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500 से अधिक गीत दान में लिंक मुफ्त में गीत लिंक Free song vishambhar https://www.facebook.com/profile.php?id=61578628681839 #🚩सालासर बालाजी 🙏 #🚩जय श्री खाटूश्याम 🙏 #🇮🇳मेरा भारत, मेरी शान #🇮🇳 देशभक्ति #🎖️देश के सिपाही
🚩सालासर बालाजी 🙏 - Sharechat @vshambhar giri परमज्ञान परमसत्य के आधार पर ईश्वर परमात्मा एक ही है रूप अनेकों परमात्मा के सत्य वचन सब एक ही है Sharechat @vshambhar giri परमज्ञान परमसत्य के आधार पर ईश्वर परमात्मा एक ही है रूप अनेकों परमात्मा के सत्य वचन सब एक ही है - ShareChat
स्टोरी पाकिस्तानी जेहाद की। । कोरोना ,महामारी , भारत देश के खिलाफ साजिश।। भाईयों बहनों हमारा भारत देश जिसकी कुछ गुप्त कथाएं अति महत्वपूर्ण सूचना वर्तमान समय मे अनुसार जो हमें जानकारी मिली है आप तक पहुंचा रहे हैं। जैसा कि अपना भारत देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ आजादी के पहले ही अमेरिका ब्रिटेन , जैसे विकसित देश एक संगठन बन चुके थे ,उस संगठन के तहत देश को आजादी तो दिलाई जाती थी ,किंतु कुछ शर्तें लागू रहती थी, जैसे की कोई भी देश आजाद हो रहा है । ब्रिटेन अर्थात इंग्लैंड ब्रिटिश साम्राज्य तो उसे प्रभु यीशु मसीह का मंत्र महामंत्र जय मसीह सभी प्रधानमंत्री को गुप्त रुप से दिया जाता था । महामंत्र जय मसीह देने के लिए देश के किसी भी नागरिक को गुरु बनाया जाता था । जो कि ब्रिटिश साम्राज्य और देश के प्रधानमंत्री के बीच समन्वय का कार्य करता था। जो कि प्रधानमंत्री का गुरु होता था। फिलहाल भारत देश को आजाद करने के कुछ शर्तें जो मोहम्मद जिन्ना और हमारे आदरणीय पंडित जवाहरलाल नेहरू जी को भी शर्तें दी गई। उनके भी धर्मगुरु नियुक्त किए गए । और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री और पाकिस्तान के इस्लामिक देश के प्रथम प्रधानमंत्री को जय मसीह का मंत्र दे दिया गया ।और उन्हें भी थोड़ा अनुदान व सहायता राशि दी गई। और भारत और पाकिस्तान दो देशों को अपने-अपने तरीके से रियासतों को मिलने का भी प्रावधान किया गया। हालांकि रियासतों को मिलने का कार्य बहुत ही कठिन लक्ष्य था । फिर भी हमारे देश के महापुरुषों ने जैसे सरदार वल्लभभाई पटेल व पंडित जवाहरलाल नेहरू अनेकों महापुरुषों ने बहुत ही अधिक परिश्रम व देश के लिए पूरा योगदान दिया । और वर्तमान भारत देश को मजबूत बनाया। हालांकि मोहम्मद जिन्ना इस्लामिक देश पाकिस्तान को पाकर खुश तो थे , लेकिन रियासतों को मिलाने में असफल रहे, जिसके चलते उन्होंने एक बड़ी साजिश प्लान की और कुछ मुस्लिम इस्लामी जिहादी मानसिकता के लोगों को भारत में हिंदू बनाकर भेजा। मोहम्मद जिन्ना का प्लान अमेरिका व ब्रिटेन के मंसूबे को भी पूरा करता था। ताकि भारत देश को निरंतर ही बीमार, कमजोर , करने के लिए तमाम प्लान बनाया गया। जिसके तहत आज अमेरिका ब्रिटेन जैसे विकसित कई राष्ट्र मिलकर प्रभु यीशु मसीह व आदि योजनाएं पूरे विश्व में कोरोना, महामारियां, और प्रभु यीशु का महामंत्र जय मसीह आदि सभी देशों में लगभग लगभग लागू करके आज भी चल ही रहा है। जिसके तहत सभी देशों को अनुदान व कर्ज के रूप में धन मिलता है ।इसलिए सभी देशों के प्रमुख लीडर नेता महामारियां फैलाने में एक साथ लगे ही रहते हैं । तभी तो कोरोना नमक महामारी पिछले विगत 4 वर्ष पहले और अभी यही कोरोना महामारी बनाई जा रही है। कोरोना महामारी फैलने या लोगों को बीमार करके बीमारियों में भी धन कमाने वाले संगठन प्राइवेट व नेताओं के मिली भगत से यह महामारियां कंपनी फैक्ट्री में मानव अहितकर पदार्थ मिलवाना , पानी में मीठा जहर मिलवाना हवा में ड्रोन से सर्वर से हवा में जहरीला पदार्थ हवा में उड़ाकर लोगों को बीमार करने की साजिश चल रही है। फिलहाल वर्तमान समय में हमारे माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर मोदी जी के नेतृत्व में विकास कार्य तो हुए, किंतु इन्होंने इतना कर्ज लिया और महामारियां अधिक बनाई और फिर से अधिक महामारी बनाकर अधिक कर्ज लेने के फिराक में ही रहते हैं। और विजय कृष्ण आचार्य निर्देशक धूम फिल्म के रिश्तेदार योगी और मोदी जी शायद मोहम्मद जिन्ना के सपनों को साकार करने में लगे हुए हैं । और उन्हें जिहाद के पैसे मिलते ही हैं। पाकिस्तान तो अमेरिका का गुलाम हो ही चुका है। किंतु हमारे देश के नेता भी इस्लामिक देश पाकिस्तान के इस तरह गुलाम हो चुके हैं , कि हिंदुओं को अधिक जहर देने के लिए एक टीमवर्क की तरह कार्य होता है , और हिंदुओं के साथ विशेष अत्याचार उत्पीड़न और अधिक जहर देकर जल्द से जल्द बीमार लाशों का व्यापार भी पाकिस्तानी जिहाद से पैसे अलग से इन्हें मिलते हैं, जिसमें कि हिंदुओं का विशेष अहित करना है , इस कार्य के लिए बहुत पहले से एक टीम थी उसे टीम में हमारे आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर मोदी जी ,उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी और विजय कृष्ण आचार्य निर्देशक धूम फिल्म को धर्मगुरु जय मसीह का मंत्र देने के लिए चुना गया , जो लगभग लगभग 30 सालों से यह कार्य कर ही रहा है। और हमारे देश को बीमार कमजोर कर्जवाला देश बनाने में पूरी तरीके से अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। विजय कृष्ण आचार्य निर्देशक धूम फिल्म बहुत ही अपराधिक व जेहादी पाकिस्तान का एजेंट है जो कि मुस्लिम होते हुए भी बचपन से हिंदू बना और हिंदुओं को ही अपनी टीम में सभी को मंत्र दिया और हिंदुओं को ही जहर देने का कार्य निरंतर करता चला रहा है। लूट हत्या बलात्कार जैसे कार्य करने वाले व्यक्ति विजय कृष्ण आचार्य को धर्मगुरु जय मसीह प्रभु का मंत्र देने के लिए गलत चयन प्रधानमंत्री जी ने जानबूझकर किया । क्योंकि यह व्यक्ति मोदी जी और योगी जी का खास रिश्तेदार है। अपने रिश्तेदार विजय कृष्ण आचार्य निर्देशक धूम फिल्म को इतना इन्होंने बढ़ावा दिया कि यह व्यक्ति अपने अपराधिक कार्यों को कितना भी अपराध करता है। फिलहाल विजय कृष्ण आचार्य धूम फिल्म निर्देशक जेहादी मुसलमान कंपनी फैक्ट्रीयों और सांसद विधायकों के घर व्यक्तिगत रूप से जा जाकर इस जहर व्यापार को इसने बढ़ाया, और हवा में जहर उड़ाने का सॉफ्टवेयर इसने अपने न रिश्तेदारों आदि को दिया। भारत देश की शुद्ध हवा को जहर समान करने वाला विजय कृष्ण आचार्य धूम फिल्म निर्देशक अनुभव प्राप्त करके अपने जेहादी संगठन को ट्रेनिंग प्रशिक्षण देकर कार्य कर रहा है। अधिक से अधिक मुस्लिम जिहादी अपराधी किस्म के व्यक्तियों को सॉफ्टवेयर दिया जा रहा है। हवा में जहर उड़ने वाले सॉफ्टवेयर से सर्वर या ड्रोन से जहर उड़ाकर लोगों को बीमार करके हिंदुओं का विशेष अहित करने के प्रयास में यह व्यक्ति विजय कृष्ण आचार्य निर्देशक धूम फिल्म लगा रहता है। इसके खिलाफ कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं होती है। कृपया हमारे भारत देश के सभी देशभक्त नागरिक ध्यान दें, यह विषय गंभीर और