena لب الؤنل IRIS Indian Ocean] F Epstein | Fil Adani Right to Recall PM law RTR Prime Minister law draft RRPIndiain Narendra Modi just surrendered the Indian Ocean to USA and Israel PM is Compromised 1 Fire! Dena لب الؤنل IRIS Indian Ocean] F Epstein | Fil Adani - ShareChat
क्या सरकार के द्वारा रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 49% से 74% करना राष्ट्रहित में है? . डिफेन्स में 74% FDI का मतलब है कि हम अपना देश अधिकृत रूप से गंवाने के कगार पर आ चुके है। ज्यादातर सम्भावना है कि, अगले 3-4 वर्ष में यह सीमा 100% बढ़ा दी जायेगी और तब हम घोषित रूप से एक परजीवी / गुलाम देश होंगे। . (1) 1990 तक भारत में परमिट राज था। हथियारों के निर्माण में न तो निजी कम्पनियों को मुक्त रूप से उत्पादन करने की छूट थी, और न ही विदेशी कम्पनियों को। किन्तु WTO समझौते के बाद जब लाइसेंस राज ख़त्म किया गया तो राष्ट्रिय सुरक्षा का विषय होने के कारण हथियारों के उत्पादन में विदेशी निवेश पर प्रतिबन्ध जारी रखा गया। कारगिल युद्ध में भारत को अमेरिका से हथियारों की मदद चाहिए थी, और तब भारत को हथियार निर्माताओ की काफी शर्तें माननी पड़ी। हथियारो के निर्माण में विदेशी निवेश को खोलना इसमें से एक था। . 2001 में हमें डिफेन्स में 26% एफडीआई की अनुमति देने के लिए बाध्य होना पड़ा। . 2015 में वे फिर से यह सीमा 49% तक बढ़वाने में कामयाब हुए। . 2020 में कोरोना की हड़बोंग में उन्होंने अब इसे 74% तक बढ़वा लिया है। . FDI in defence limit raised to 74%; FM Sitharaman announces major ‘Make in India’ push for defence . (2) पेड मीडिया द्वारा ऍफ़डीआई के समर्थन में दिए गए गलत तर्क : . 2.1. डिफेन्स में एफडीआई से भारत में टेक्नोलोजी ट्रांसफर होगा !! . जटिल तकनीक के मामले में टेक्नोलोजी ट्रांसफर सिर्फ एक थ्योरी है, और व्यवहारिक रूप से जटिल निर्माण की तकनीक ट्रांसफर की ही नहीं जा सकती। और हथियारों के निर्माण में टेक्नोलोजी ट्रांसफर की बात करना एक निर्मम मजाक है। दुनिया के किसी देश ने आज किसी भी देश को हथियारों की तकनीक का हस्तांतरण नहीं किया है, और न ही किया जा सकता है। इस बारे में विस्तृत विवरण के लिए यह जवाब पढ़ें - Pawan Kumar Sharma का जवाब - विश्व स्तरीय अंतरिक्ष और मिसाइल प्रोग्राम होने के बावजूद भी भारत तेजस के लिए जेट इंजन क्यों नहीं बना पाया? . 2.2. भारत पहले से ही विदेशियों से हथियार आयात कर रहा है, अत: विदेशी भारत में आकर हथियार बनाते है तो हमें कोई नुकसान नहीं !! . पहली बात तो यह है कि, यह तर्क देने वाले इस बिंदु को जानबुझकर गायब कर देते है कि, किन कानूनों को गेजेट में छापने से भारत स्वदेशी तकनीक आधारित जटिल हथियारो का निर्माण कर सकता है। तो पहले वे भारत में हथियार निर्माण संभव बनाने के लिए आवश्यक कानूनों का विरोध करते है, जिससे हमें हथियार आयात करने पड़ते है, और फिर वे कहते है कि भारत को हथियार आयात करने पड़ रहे है, अत: हमें विदेशियों को बुलाकर भारत में हथियार बनाने के कारखाने लगाने के लिए कहना चाहिए !! . इससे हमें निम्न तरह के नुकसान होंगे जब तक विदेशी निवेश की सीमा 49% थी तब तक विदेशी किसी हथियार कम्पनी पर अपना स्वामित्व नहीं ले सकते थे। 