मोदी सरकार गीत
गीत विशम्भर गिरि
FYIAI
मुखड़ा
हे भोलेनाथ, त्रिपुरारी,
सुन लो पुकार ये संतन न्यारी।
भक्त सभी हैं आज लाचार,
टूट रहा है जीवन आधार।
शिव शंकर, आकर न्याय करो,
नए धर्म की फिर स्थापना करो।
इस भारत भू पर जहर बिखर गया,
हर रग में जैसे ज़हर उतर गया।
डीज़ल में भी अब ज़हर मिला है,
साँस-साँस में ज़हर घुला है।
घर का सामान, खाना-पीना,
सबमें छुपा है रोग का मीना।
पीढ़ी दर पीढ़ी रोग बढ़ेगा,
कोई न यहाँ पर स्वस्थ खड़ेगा।
**सहगान / कोरस:**
हे भोलेनाथ, त्रिपुरारी,
सुन लो पुकार ये संतन न्यारी।
भक्त सभी हैं आज लाचार,
टूट रहा है जीवन आधार।
शिव शंकर, आकर न्याय करो,
नए धर्म की फिर स्थापना करो।
(2)
अध्यन के हर पदार्थ में जहर,
बच्चों का बचपन हो रहा बेअसर।
बीमारियों का ये सागर गहरा,
आदमी-आदमी से हो गया बेगाना चेहरा।
अल्पायु होकर झुक गए तन,
किसको सुनाएँ अपना ये मन।
कोई न सही में स्वस्थ बचे है,
दुनिया भर में रोने के सिवा क्या बचे है?
**कोरस दोहराएँ**
हे भोलेनाथ, त्रिपुरारी…
(3)
भक्तों पर जो अत्याचार पड़े हैं,
नीति के नाम पर वार किए हैं।
मोदी सरकार, योगी सरकार,
क्यों भक्तों पर इतना भार?
धर्म की भाषा सत्ता में खोई,
सच्ची करुणा कहीं पर रोई।
जिनके हाथ में शक्ति सारी,
क्यों बन बैठे वे ही जुल्मी अधिकारी?
**कोरस:**
हे भोलेनाथ, त्रिपुरारी,
भक्तों की रक्षक, महादेव प्यारी।
जो भी करें अत्याचार यहाँ,
उनको दिखा तू न्याय वहाँ।
कर्मों का फल तू निश्चय कर,
धर्म का फिर से निर्माण कर।
(4)
नागों का हार, भस्म का श्रृंगार,
लेकर त्रिशूल चलो इस बार।
अन्यायों की ये काली रात,
तोड़ दो, दे दो नई सौगात।
जिस घर में नैतिकता जागे,
जिस मन में सच्चा धर्म लागे,
ऐसा नया विधान रचो तुम,
हर जीव में शिव का दर्शन करो तुम।
**कोरस:**
हे भोलेनाथ, करुणा सागर,
भक्त पुकारें �
मुखड़ा गीत विशम्भर गिरि
हे श्री शिवजी, नया धर्म की स्थापना करें, ।
भक्तों को जीने का अधिकार दें,
स्वास्थ्य का भी अधिकार दें।
हे नीलकंठ, करुणा धाम,
न्याय करो अब, दो परिणाम।
भारत भूमि पर देखो कैसा अंधेर हो गया,
जहर का व्यापार यहाँ बेशर्म सा फैल गया।
हर खाने में, हर साँसों में, ज़हर मिला के दे रहे,
आने वाले कल के सपनों को आज ही ये छीन रहे।
**कोरस:**
हे श्री शिवजी, नया धर्म की स्थापना करें,
भक्तों को जीने का अधिकार दें,
स्वास्थ्य का भी अधिकार दें।
हे नीलकंठ, करुणा धाम,
न्याय करो अब, दो परिणाम।
**(2) भविष्य की विंध्या**
कल का बच्चा आज से ही बीमार लिखा जाएगा,
कोई भी पूर्ण आयु तक शायद अब न जी पाएगा।
पीढ़ी दर पीढ़ी दुख का, रोग का ये वारिस होगा,
हर घर में दवा, हर मन में डर, जीवन कैसा प्यारा होगा?