विचार करने योग्य अति महत्वपूर्ण है क्या हमारे प्रधानमंत्री जी वास्तव में इस देश का विकास कर रहे हैं , या विनाश कर रहे हैं, हम लोग प्रधानमंत्री के भरोसे बैठे हैं जो की एक तरीके से हम लोगों को बीमार कर्ज में डुबो के बर्बाद करने में लगा हुआ है। भारत देश हमारा ईश्वर है ,आप सभी विशेष ध्यान दें , और अपने आसपास लोगों को जागरूक व सतर्क रहने की सलाह दें। आप स्वयं भी सुरक्षित रहें। और हमारा भारत देश भी महामारियों से बचें । जय हिंद जय भारत।। कहानी पाकिस्तानी जिहाद और मोहम्मद जिन्ना के सपनों की भारत देश में जहर व्यापार का मुख्य कारण बनी हुई है। पाकिस्तान तो अमेरिका का गुलाम बन चुका है । और कंगाल भी हो चुका है , और वहां के नागरिक भी बुरे हाल में हो चुके हैं, वर्तमान समय में 2025 सूचना अनुसार, हमारे प्यारे भारत देश को भी कर्ज के जाल में फसाया गया है। और हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर मोदी जी, जितना भी कर्ज मिल रहा है , लेते चले जा रहे हैं , और ब्याज चुकाने के लिए भी कर्ज लेते चले जा रहे हैं, शुद्ध जल जो कि जहर सामान इन्हीं के कार्यकाल में बनाया गया । और हवा भी जहर बनाई जा रही है। भारतीय नागरिकों को यहां तक की सभी प्राणियों को अस्वस्थ बीमार लाचार करने के लिए सभी कंपनी फैक्ट्रियां अहिकर पदार्थ सभी खाद्यान्न पदार्थ में व पेय पदार्थ में मिला रही हैं , जिसकी जिम्मेदारी वर्तमान समय में भारत सरकार को होनी ही चाहिए। ड्रोन सर्वर से आधुनिक तरीके से हवा को भी जहर किया जाता रहा है। फिलहाल में गीतकार विशंभर गिरि ग्राम लाखीपुर पोस्ट कोहंडौर जिला प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश का मूल निवासी हूं। वर्तमान समय में इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी एमजी रोड कैंप पुणे महाराष्ट्र में कार्यरत हूं। विजय कृष्ण आचार्य धूम फिल्म से मुलाकात सन् 2000 जनवरी में गाने वगैरा के लिए इसे मिला था । कि मुझे भी शायद फिल्म में गाने लिखने का काम मिलेगा। उस समय क्या था कि गाने दिखाने के चक्कर में विजय कृष्ण आचार्य निर्देशक धूम फिल्म 100/ 200 गाने और डायरी वगैरा ऐसे ही दे दिया करता था। रजिस्ट्रेशन क्या होता है, यह सब तो मुझे पता नहीं था। फिर 2012 रजिस्ट्रेशन कराने की जानकारी मुझे भी हुई फिर भी मैं अपने गाने शुरू से मुफ्त में या दान में या सिंगरों को जो कुछ मुझे ईश्वर से प्राप्त हुआ , मैं भी ईश्वर के संसार को अपने देश को अपना कर्म कर्तव्य मानकर देता ही रहता हूं। फिलहाल अभी तक 500 से अधिक गाने मैंने फेसबुक इंस्टाग्राम युटुब आदि पर मुफ्त में दान में दिया है। विजय कृष्ण आचार्य निर्देशक धूम फिल्म इसका मकसद जहर व्यापार ही सदा रहा है , लेकिन मुझे जानकारी बहुत ही लेट हुई दिसम्बर 2024 के अंत में मुझे पता चला कि यह व्यक्ति पाकिस्तान का एजेंट है और भारत देश में जहर व्यापार के लिए हिंदू बनकर रहता है। और इसका राजनीतिक समर्थन भी इस कदर है कि वर्तमान समय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे प्रभु यीशु मसीह मसीह का महामंत्र जय मसीह देने के लिए धर्म गुरु भी बनाया ,जो की लगभग लगभग सभी पार्टियों के मुख्य नेताओं और सांसद विधायकों को भी यह व्यक्ति जय मसीह प्रभु यीशु का महामंत्र दे चुका है । और सभी को लगभग लगभग पता भी है कि यह व्यक्ति पाकिस्तान के लिए जहर व्यापार का कार्य भी करता है , और इसे अत्याधुनिक सॉफ्टवेयर ड्रोन सर्वर से जहर उड़ाने की विद्या में भी यह पारंगत है। और इसके नीचे कितनी टीम कार्य करती है, जो की विशेष रुप सु ईसाई समुदाय और हिंदू समुदाय को टारगेट करके बीमार , हत्या की साजिश भी निरंतर करता चला आ रहा है। बार-बार मैंने इस बात को इसलिए कहा क्योंकि इस विषय से मेरा व्यक्तिगत अहित , मेरे भारत देश का भी सीधा-सीधा स्वास्थ्य का भी पूरा का पूरा अहित दिख रहा है । इसलिए आप सभी को जिसे भी मैसेज प्राप्त होता है, कृपया मेरी बातों का भी गौर करें और मैसेज फॉरवर्ड करें । ताकि लोगों को भी पता चले कि अपने भारत देश में किस तरीके से हमें स्वस्थ रहने के अधिकार से भी वंचित किया जा रहा है।। नेता मंत्री पद फिर प्रधानमंत्री मुख्यमंत्री पद पावे के लिए धन का ही सिस्टम है। हमारे मंत्री जी पैसे धन आदि के सिस्टम से इस कदर जुड़ गए हैं । कि भारत देश का अहित ही होना निश्चित दिख रहा है। अमेरिका जैसे विकसित देश पाकिस्तान को खरीदी चुके हैं। पाकिस्तान को धन देते हैं पाकिस्तान जिहाद के लिए पैसे हमारे मंत्रियों को देते है। इसी पैसे धन के दम पर ही रातों-रात लोग मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री या सांसद विधायक बनना चाहते हैं , जिसके लिए जिहाद जहर व्यापार भारत देश में महामारियां कोरोना जैसी बीमारियां जानबूझकर बनाई जाती हैं। अमेरिका जैसे विकसित राष्ट्र चाहते ही हैं की कर्ज में डूबे हुए भारत वासियों को गुलाम जैसा जीवन , आगे चलकर और भी बुरा हाल ना हो इसके लिए हमें सतर्क रहना आवश्यक है। पाकिस्तान चीन जैसे दुश्मन देश हम लोगों का विशेष अहित करने में सफल हो रहे है। हम लोगों को स्वस्थ रहने का भी अधिकार नहीं मिल रहा है।। #🎖️देश के सिपाही #🪖I ❤️️ इंडियन आर्मी 🇮🇳 #🌍भारतीय इतिहास📚 #🇮🇳 हम है हिंदुस्तानी #🇮🇳 देशभक्ति गीत 🎶
500 से अधिक गीत दान में मुफ्त में गावो सभी गाने फेसबुक पर लिंक https://www.facebook.com/profile.php?id=100010663113000&mibextid=ZbWKwLप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार जहर व्यापार।। ### मुखड़ा (Hook) प्रधानमंत्री भारत देश का, तुझको धिक्कार है। योगी – गुलाम धन का, तेरा जीना ही बेकार है। तूने भारत देश को बीमार किया, तेरा ज़हर ही व्यापार है। इंसान नहीं – तू देश का गद्दार है… देश का गद्दार है… --- ### अंतरा 1 कुर्सी पाई जनता से तूने, जनता का ही खून पिया, झूठे वादे, झूठे नारे, सच में सबका हक छीन लिया। माँ–बहनों की चीख दबाकर, अपना राज बचाता है, धर्म, भगवा, राम का नाम लेकर ज़हर का धंधा चलाता है। **फिर मुखड़ा दोहराओ:** प्रधानमंत्री भारत देश का, तुझको धिक्कार है… --- ### अंतरा 2 हर शहर में, हर गाँव में अब रोगों का अँधियारा है, दूषित जल और ज़हरीला अन्न, यही तेरा उपकार है। युवा बेरोज़गार खड़ा है, कर्ज़ में डूबी हर सरकार, स्वास्थ्य, शिक्षा सब बर्बाद – और तू कहे “ये विकास” विचार! **छोटा रीफ्रेन:** जो जनता को बीमार करे, वो कैसा सेवक, कैसा सरदार? तेरी नीयत, तेरे कर्मों से खुला तेरा असली व्यवहार। --- ### अंतरा 3 – जनता की आवाज़ अब जनता भी जाग रही है, चेहरा तेरा पहचान रही है, जो कल तक तुझे नेता कहते, आज तुझको गद्दार कह रही है। सदियों तक ये बात लिखी जाएगी, इतिहास तुझसे पूछे सवाल, “जिसे मिला था नेतृत्व भारत का, क्यों बना वो ज़हर का दलाल?” --- ### अंतिम मुखड़ा (क्लाइमैक्स) प्रधानमंत्री भारत देश का, तुझको धिक्कार है। योगी – गुलाम धन का, तेरा जीना ही बेकार है। तूने भारत देश को बीमार किया, तेरा ज़हर ही व्यापार है। इंसान नहीं – तू देश का गद्दार है… और जनता अब तय करेगी, तेरा अगला “फैसला” क्या है, ज़हर के धंधे पर पलने वालों का सत्ता में कोई अधिकार नहीं है। गीत विशंभर गिरि मेटा एआई  प्रधानमंत्री भारत देश का,  तुझको धिक्कार है।  