74% स्टेक के बाद अब हथियार निर्माण कम्पनियों पर विदेशियों का स्वामित्व निर्णायक जाएगा। अत: अब अमेरिकी-ब्रिटिश-फ्रेंच कम्पनियां भारत में बड़े पैमाने पर हथियार निर्माण के कारखाने लगाएगी। . जब विदेशी भारत में आकर हथियार बनायेंगे तो नेताओं को धमका कर / उन्हें ब्राइब / म्राइब देकर सरकारी हथियार कम्पनियों का बचा खुचा बेस भी तोड़ देंगे। इससे हम हथियारों के निर्माण में विदेशियों पर और भी निर्भर हो जायेंगे । हथियार निर्माण की सरकारी कम्पनियों को अब धीरे धीरे या तो बंद कर दिया जाएगा या विदेशी इनका अधिग्रहण कर लेंगे। . पेड मीडिया पूरी तरह से हथियार कम्पनियों के नियंत्रण में काम करता है। अत: हथियार कंपनियों के भारत में सीधे घुस आने के बाद मीडिया की शक्ति विस्फोटक रूप से बढ़ेगी, जिससे भारत के नेताओ की निर्भरता अमेरिकी-ब्रिटिश धनिकों पर और भी बुरी तरह से बढ़ जायेगी। . हथियार कम्पनियों का मुख्य धंधा खनिज लूटना है। अत: अब वे भारत के नेताओं से ऐसे क़ानून छपवाएंगे जिससे वे लगभग मुफ्त में भारत के मिनरल्स लूट सके। तो अभी भारत के प्राकृतिक संसाधन की बहुत बड़े पैमाने पर लूट होने वाली है। और यह लूट पूरी तरह से कानूनी होगी। . ये कम्पनियां जितना मुनाफा बनाएगी उसके बदले हमें डॉलर चुकाने होंगे। पहले हम हथियार लेने के लिए सीधे डॉलर चुका रहे थे, और अब रिपेट्रीएशन के रूप में डॉलर चुकायेंगे। मतलब ऍफ़डीआई डॉलर संकट में कोई कमी नहीं लाता, बल्कि इसमें इजाफा ही करता है। . ऍफ़डीआई सबसे ज्यादा महत्त्वपूर्ण विषय है, और डिफेन्स में यह काफी खतरनाक है। इस बारे में अधिक जानकारी के लिए निचे दिए गए तीनो जवाब पढ़ें। . (i) Pawan Kumar Sharma का जवाब - प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति क्यों दी जाती है? इससे हमें क्या फायदे और नुकसान होंगे? . (ii) Pawan Kumar Sharma का जवाब - भारत के मीडिया को नियंत्रित करने वाली शक्तियों का एजेंडा क्या है ? . (iii) Pawan Kumar Sharma का जवाब - क्या इंदिरा गांधी वाक़ई सबसे ताक़तवर भारतीय प्रधानमंत्री थीं? . (3) यह अमेरिका की चीन के साथ युद्ध की तैयारी है। युद्ध कब होगा मुझे नहीं पता। लेकिन जैसे जैसे अमेरिका भारत का अधिग्रहण करता जाएगा वैसे वैसे युद्ध करीब आता जाएगा। और इस मामले में डिफेंस में एफडीआई निर्णायक है। दरअसल, अमेरिका भारत पर इतना कंट्रोल ले चुका है कि वह चीन का किला तोड़ने के लिए अब भारत का इस्तेमाल एक ऊंट की तरह कर सकता है। भारत और चीन के बीच इस युद्ध में चीन ख़त्म हो जाएगा और भारत आधे से अधिक बर्बाद होगा, और चीन के ख़त्म होने के बाद अमेरिका भारत को एक विशाल फिलिपिन्स में बदल देगा। . तो अगले कुछ वर्षो में निम्नलिखित में से कोई एक या एक से अधिक परिस्थितियों के घटने की सम्भावनाए प्रबल है : . यदि पहले चरण में भारत एवं चीन का युद्ध शुरू होता है तो भारत के ज्यादातर नागरिक चीन के खिलाफ युद्ध का समर्थन नहीं करेंगे, अत: ज्यादातर सम्भावना है कि अमेरिका भारत के नेताओं का इस्तेमाल करके पाकिस्तान पर हमला करने के हालात खड़े करेगा। भारत की जनता पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में जाने के लिए आसानी से तैयार हो जाएगी। उदाहरण के लिए अमेरिका