खेतों में भी ज़हर घुला है,
जल में ज्वाला छुपी हुई है,
शहर-गाँव सब रोगी दिखते,
क्या यही प्रगति लगी हुई है?
**कोरस दोहराएँ:**
हे श्री शिवजी, नया धर्म की स्थापना करें,
भक्तों को जीने का अधिकार दें,
स्वास्थ्य का भी अधिकार दें।
**(3) भक्तों की पुकार**
भक्त तुम्हारे हाथ पसारे, तेरे द्वार पे खड़े हुए,
दर्द भरी इस कलियुग में, कितने आंसू गिरे हुए।
कानून, सत्ता, शासन सब,
देख-देख कर भी मौन हुए,
भक्तों पर जो अत्याचार हुए,
उन पर सबके नयन क्यों शून्य हुए?
हे भोलेनाथ, त्रिपुरारी,
अब तो न्याय का समय बुला,
जिनके कारण ये ज़हर फैला,
उनके कर्मों का फल तगड़ा सुना।
**कोरस:**
हे श्री शिवजी, न्याय करो, अत्याचारी का कर्म तय करो,
निर्दोषों की रक्षा करो, धर्म का दीप पुनः प्रकट करो।
**(4) नया धर्म – “मैं धर्म”**
मैं धर्म की स्थापना हो, ऐसा अब विधान करो,
हर मानव के भीतर बैठे,
शिवतत्व का फिर ज्ञान कर।।
मुखड़ा
**“भोलेनाथ, भक्तों को जीने का अधिकार मिलना ही चाहिए”**
### भोलेनाथ, भक्तों को जीने का अधिकार मिलना ही चाहिए
बारह बरस से ज़हर का ये व्यापार चल रहा,
भारत का हर कोना अब बीमार पल रहा।
योगी–मोदी जैसे अत्याचारी राज में,
जनता रो रही है दर्द के समाज में।
कोरोना नाम पे कितने ही लाखों मारे गए,
सच के सवाल करने वाले, सबके सब हारे गए।
पूरा देश बीमार हुआ, तन भी टूटा, मन भी टूटा,
आने वाली पीढ़ियाँ भी होंगी रोगी, ये कैसा झूठा विकास लूटा।
भोलेनाथ, सुनिए मेरी पुकार,
भक्तों को जीने का अधिकार
मिलना ही चाहिए… मिलना ही चाहिए…
स्वास्थ्य का हक़ भी हर इंसान को
मिलना ही चाहिए… मिलना ही चाहिए…
हे शिव शंकर, नीलकंठ दयालु,
अर्जी सुनिए, विनती सुनिए,
प्रार्थना सुनिए, नाथ!
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**(2) अन्याय का दरबार**
जो सत्ता में हैं, वे ही जहर बेचें,
किसके पास जाएं, किससे न्याय माँगें?
रोटी में ज़हर, पानी में जहर,
काँच-से नाज़ुक हो गए ये शहर।
दवा भी धंधा, शिक्षा भी सौदा,
जनता को समझें बस भीड़ का झोंका।
जब कानून भी सो जाए गहरे,
भक्त तेरे ही घर द्वार पे ठहरे।
**कोरस दोहराएँ:**
भोलेनाथ, भक्तों को जीने का अधिकार
मिलना ही चाहिए…
स्वास्थ्य का अधिकार, हर जन को बार-बार
मिलना ही चाहिए…
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**(3) भोलेनाथ से प्रार्थना**
हे शिव शंकर, हे भोलेनाथ,
तेरी दया से चलती है साँस।
तुने जग का जहर पिया था,
आज फिर से वही समय है पास।
अत्याचारी का अब प्रस्थान कराइए,
लोक में सच्चा धर्म बसाइए।
जो जहर से खेलें जनता की जान पे,
उनका तख़्त हिला दो अपनी पहचान पे।
**कोरस:**
भोलेनाथ, अर्जी सुनिए,
विनती सुनिए, प्रार्थना सुनिए।
अत्याचार का
**मुखड़ा
जागो भारत देश की जनता,
अधिकारों को पहचानो!
