सरकार की तरफ से SC, ST और OBC छात्रों के लिए कई मुफ्त कोचिंग और शैक्षणिक सहायता योजनाएँ चलाई जा रही हैं। इन योजनाओं का उद्देश्य उन वर्गों के विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में मदद देना है, जो सामाजिक और आर्थिक रूप से लंबे समय से वंचित रहे हैं। इनके तहत UPSC, SSC, बैंकिंग, JEE-NEET जैसी परीक्षाओं की तैयारी के लिए मान्यता प्राप्त संस्थानों में बिना फीस कोचिंग, स्टाइपेंड और अन्य सुविधाएँ दी जाती हैं।
लेकिन एक सवाल अक्सर उठता है—गरीबी क्या जाति देखकर आती है? क्या सामान्य (General) वर्ग में आर्थिक रूप से कमजोर लोग नहीं होते? गांव-कस्बों में ऐसे बहुत से परिवार हैं जिनकी आय बेहद कम है, लेकिन वे इन योजनाओं के दायरे में नहीं आ पाते। उनके बच्चों में भी वही सपना होता है—सरकारी नौकरी, अच्छी पढ़ाई और बेहतर भविष्य। फिर उनके लिए मुफ्त कोचिंग जैसी व्यवस्था क्यों सीमित है?
नीति का उद्देश्य वंचितों को आगे बढ़ाना है, पर यह भी जरूरी है कि आर्थिक कमजोरी को हर वर्ग में गंभीरता से देखा जाए, ताकि हर जरूरतमंद विद्यार्थी को पढ़ाई का समान मौका मिल सके।
यह लेख नीति पर सामान्य चर्चा और जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है, किसी भी जाति, वर्ग या समुदाय के प्रति दुर्भावना नहीं रखता।
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