#आई तुळजाभवानी 🛕🚩🔱
"जब गुरु ने भय और अंधकार का अर्थ समझाया, तब शिष्य ने काली में आत्मज्ञान का प्रकाश देखा। ”
गुरु-शिष्य संवाद : महाकाली का रहस्य
दृश्य:
एक शाम को शिष्य गुरु के चरणों में नमन करता है। शिष्य के मन में एक गहरा प्रश्न उठता है - " काली देवी का भयंकर रूप क्यों है?" वह मृत्यु और विनाश से क्यों जुड़ा हुआ है? "
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👦 शिष्य:
गुरुदेव, काली देवी की तस्वीर देखी है—वो कृष्णवर्ण लगती है, जीभ निकाल कर, शव पर खड़ी है।
क्या वह मृत्यु और भय की देवी है? वह इतनी भयानक क्यों दिखती है?
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🧘 ♂️ गुरु:
क्या, आपका सवाल गहरा है।
काली को समझने के लिए पहले समय (कल) को समझना होगा।
समय सबको निगल जाता है - राजा हो या साधु, सबको।
काली काल से परे एक शक्ति है - इसलिए महाकाली कहलाती है।
उसका काला रूप बताता है - जब अहंकार, लालच, और अज्ञान हमारी चेतना को कवर करता है,
वह अंधकार काले रूप में प्रकट होता है, जो उस अज्ञान को नष्ट कर देता है।
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👦 शिष्य:
लेकिन गुरुदेव वो शिव पर टिकी है इसका क्या मतलब है?
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🧘 ♂️ गुरु:
शिव चेतना है, शक्ति काली है
शक्ति बिना शिव शव समान है
जब चेतना (शिव) निष्क्रिय हो जाती है, तब शक्ति (काली) उसे गति देने के लिए आगे बढ़ती है।
वह दृश्य शक्ति और चेतना के अद्वितीय संबंध को दर्शाता है - दो नहीं, बल्कि एक ही अस्तित्व के दो पहलू।
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👦 शिष्य:
गुरुदेव, काली के हाथों में तलवार और खप्पर क्यों है?
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🧘 ♂️ गुरु:
तलवार अज्ञान और अहंकार को काटती है।
जीवन और मृत्यु का चक्र बताता है खप्पर।
उसकी जीभ बाहर निकालने का अर्थ —
"मनुष्य ने अहंकार, पाप और वासना की रक्षा की है" उसकी आत्मस्वीकृति और नियंत्रण है।
काली हमें एक संदेश भेजता है —
"अपने स्वयं के अंधेरे का सामना करें, दौड़कर नहीं - चेतना के साथ। ”
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👦 शिष्य:
गुरुदेव उसका ध्यान कैसे हो सकता है?
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🧘 ♂️ गुरु:
काली ध्यान एक साहसिक कार्य है, वत्स।
आपको अपना मन बनाना होगा जो आपके पास पहले है उसका सामना करने के लिए।
अमावस्या की रात, दीप प्रज्वलित करते हुए,
शांत मन से इस मंत्र का जाप करें।
>" ॐ क्रीं कालिकय नमः ॥"
यह बीज मंत्र भीतर के भय,संदेह और बंधन को काट देता है।
काली बाहर नहीं है, आपके भीतर जो शक्ति सो रही है।
जब आप अपने आप को अंधेरे में पाते हैं,
जिस पल तेरे दिल में काली आती है।
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👦 शिष्य:
गुरुदेव ये मृत्यु की देवी हैं या मोक्ष की ?
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🧘 ♂️ गुरु:
वह दोनों है, क्या है।
जो अज्ञान से बंधा है उसके लिए मृत्यु है।
परन्तु जो सत्य की खोज करता है, उसके लिए वह मोक्ष है।
काली विनाश नहीं है - वह नवाचार की शुरुआत है।
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👦 बच्चा (झुकता हुआ):
अब तो समझ जाओ गुरुदेव
कैली के बाहर से नहीं डरता —
वह मेरी आंतरिक जागरूकता की जागृति है।
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🧘 ♂️ गुरु (आशीर्वाद देते हुए):
क्या, कैली की तलाश में बाहर मत जाओ।
वह तुम्हारी आत्मा का नृत्य है —
भय को प्रकाश में बदलने की शक्ति।
जब आप अंधेरे से प्यार करना सीखते हैं,
जिस पल आपको महाकाली का आशीर्वाद मिलता है।
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✨ सारांश (संदेश):
> काला विनाश नहीं किया जाता है,
वह परिवर्तन, पुनर्जन्म और मोक्ष है।
जो उसे समझता है, वह "समय" को पार कर जाता है —
और अनन्त शांति में प्रवेश करता है।