श्री हरि विष्णु
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sn vyas
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#श्री हरि विष्णु श्री हरि (भगवान विष्णु) की कृपा प्राप्त करने के लिए सबसे शक्तिशाली मंत्र और उपाय निम्नलिखित हैं: ​शक्तिशाली मंत्र ​द्वादशाक्षर मंत्र (सबसे प्रभावशाली): ​"ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" यह मंत्र मुक्ति और सभी सुखों को प्रदान करने वाला महामंत्र माना जाता है। ​विष्णु मूल मंत्र: ​"ॐ नमो नारायणाय" ​श्री कृष्ण मंत्र (विपत्ति नाशक): ​"हरे कृष्ण हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम, राम राम हरे हरे॥" ​विष्णु गायत्री मंत्र: ​"ॐ नारायणाय विद्महे। वासुदेवाय धीमही। तन्नो विष्णु प्रचोदयात्॥" ​प्रभावी उपाय ​तुलसी अर्पण: भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। उनकी पूजा में तुलसी दल (पत्ते) अवश्य अर्पित करें। बिना तुलसी के वे भोग स्वीकार नहीं करते। ​विष्णु सहस्रनाम का पाठ: प्रतिदिन या प्रत्येक गुरुवार को विष्णु सहस्रनाम का पाठ करने से कुंडली के बड़े से बड़े दोष शांत होते हैं और आर्थिक उन्नति होती है। ​पीले रंग का प्रयोग: श्री हरि को पीला रंग प्रिय है। गुरुवार के दिन पीले वस्त्र पहनें और उन्हें पीले फूल व पीले फल (जैसे केला) अर्पित करें। ​एकादशी व्रत: भगवान विष्णु की प्रसन्नता के लिए एकादशी का व्रत सबसे उत्तम उपाय है। इस दिन अन्न का त्याग कर भजन-कीर्तन करना चाहिए। ​शंख पूजन: घर के मंदिर में दक्षिणावर्ती शंख रखें और उसकी पूजा करें। शंख की ध्वनि से श्री हरि और माता लक्ष्मी दोनों प्रसन्न होते हैं। ​परोपकार और सेवा: "नर सेवा ही नारायण सेवा है।" दीन-दुखियों की मदद क,रने और जीव मात्र पर दया करने से श्री हरि की कृपा स्वतः ही प्राप्त होने लगती है।
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sn vyas
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#श्री हरि विष्णु 🙏🥰 #भगवानविष्णु का विराट स्वरूप, जिसे विश्वरूप भी कहते हैं, उनका वह ब्रह्मांडीय और सार्वभौमिक रूप है जिसमें संपूर्ण सृष्टि समाहित है; इसमें अनगिनत मुख, भुजाएँ और सभी देवी-देवता, जीव-जंतु, ग्रह-नक्षत्र एक साथ दिखाई देते हैं, जैसा कि भगवद्गीता के 11वें अध्याय में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को दिखाया था, जो उनकी असीमित शक्ति, सर्वव्यापकता और सृष्टि के रचयिता, पालक और संहारक होने का प्रतीक है। विराट स्वरूप की विशेषताएँ: अनंतता: इस रूप में भगवान विष्णु के अनगिनत मुख, आँखें और भुजाएँ होती हैं, जिनमें पूरा ब्रह्मांड समाया होता है। ब्रह्मांडीय घटनाएँ: इसके भीतर जन्म, मृत्यु, सृजन और विनाश जैसी सभी ब्रह्मांडीय घटनाएँ घटित होती दिखती हैं। तेजोमय: यह स्वरूप इतना तेजस्वी होता है, जैसे हजारों सूर्य एक साथ उग आए हों। सभी रूपों का समावेश: इसमें सभी प्रकार के शस्त्र, दिव्य प्राणी, मनुष्य, जीव-जंतु और प्राकृतिक तत्व समाहित होते हैं। सर्वव्यापकता: यह स्वरूप दर्शाता है कि भगवान ही सब कुछ हैं और सब कुछ उन्हीं का अंश है। विराट स्वरूप के दर्शन के प्रसंग: भगवद्गीता: भगवान कृष्ण ने कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान अर्जुन को यह स्वरूप दिखाया, जिससे अर्जुन को अपनी ड्यूटी (धर्म) का एहसास हुआ। राजा बलि: वामन अवतार में भगवान विष्णु ने राजा बलि को अपना विराट रूप दिखाया था। मैया यशोदा: बाल-कृष्ण के रूप में उन्होंने अपनी माँ यशोदा को मिट्टी खाते समय यही विराट स्वरूप दिखाया था। नारद मुनि: नारद मुनि को भी भगवान ने अपने विराट रूप के दर्शन कराए थे। महत्व: विराट स्वरूप भगवान की महानता, सर्वशक्तिमानता और सर्वोच्चता को दर्शाता है। यह भक्तों को भौतिक जगत से परे परम सत्य का बोध कराता है और उन्हें भक्ति व श्रद्धा के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता है। यह रूप देखकर मनुष्य को अपनी लघुता और ईश्वर की विशालता का अनुभव होता है।
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sn vyas
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#श्री हरि विष्णु #शुभ गुरुवार अनंत शेष पर विराजमान श्रीहरि 🌊 | सृष्टि के पालनहार क्षीरसागर की लहरों पर, शेषनाग की छाया में, योगनिद्रा में लीन भगवान श्रीविष्णु — जहाँ से सृष्टि का सृजन, पालन और संतुलन होता है 🙏✨ यह दृश्य हमें स्मरण कराता है कि 👉 ईश्वर शांत भी हैं और सर्वशक्तिमान भी। 👉 धैर्य और संतुलन ही जीवन का आधार है।
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