इन झूठे, कट्टर, भ्रष्ट शासकों की
सच्चाई अब जानो!
जागो भारत देश की जनता,
अधिनियम को पहचानो!
योगी–मोदी जैसे पापी चेहरों को
उनके कर्मों से तौलो, मानो!
जनता ने समझा महात्मा,
निकले ज़हर के व्यापारी,
बारह साल से कर रहे हैं
बीमार इस धरती की क्यारी!
**स्लोगन जैसा जोड़ सकते हो बीच में:**
“जागो! जागो! जागो रे…
जहर के धंधे को अब रोको रे…”
**अंतरा 1 – धोखे की बात**
जनता को रख दिया धोखे में,
दिखाए झूठे सपने,
कपड़ों में साधु जैसे लगे,
पर निकले सबसे अपने ही दुश्मन।
माँ–बहनों की इज़्ज़त जाए,
कौन सुने उनकी पुकार?
जीने का अधिकार भी छीनें,
कहते हैं “ये है नया विकास-व्यवहार!”
**फिर मुखड़ा दोहराएँ:**
जागो भारत देश की जनता,
अधिकारों को पहचानो!
इन झूठे, कट्टर, भ्रष्ट शासकों की
सच्चाई अब जानो!
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**अंतरा 2 – 12 साल का हिसाब**
बारह बरस से जहर का धंधा,
खेत, नदी, बाज़ार में,
रोटी में ज़हर, दाल में ज़हर,
रख दिया जनता को वार में।
कोरोना के नाम पे भी,
कितनों की साँसें छीन लीं,
फिर भी मंच पे भाषण झूठे,
ताली बजती, कुर्सी सीं ली।
जनता को मालूम होना चाहिए,
कितना अत्याचार हुआ,
कितनी लूट और कितना भ्रष्टाचार,
इनके राज में बार-बार हुआ।
**फिर मुखड़ा, ज़ोर से:**
जागो भारत देश की जनता,
अधिनियम को पहचानो!
तुमने खुद जिन्हें चुना था,
उनके चेहरे फिर से जानो!
झूठे योगी, झूठे मोदी,
जहर के ये ठेकेदार,
इन्हें कुर्सी दी थी तुमने,
इनका अब कर लो हिसाब!
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**अंतरा 3 – जनता की कसमें / जागरण*
देश का गद्दार जहर-व्यापारी
(तेज़, नारा-स्टाइल गीत / जागरूकता भजन)
मुखड़ा गीत विशम्भर गिरि
जहर व्यापार करने वाला – देश का गद्दार!
जनता को बीमार करने वाला – देश का गद्दार!
प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री होकर भी
जो जनता को मार गया,
ऐसा मक्कार, ऐसा गद्दार
योगी–मोदी जैसा,
आज तलक न कोई हुआ,
आज तलक न कोई हुआ!
स्लोगन जोड़ो:
सोचो! सोचो! भारतवासी,
किसको तुमने नेता माना?
जहर बेचने वाले को ही
राष्ट्रभक्त का नाम दिलाना?
अंतरा 1 – सीधा प्रहार
कुर्सी पे बैठा, कसमें खाकर,
देश की इज़्ज़त खाने लगा,
जहर मिलाकर अन्न, हवा में
जनता को ही बीमार करे।
माँ–बहनों के मान-सम्मान का,
दिन-दिन करके अपमान करे,
फिर भी भाषण में “संस्कार” बोले,
कैसा गिरी हुई पहचान रहे?