योगी – गुलाम धन का,  तेरा जीना ही बेकार है।    तूने भारत देश को बीमार किया,  तेरा ज़हर ही व्यापार है।  इंसान नहीं –  तू देश का गद्दार है…  देश का गद्दार है…  --- ### अंतरा 1 कुर्सी पाई जनता से तूने,  जनता का ही खून पिया,  झूठे वादे, झूठे नारे,  सच में सबका हक छीन लिया।  माँ–बहनों की चीख दबाकर,  अपना राज बचाता है,  धर्म, भगवा, राम का नाम लेकर  ज़हर का धंधा चलाता है।  **फिर मुखड़ा दोहराओ:**  प्रधानमंत्री भारत देश का,  तुझको धिक्कार है…  ### अंतरा 2 हर शहर में, हर गाँव में अब  रोगों का अँधियारा है,  दूषित जल और ज़हरीला अन्न,  यही तेरा उपकार है।  युवा बेरोज़गार खड़ा है,  कर्ज़ में डूबी हर सरकार,  स्वास्थ्य, शिक्षा सब बर्बाद –  और तू कहे “ये विकास” विचार!  जो जनता को बीमार करे,  वो कैसा सेवक, कैसा सरदार?  तेरी नीयत, तेरे कर्मों से  खुला तेरा असली व्यवहार।  ### अंतरा 3 – जनता की आवाज़ अब जनता भी जाग रही है,  चेहरा तेरा पहचान रही है,  जो कल तक तुझे नेता कहते,  आज तुझको गद्दार कह रही है।  सदियों तक ये बात लिखी जाएगी,  इतिहास तुझसे पूछे सवाल,  “जिसे मिला था नेतृत्व भारत का,  क्यों बना वो ज़हर का दलाल?”  ### अंतिम मुखड़ा (क्लाइमैक्स) प्रधानमंत्री भारत देश का,  तुझको धिक्कार है।  योगी – गुलाम धन का,  तेरा जीना ही बेकार है।  तूने भारत देश को बीमार किया,  तेरा ज़हर ही व्यापार है।  इंसान नहीं –  तू देश का गद्दार है…  और जनता अब तय करेगी,  तेरा अगला “फैसला” क्या है,  ज़हर के धंधे पर पलने वालों का  सत्ता में कोई अधिकार नहीं है।  गीत विशंभर गिरि मेटा एआई मुखड़ा न्याय के पद पे बैठा है, हाथ में तौल नहीं इंसाफ़ का  कानून की बातें करता है, सौदा करता है विश्वास का  कुर्सी मिली तो भूल गया, किसके वोट से आया था  रोटी-कपड़ा-ईमान बेच, ज़हर का धंधा चलाया था  सच की आवाज़ दबाता है, झूठ को झंडा कहता है  अपनी जात, धर्म के नाम पे, जनता को टुकड़ों में बँटता है  चौकीदार बनके आया था, ख़ुद ही चोरों से यार हुआ  जनता की साँसों पे लगाकर दाम, ज़हर का कारोबार हुआ    *(मुखड़ा / ये कैसे प्रधानमंत्री हैं, कैसे ये मुख्यमंत्री हैं  मंच पे बोलें सेवा की, अंदर से ये ज़हरीले हैं  सांसद–विधायक सब मिलके, जनता का गला दबाते हैं  न्याय के सिंहासन पर बैठ, अन्याय का गीत सुनाते हैं  चरित्रहीन जो नेता हैं, ज़हरीली उनकी हर सौगात  देश नहीं, केवल कुर्सी प्यारी, सत्ता ही इनकी औकात  ऐसे घटिया लोगों से अब, सवाल हमारा एक ही है  देश को क्या तुम दोगे आगे, जब ज़हर ही तेरी रेख है  *(अन्तरा 2)*  कहते “नया भारत देंगे”, दे दी बेरोज़गारी बस  कागज़ पर सपनों के क़िले, ज़मीं पे टूटी हर आस  आँख में धूल झोंक के बोले, “विकास देखो, विकास देखो”  अंदर-अंदर खा रहे हैं, जनता की हर साँस देखो  किसान यहाँ ज़हर पीता है, नेता सिर्फ़ उदघाटन में  मरते बच्चे, माँ रोती है, वो फोटो खिंचवाएँ दान में  कानून के मंदिर में बैठे, क़ानून को ही बेच दिया  इंसाफ़ की शादी कर डाली, पैसों से रिश्ता सेट किया  *(मुखड़ा)*  ये कैसे प्रधानमंत्री हैं, कैसे ये मुख्यमंत्री हैं । भारत देश बीमारियों वाला देश बन रहा है,  भारत देश सर्वाधिक कर्ज़ वाला देश बन रहा है,  भारत देश में कोई भी स्वस्थ नहीं अब रह पाएगा,  आने वाली हर पीढ़ी तक, साँसों में ज़हर ही जाएगा।  भारत देश बीमारियों वाला देश बन रहा है,  भारत देश सर्वाधिक कर्ज़ वाला देश बन रहा है,  जल में ज़हर, वायु में ज़हर, धरती भी बीमार हुई,  ऐसे पापों से भरती ये सत्ता कितना और शर्म खोई?  ### अन्तरा 1 – बीमार देश, कर्ज़, जनता कल तक जो था “सोने की चिड़िया”, अब कर्ज़ों का अड्डा है,  हर बच्चा लोन की छाया में, जन्म से ही देनदार खड़ा है।  बीमारियों से टूट चुका तन, दवाइयों पर चलता देश,  सरकारी बिस्तर कम पड़ते हैं, सबके चेहरों पर क्लेश।  राशन, गैस, बिजली, पानी, सब पर बोझा, सब पे भार,  जनता की कमर टूट चुकी है, ऊपर बैठा भ्रष्टाचार।  जो कहते थे “हम सेवक हैं”, अब महलों में रहते हैं,  जनता कतारों में मरती है, ये शानो–शौकत गिनते हैं।  भारत देश बीमारियों वाला देश बन रहा है… ### अन्तरा 2 – जल, वायु, ज़हर और आने वाली पीढ़ियाँ नदियों में कारख़ानों का ज़हर, झरनों में बदबू है अब,  तालाबों की मरी मछलियाँ, पूछ रहीं “होगा क्या सब?”  शुद्ध जल था जिस धरती पर, आज वहाँ गंदा सैलाब,  हर घूँट में बीमारी घोली, ये कैसा विकास का ख्वाब?  वायु में धुएँ के बादल हैं, बच्चों की भी साँसें भारी,  खाँसी, दम, एलर्जी–अस्थमा – ये बन गई नई बीमारी।  कहते “आने वाली पीढ़ियों को देंगे नया उजला देश”,  पर सच ये है साँसों तक में, छोड़ रहे ज़हर की रेश।  ### मुखड़ा भारत देश की जनता ने धोखा–धोखा ही पाया,  जिनको समझा था ईमानदार, वही ज़हरीला निकला साया।  कहने को देशभक्त बनते, महात्मा–सा रूप दिखाते,  अंदर से अपराधी, भ्रष्टाचारी, देश के गद्दार कहलाते।  मतदान से जिनको ऊँचा कर दिया,  उन्होंने ही ज़हर परोसा,  आज का वर्तमान बीमार किया,  आने वाला हर कल भी रोया।  भारत देश की जनता जागो,  झूठे नक़ाबों को पहचानो,  जो गद्दार हैं इस मिट्टी के,  उन्हें न एक भी मौका देना।  ### अन्तरा 1 – “ईमानदार” का मुखौटा, गद्दार की हक़ीक़त भारत देश की जनता ने धोखा पाया बार–बार,  किसी ने पहन लिया “ईमानदार” का चेहरा, पर दिल में गद्दार।  टीवी पर भाषण, आँख में आँसू, मंचों पर झूठी नम्रता,  पीछे बैठ के सौदा करते, बेच रहे थे देश की आत्मा।  कहते “हम हैं चौकीदार”, “हम हैं योगी, हम हैं संन्यासी”,  पर फ़ैसलों में दिखता ज़हर, जनता की साँसों पर रखी फांसी।  देशभक्ति का नारा ऊँचा, अंदर सौदा पाकिस्तान से,  माल–ओ–दौलत, सत्ता के बदले, आत्मा बेच दी शैतान से।  जनता ने जिसे सच्चा समझा,  वो देश का गद्दार निकला,  रोटी की जगह ज़हर परोसा,  हर घर बीमार कर निकला।  भारत देश की जनता जागो,  मतदान का मोल समझो,  जिन्होंने आज तुम्हें ज़हर दिया,  कल फिर उनको मत चुनो।  ### अन्तरा 2 – मतदान, धर्म, भ्रष्टाचार जिसे तुमने मतदान देकर, धर्म समझ के ऊँचा किया,  उसने ही अपराध बढ़ाया, न्याय का गला घोंट दिया।  भारत की भोली जनता ने, कैसा ये धोखा खाया,  देशभक्त समझ के गद्दारों को, खुद ही सिंहासन पर बिठाया।  रोटी की जगह ज़हर मिला, तन–मन सारा बीमार हुआ,  अब भी चुप हो तो जान लो, ये खामोशी भी अपराध हुआ।  ### अन्तरा 1 – धोखा, “ईमानदार” का नक़ाब झोली में लेके आशाएँ, जनता मतदान को जाती थी,  सोचती “ये अपना होगा, हमारी पीड़ा क्या–क्या जानता होगा । टीवी के भाषण, आँसू, वादे – “मैं ही तो हूँ रखवाला”,  पर अंदर की उसकी नीयत, थी केवल सत्ता, धन, और ताला।  