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.कबीर साहिब जी की शरण में आने से अवश्य पार होगा
कबीर, जो जन मेरी शरण है, ताका हूँ मैं दास।
गेल-गेल लाग्या फिरूँ, जब तक धरती आकाश।।
परमात्मा कबीर जी ने बताया है कि यदि कोई जीव किसी युग में मेरी दीक्षा ले लेता है। यदि वह पार नहीं हो पाता है तो उसको किसी मानुष जन्म में ज्ञान सुनाकर शरण में लूँगा। उसके साथ-साथ रहूँगा। मेरी कोशिश रहती है कि किसी प्रकार यह काल जाल से छूटकर सुखसागर सत्यलोक में जाकर सुखी हो जाए। मेरा प्रयत्न तब तक रहता है जब तक धरती और आकाश नष्ट नहीं होते यानि प्रलय नहीं होती।
इसी प्रक्रिया के चलते अब्राहिम अधम सुल्तान की आत्मा पूर्व के कई जन्मों से परमेश्वर कबीर जी की शरण में रही थी। फिर काल ने खण्ड कर दिया। इसके पूर्व के कुछ जन्मों का विवरण इस प्रकार है जो पुराने कबीर सागर में है, वर्तमान वाले कबीर सागर से वह विवरण अज्ञानवश निकाल दिया गया है। कारण यह रहा है कि काल प्रेरणा से 12 पंथों के कबीर पंथी समझ नहीं सके। इसलिए उसको व्यर्थ जानकर ग्रन्थ से निकाल दिया।
జ్ఞాన గంగా