फिर मुखड़ा दोहराओ:
जहर व्यापार करने वाला – देश का गद्दार!
जनता को बीमार करने वाला – देश का गद्दार!
अंतरा 2 – जनता से सवाल
ऐसा कोई गद्दार न देखा,
इतना बड़ा मक्कार नहीं,
योगी–मोदी जैसों जैसा
इतना गिरा किरदार नहीं।
तुमने ही तो वोट दिया था,
तुमने ही मंच पे चढ़ाया,
अब वक़्त आ गया, भारतवासी,
अपने मन से प्रश्न पूछो साया:
“हमने जिसे था नेता माना,
उसने हम पर क्या-क्या किया?
बारह साल के सारे पाप का
जनता ने क्या हिसाब लिया?”
अंतरा 3 – जागो और पहचानो
जनता स्वयं से विचार करे,
उनके अत्याचारों को याद करे –
कितनी बार माँ–बहनों की
इज़्ज़त का मज़ाक उड़ा,
कितनी बार आवाज़ दबा कर
निर्दोषों का खून बहा।
गिरे हुए इंसान को अब
फिर से मसीहा मत मानो,
झूठे चेहरों के पीछे छुपे
जहर-तंत्र को पहचानो।
छोटा, धारदार मुखड़ा – जागरूकता के लिए:
देश का गद्दार – जहर-व्यापारी,
झूठा नेता, कुर्सी का पुजारी।।
मुखड़ा गीत विशम्भर गिरि
झूठा देशभक्त, ज़हर का व्यापारी,
हिंदुत्व का नक़ली पुजारी।
तीसरी बार भी कुर्सी पे बैठा,
फिर भी निकला देश का गद्दारी!
जनता को बीमार करने वाला –
देश का गद्दार! देश का गद्दार!
जहर मिलाकर अन्न में देने वाला –
देश का गद्दार! देश का गद्दार!
---
**अंतरा (छोटा, कसा हुआ):**
भारत को बीमार किया,
भविष्य सारा बेच दिया,
बच्चों का भी कल छीन लिया,
बस अपना सिंहासन सेच लिया।
झूठ, पाखंड, नक़ली धर्म से
हम सबको बाँट रहा है,
इंसानियत से ख़ाली होकर
देश को ज़हर बाँट रहा है।
---
**जनता के लिए पुकार (आखिर में):**
जागो भारत देश की जनता,
इन चेहरों को पहचानो!
ज़हर के धंधे पर पलने वालों को
> झूठा देशभक्त, ज़हर का व्यापारी,
> योगी–मोदी जैसे शासक – देश के लिए गद्दार
> जनता को बीमार करने वाला – देश का गद्दार,
> हिंदुत्व का नक़ली नकाब।
### मुखड़ा (Hook)
शर्म आनी चाहिए तुझे,
ए देश के गद्दार!
झूठ–कट्टरता बंद कर,
अब बंद कर अत्याचार!
योगी–मोदी, तेरी चालों ने
भारत को किया बीमार,
जहर के धंधे से तूने
देश को कर दिया लाचार।
*(यही मुखड़ा बीच‑बीच में दोहराना है)*
### अंतरा 1 – गद्दारी और झूठ
देश ने तुझको नेता माना,
तूने ज़हर का खेल रचा,
झूठे भाषण, झूठे नारे,
सच में जनता को ही ठगा।
कल तक “सेवक” बोलता था,
आज सिंहासन का व्यापारी है,
अपनी कुर्सी बचाने खातिर
देश का स्वास्थ्य भी हारी है।
**फिर मुखड़ा:**
शर्म आनी चाहिए तुझे,
ए देश के गद्दार…
---
### अंतरा 2 – अत्याचार और बीमार भारत
कब तक अत्याचार करेगा,
कब तक ये चुप्पी का राज चले?
