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#whatsaap status Who does Achyutananda Das Ji's Adi Samhita describe as the incarnation of God? To find out, watch Part 5 of "The Beginning of the Golden Age in Kaliyuga" on the Factful Debates YouTube channel. #कलयुगमें_सतयुगकी_शुरुआतPart5 #FactfulDebatesYouTubeChannel #spiritualvibes #godisgood #blessed #KabirisGod #SupremeGod
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#whatsaap status अच्युतानंद दास जी की आदि संहिता किसे बता रही परमात्मा का अवतार? जानने के लिए देखिए कलयुग में सतयुग में शुरुआत Part 5 Factful Debates यूट्यूब चैनल पर #कलयुगमें_सतयुगकी_शुरुआतPart5 #FactfulDebatesYouTubeChannel #spiritualvibes #godisgood #blessed #dua #viralreels #fbreels #shriram #sanatandharma #bhagavadgita #shorts #gurugranthsahibji #quran #bible #vedas #hinduism #peace #geopolitics #globalpolitics #worldnews #breakingnews #friendship #Iran #Trump https://youtu.be/ji68lEM8Ppw
whatsaap status - आश्चर्य कर देने वाली भविष्यवाणी! खद्म्महयपुरुषअवतख ह्ो चुका दैजा कलयुग में सतयुग की शुरुआत ర]ాా 5 १६ महाकला ओर 38 परकाया प्रवेश का रहस्य अशतिदुनियामे पुनः शातिस्थापित करेग[ ] जानने के लिए देखिए Factful Debates 0 YOUTUBE Hee Book: 7496801825 CHANNEL @FaclfulDebales AAAK subescniberss 177ude0s आश्चर्य कर देने वाली भविष्यवाणी! खद्म्महयपुरुषअवतख ह्ो चुका दैजा कलयुग में सतयुग की शुरुआत ర]ాా 5 १६ महाकला ओर 38 परकाया प्रवेश का रहस्य अशतिदुनियामे पुनः शातिस्थापित करेग[ ] जानने के लिए देखिए Factful Debates 0 YOUTUBE Hee Book: 7496801825 CHANNEL @FaclfulDebales AAAK subescniberss 177ude0s - ShareChat
https://youtube.com/live/RGwu1siKhYw?si=oOx38GDYRnOiYssO #whatsaap status
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#whatsaap status #सत_भक्ति_संदेश ये कसाई का लोक है। कबीर परमात्मा ने कहा कि तुम जिस लोक में रह रहे हो ये कसाई का लोक है। यहां कोई रहम नाम की चीज नहीं है। किसी का बेटा मरो। किसी की बेटी मरो। पूरा क्षेत्र नष्ट हो जाओ। इस काल में दया नाम की चीज नहीं है। पढ़ें पुस्तक ज्ञान गंगा #GodMorningSaturday
whatsaap status - खुद्ा भाकार कुरआन ज्ञान दाता अपने से अन्य दयालु अल्लाह की महिमा बताता है। ३२ आयत नं. ४ :- वह अल्लाह ही है जिसने आसमानों और सूर अस् सज्दा మ जमीन को और उन सारी चीजों को जो इनके बीच है, छः दिन में पैदा किया और उसके बाद सिंहासन पर विराजमान हुआ| उसके सिवा न तुम्हारा कोई अपना है न सहायक है और न कोई उसके आगे सिफारिश करने वाला है। फिर क्या तुम होश में न आओगे | ~C 557 निःशुल्क पुस्तक पाय।  