से चाबी मिलने के बाद भारत POK, गिलगित-बाल्टिस्तान पर हमला कर सकता है। . पहले भारत पाकिस्तान का युद्ध शुरू होगा, और फिर अपना निवेश बचाने के लिए चीन को बीच में आना पड़ेगा। फर्स्ट राउंड में अमेरिका भारत को सिर्फ सीमित मात्रा में हथियारो की मदद भेजेगा, और जब भारत पिटने लगेगा तो अमेरिका भारत की तरफ से युद्ध की कमान संभाल लेगा, एवं बड़े पैमाने पर हथियार भेजना शुरू कर देगा। और भारत के नागरिक सोचेंगे कि अमेरिका हमें "बचाने" आया है !! . यदि पाकिस्तान के राजनेता युद्ध को टालने की कोशिश करते है (जो कि वे कर सकते है) तो अमेरिका पाकिस्तान के जनरलों को डॉलर एवं हथियार भेजेगा और कश्मीर पर हमला करने को कहेगा। इस तरह भारत एवं पाकिस्तान का युद्ध शुरू होगा। बाद में अमेरिका भारत को डबल हथियार भेजेगा और भारत की सेना पाकिस्तान में अंदर तक घुस जाएगी। जैसे ही भारत की सेना POK में घुसेगी, CPEC को बचाने के लिए चीन को बीच में आना पड़ेगा। . यदि चीन पाकिस्तान की सेना को भारत पर हमला करने से रोकने में सफल हो जाता है तो अमेरिका आतंकी समूहों एवं इंटर्नल इंसरजेंसी का सहारा लेगा। अमेरिका कश्मीर में हथियार भेजकर गुह युद्ध शुरु करेगा। साथ ही अमेरिका असम में भी हथियार भेजेगा। इन दोनों हिस्सों में यदि हथियार आने शुरू हो जाते है तो हिन्दुओ का बड़े पैमाने पर कत्ले आम होगा और लाखो नागरिको को पलायन करना पड़ सकता है। . और तब भारत में State Vs इस्लामिस्ट का एक गृह युद्ध शुरू हो सकता है, जिसमें बड़ी संख्या में मुस्लिमों का कत्ले आम हो सकता है। इससे भारतीय मुस्लिमो बचाने के लिए ईरान, तुर्की, पाकिस्तान, अफगानिस्तान साथ में आ सकते है, और भारत में कट्टरपंथी इस्लामिक समूहों को बड़े पैमाने पर हथियार भेजना शुरू कर देंगे। तब यह जंग भारतीय हिन्दू Vs एशियाई महाद्वीप के मुस्लिम के बीच बन जायेगी। तब अमेरिका भारत को हथियारों की मदद करना शुरु करेगा और जंग शुरू हो जाएगी। . और इस तरह के दर्जनों पहलू हो सकते है जिनका इस्तेमाल करके अमेरिका भारत, पाकिस्तान, चीन, ईरान, अफगानिस्तान के बीच जंग शुरू कर सकता है। हमारी समस्या यह है कि भारत के पास इससे बचने का कोई उपाय नहीं है। सब कुछ तय करने वाला अमेरिका है। या तय करने वाला है चीन। यदि ये देश भारत को जंग का मैदान बनाना तय करते है तो भारत क्या चाहता है, यह महत्वहीन है। भारत की इच्छा महत्त्वहीन इसलिए है क्योंकि भारत जंग लड़ने और खुद को जंग से बचाने के लिए अमेरिकी हथियारों पर बुरी तरह से निर्भर है। . (4) तो युद्ध कब होगा ? . इसका जवाब मेरे पास नहीं है। किसी के पास नहीं है। इतिहास हमें यही बताता है कि इसी तरह की बातें चलती रहती है, और अचानक किसी भी समय किसी न किसी वजह से युद्ध शुरू हो जाता है। हम बस इतना देख सकते है कि युद्ध की तैयारी कहाँ हो रही है । और यह साफ़ तौर पर देखा जा सकता है, कि अमेरिका चीन के खिलाफ युद्ध की तैयारी कर रहा है। और जब तक अमेरिका भारत की सेना, जमीन एवं संसाधनों का इस्तेमाल न करें, तब तक अमेरिका किसी भी स्थिति में चीन से लड़ नहीं सकता। चीन को तोड़ने के लिए उसे भारत चाहिए ही चाहिए। . यदि भारत के नागरिक सरकार पर दबाव बनाकर ऍफ़डीआई को रूकवाने में कामयाब हो जाते है, तो अमेरिकी-ब्रिटिश हथियार