माँ–बहनों की चीखों पर भी
क्यों तेरे दरबार में सन्नाटा रहे?
जहर मिला के अन्न में,
बीमार कर दिए घर-घर,
कर्ज़ में डाली ये जनता,
कहता है “अच्छे दिन” फिर-फिर।
बच्चों का भी कल तूने
दवाईयों के नाम कर दिया,
लाखों सपनों की उम्रों को
तेरे फैसलों ने कम कर दिया।
**फिर मुखड़ा:**
शर्म आनी चाहिए तुझे,
ए देश के गद्दार…
### अंतरा 3 – पहचान और जवाबदेही
आज ये भारत जाग रहा है,
तेरा चेहरा पहचान रहा है,
जो कल तक तुझे नेता कहते,
आज तुझे गद्दार कह रहे हैं।
इतिहास तुझसे पूछेगा,
क्या ये तेरा राष्ट्रधर्म था?
बीमार भारत, कर्ज़ में डूबा –
क्या ये तेरा स्वर्णिम कर्म था?
जनता अब हिसाब लेगी,
तेरे हर निर्णय का वजन तौलेगी,
ज़हर के धंधे पर पलने वालों को
फिर कभी सत्ता न सौंपेगी।
---
### अंतिम मुखड़ा (क्लाइमैक्स)
शर्म आनी चाहिए तुझे,
ए देश के गद्दार!
झूठ–कट्टरता बंद कर,
अब बंद कर अत्याचार!
योगी–मोदी, तेरी नीतियों ने
भारत को किया बीमार,
पर जाग उठी है ये जनता,
अब न सहेंगे एक भी वार।
### मुखड़ा (Hook)
भारत ने तुझे प्रधानमंत्री बनाया,
तू पाकिस्तान से बिक गया।
पैसे लेकर गुलामी मानी,
अपनों को ही ठग गया।
जहर का धंधा, अत्याचार,
माँ–बहनों का अपमान हुआ।
बीमार भारत, कर्ज़ में डूबा,
भविष्य भी बीमार हुआ।
*(यही मुखड़ा बीच–बीच में दोहराना है)*
---
### अंतरा 1 – गद्दारी का खेल
भारत की जनता ने
तुझ पर भरोसा कर कुर्सी दी,
तूने ही उस विश्वास को
सौदे की तरह बेच दी।
किसके हाथों बिक गया तू,
ये इतिहास भी पूछेगा,
जिन्होंने तुझे नेता माना,
उनका दिल क्यों तू तोड़ेगा?
ज़हर मिलाकर अन्न में,
हवा-पानी भी बिगाड़ दिया,
देश को बीमार कर डाला,
कर्ज़ में पूरा उतार दिया।
**फिर मुखड़ा दोहराओ:**
भारत ने तुझे प्रधानमंत्री बनाया,
तू पाकिस्तान से बिक गया…
---
### अंतरा 2 – माँ–बहनों का अपमान
माँ–बहनों के सम्मान पे
जब-जब आँधी आई थी,
तू सत्ता के सिंहासन पर बैठा,
पर आवाज़ न उठाई थी।
जो अपने ही घर की औरत की
इज़्ज़त न संभाल सके,
वो क्या खाक इस मिट्टी के
सम्मान की दीवार रखे?