मुसलमान नहीं समझे নাম; পুর এনা; সানাবতল নন গন ক্তনোন 7(ಗ +91 7496801823 खुद्ा भाकार कुरआन ज्ञान दाता अपने से अन्य दयालु अल्लाह की महिमा बताता है। ३२ आयत नं. ४ :- वह अल्लाह ही है जिसने आसमानों और सूर अस् सज्दा మ जमीन को और उन सारी चीजों को जो इनके बीच है, छः दिन में पैदा किया और उसके बाद सिंहासन पर विराजमान हुआ| उसके सिवा न तुम्हारा कोई अपना है न सहायक है और न कोई उसके आगे सिफारिश करने वाला है। फिर क्या तुम होश में न आओगे | ~C 557 निःशुल्क पुस्तक पाय।  मुसलमान नहीं समझे নাম; পুর এনা; সানাবতল নন গন ক্তনোন 7(ಗ +91 7496801823 - ShareChat
#whatsaap status #GodNightFriday #TrueWorship_EndsSuffering . कबीर साहिब द्वारा धर्मदास को उपदेश देना वेदों में वर्णित विधि से तथा अन्य प्रचलित क्रियाओं से ब्रह्म प्राप्ति नहीं है। इसलिए उस चुणक ऋषि को परमात्मा प्राप्ति तो हुई नहीं, सिद्धियाँ प्राप्त हो गई। ऋषियों ने उसी को भक्ति की अन्तिम उपलब्धि मान लिया। जिसके पास अधिक सिद्धियाँ होती थी, वह अन्य ऋषियों से श्रेष्ठ माना जाने लगा। यही उपलब्धि चुणक ऋषि को प्राप्त थी। एक मानधाता चक्रवर्ती राजा था। जिसका राज्य पूरी पृथ्वी पर हो, ऐसा शक्तिशाली राजा था। उसके पास 72 अक्षौहिणी सेना थी। राजा ने अपने आधीन राजाओं को कहा कि जिसको मेरी पराधीनता स्वीकार नहीं, वे मेरे साथ युद्ध करें, एक घोड़े के गले में एक पत्र बाँध दिया कि जिस राजा को राजा मानधाता की आधीनता स्वीकार न हो, वो इस घोड़े को पकड़ ले और युद्ध के लिए तैयार हो जाए। पूरी पृथ्वी पर किसी भी राजा ने घोड़ा नहीं पकड़ा। घोड़े के साथ कुछ सैनिक भी थे। वापिस आते समय ऋषि चुणक ने पूछा कि कहाँ गए थे सैनिको! उत्तर मिला कि पूरी पृथ्वी पर घूम आए, किसी ने घोड़ा नहीं पकड़ा। किसी ने राजा का युद्ध नहीं स्वीकारा। ऋषि ने कहा कि मैंने यह युद्ध स्वीकार लिया। सैनिक बोले हे कंगाल! तेरे पास दाने तो खाने को हैं नहीं और युद्ध करेगा महाराजा मानधाता के साथ? ऋषि चुणक जी ने घोड़ा पकड़कर वृक्ष से बाँध लिया। मानधाता राजा को पता चला तो युद्ध की तैयारी हुई। राजा ने 72 अक्षौहिणी सैना की चार टुकडि़याँ बनाई। ऋषि पर हमला करने के लिए एक टुकड़ी 18 अक्षौहिणी (18 करोड़) सेना भेज दी । दूसरी ओर ऋषि ने अपनी सिद्धि से चार पूतलियाँ बनाई। एक पुतली छोड़ी जिसने राजा की 18 अक्षौहिणी सेना का नाश कर दिया। राजा ने दूसरी टुकड़ी भेजी। ऋषि ने दूसरी पुतली छोड़ी, उसने दूसरी टुकड़ी 18 अक्षौहिणी सेना का नाश कर दिया। इस प्रकार चुणक ऋषि ने मानधाता राजा की चार पुतलियों से 72 अक्षौहिणी सेना नष्ट कर दी। जिस कारण से महर्षि चुणक की महिमा पूरी पृथ्वी पर फैल गई। जिन्दा रुप धारी परमात्मा बोले कि हे धर्मदास! ऋषि चुणक ने जो सेना मारी, ये पाप कर्म ऋषि के संचित कर्मों में जमा हो गए। ऋषि चुणक ने जो ऊँ (ओम्) एक अक्षर का जाप