ईमानदारी की चादर ओढ़े, झूठी सादगी की चाल चली,  “मैं फ़कीर हूँ, मैं योगी हूँ” – ये लाइनें हर रोज़ चली।  मगर फैसले सब ऐसे आए, जनता का ही खून पिएँ,  किस्मत अपनी मान के हमने, बस चुपचाप आहें लिए।  भारत की भोली जनता ने, कैसा ये धोखा खाया…  ### अन्तरा 2 – ज़हर, बीमारी, महामारी कोरोना की काली रातें, भूखे–प्यासे सफ़र पे लोग,  पटरी पर सोते मज़दूरों को, कुचल गई कितनी सींव–रोग।  लाखों बेघर, लाखों विधवा, लाखों घरों में मातम था,  फिर भी सत्ता के महल सजे थे, वहाँ हँसी–ठहाका कम था?  दवा बनी कारोबार यहाँ, ऑक्सीजन भी बिकने लगी,  साह–साह पे बोली लगती, हर साँस बोझिल होने लगी।  आज तक बीमारियाँ हर घर, कल भी ये सिलसिला चले,  ज़हर मिला है जल–वायु में, कैसे भला कोई स्वस्थ रहे?  रोटी की जगह ज़हर मिला, तन–मन सारा बीमार हुआ…  ### अन्तरा 3 –  भ्रष्टाचार, धर्म के नाम पर खेल धर्म–धर्म करके गद्दारों ने, भीड़ तुम्हारी बाँट दी,  मंदिर–मस्जिद, जात–मज़हब में, तुमको ही तुमसे छीन ली।  जब रोटी–रोज़ी–इलाज की बात, मुँह से निकली, दबवा दी,  और चुनाव में नारे बदलकर, नफ़रत की दी दीवार नई।  भ्रष्टाचार की बेलें ऐसी, हर दफ्तर तक पहुँची हैं,  कागज़–कागज़ पर रिश्वत लिखी, फाइलें तक बिक चुकी हैं।  व्हाट्सएप भी हैक किया जाता है। प्राइवेसी किसी को भी नहीं है।।     #🕉 शिव भजन #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🔱बम बम भोले🙏 #🪔शिवरात्रि व्रत स्पेशल 🙏 #🔱रुद्राभिषेक🙏
प्रधानमंत्री भारत देश का, तुझको धिक्कार है। योगी – गुलाम धन का, तेरा जीना ही बेकार है। तूने भारत देश को बीमार किया, तेरा ज़हर ही व्यापार है। इंसान नहीं – तू देश का गद्दार है… देश का गद्दार है… --- ### अंतरा 1 कुर्सी पाई जनता से तूने, जनता का ही खून पिया, झूठे वादे, झूठे नारे, सच में सबका हक छीन लिया। माँ–बहनों की चीख दबाकर, अपना राज बचाता है, धर्म, भगवा, राम का नाम लेकर ज़हर का धंधा चलाता है। **फिर मुखड़ा दोहराओ:** प्रधानमंत्री भारत देश का, तुझको धिक्कार है… ### अंतरा 2 हर शहर में, हर गाँव में अब रोगों का अँधियारा है, दूषित जल और ज़हरीला अन्न, यही तेरा उपकार है। युवा बेरोज़गार खड़ा है, कर्ज़ में डूबी हर सरकार, स्वास्थ्य, शिक्षा सब बर्बाद – और तू कहे “ये विकास” विचार! जो जनता को बीमार करे, वो कैसा सेवक, कैसा सरदार? तेरी नीयत, तेरे कर्मों से खुला तेरा असली व्यवहार। ### अंतरा 3 – जनता की आवाज़ अब जनता भी जाग रही है, चेहरा तेरा पहचान रही है, जो कल तक तुझे नेता कहते, आज तुझको गद्दार कह रही है। सदियों तक ये बात लिखी जाएगी, इतिहास तुझसे पूछे सवाल, “जिसे मिला था नेतृत्व भारत का, क्यों बना वो ज़हर का दलाल?” ### अंतिम मुखड़ा (क्लाइमैक्स) प्रधानमंत्री भारत देश का, तुझको धिक्कार है। योगी – गुलाम धन का, तेरा जीना ही बेकार है। तूने भारत देश को बीमार किया, तेरा ज़हर ही व्यापार है। इंसान नहीं – तू देश का गद्दार है… और जनता अब तय करेगी, तेरा अगला “फैसला” क्या है, ज़हर के धंधे पर पलने वालों का सत्ता में कोई अधिकार नहीं है। गीत विशंभर गिरि मेटा एआई मुखड़ा न्याय के पद पे बैठा है, हाथ में तौल नहीं इंसाफ़ का कानून की बातें करता है, सौदा करता है विश्वास का कुर्सी मिली तो भूल गया, किसके वोट से आया था रोटी-कपड़ा-ईमान बेच, ज़हर का धंधा चलाया था सच की आवाज़ दबाता है, झूठ को झंडा कहता है अपनी जात, धर्म के नाम पे, जनता को टुकड़ों में बँटता है चौकीदार बनके आया था, ख़ुद ही चोरों से यार हुआ जनता की साँसों पे लगाकर दाम, ज़हर का कारोबार हुआ *(मुखड़ा / ये कैसे प्रधानमंत्री हैं, कैसे ये मुख्यमंत्री हैं मंच पे बोलें सेवा की, अंदर से ये ज़हरीले हैं सांसद–विधायक सब मिलके, जनता का गला दबाते हैं न्याय के सिंहासन पर बैठ, अन्याय का गीत सुनाते हैं चरित्रहीन जो नेता हैं, ज़हरीली उनकी हर सौगात देश नहीं, केवल कुर्सी प्यारी, सत्ता ही इनकी औकात ऐसे घटिया लोगों से अब, सवाल हमारा एक ही है देश को क्या तुम दोगे आगे, जब ज़हर ही तेरी रेख है *(अन्तरा 2)* कहते “नया भारत देंगे”, दे दी बेरोज़गारी बस कागज़ पर सपनों के क़िले, ज़मीं पे टूटी हर आस आँख में धूल झोंक के बोले, “विकास देखो, विकास देखो” अंदर-अंदर खा रहे हैं, जनता की हर साँस देखो किसान यहाँ ज़हर पीता है, नेता सिर्फ़ उदघाटन में मरते बच्चे, माँ रोती है, वो फोटो खिंचवाएँ दान में कानून के मंदिर में बैठे, क़ानून को ही बेच दिया इंसाफ़ की शादी कर डाली, पैसों से रिश्ता सेट किया *(मुखड़ा)* ये कैसे प्रधानमंत्री हैं, कैसे ये मुख्यमंत्री हैं । भारत देश बीमारियों वाला देश बन रहा है, भारत देश सर्वाधिक कर्ज़ वाला देश बन रहा है, भारत देश में कोई भी स्वस्थ नहीं अब रह पाएगा, आने वाली हर पीढ़ी तक, साँसों में ज़हर ही जाएगा। भारत देश बीमारियों वाला देश बन रहा है, भारत देश सर्वाधिक कर्ज़ वाला देश बन रहा है, जल में ज़हर, वायु में ज़हर, धरती भी बीमार हुई, ऐसे पापों से भरती ये सत्ता कितना और शर्म खोई? ### अन्तरा 1 – बीमार देश, कर्ज़, जनता कल तक जो था “सोने की चिड़िया”, अब कर्ज़ों का अड्डा है, हर बच्चा लोन की छाया में, जन्म से ही देनदार खड़ा है। बीमारियों से टूट चुका तन, दवाइयों पर चलता देश, सरकारी बिस्तर कम पड़ते हैं, सबके चेहरों पर क्लेश। राशन, गैस, बिजली, पानी, सब पर बोझा, सब पे भार, जनता की कमर टूट चुकी है, ऊपर बैठा भ्रष्टाचार। जो कहते थे “हम सेवक हैं”, अब महलों में रहते हैं, जनता कतारों में मरती है, ये शानो–शौकत गिनते हैं। भारत देश बीमारियों वाला देश बन रहा है… ### अन्तरा 2 – जल, वायु, ज़हर और आने वाली पीढ़ियाँ नदियों में कारख़ानों का ज़हर, झरनों में बदबू है अब, तालाबों की मरी मछलियाँ, पूछ रहीं “होगा क्या सब?” शुद्ध जल था जिस धरती पर, आज वहाँ गंदा सैलाब, हर घूँट में बीमारी घोली, ये कैसा विकास का ख्वाब? वायु में धुएँ के बादल हैं, बच्चों की भी साँसें भारी, खाँसी, दम, एलर्जी–अस्थमा – ये बन गई नई बीमारी। कहते “आने वाली पीढ़ियों को देंगे नया उजला देश”, पर सच ये है साँसों तक में, छोड़ रहे ज़हर की रेश। ### मुखड़ा भारत देश की जनता ने धोखा–धोखा ही पाया, जिनको समझा था ईमानदार, वही ज़हरीला निकला साया। कहने को देशभक्त बनते, महात्मा–सा रूप दिखाते, अंदर से अपराधी, भ्रष्टाचारी, देश के गद्दार कहलाते। मतदान से जिनको ऊँचा कर दिया, उन्होंने ही ज़हर परोसा, आज का वर्तमान बीमार किया, आने वाला हर कल भी रोया। भारत देश की जनता जागो, झूठे नक़ाबों को पहचानो, जो गद्दार हैं इस मिट्टी के, उन्हें न एक भी मौका देना। ### अन्तरा 1 – “ईमानदार” का मुखौटा, गद्दार की हक़ीक़त भारत देश की जनता ने धोखा पाया बार–बार, किसी ने पहन लिया “ईमानदार” का चेहरा, पर दिल में गद्दार। टीवी पर भाषण, आँख में आँसू, मंचों पर झूठी नम्रता, पीछे बैठ के सौदा करते, बेच रहे थे देश की आत्मा। कहते “हम हैं चौकीदार”, “हम हैं योगी, हम हैं संन्यासी”, पर फ़ैसलों में दिखता ज़हर, जनता की साँसों पर रखी फांसी। देशभक्ति