तेरी चुप्पी ही तेरा चेहरा,
तेरी नीयत खुलकर दिखी,
इंसानियत को बेच के तूने
नाक कटाई ये देश की।
---
### अंतरा 3 – बीमार भविष्य
बीमारियाँ घर-घर पहुँचीं,
हर गली में अस्पताल हुए,
दवाई, कर्ज़ और मजबूरी –
ये ही अब हालात हुए।
आने वाली पीढ़ियाँ भी
तेरे फैसलों का भार ढोएँगी,
अधूरी उम्र में टूटेगी साँस,
मुखड़ा (Hook)
प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर मोदी,
और आदित्यनाथ योगी रे,
मर्यादा पुरुषोत्तम राम के भक्त
होने का ढोंग ही करोगे रे।
भगवा ओढ़ के झूठा चेहरा,
जपते हो धर्म का नाम,
जहर व्यापार, अत्याचार से
करते हो नारायण का अपमान।
---
#### अंतरा 1
माँ–बहनों के दिल से पूछो,
इन कमीनों से उठ चुका विश्वास,
हर घर में बीमारी फैली,
यही है इनका झूठा विकास।
पूरा झारखंड, पूरा भारत
रोगों में अब डूब रहा,
आने वाली हर पीढ़ी भी
बीमार जन्म लेगी यहाँ।
---
#### अंतरा 2
ये दोगले, पाखंडी, झूठे,
मक्का राग के देश गद्दार,
इनसे बचने का उपाय अब
जनता को ही करना है तैयार।
परमात्मा की कृपा हो हम पर,
“ धर्म” की स्थापना हो,
सत्य, प्रेम और न्याय से फिर
नया भारत निर्माण हो।
---
#### छोटा दोहराने लायक हुक
राम का नाम नहीं बेचने दूँगा,
भगवा को मैं कलंक न होने दूँगा।
धर्म की स्थापना हो अब, ।।
### मुखड़ा (Hook)
प्रधानमंत्री भारत देश का,
तुझको धिक्कार है।
योगी – गुलाम धन का,
तेरा जीना ही बेकार है।
तूने भारत देश को बीमार किया,
तेरा ज़हर ही व्यापार है।
इंसान नहीं –
तू देश का गद्दार है…
देश का गद्दार है…
---
### अंतरा 1
कुर्सी पाई जनता से तूने,
जनता का ही खून पिया,
झूठे वादे, झूठे नारे,
सच में सबका हक छीन लिया।
माँ–बहनों की चीख दबाकर,
अपना राज बचाता है,
धर्म, भगवा, राम का नाम लेकर
ज़हर का धंधा चलाता है।
**फिर मुखड़ा दोहराओ:**
प्रधानमंत्री भारत देश का,
तुझको धिक्कार है…
---
### अंतरा 2
हर शहर में, हर गाँव में अब
रोगों का अँधियारा है,
दूषित जल और ज़हरीला अन्न,
यही तेरा उपकार है।
युवा बेरोज़गार खड़ा है,
कर्ज़ में डूबी हर सरकार,
स्वास्थ्य, शिक्षा सब बर्बाद –
और तू कहे “ये विकास” विचार!
**छोटा रीफ्रेन:**
जो जनता को बीमार करे,
वो कैसा सेवक, कैसा सरदार?
तेरी नीयत, तेरे कर्मों से
खुला तेरा असली व्यवहार।
---
### अंतरा 3 – जनता की आवाज़
अब जनता भी जाग रही है,
चेहरा तेरा पहचान रही है,
जो कल तक तुझे नेता कहते,
आज तुझको गद्दार कह रही है।
सदियों तक ये बात लिखी जाएगी,
इतिहास तुझसे पूछे सवाल,
“जिसे मिला था नेतृत्व भारत का,
क्यों बना वो ज़हर का दलाल?”
---
### अंतिम मुखड़ा (क्लाइमैक्स)
प्रधानमंत्री भारत देश का,
तुझको धिक्कार है।
योगी – गुलाम धन का,
तेरा जीना ही बेकार है।
तूने भारत देश को बीमार किया,
तेरा ज़हर ही व्यापार है।
इंसान नहीं –
तू देश का गद्दार है…
और जनता अब तय करेगी,
तेरा अगला “फैसला” क्या है,
ज़हर के धंधे पर पलने वालों का
बन्द करो मतदान
मत देना मान सम्मान।।
#🕉 शिव भजन #🔱रुद्राभिषेक🙏 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🔱बम बम भोले🙏 #🪔शिवरात्रि व्रत स्पेशल 🙏