किया, वह उसके बदले ब्रह्मलोक में जाएगा। फिर अपना ब्रह्म लोक का सुख समय व्यतीत करके पृथ्वी पर जन्मेगा। जो हठ योग तप किया, उसके कारण पृथ्वी पर राजा बनेगा। फिर मृत्यु के उपरान्त कुत्ते का जन्म होगा। जो 72 अक्षौहिणी सेना मारी थी, वह अपना बदला लेगी। कुत्ते के सिर में जख्म होगा और उसमें कीड़े बनकर 72 अक्षौहिणी सेना अपना बदला चुकाएगी। इसलिए हे धर्मदास! गीता ज्ञान दाता ब्रह्म ने अपनी साधना से होने वाली गति को अनुत्तम अश्रेष्ठ कहा है। धर्मदास जी ने पुछा कि हे जिन्दा! मैंने एक महामण्डलेश्वर से प्रश्न किया था कि गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में भगवान कृष्ण जी ने किस परमेश्वर की शरण में जाने के लिए कहा है? उस मण्डलेश्वर ने उत्तर दिया था कि भगवान श्री कृष्ण से अतिरिक्त कोई भगवान ही नहीं। कृष्ण जी ही स्वयं पूर्ण परमात्मा हैं, वे अपनी ही शरण आने के लिए कह रहे हैं, बस कहने का फेर है। हे जिन्दा जी! कृपया मुझ अज्ञानी का भ्रम निवारण करें। जिन्दा बाबा परमेश्वर कबीर साहिब ने कहा कि हे धर्मदास! ये माला डाल हुए हैं मुक्ता। षटदल उवा-बाई बकता। आपके सर्व मण्डलेश्वर अर्थात् तथा शंकराचार्य अट-बट करके भोली जनता को भ्रमित कर रहे हैं। कह रहे हैं कि गीता ज्ञान दाता गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में अर्जुन को अपनी शरण में आने को कहता है, यह बिल्कुल गलत है क्योंकि गीता अध्याय 2 श्लोक 7 में अर्जुन ने कहा कि ‘हे कृष्ण! अब मेरी बुद्धि ठीक से काम नहीं कर रही है। मैं आप का शिष्य हूँ, आपकी शरण में हूँ। जो मेरे हित में हो, वह ज्ञान मुझे दीजिए। हे धर्मदास! अर्जुन तो पहले ही श्री कृष्ण की शरण में था। इसलिए गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में गीता ज्ञान दाता ने अपने से अन्य ‘परम अक्षर ब्रह्म’ की शरण में जाने के लिए कहा है। गीता अध्याय 4 श्लोक 3 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि हे अर्जुन! तू मेरा भक्त है। इसलिए यह गीता शास्त्र सुनाया है। गीता ज्ञान दाता से अन्य पूर्ण परमात्मा का अन्य प्रमाण गीता अध्याय 13 श्लोक 11 से 28, 30, 31, 34 में भी है। श्री मद्भगवत गीता अध्याय 13 श्लोक 1 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि शरीर को क्षेत्र कहते हैं जो इस क्षेत्रा अर्थात् शरीर को जानता है, उसे “क्षेत्रज्ञ” कहा जाता है। गीता अध्याय 13 श्लोक 1 गीता अध्याय 13 श्लोक 2 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि मैं क्षेत्रज्ञ हूँ। क्षेत्र तथा क्षेत्रज्ञ दोनों को जानना ही तत्त्वज्ञान कहा जाता है, ऐसा मेरा मत है। गीता अध्याय 13 श्लोक 10 में कहा है कि मेरी भक्ति अव्याभिचारिणी होनी चाहिए। जैसे अन्य देवताओं की साधना तो गीता अध्याय 7 श्लोक 12 से 15 तथा 20 से 23 में व्यर्थ कही हैं। केवल ब्रह्म की भक्ति