कंपनियों द्वारा भारत का अधिग्रहण करने की प्रक्रिया रूक जाएगी, और युद्ध कुछ समय के लिए टल जाएगा। सिर्फ कुछ समय के लिए !! . युद्ध पूरी तरह से इसीलिए नहीं टलेगा, क्योंकि भारत के सेना विदेशी हथियारों पर निर्भर है। अत: तब अमेरिका पाकिस्तान का इस्तेमाल करके जंग शुरू करेगा। यदि पाकिस्तान को पूरे पूरे अमेरिकी हथियार (मिलिट्री ड्रोन, फाइटर प्लेन, लेसर गाइडेड मिसाइले, लेसर गाईडेड बम, आदि) मिल जाते है, तो पाकिस्तान भारत के काफी अंदर तक घुस आएगा। . यदि अमेरिका ऐसा नहीं करता है, या नहीं कर पाता है, तो वक्त के साथ चीन की सेना मजबूत होती जायेगी, और फिर चीन भारत के साथ ठीक वही करेगा जो की आज अमेरिका भारत के साथ कर रहा है। मतलब चीन भारत का आर्थिक एवं सैन्य रूप से अधिग्रहण कर लेगा। . असल में, इन सभी स्थितियों में या इस तरह की किसी भी स्थिति में भारत की स्थिति खुद को बचाने के लिए इधर उधर भागने वाले की रहेगी। और हथियारों की लिस्ट लेकर जाने के लिए हमारे पास सिर्फ 2 ठिकाने है – रूस एवं अमेरिका !! . रूस अब हमसे काफी दूर हो चुका है, और कोई वजह नहीं कि वह भारत को बचाने के लिए या तो अमेरिका या तो चीन से दुश्मनी मोल ले। क्योंकि भारत की स्थिति एक तरबूज की है, जिसे काटने और काटकर बांटने के लिए चीन एवं अमेरिका चाकू लेकर खड़े है। अभी ऍफ़डीआई के माध्यम से दोनों देश थोड़ी थोड़ी फांके ले रहे है। . यदि ऐसे ही चलता रहा तो धीरे धीरे अमेरिका एवं चीन भारत को आधा आधा बिना किसी जंग के ही बाँट लेंगे। और यदि जंग हो जाती है, भारत किसके हिस्से में जायेगा इसका फैसला जंग करेगी। मतलब यह उसी तरह की लड़ाई है, जो ब्रिटिश एवं फ्रांसिस आज से 220 साल पहले भारत में लड़ रहे है। ब्रिटिश के पास फ़्रांस से बेहतर हथियार थे अत: तब भारत ईस्ट इण्डिया कम्पनी के हिस्से में चला गया था। . (5) भारत में आपको ऐसे कई बुद्धिजीवी मिलेंगे जो इसे समस्या के रूप में देखते ही नहीं है कि, भारत की सेना विदेशियों के हथियारों पर निर्भर है !! घूम फिर कर वे अपनी बहस को इस बिंदु के इर्द गिर्द रखते है कि, भारत की सेना “पर्याप्त” रूप से मजबूत है। अमेरिका हमारा मित्र देश है, अत: वह चीन को ख़त्म करने के बाद भारत को ख़त्म नहीं करेगा। अब भारत का कभी युद्ध नहीं होगा, अत: आपको भय फैलाने की जरूरत नहीं है। और यदि भारत को युद्ध का सामना करना पड़ता भी है तो भारत की सेना पर्याप्त रूप से मजबूत है !! आदि आदि . दुसरे शब्दों में, वे भारत की सेना को विदेशियों के हथियारों पर निर्भर बनाए रखना चाहते है, ताकि अमेरिका भारत की जमीन एवं संसाधनों का इस्तेमाल चीन को तोड़ने में कर सके। दरअसल, ये बुद्धिजीवी युद्ध की चर्चा को टाल कर भारत को युद्ध की तरफ धकेल रहे है। और वे ऐसा इसीलिए कर रहे है, क्योंकि पेड मीडिया ने उन्हें ऐसा करने के लिए चाबी दी है। . मेरे विचार में, भारत के प्रत्येक नागरिक को अब इस बारे में स्टेंड लेना चाहिए कि क्या वह अमेरिका को चीन के खिलाफ अपनी सेना एवं जमीन का इस्तेमाल करने देना चाहता है या नहीं। और यदि आप भारत की जमीन का इस्तेमाल चीन के खिलाफ करने देना चाहते है, तो आपको यह बात समझ लेनी चाहिए कि, यह फैसला पेड मीडिया का है, आपका नही। क्योंकि पेड मीडिया के प्रायोजक इस युद्ध की