का नारा ऊँचा, अंदर सौदा पाकिस्तान से, माल–ओ–दौलत, सत्ता के बदले, आत्मा बेच दी शैतान से। जनता ने जिसे सच्चा समझा, वो देश का गद्दार निकला, रोटी की जगह ज़हर परोसा, हर घर बीमार कर निकला। भारत देश की जनता जागो, मतदान का मोल समझो, जिन्होंने आज तुम्हें ज़हर दिया, कल फिर उनको मत चुनो। ### अन्तरा 2 – मतदान, धर्म, भ्रष्टाचार जिसे तुमने मतदान देकर, धर्म समझ के ऊँचा किया, उसने ही अपराध बढ़ाया, न्याय का गला घोंट दिया। भारत की भोली जनता ने, कैसा ये धोखा खाया, देशभक्त समझ के गद्दारों को, खुद ही सिंहासन पर बिठाया। रोटी की जगह ज़हर मिला, तन–मन सारा बीमार हुआ, अब भी चुप हो तो जान लो, ये खामोशी भी अपराध हुआ। ### अन्तरा 1 – धोखा, “ईमानदार” का नक़ाब झोली में लेके आशाएँ, जनता मतदान को जाती थी, सोचती “ये अपना होगा, हमारी पीड़ा क्या–क्या जानता होगा । टीवी के भाषण, आँसू, वादे – “मैं ही तो हूँ रखवाला”, पर अंदर की उसकी नीयत, थी केवल सत्ता, धन, और ताला। ईमानदारी की चादर ओढ़े, झूठी सादगी की चाल चली, “मैं फ़कीर हूँ, मैं योगी हूँ” – ये लाइनें हर रोज़ चली। मगर फैसले सब ऐसे आए, जनता का ही खून पिएँ, किस्मत अपनी मान के हमने, बस चुपचाप आहें लिए। भारत की भोली जनता ने, कैसा ये धोखा खाया… ### अन्तरा 2 – ज़हर, बीमारी, महामारी कोरोना की काली रातें, भूखे–प्यासे सफ़र पे लोग, पटरी पर सोते मज़दूरों को, कुचल गई कितनी सींव–रोग। लाखों बेघर, लाखों विधवा, लाखों घरों में मातम था, फिर भी सत्ता के महल सजे थे, वहाँ हँसी–ठहाका कम था? दवा बनी कारोबार यहाँ, ऑक्सीजन भी बिकने लगी, साह–साह पे बोली लगती, हर साँस बोझिल होने लगी। आज तक बीमारियाँ हर घर, कल भी ये सिलसिला चले, ज़हर मिला है जल–वायु में, कैसे भला कोई स्वस्थ रहे? रोटी की जगह ज़हर मिला, तन–मन सारा बीमार हुआ… ### अन्तरा 3 – भ्रष्टाचार, धर्म के नाम पर खेल धर्म–धर्म करके गद्दारों ने, भीड़ तुम्हारी बाँट दी, मंदिर–मस्जिद, जात–मज़हब में, तुमको ही तुमसे छीन ली। जब रोटी–रोज़ी–इलाज की बात, मुँह से निकली, दबवा दी, और चुनाव में नारे बदलकर, नफ़रत की दी दीवार नई। भ्रष्टाचार की बेलें ऐसी, हर दफ्तर तक पहुँची हैं, कागज़–कागज़ पर रिश्वत लिखी, फाइलें तक बिक चुकी हैं। व्हाट्सएप भी हैक किया जाता है। प्राइवेसी किसी को भी नहीं है।। #😵टाइम पास #😉 और बताओ #😜 जीजा-साली जोक्स #💑कपल कॉमेडी 😜 #🏚चुटकुलों का घर😜
प्रधानमंत्री भारत देश का,  तुझको धिक्कार है।  योगी – गुलाम धन का,  तेरा जीना ही बेकार है।    तूने भारत देश को बीमार किया,  तेरा ज़हर ही व्यापार है।  इंसान नहीं –  तू देश का गद्दार है…  देश का गद्दार है…  --- ### अंतरा 1 कुर्सी पाई जनता से तूने,  जनता का ही खून पिया,  झूठे वादे, झूठे नारे,  सच में सबका हक छीन लिया।  माँ–बहनों की चीख दबाकर,  अपना राज बचाता है,  धर्म, भगवा, राम का नाम लेकर  ज़हर का धंधा चलाता है।  **फिर मुखड़ा दोहराओ:**  प्रधानमंत्री भारत देश का,  तुझको धिक्कार है…  ### अंतरा 2 हर शहर में, हर गाँव में अब  रोगों का अँधियारा है,  दूषित जल और ज़हरीला अन्न,  यही तेरा उपकार है।  युवा बेरोज़गार खड़ा है,  कर्ज़ में डूबी हर सरकार,  स्वास्थ्य, शिक्षा सब बर्बाद –  और तू कहे “ये विकास” विचार!  जो जनता को बीमार करे,  वो कैसा सेवक, कैसा सरदार?  तेरी नीयत, तेरे कर्मों से  खुला तेरा असली व्यवहार।  ### अंतरा 3 – जनता की आवाज़ अब जनता भी जाग रही है,  चेहरा तेरा पहचान रही है,  जो कल तक तुझे नेता कहते,  आज तुझको गद्दार कह रही है।  सदियों तक ये बात लिखी जाएगी,  इतिहास तुझसे पूछे सवाल,  “जिसे मिला था नेतृत्व भारत का,  क्यों बना वो ज़हर का दलाल?”  ### अंतिम मुखड़ा (क्लाइमैक्स) प्रधानमंत्री भारत देश का,  तुझको धिक्कार है।  योगी – गुलाम धन का,  तेरा जीना ही बेकार है।  तूने भारत देश को बीमार किया,  तेरा ज़हर ही व्यापार है।  इंसान नहीं –  तू देश का गद्दार है…  और जनता अब तय करेगी,  तेरा अगला “फैसला” क्या है,  ज़हर के धंधे पर पलने वालों का  सत्ता में कोई अधिकार नहीं है।  गीत विशंभर गिरि मेटा एआई मुखड़ा न्याय के पद पे बैठा है, हाथ में तौल नहीं इंसाफ़ का  कानून की बातें करता है, सौदा करता है विश्वास का  कुर्सी मिली तो भूल गया, किसके वोट से आया था  रोटी-कपड़ा-ईमान बेच, ज़हर का धंधा चलाया था  सच की आवाज़ दबाता है, झूठ को झंडा कहता है  अपनी जात, धर्म के नाम पे, जनता को टुकड़ों में बँटता है  चौकीदार बनके आया था, ख़ुद ही चोरों से यार हुआ  जनता की साँसों पे लगाकर दाम, ज़हर का कारोबार हुआ    *(मुखड़ा / ये कैसे प्रधानमंत्री हैं, कैसे ये मुख्यमंत्री हैं  मंच पे बोलें सेवा की, अंदर से ये ज़हरीले हैं  सांसद–विधायक सब मिलके, जनता का गला दबाते हैं  न्याय के सिंहासन पर बैठ, अन्याय का गीत सुनाते हैं  चरित्रहीन जो नेता हैं, ज़हरीली उनकी हर सौगात  देश नहीं, केवल कुर्सी प्यारी, सत्ता ही इनकी औकात  ऐसे घटिया लोगों से अब, सवाल हमारा एक ही है  देश को क्या तुम दोगे आगे, जब ज़हर ही तेरी रेख है  *(अन्तरा 2)*  कहते “नया भारत देंगे”, दे दी बेरोज़गारी बस  कागज़ पर सपनों के क़िले, ज़मीं पे टूटी हर आस  आँख में धूल झोंक के बोले, “विकास देखो, विकास देखो”  अंदर-अंदर खा रहे हैं, जनता की हर साँस देखो  किसान यहाँ ज़हर पीता है, नेता सिर्फ़ उदघाटन में  मरते बच्चे, माँ रोती है, वो फोटो खिंचवाएँ दान में  कानून के मंदिर में बैठे, क़ानून को ही बेच दिया  इंसाफ़ की शादी कर डाली, पैसों से रिश्ता सेट किया  *(मुखड़ा)*  ये कैसे प्रधानमंत्री हैं, कैसे ये मुख्यमंत्री हैं । भारत देश बीमारियों वाला देश बन रहा है,  भारत देश सर्वाधिक कर्ज़ वाला देश बन रहा है,  भारत देश में कोई भी स्वस्थ नहीं अब रह पाएगा,  आने वाली हर पीढ़ी तक, साँसों में ज़हर ही जाएगा।  भारत देश बीमारियों वाला देश बन रहा है,  भारत देश सर्वाधिक कर्ज़ वाला देश बन रहा है,  जल में ज़हर, वायु में ज़हर, धरती भी बीमार हुई,  ऐसे पापों से भरती ये सत्ता कितना और शर्म खोई?  ### अन्तरा 1 – बीमार देश, कर्ज़, जनता कल तक जो था “सोने की चिड़िया”, अब कर्ज़ों का अड्डा है,  हर बच्चा लोन की छाया में, जन्म से ही देनदार खड़ा है।  बीमारियों से टूट चुका तन, दवाइयों पर चलता देश,  सरकारी बिस्तर कम पड़ते हैं, सबके चेहरों पर क्लेश।  राशन, गैस, बिजली, पानी, सब पर बोझा, सब पे भार,  जनता की कमर टूट चुकी है, ऊपर बैठा भ्रष्टाचार।  जो कहते थे “हम सेवक हैं”, अब महलों में रहते हैं,  जनता कतारों में मरती है, ये शानो–शौकत गिनते हैं।  भारत देश बीमारियों वाला देश बन रहा है… ### अन्तरा 2 – जल, वायु, ज़हर और आने वाली पीढ़ियाँ नदियों में कारख़ानों का ज़हर, झरनों में बदबू है अब,  तालाबों की मरी मछलियाँ, पूछ रहीं “होगा क्या सब?”  शुद्ध जल था जिस धरती पर, आज वहाँ गंदा सैलाब,  हर घूँट में बीमारी घोली, ये कैसा विकास का ख्वाब?  