करें। उसके विषय में यहाँ कहा है कि अन्य देवता में आसक्त न हों। भावार्थ है कि भक्ति व मुक्ति के लिए ज्ञान समझें, वक्ता बनने के लिए नहीं। इसके अतिरिक्त वक्ता बनने के लिए ज्ञान सुनना अज्ञान है। पतिव्रता स्त्री की तरह केवल मुझमें आस्था रखकर भक्ति करें और मनुष्यों में बैठकर बातें बनाने का स्वभाव नहीं होना चाहिए। एकान्त स्थान में रहकर भक्ति करें। गीता अध्याय 13 श्लोक 11 में गीता ज्ञान दाता ने कहा है कि अध्यात्म ज्ञान में रूचि रखकर तत्त्व ज्ञान के लिए सद्ग्रन्थों को देखना तत्त्वज्ञान है, वह ज्ञान है तथा तत्त्वज्ञान की अपेक्षा कथा कहानियाँ सुनाना, सुनना, शास्त्रविधि विरूद्ध भक्ति करना यह सब अज्ञान है। तत्त्वज्ञान के लिए परमात्मा को जानना ही ज्ञान है। गीता अध्याय 13 श्लोक 12 में गीता ज्ञान दाता ने अपने से “परम ब्रह्म” यानि श्रेष्ठ परमात्मा का ज्ञान करवाया है, जो परमात्मा जानने योग्य है, जिसको जानकर अमरत्व प्राप्त होता है अर्थात् पूर्ण मोक्ष का अमृत जैसा आनन्द भोगने को मिलता है। उसको भली-भाँति कहूँगा। वह दूसरा परमात्मा न तो सत् कहा जाता है अर्थात् गीता ज्ञान दाता ने अध्याय 4 श्लोक 32, 34 में कहा है कि जो तत्त्वज्ञान है, उसमें परमात्मा का पूर्ण ज्ञान है। वह तत्त्वज्ञान परमात्मा अपने मुख कमल से स्वयं उच्चारण करके बोलता है। उस तत्त्वज्ञान को तत्त्वदर्शी सन्त जानते हैं, उनको दण्डवत् प्रणाम करने से, नम्रतापूर्वक प्रश्न करने से वे परमात्म तत्त्व को भली भाँति जानने वाले तत्त्वदर्शी सन्त तुझे तत्त्वज्ञान का उपदेश करेंगे। इससे सिद्ध हुआ कि गीता ज्ञान दाता को परमात्मा का पूर्ण ज्ञान नहीं है। इसलिए कह रहा है कि वह दूसरा परमात्मा जो गीता ज्ञान दाता से भिन्न है। वह न सत् है, न ही असत्। यहाँ पर परब्रह्म का अर्थ सात शंख ब्रह्माण्ड वाले परब्रह्म अर्थात् गीता अध्याय 15 श्लोक 16 वाले अक्षर पुरूष से नहीं है। यहाँ पर माने दूसरा और ब्रह्म माने परमात्मा ब्रह्म से अन्य परमात्मा पूर्ण ब्रह्म का वर्णन है। गीता अध्याय 13 श्लोक 12 में गीता ज्ञान दाता कह रहा है कि जो मेरे से दूसरा ब्रह्म अर्थात् प्रभु है वह अनादि वाला है। अनादि का अर्थ है जिसका कभी आदि अर्थात् शुरूवात न हो, कभी जन्म न हुआ हो। गीता ज्ञानदाता क्षर पुरूष है, इसे “ब्रह्म” भी कहा जाता है। इसने गीता अध्याय 2 श्लोक 12, गीता अध्याय 4 श्लोक 5, 9, गीता अध्याय 10 श्लोक 2 में स्वयं स्वीकारा है कि हे अर्जुन! तेरे और मेरे बहुत जन्म हो चुके हैं, तू नहीं जानता, मैं जानता हूँ। इससे सिद्ध हुआ कि गीता ज्ञानदाता अनादि वाला “ब्रह्म” अर्थात् प्रभु नहीं है। इससे यह सिद्ध हुआ कि गीता ज्ञानदाता ने अध्याय 13 के श्लोक 12 में अपने से अन्य अविनाशी परमात्मा की महिमा कही है। (अध्याय 13 श्लोक 12) Sa True Story YouTube