तैयारी पिछले 10 वर्षो से कर रहे है। भारत में ऍफ़डीआई उनकी इसी तैयारी का हिस्सा है। . (6) समाधान : मेरा प्रस्ताव जूरी कोर्ट एवं रिक्त भूमि कर का है। यदि ये दोनों क़ानून गेजेट में छाप दिए जाते है तो भारत अगले 5-6 वर्ष में स्वदेशी तकनीक आधारित इतने ताकतवर हथियार बना सकता है, कि हम चीन एवं अमेरिका की सेना का मुकाबला कर सके। यदि एक बार हम खुद के हथियार बनाने की क्षमता जुटा लेते है, तो युद्ध को टाला जा सकता है। . यदि हम स्वदेशी हथियारों का उत्पादन करने में असफल रहते है तो चीन से युद्ध टल जाने पर भी अमेरिका भारत का पूरी तरह से अधिग्रहण कर लेगा। . ======== #🇮🇳 देशभक्ति #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #💓 मोहब्बत दिल से #🌷शुभ रविवार
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नियम और कानून में क्या अंतर है ? क्या करने की अनुमति है, एवं क्या करने की अनुमति नहीं है की सूचना देने वाले पाठ्य को नियम या क़ानून कहते है। विशिष्ट एवं संक्षिप्त होने के कारण इन्हें हमेशा बिन्दुओ के रूप में लिखा जाता है। . नियम एवं कानून में अंतर : . नियम निजी संस्थाओ द्वारा बनाए जाते है, जबकि क़ानून बनाने की शक्ति सिर्फ सरकार के पास होती है नियमों को तोड़ने पर आर्थिक या करावासीय दंड का सामना नहीं करना पड़ता, जबकि क़ानून तोड़ने पर हमेशा दंड का सामना करना पड़ता है। . मूल अंतर इतना ही है। इससे सम्बंधित कुछ अन्य मूल्यपरक विवरण निचे दिए गए है . (1) सरकार किसे कहते है ? अमुक क्षेत्र में जिस संस्था के पास सेना रखने की शक्ति होती है, उस संस्था को सरकार कहते है। . (2) सरकार में कौन लोग होते है ? मुख्यत: सांसदो और विधायको के समूह से सरकार बनती है। सांसद संसद में बैठते है, और विधायक विधानसभाओ में। . (3) सरकार का मुख्य काम क्या है ? सरकार का एक मात्र काम क़ानून बनाना है। क़ानून बनाने के अलावा उन्हें कुछ नहीं करना होता। संसद और विधानसभा उनके दफ्तर है, जहाँ बैठकर वे क़ानून बनाते है। . (4) जो लोग क़ानून तोड़ते है क्या उन्हें पकड़ना सरकार का काम नहीं है ? नहीं। सरकार का काम उन्हें पकड़ना नहीं है। सरकार उन्हें पकड़ने के लिए पुलिस के क़ानून बना देगी और पुलिस वाले कानून तोड़ने वालो को पकड़ते रहेंगे। इसी तरह जो भी काम करना हो सरकार उस काम को करने के लिए क़ानून बनाती है बस। क़ानून बनाने के अलावा सरकार और कुछ नहीं करती, और न ही कुछ कर सकती है। . क़ानून बनाने के अलावा आप सरकार के अंगो (सांसद, विधायक, मंत्री, मुख्यमंत्री एवं प्रधानमंत्री) को जो भी करते देखते है, वह एक तमाशा होता है। तमाशे से ज्यादा उसमें कोई कीमत नहीं होती। . (5) व्यवस्था (System) किसे कहते है ? नियमों एवं कानूनों के समुच्चय (Set) को व्यवस्था कहते है। . (6) क्या सरकार व्यवस्था नहीं बनाती ? नहीं। सरकार व्यवस्था नहीं बनाती। दरअसल व्यवस्था अपने आप में स्वतन्त्र रूप से कुछ नहीं होता। व्यवस्था का मूल तत्व क़ानून है। सरकार सिर्फ क़ानून बनाती है, और कानूनों के सेट को आप व्यवस्था कहने लगते है। तो दरअसल जब आप कहते है कि, भारत की व्यवस्था (System) खराब है, तो आप कह रहे होते है कि भारत के क़ानून ख़राब है। . यह बात दीगर है कि जब आप कहते है कि अमुक क़ानून खराब