वायु में धुएँ के बादल हैं, बच्चों की भी साँसें भारी,  खाँसी, दम, एलर्जी–अस्थमा – ये बन गई नई बीमारी।  कहते “आने वाली पीढ़ियों को देंगे नया उजला देश”,  पर सच ये है साँसों तक में, छोड़ रहे ज़हर की रेश।  ### मुखड़ा भारत देश की जनता ने धोखा–धोखा ही पाया,  जिनको समझा था ईमानदार, वही ज़हरीला निकला साया।  कहने को देशभक्त बनते, महात्मा–सा रूप दिखाते,  अंदर से अपराधी, भ्रष्टाचारी, देश के गद्दार कहलाते।  मतदान से जिनको ऊँचा कर दिया,  उन्होंने ही ज़हर परोसा,  आज का वर्तमान बीमार किया,  आने वाला हर कल भी रोया।  भारत देश की जनता जागो,  झूठे नक़ाबों को पहचानो,  जो गद्दार हैं इस मिट्टी के,  उन्हें न एक भी मौका देना।  ### अन्तरा 1 – “ईमानदार” का मुखौटा, गद्दार की हक़ीक़त भारत देश की जनता ने धोखा पाया बार–बार,  किसी ने पहन लिया “ईमानदार” का चेहरा, पर दिल में गद्दार।  टीवी पर भाषण, आँख में आँसू, मंचों पर झूठी नम्रता,  पीछे बैठ के सौदा करते, बेच रहे थे देश की आत्मा।  कहते “हम हैं चौकीदार”, “हम हैं योगी, हम हैं संन्यासी”,  पर फ़ैसलों में दिखता ज़हर, जनता की साँसों पर रखी फांसी।  देशभक्ति का नारा ऊँचा, अंदर सौदा पाकिस्तान से,  माल–ओ–दौलत, सत्ता के बदले, आत्मा बेच दी शैतान से।  जनता ने जिसे सच्चा समझा,  वो देश का गद्दार निकला,  रोटी की जगह ज़हर परोसा,  हर घर बीमार कर निकला।  भारत देश की जनता जागो,  मतदान का मोल समझो,  जिन्होंने आज तुम्हें ज़हर दिया,  कल फिर उनको मत चुनो।  ### अन्तरा 2 – मतदान, धर्म, भ्रष्टाचार जिसे तुमने मतदान देकर, धर्म समझ के ऊँचा किया,  उसने ही अपराध बढ़ाया, न्याय का गला घोंट दिया।  भारत की भोली जनता ने, कैसा ये धोखा खाया,  देशभक्त समझ के गद्दारों को, खुद ही सिंहासन पर बिठाया।  रोटी की जगह ज़हर मिला, तन–मन सारा बीमार हुआ,  अब भी चुप हो तो जान लो, ये खामोशी भी अपराध हुआ।  ### अन्तरा 1 – धोखा, “ईमानदार” का नक़ाब झोली में लेके आशाएँ, जनता मतदान को जाती थी,  सोचती “ये अपना होगा, हमारी पीड़ा क्या–क्या जानता होगा । टीवी के भाषण, आँसू, वादे – “मैं ही तो हूँ रखवाला”,  पर अंदर की उसकी नीयत, थी केवल सत्ता, धन, और ताला।  ईमानदारी की चादर ओढ़े, झूठी सादगी की चाल चली,  “मैं फ़कीर हूँ, मैं योगी हूँ” – ये लाइनें हर रोज़ चली।  मगर फैसले सब ऐसे आए, जनता का ही खून पिएँ,  किस्मत अपनी मान के हमने, बस चुपचाप आहें लिए।  भारत की भोली जनता ने, कैसा ये धोखा खाया…  ### अन्तरा 2 – ज़हर, बीमारी, महामारी कोरोना की काली रातें, भूखे–प्यासे सफ़र पे लोग,  पटरी पर सोते मज़दूरों को, कुचल गई कितनी सींव–रोग।  लाखों बेघर, लाखों विधवा, लाखों घरों में मातम था,  फिर भी सत्ता के महल सजे थे, वहाँ हँसी–ठहाका कम था?  दवा बनी कारोबार यहाँ, ऑक्सीजन भी बिकने लगी,  साह–साह पे बोली लगती, हर साँस बोझिल होने लगी।  आज तक बीमारियाँ हर घर, कल भी ये सिलसिला चले,  ज़हर मिला है जल–वायु में, कैसे भला कोई स्वस्थ रहे?  रोटी की जगह ज़हर मिला, तन–मन सारा बीमार हुआ…  ### अन्तरा 3 –  भ्रष्टाचार, धर्म के नाम पर खेल धर्म–धर्म करके गद्दारों ने, भीड़ तुम्हारी बाँट दी,  मंदिर–मस्जिद, जात–मज़हब में, तुमको ही तुमसे छीन ली।  जब रोटी–रोज़ी–इलाज की बात, मुँह से निकली, दबवा दी,  और चुनाव में नारे बदलकर, नफ़रत की दी दीवार नई।  भ्रष्टाचार की बेलें ऐसी, हर दफ्तर तक पहुँची हैं,  कागज़–कागज़ पर रिश्वत लिखी, फाइलें तक बिक चुकी हैं।  व्हाट्सएप भी हैक किया जाता है। प्राइवेसी किसी को भी नहीं है।।     #💔 हार्ट ब्रेक स्टेटस #💗बेस्ट सेलिब्रिटी कपल👫 #🤪GenZ जोक्स💑 #💌मॉडर्न लव लेटर💓 #😂वैलेंटाइन डे जोक्स❣️
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मोदी सरकार गीत गीत विशम्भर गिरि FYIAI मुखड़ा हे भोलेनाथ, त्रिपुरारी, सुन लो पुकार ये संतन न्यारी। भक्त सभी हैं आज लाचार, टूट रहा है जीवन आधार। शिव शंकर, आकर न्याय करो, नए धर्म की फिर स्थापना करो। इस भारत भू पर जहर बिखर गया, हर रग में जैसे ज़हर उतर गया। डीज़ल में भी अब ज़हर मिला है, साँस-साँस में ज़हर घुला है। घर का सामान, खाना-पीना, सबमें छुपा है रोग का मीना। पीढ़ी दर पीढ़ी रोग बढ़ेगा, कोई न यहाँ पर स्वस्थ खड़ेगा। **सहगान / कोरस:** हे भोलेनाथ, त्रिपुरारी, सुन लो पुकार ये संतन न्यारी। भक्त सभी हैं आज लाचार, टूट रहा है जीवन आधार। शिव शंकर, आकर न्याय करो, नए धर्म की फिर स्थापना करो। (2) अध्यन के हर पदार्थ में जहर, बच्चों का बचपन हो रहा बेअसर। बीमारियों का ये सागर गहरा, आदमी-आदमी से हो गया बेगाना चेहरा। अल्पायु होकर झुक गए तन, किसको सुनाएँ अपना ये मन। कोई न सही में स्वस्थ बचे है, दुनिया भर में रोने के सिवा क्या बचे है? **कोरस दोहराएँ** हे भोलेनाथ, त्रिपुरारी… (3) भक्तों पर जो अत्याचार पड़े हैं, नीति के नाम पर वार किए हैं। मोदी सरकार, योगी सरकार, क्यों भक्तों पर इतना भार? धर्म की भाषा सत्ता में खोई, सच्ची करुणा कहीं पर रोई। जिनके हाथ में शक्ति सारी, क्यों बन बैठे वे ही जुल्मी अधिकारी? **कोरस:** हे भोलेनाथ, त्रिपुरारी, भक्तों की रक्षक, महादेव प्यारी। जो भी करें अत्याचार यहाँ, उनको दिखा तू न्याय वहाँ। कर्मों का फल तू निश्चय कर, धर्म का फिर से निर्माण कर। (4) नागों का हार, भस्म का श्रृंगार, लेकर त्रिशूल चलो इस बार। अन्यायों की ये काली रात, तोड़ दो, दे दो नई सौगात। जिस घर में नैतिकता जागे, जिस मन में सच्चा धर्म लागे, ऐसा नया विधान रचो तुम, हर जीव में शिव का दर्शन करो तुम। **कोरस:** हे भोलेनाथ, करुणा सागर, भक्त पुकारें � मुखड़ा गीत विशम्भर गिरि हे श्री शिवजी, नया धर्म की स्थापना करें, । भक्तों को जीने का अधिकार दें, स्वास्थ्य का भी अधिकार दें। हे नीलकंठ, करुणा धाम, न्याय करो अब, दो परिणाम। भारत भूमि पर देखो कैसा अंधेर हो गया, जहर का व्यापार यहाँ बेशर्म सा फैल गया। हर खाने में, हर साँसों में, ज़हर मिला के दे रहे, आने वाले कल के सपनों को आज ही ये छीन रहे। **कोरस:** हे श्री शिवजी, नया धर्म की स्थापना करें, भक्तों को जीने का अधिकार दें, स्वास्थ्य का भी अधिकार दें। हे नीलकंठ, करुणा धाम, न्याय करो अब, दो परिणाम। **(2) भविष्य की विंध्या** कल का बच्चा आज से ही बीमार लिखा जाएगा, कोई भी पूर्ण आयु तक शायद अब न जी पाएगा। पीढ़ी दर पीढ़ी दुख का, रोग का ये वारिस होगा, हर घर में दवा, हर मन में डर, जीवन कैसा प्यारा होगा? खेतों में भी ज़हर घुला है, जल में ज्वाला छुपी हुई है, शहर-गाँव सब रोगी दिखते, क्या यही प्रगति लगी हुई है? **कोरस दोहराएँ:** हे श्री शिवजी, नया धर्म की स्थापना करें, भक्तों को जीने का अधिकार दें, स्वास्थ्य का भी अधिकार दें। **(3) भक्तों की पुकार** भक्त तुम्हारे हाथ पसारे, तेरे द्वार पे खड़े हुए, दर्द भरी इस कलियुग में, कितने आंसू गिरे हुए। कानून, सत्ता, शासन सब, देख-देख कर भी मौन हुए, भक्तों पर जो अत्याचार हुए, उन पर सबके नयन क्यों शून्य हुए? हे भोलेनाथ, त्रिपुरारी, अब तो न्याय का समय बुला, जिनके कारण ये