Editraj
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इसरो के असफल हुए पीएसएलवी सी62 मिशन में 16 में से एक यात्री जिंदा बचा है। क्या आपको पता है? जी हां, 16 को पैसेंजर्स इसरो के इस मिशन के साथ गए थे। लेकिन इनमें जो जिंदा बचा एकमात्र यात्री है उसका नाम है केआईडी किड। जब यह माना जा रहा था कि मिशन के बाद पीएसएलवी का पूरा पेलोड कहीं खो गया तब अचानक से खबर आती है स्पेनिश स्टार्टअप ऑर्बिटल पैराडाइम ने खुलासा किया कि उसका कैस्ट्रल इनिशियल डेमोंस्ट्रेटर या किड कैप्सूल ना सिर्फ स्पेसक्राफ्ट से अलग होने में कामयाब रहा बल्कि अब वह डाटा भी भेज रहा है। केआईडी किड की इस चमत्कारिक उपलब्धि को कंपनी ने
बखूबी समझाया है। ऑर्बिटल पैराडाइम ने एक्स पर पोस्ट में कहा, "हमारा किड कैप्सूल तमाम मुश्किलों के बावजूद पीएसएलवी C62 से अलग हो गया। यह ना सिर्फ चला बल्कि इसने डाटा भेजना शुरू कर दिया। हम प्रक्षेप पथ का पुनर्निर्माण कर रहे हैं। पूरी रिपोर्ट जल्द आएगी। कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर कहा वो अंतरिक्ष औद्योगिकीकरण को सक्षम बनाने के लिए काम करती है। उसका लक्ष्य कक्षा से पृथ्वी तक नियमित कुशल और सुलभ उड़ाने उपलब्ध कराना है। इसमें ऐसा कैप्सूल डिजाइन करना भी शामिल है जो रीएंट्री के हाई टेंपरेचर को सहन कर सके और यह सुनिश्चित किया जा सके
कि स्पेस से पृथ्वी तक ऐसी कारगो यात्राएं अपेक्षाकृत कम लागत वाली हो। तो आखिरकार मिशन जो फेल हुआ उसमें जो एकमात्र जिंदा बचा है किड वो क्या है? किड एक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर और कंपनी के प्रस्तावित वाहन कर्नेल का प्रोटोटाइप था। इसका मकसद कक्षा से पृथ्वी पर 120 किलो तक का पेलोड वापस लाना है। ऑर्बिटल पैराडाइम के कोफाउंडर और सीईओ फ्रांसिस्को कैसियाटोर ने मिशन से पहले लिखा था कि किड को अंतरिक्ष में भेजने का मकसद वायुमंडलीय रीएंट्री पर महारत हासिल करने की दिशा में कंपनी को और आगे ले जाना था। दूसरे मिशन
चरणों के विपरीत रीएट्री के दौरान पैदा होने वाली सभी स्थितियों को एक ही समय में जमीन पर सटीक रूप से दोहराना संभव नहीं है। यह किड कैप्सूल मुख्य रूप से रीयूजेबल यानी रीएंट्री सिस्टम के परीक्षण के लिए भेजा गया था। इसे फ्रेंच कंपनी राइड के सहयोग से तैयार किया गया है। कंपनी का जो टारगेट है वह ऐसा सिस्टम बनाना है जो उपग्रहों की सर्विसिंग और लॉजिस्टिक्स में काम आ सके। इस मिशन की विफलता ने कई सवाल खड़े कर दिए थे और इसके साथ ही अनजाने में ही इंजीनियर्स को एक दुर्लभ मौका भी दे दिया। आमतौर पर रीएंट्री का डाटा सामान्य
परिस्थितियों में ही मिलता है। लेकिन पीएसएलवी की खराबी के कारण इस कैप्सूल ने ऑफन नॉमिनल यानी असामान्य स्थितियों का सामना किया। तो मिशन में क्या गड़बड़ी हुई? एक बार फिर से जान लीजिए। पीएसएलवी C62 रॉकेट एक विदेशी पृथ्वी अवलोकन उपग्रह एक स्पाई कैमरे की तरह काम करता। 16 उपग्रहों को लेकर अंतरिक्ष के लिए रवाना हुआ था। जिसे इसरो की साइट पर आपको कोपसेंजर्स लिखा हुआ मिलेगा। इसको प्रक्षेपण के तीसरे चरण में गड़बड़ी का सामना करना पड़ा। थर्ड फेज में गड़बड़ा गया। नर्वस 90 का शिकार हुआ। यह रॉकेट उड़ान पथ से भटका। उपग्रहों को निर्धारित
कक्षा में स्थापित करने में नाकामयाब रहा। इसरो ने यह जानकारी दी। यह लगातार दूसरी बार हुआ है जब पीएसएलवी मिशन तीसरे चरण के दौरान आई गड़बड़ी का शिकार हो गया। पेलोड में एक विशेष टैंकर उपग्रह, आईल सेट और ध्रुवा स्पेस के साथ छात्रों द्वारा बनाए गए कुछ उपग्रह भी शामिल थे। इसरो के अध्यक्ष वी नारायण कहते हैं उड़ान के तीसरे चरण के दौरान जब स्टैप ऑन मोटर पीएसएलवी62 को निर्धारित ऊंचाई तक ले जाने के लिए थ्रस्ट प्रदान कर रहे थे। तभी रॉकेट में गड़बड़ी आ गई। बाद में वह उड़ान पथ से विचलित हो गया। उन्होंने कहा रॉकेट में
गड़बड़ी आने और उसके उड़ान पथ से भटकने के कारणों का पता लगाने के लिए डिस्क्रिप्टिव विश्लेषण शुरू कर दिया गया है। मई 2025 में की गई इसी तरह की कोशिश पीएसएलवी61 भी नाकाम हो गई थी क्योंकि मोटर के चेंबर प्रेशर में अचानक गिरावट आ गई जिसके बाद रॉकेट को सही डायरेक्शन और सही स्पीड नहीं मिल पाई थी। पीएसएलवी C62 मिशन साल 2026 का इसरो का पहला अभियान था। इस रॉकेट में डीआरडीओ का मुख्य सेटेलाइट ईओएस एन1 मौजूद था और इसके अलावा इसमें भारत और विदेशों के 15 छोटे-छोटे दूसरे पेलोड्स भी थे। इसरो चेयरमैन वी नारायणन का कहना है कि
तीसरे चरण यानी PS3 के जलने के दौरान यह भटकाव हुआ है। इसी तकनीकी गड़बड़ी ने रॉकेट को उसकी सही कक्षा में पहुंचने से रोक दिया। हालांकि इसरो ने अभी तक इसे औपचारिक रूप से पूरी तरह फेल घोषित नहीं किया है। लेकिन प्राथमिक सेटेलाइट्स के खो जाने की पुष्टि जरूर हुई है। अगर आप यह वीडियो YouTube पर देख रहे हैं तो हमारे चैनल को सब्सक्राइब कर बेल आइकन दबाएं और Facebook पर देख रहे हैं तो हमारे पेज को लाइक
##ISRO
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