है, तो इसमें एक विशिष्टता होती है। जबकि व्यवस्था खराब है, वक्तव्य एक नारा बन कर रह जाता है !! . (7) किसी व्यवस्था में परिवर्तन कैसे किया जा सकता है ? . जैसा ऊपर बताया है कि व्यवस्था अपने आप में कानूनों का एक सेट है, अत: जैसे ही कानून में बदलाव किया जायेगा वैसे ही व्यवस्था बदल जायेगी। क़ानून को बदले बिना आप व्यवस्था बदल ही नहीं सकते। क्योंकि व्यवस्था जैसा कुछ होता ही नहीं है, जिसे कानून को बदले बिना बदला जा सके। . भारत की ट्रेफिक व्यवस्था के उदाहरण से इसे समझते है : . भारत में सड़कें बनाने और टोल वसूलने के कुछ कानून है, गाड़ी खरीदने और इसे चलाने के फिर से कुछ क़ानून है। इसी तरह चालको के सड़क पर व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए RTO एवं ट्रेफिक पुलिस विभाग है, और इन विभागों में काम करने वाले अधिकारीयों के लिए सेवा शर्तो के फिर से कुछ क़ानून है। . इस तरह भारत भर में कुछ 100 से ज्यादा तरह के क़ानून मिलकर भारत में ट्रेफिक व्यवस्था का निर्माण करते है। और इसी तरह से पुलिस व्यवस्था, न्याय व्यवस्था, बिजली व्यवस्था, जलदाय व्यवस्था आदि सैंकड़ो व्यवस्थाएं है, और प्रत्येक व्यवस्था के पीछे फिर से सैंकड़ो क़ानून है। . इन सैंकड़ो कानूनों में से आप जैसे ही किसी एक कानून को छेड़ेंगे वैसे ही व्यवस्था बदल जायेगी। उदारहण के लिए ट्रेफिक व्यवस्था का एक क़ानून यह कहता है कि – जब भी आप कोई वाहन सड़क पर लायेंगे तो इसके आगे पीछे वाहन का नंबर लिखा होना चाहिए। . अब यदि आप इस बिंदु को निकाल देते है, तो सड़क पर अनियंत्रित गति से दौड़ने वाले वाहनों की संख्या बढ़ जायेगी और लोग बेतहाशा ट्रेफिक रूल तोड़ने लगेंगे। क्योंकि अब ट्रेफिक रूल तोड़ने वालो को चिन्हित करके पकड़ा नहीं जा सकता। इस तरह क़ानून के सिर्फ एक बिंदु में बदलाव करने से पूरी व्यवस्था में दोष आना शुरू हो जाता है। . यदि कानूनों में दोष नहीं है तो व्यवस्था में भी दोष नहीं रहेगा, और यदि कानून दोषपूर्ण है तो व्यवस्था भी दोषपूर्ण हो जाएगी। और एक दोषपूर्ण व्यवस्था हमेशा दोषपूर्ण ढंग से ही काम करगी। क्योंकि प्रक्रिया एवं नतीजो का दोहराव ही व्यवस्था की मुख्य विशेषता है। . सार : यदि आपको देश का सिस्टम सुधारना है तो आपको क़ानून सुधारने होंगे। जैसे जैसे क़ानून सुधरेंगे वैसे वैसे सिस्टम में सुधार आएगा। . और क़ानून सुधारने की दिशा में काम करने का पहला कदम यह है कि राजनैतिक विमर्श करने वाले ऐसे बुद्धिजीवियों से दूरी बनाकर रखें जिन्हें व्यवस्था बदलनी चाहिए, भारत का सिस्टम ही खराब है, पूरा सिस्टम भ्रष्ट हो चूका है टाइप की बौद्धिक जुगाली करने का व्यसन है। . जब भी आपका सामना किसी ऐसे व्यक्ति से हो जो देश की व्यवस्था में बदलाव लाने की बात कर रहा हो तो उससे पूछे भारत की अमुक व्यवस्था में बदलाव लाने के लिए वे किन क़ानूनो को बदलने का प्रस्ताव कर रहे है ? . और आप देखेंगे कि उसके पास कानूनों में बदलाव की न तो कोई रूप रेखा है और न ही प्रस्तावित कानूनों के ड्राफ्ट है। वह सिर्फ व्यवस्था परिवर्तन शब्द बेचकर तमाशा खड़ा कर रहा है। . ----------------- #🇮🇳 देशभक्ति #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🌷शुभ रविवार #❤️Love You ज़िंदगी ❤️ #💓 मोहब्बत दिल से