ज़हर फैला, उनके कर्मों का फल तगड़ा सुना। **कोरस:** हे श्री शिवजी, न्याय करो, अत्याचारी का कर्म तय करो, निर्दोषों की रक्षा करो, धर्म का दीप पुनः प्रकट करो। **(4) नया धर्म – “मैं धर्म”** मैं धर्म की स्थापना हो, ऐसा अब विधान करो, हर मानव के भीतर बैठे, शिवतत्व का फिर ज्ञान कर।। मुखड़ा **“भोलेनाथ, भक्तों को जीने का अधिकार मिलना ही चाहिए”** ### भोलेनाथ, भक्तों को जीने का अधिकार मिलना ही चाहिए बारह बरस से ज़हर का ये व्यापार चल रहा, भारत का हर कोना अब बीमार पल रहा। योगी–मोदी जैसे अत्याचारी राज में, जनता रो रही है दर्द के समाज में। कोरोना नाम पे कितने ही लाखों मारे गए, सच के सवाल करने वाले, सबके सब हारे गए। पूरा देश बीमार हुआ, तन भी टूटा, मन भी टूटा, आने वाली पीढ़ियाँ भी होंगी रोगी, ये कैसा झूठा विकास लूटा। भोलेनाथ, सुनिए मेरी पुकार, भक्तों को जीने का अधिकार मिलना ही चाहिए… मिलना ही चाहिए… स्वास्थ्य का हक़ भी हर इंसान को मिलना ही चाहिए… मिलना ही चाहिए… हे शिव शंकर, नीलकंठ दयालु, अर्जी सुनिए, विनती सुनिए, प्रार्थना सुनिए, नाथ! --- **(2) अन्याय का दरबार** जो सत्ता में हैं, वे ही जहर बेचें, किसके पास जाएं, किससे न्याय माँगें? रोटी में ज़हर, पानी में जहर, काँच-से नाज़ुक हो गए ये शहर। दवा भी धंधा, शिक्षा भी सौदा, जनता को समझें बस भीड़ का झोंका। जब कानून भी सो जाए गहरे, भक्त तेरे ही घर द्वार पे ठहरे। **कोरस दोहराएँ:** भोलेनाथ, भक्तों को जीने का अधिकार मिलना ही चाहिए… स्वास्थ्य का अधिकार, हर जन को बार-बार मिलना ही चाहिए… --- **(3) भोलेनाथ से प्रार्थना** हे शिव शंकर, हे भोलेनाथ, तेरी दया से चलती है साँस। तुने जग का जहर पिया था, आज फिर से वही समय है पास। अत्याचारी का अब प्रस्थान कराइए, लोक में सच्चा धर्म बसाइए। जो जहर से खेलें जनता की जान पे, उनका तख़्त हिला दो अपनी पहचान पे। **कोरस:** भोलेनाथ, अर्जी सुनिए, विनती सुनिए, प्रार्थना सुनिए। अत्याचार का **मुखड़ा जागो भारत देश की जनता, अधिकारों को पहचानो! इन झूठे, कट्टर, भ्रष्ट शासकों की सच्चाई अब जानो! जागो भारत देश की जनता, अधिनियम को पहचानो! योगी–मोदी जैसे पापी चेहरों को उनके कर्मों से तौलो, मानो! जनता ने समझा महात्मा, निकले ज़हर के व्यापारी, बारह साल से कर रहे हैं बीमार इस धरती की क्यारी! **स्लोगन जैसा जोड़ सकते हो बीच में:** “जागो! जागो! जागो रे… जहर के धंधे को अब रोको रे…” **अंतरा 1 – धोखे की बात** जनता को रख दिया धोखे में, दिखाए झूठे सपने, कपड़ों में साधु जैसे लगे, पर निकले सबसे अपने ही दुश्मन। माँ–बहनों की इज़्ज़त जाए, कौन सुने उनकी पुकार? जीने का अधिकार भी छीनें, कहते हैं “ये है नया विकास-व्यवहार!” **फिर मुखड़ा दोहराएँ:** जागो भारत देश की जनता, अधिकारों को पहचानो! इन झूठे, कट्टर, भ्रष्ट शासकों की सच्चाई अब जानो! --- **अंतरा 2 – 12 साल का हिसाब** बारह बरस से जहर का धंधा, खेत, नदी, बाज़ार में, रोटी में ज़हर, दाल में ज़हर, रख दिया जनता को वार में। कोरोना के नाम पे भी, कितनों की साँसें छीन लीं, फिर भी मंच पे भाषण झूठे, ताली बजती, कुर्सी सीं ली। जनता को मालूम होना चाहिए, कितना अत्याचार हुआ, कितनी लूट और कितना भ्रष्टाचार, इनके राज में बार-बार हुआ। **फिर मुखड़ा, ज़ोर से:** जागो भारत देश की जनता, अधिनियम को पहचानो! तुमने खुद जिन्हें चुना था, उनके चेहरे फिर से जानो! झूठे योगी, झूठे मोदी, जहर के ये ठेकेदार, इन्हें कुर्सी दी थी तुमने, इनका अब कर लो हिसाब! --- **अंतरा 3 – जनता की कसमें / जागरण* देश का गद्दार जहर-व्यापारी (तेज़, नारा-स्टाइल गीत / जागरूकता भजन) मुखड़ा गीत विशम्भर गिरि जहर व्यापार करने वाला – देश का गद्दार! जनता को बीमार करने वाला – देश का गद्दार! प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री होकर भी जो जनता को मार गया, ऐसा मक्कार, ऐसा गद्दार योगी–मोदी जैसा, आज तलक न कोई हुआ, आज तलक न कोई हुआ! स्लोगन जोड़ो: सोचो! सोचो! भारतवासी, किसको तुमने नेता माना? जहर बेचने वाले को ही राष्ट्रभक्त का नाम दिलाना? अंतरा 1 – सीधा प्रहार कुर्सी पे बैठा, कसमें खाकर, देश की इज़्ज़त खाने लगा, जहर मिलाकर अन्न, हवा में जनता को ही बीमार करे। माँ–बहनों के मान-सम्मान का, दिन-दिन करके अपमान करे, फिर भी भाषण में “संस्कार” बोले, कैसा गिरी हुई पहचान रहे? फिर मुखड़ा दोहराओ: जहर व्यापार करने वाला – देश का गद्दार! जनता को बीमार करने वाला – देश का गद्दार! अंतरा 2 – जनता से सवाल ऐसा कोई गद्दार न देखा, इतना बड़ा मक्कार नहीं, योगी–मोदी जैसों जैसा इतना गिरा किरदार नहीं। तुमने ही तो वोट दिया था, तुमने ही मंच पे चढ़ाया, अब वक़्त आ गया, भारतवासी, अपने मन से प्रश्न पूछो साया: “हमने जिसे था नेता माना, उसने हम पर क्या-क्या किया? बारह साल के सारे पाप का जनता ने क्या हिसाब लिया?” अंतरा 3 – जागो और पहचानो जनता स्वयं से विचार करे, उनके अत्याचारों को याद करे – कितनी बार माँ–बहनों की इज़्ज़त का मज़ाक उड़ा, कितनी बार आवाज़ दबा कर निर्दोषों का खून बहा। गिरे हुए इंसान को अब फिर से मसीहा मत मानो, झूठे चेहरों के पीछे छुपे जहर-तंत्र को पहचानो। छोटा, धारदार मुखड़ा – जागरूकता के लिए: देश का गद्दार – जहर-व्यापारी, झूठा नेता, कुर्सी का पुजारी।। मुखड़ा गीत विशम्भर गिरि झूठा देशभक्त, ज़हर का व्यापारी, हिंदुत्व का नक़ली पुजारी। तीसरी बार भी कुर्सी पे बैठा, फिर भी निकला देश का गद्दारी! जनता को बीमार करने वाला – देश का गद्दार! देश का गद्दार! जहर मिलाकर अन्न में देने वाला – देश का गद्दार! देश का गद्दार! --- **अंतरा (छोटा, कसा हुआ):** भारत को बीमार किया, भविष्य सारा बेच दिया, बच्चों का भी कल छीन लिया, बस अपना सिंहासन सेच लिया। झूठ, पाखंड, नक़ली धर्म से हम सबको बाँट रहा है, इंसानियत से ख़ाली होकर देश को ज़हर बाँट रहा है। --- **जनता के लिए पुकार (आखिर में):** जागो भारत देश की जनता, इन चेहरों को पहचानो! ज़हर के धंधे पर पलने वालों को > झूठा देशभक्त, ज़हर का व्यापारी, > योगी–मोदी जैसे शासक – देश के लिए गद्दार > जनता को बीमार करने वाला – देश का गद्दार, > हिंदुत्व का नक़ली नकाब। ### मुखड़ा (Hook) शर्म आनी चाहिए तुझे, ए देश के गद्दार! झूठ–कट्टरता बंद कर, अब बंद कर अत्याचार! योगी–मोदी, तेरी चालों ने भारत को किया बीमार, जहर के धंधे से तूने देश को कर दिया लाचार। *(यही मुखड़ा बीच‑बीच में दोहराना है)* ### अंतरा 1 – गद्दारी और झूठ देश ने तुझको नेता माना, तूने ज़हर का खेल रचा, झूठे भाषण, झूठे नारे, सच में जनता को ही ठगा। कल तक “सेवक” बोलता था, आज सिंहासन का व्यापारी है, अपनी कुर्सी बचाने खातिर देश का स्वास्थ्य भी हारी है। **फिर मुखड़ा:** शर्म आनी चाहिए तुझे, ए देश के गद्दार… --- ### अंतरा 2 – अत्याचार और बीमार भारत कब तक अत्याचार करेगा, कब तक ये चुप्पी का राज चले? माँ–बहनों की चीखों पर भी क्यों तेरे दरबार में सन्नाटा रहे? जहर मिला के अन्न