whatsaap status - नुक्तिबोध पेज ४११ ~ ४१२ वेदों में वर्णित विधि से तथा अन्य प्रचलित क्रिया से ब्रह्मा प्राप्ति नहीं है॰ इसीलिए चुणक ऋषि को परमात्मा की प्राप्ति तो नहीं हुई। सिद्धियां प्राप्त ही गरई और सिद्धियों साथ में अभिमान भी आ जाता है। चुणक ऋषि ने अपनी सारी भक्ति कमाई सेजो सिद्धियां मिली उससे उन्होंने राजा मांनधाता से युद्ध कर अक्षौहिणी सेना को मार दिया और अपनी भक्ति का नाश किया। 72 SPIRITUALLEADER SANT RAMPAL Ji @SAINTRANPALJIN SUPREMEGOD.ORG SAINT RAmPALJ MAHARAJ नुक्तिबोध पेज ४११ ~ ४१२ वेदों में वर्णित विधि से तथा अन्य प्रचलित क्रिया से ब्रह्मा प्राप्ति नहीं है॰ इसीलिए चुणक ऋषि को परमात्मा की प्राप्ति तो नहीं हुई। सिद्धियां प्राप्त ही गरई और सिद्धियों साथ में अभिमान भी आ जाता है। चुणक ऋषि ने अपनी सारी भक्ति कमाई सेजो सिद्धियां मिली उससे उन्होंने राजा मांनधाता से युद्ध कर अक्षौहिणी सेना को मार दिया और अपनी भक्ति का नाश किया। 72 SPIRITUALLEADER SANT RAMPAL Ji @SAINTRANPALJIN SUPREMEGOD.ORG SAINT RAmPALJ MAHARAJ - ShareChat
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#whatsaap status ऋग्वेद मण्डल 10 सुक्त 161 मंत्र 2, 5, सुक्त 162 मंत्र 5, सुक्त 163 मंत्र 1 - 3 में प्रमाण है कि पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी सतभक्ति करने वाले की आयु बढ़ा देते हैं और यदि कोई रोगी मृत्यु के भी निकट है तो भी उसको निरोग करके सौ वर्ष तक कि आयु भी प्रदान कर सकते हैं। भक्ति न करने वाले और मनमानी पूजाएं करने वाले को काल के दूत ले जाते हैं जबकि सतभक्ति करने वाले को परमात्मा विमान में बैठाकर अमरलोक यानी सतलोक ले जाते हैं। #TrueWorship_EndsSuffering #SaTrueStoryYouTubeChannel #worship #faith #cancer #fyp #coloncancer #healthcare #stroke #digitalhealth #cancertreatment #healthsecrets #meditation #waheguru #harharmahadev #shiv #viralreels #SantRampalJiMaharaj
whatsaap status - 25 अनेक ग्ुरु बनाये लेकिन कोई लाभ नहींहो र्हा था surrendering fo fhe By Safguru and pracficing Irue devotion one cqn receive counlless blessings. Visit, Sa True Story VSIT SA Youlube Channel Story | True WETM: 4 App Download our Official To receive free Initiation Sant Rampal Ji Maharaj and spiritual books by Sant Rampal ]i Maharaj ]i, 6ON Play Google WhatsApp: 91 7496801823 message us on 25 अनेक ग्ुरु बनाये लेकिन कोई लाभ नहींहो र्हा था surrendering fo fhe By Safguru and pracficing Irue devotion one cqn receive counlless blessings. Visit, Sa True Story VSIT SA Youlube Channel Story | True WETM: 4 App Download our Official To receive free Initiation Sant Rampal Ji Maharaj and spiritual books by Sant Rampal ]i Maharaj ]i, 6ON Play Google WhatsApp: 91 7496801823 message us on - ShareChat