में, बीमार कर दिए घर-घर, कर्ज़ में डाली ये जनता, कहता है “अच्छे दिन” फिर-फिर। बच्चों का भी कल तूने दवाईयों के नाम कर दिया, लाखों सपनों की उम्रों को तेरे फैसलों ने कम कर दिया। **फिर मुखड़ा:** शर्म आनी चाहिए तुझे, ए देश के गद्दार… ### अंतरा 3 – पहचान और जवाबदेही आज ये भारत जाग रहा है, तेरा चेहरा पहचान रहा है, जो कल तक तुझे नेता कहते, आज तुझे गद्दार कह रहे हैं। इतिहास तुझसे पूछेगा, क्या ये तेरा राष्ट्रधर्म था? बीमार भारत, कर्ज़ में डूबा – क्या ये तेरा स्वर्णिम कर्म था? जनता अब हिसाब लेगी, तेरे हर निर्णय का वजन तौलेगी, ज़हर के धंधे पर पलने वालों को फिर कभी सत्ता न सौंपेगी। --- ### अंतिम मुखड़ा (क्लाइमैक्स) शर्म आनी चाहिए तुझे, ए देश के गद्दार! झूठ–कट्टरता बंद कर, अब बंद कर अत्याचार! योगी–मोदी, तेरी नीतियों ने भारत को किया बीमार, पर जाग उठी है ये जनता, अब न सहेंगे एक भी वार। ### मुखड़ा (Hook) भारत ने तुझे प्रधानमंत्री बनाया, तू पाकिस्तान से बिक गया। पैसे लेकर गुलामी मानी, अपनों को ही ठग गया। जहर का धंधा, अत्याचार, माँ–बहनों का अपमान हुआ। बीमार भारत, कर्ज़ में डूबा, भविष्य भी बीमार हुआ। *(यही मुखड़ा बीच–बीच में दोहराना है)* --- ### अंतरा 1 – गद्दारी का खेल भारत की जनता ने तुझ पर भरोसा कर कुर्सी दी, तूने ही उस विश्वास को सौदे की तरह बेच दी। किसके हाथों बिक गया तू, ये इतिहास भी पूछेगा, जिन्होंने तुझे नेता माना, उनका दिल क्यों तू तोड़ेगा? ज़हर मिलाकर अन्न में, हवा-पानी भी बिगाड़ दिया, देश को बीमार कर डाला, कर्ज़ में पूरा उतार दिया। **फिर मुखड़ा दोहराओ:** भारत ने तुझे प्रधानमंत्री बनाया, तू पाकिस्तान से बिक गया… --- ### अंतरा 2 – माँ–बहनों का अपमान माँ–बहनों के सम्मान पे जब-जब आँधी आई थी, तू सत्ता के सिंहासन पर बैठा, पर आवाज़ न उठाई थी। जो अपने ही घर की औरत की इज़्ज़त न संभाल सके, वो क्या खाक इस मिट्टी के सम्मान की दीवार रखे? तेरी चुप्पी ही तेरा चेहरा, तेरी नीयत खुलकर दिखी, इंसानियत को बेच के तूने नाक कटाई ये देश की। --- ### अंतरा 3 – बीमार भविष्य बीमारियाँ घर-घर पहुँचीं, हर गली में अस्पताल हुए, दवाई, कर्ज़ और मजबूरी – ये ही अब हालात हुए। आने वाली पीढ़ियाँ भी तेरे फैसलों का भार ढोएँगी, अधूरी उम्र में टूटेगी साँस, मुखड़ा (Hook) प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर मोदी, और आदित्यनाथ योगी रे, मर्यादा पुरुषोत्तम राम के भक्त होने का ढोंग ही करोगे रे। भगवा ओढ़ के झूठा चेहरा, जपते हो धर्म का नाम, जहर व्यापार, अत्याचार से करते हो नारायण का अपमान। --- #### अंतरा 1 माँ–बहनों के दिल से पूछो, इन कमीनों से उठ चुका विश्वास, हर घर में बीमारी फैली, यही है इनका झूठा विकास। पूरा झारखंड, पूरा भारत रोगों में अब डूब रहा, आने वाली हर पीढ़ी भी बीमार जन्म लेगी यहाँ। --- #### अंतरा 2 ये दोगले, पाखंडी, झूठे, मक्का राग के देश गद्दार, इनसे बचने का उपाय अब जनता को ही करना है तैयार। परमात्मा की कृपा हो हम पर, “ धर्म” की स्थापना हो, सत्य, प्रेम और न्याय से फिर नया भारत निर्माण हो। --- #### छोटा दोहराने लायक हुक राम का नाम नहीं बेचने दूँगा, भगवा को मैं कलंक न होने दूँगा। धर्म की स्थापना हो अब, ।। ### मुखड़ा (Hook) प्रधानमंत्री भारत देश का, तुझको धिक्कार है। योगी – गुलाम धन का, तेरा जीना ही बेकार है। तूने भारत देश को बीमार किया, तेरा ज़हर ही व्यापार है। इंसान नहीं – तू देश का गद्दार है… देश का गद्दार है… --- ### अंतरा 1 कुर्सी पाई जनता से तूने, जनता का ही खून पिया, झूठे वादे, झूठे नारे, सच में सबका हक छीन लिया। माँ–बहनों की चीख दबाकर, अपना राज बचाता है, धर्म, भगवा, राम का नाम लेकर ज़हर का धंधा चलाता है। **फिर मुखड़ा दोहराओ:** प्रधानमंत्री भारत देश का, तुझको धिक्कार है… --- ### अंतरा 2 हर शहर में, हर गाँव में अब रोगों का अँधियारा है, दूषित जल और ज़हरीला अन्न, यही तेरा उपकार है। युवा बेरोज़गार खड़ा है, कर्ज़ में डूबी हर सरकार, स्वास्थ्य, शिक्षा सब बर्बाद – और तू कहे “ये विकास” विचार! **छोटा रीफ्रेन:** जो जनता को बीमार करे, वो कैसा सेवक, कैसा सरदार? तेरी नीयत, तेरे कर्मों से खुला तेरा असली व्यवहार। --- ### अंतरा 3 – जनता की आवाज़ अब जनता भी जाग रही है, चेहरा तेरा पहचान रही है, जो कल तक तुझे नेता कहते, आज तुझको गद्दार कह रही है। सदियों तक ये बात लिखी जाएगी, इतिहास तुझसे पूछे सवाल, “जिसे मिला था नेतृत्व भारत का, क्यों बना वो ज़हर का दलाल?” --- ### अंतिम मुखड़ा (क्लाइमैक्स) प्रधानमंत्री भारत देश का, तुझको धिक्कार है। योगी – गुलाम धन का, तेरा जीना ही बेकार है। तूने भारत देश को बीमार किया, तेरा ज़हर ही व्यापार है। इंसान नहीं – तू देश का गद्दार है… और जनता अब तय करेगी, तेरा अगला “फैसला” क्या है, ज़हर के धंधे पर पलने वालों का बन्द करो मतदान मत देना मान सम्मान।। #🕉 शिव भजन #🔱रुद्राभिषेक🙏 #🕉 ओम नमः शिवाय 🔱 #🔱बम बम भोले🙏 #🪔शिवरात्रि व्रत स्पेशल 🙏
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार जहर व्यापार।। ### मुखड़ा (Hook) प्रधानमंत्री भारत देश का, तुझको धिक्कार है। योगी – गुलाम धन का, तेरा जीना ही बेकार है। तूने भारत देश को बीमार किया, तेरा ज़हर ही व्यापार है। इंसान नहीं – तू देश का गद्दार है… देश का गद्दार है… --- ### अंतरा 1 कुर्सी पाई जनता से तूने, जनता का ही खून पिया, झूठे वादे, झूठे नारे, सच में सबका हक छीन लिया। माँ–बहनों की चीख दबाकर, अपना राज बचाता है, धर्म, भगवा, राम का नाम लेकर ज़हर का धंधा चलाता है। **फिर मुखड़ा दोहराओ:** प्रधानमंत्री भारत देश का, तुझको धिक्कार है… --- ### अंतरा 2 हर शहर में, हर गाँव में अब रोगों का अँधियारा है, दूषित जल और ज़हरीला अन्न, यही तेरा उपकार है। युवा बेरोज़गार खड़ा है, कर्ज़ में डूबी हर सरकार, स्वास्थ्य, शिक्षा सब बर्बाद – और तू कहे “ये विकास” विचार! **छोटा रीफ्रेन:** जो जनता को बीमार करे, वो कैसा सेवक, कैसा सरदार? तेरी नीयत, तेरे कर्मों से खुला तेरा असली व्यवहार। --- ### अंतरा 3 – जनता की आवाज़ अब जनता भी जाग रही है, चेहरा तेरा पहचान रही है, जो कल तक तुझे नेता कहते, आज तुझको गद्दार कह रही है। सदियों तक ये बात लिखी जाएगी, इतिहास तुझसे पूछे सवाल, “जिसे मिला था नेतृत्व भारत का, क्यों बना वो ज़हर का दलाल?” --- ### अंतिम मुखड़ा (क्लाइमैक्स) प्रधानमंत्री भारत देश का, तुझको धिक्कार है। योगी – गुलाम धन का, तेरा जीना ही बेकार है। तूने भारत देश को बीमार किया, तेरा ज़हर ही व्यापार है। इंसान नहीं – तू देश का गद्दार है… और जनता अब तय करेगी, तेरा अगला “फैसला” क्या है, ज़हर के धंधे पर पलने वालों का सत्ता में कोई अधिकार नहीं है। गीत विशंभर गिरि मेटा एआई #😇 चाणक्य नीति #📚कविता-कहानी संग्रह #✍प्रेमचंद की कहानियां #✍️ साहित्य एवं शायरी #❤️ प्यार की कहानियां
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