#whatsaap status पूर्ण परमात्मा कबीर साहेब जी संत की भूमिका में आए और ऐसा अद्वितीय ज्ञान दिया कि देखते ही देखते 64 लाख लोग परमात्मा के शिष्य बन गए। वर्तमान में स्वयं कबीर जी संत रामपाल जी महाराज के रूप में अवतरित हैं और वो भी वही शास्त्र प्रमाणित ज्ञान दे रहे हैं जिसे समझकर करोड़ों लोग उनसे जुड़ चुके हैं। आज से 600 वर्ष पहले कबीर परमात्मा संत की भूमिका में पृथ्वी पर आए और काल जाल में कष्ट भोग रहे प्राणियों को सतभक्ति विधि बताकर अनेकों लाभ दिए। अब फिर कबीर परमात्मा जी संत रामपाल जी महाराज जी के रूप में आए हुए हैं और लाखों दीन दुःखियों को वही भक्ति विधि बताकर दुःखों से छुटकारा दिला रहे हैं। यजुर्वेद अध्याय 8 मंत्र 13, अध्याय 5 मंत्र 32 में स्प्ष्ट है कि कबीर परमेश्वर जी सभी पापों का नाश कर देते हैं। वहीं वर्तमान समय में संत रामपाल जी महाराज जी से नाम लेकर कबीर परमेश्वर की भक्ति करने से लोगों के सर्व पाप समाप्त हो रहें हैं जिससे लोगों का जीवन सुखी हो रहा है। कबीर, जब ही सत्यनाम हृदय धरो, भयो पाप को नाश। मानो चिंगारी अग्नि की, पड़े पुरानी घास।। जैसा कि ऋग्वेद मण्डल 10 सूक्त 161 मंत्र 2, मण्डल 9 सूक्त 80 मंत्र 2, सामवेद मंत्र संख्या 822 में लिखा है कि कबीर परमात्मा अपने साधक की आयु भी बढ़ा देता है। वर्तमान समय में कबीर परमेश्वर के अवतार संत रामपाल जी महाराज जी से नाम (मंत्र) उपदेश लेकर मर्यादा में रहकर भक्ति करने से मौत के मुँह में गये लोगों को एक बार पुनः जीवन दान मिला। ऐसे अनेक उदाहरण हैं जिनकी आयु संत रामपाल जी महाराज जी द्वारा दी गयी सतभक्ति करने से बढ़ गई। #TrueWorship_EndsSuffering #SaTrueStoryYouTubeChannel #worship #faith #cancer #fyp #coloncancer #healthcare #stroke #digitalhealth #cancertreatment #healthsecrets #meditation #waheguru #harharmahadev #shiv #viralreels #SantRampalJiMaharaj
whatsaap status - புன ट्यूमर छूमंतर 3 Shiloya Sundargar 9५९ सनभक्ति से मिले 354 गजब सुख् संत रामपाल जी महाराज जी से नाम उपदेश लेने के बाद ट्यूमर से मिला छुटकारा। देखें Sa True Story YouTube Channel. VISIT संत रामपाल जी महाराज जी से SA निःशुल्क नामदीक्षा व निःशुल्क True Story पुस्तक प्राप्त करने के लिये संपर्क सूत्र : +91 7496801823 सत्य घटनाओं पर आधारित புன ट्यूमर छूमंतर 3 Shiloya Sundargar 9५९ सनभक्ति से मिले 354 गजब सुख् संत रामपाल जी महाराज जी से नाम उपदेश लेने के बाद ट्यूमर से मिला छुटकारा। देखें Sa True Story YouTube Channel. VISIT संत रामपाल जी महाराज जी से SA निःशुल्क नामदीक्षा व निःशुल्क True Story पुस्तक प्राप्त करने के लिये संपर्क सूत्र : +91 7496801823 सत्य घटनाओं पर आधारित - ShareChat