कवि सुमित मानधना 'गौरव'
( "कुछ मेरी कलम से ")
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भगवान तू बहुत निष्ठुर है।
नियति तू बड़ी ही क्रूर है।
कल रहते थे जो मेरे संग,
तू ने कर दिया उन्हें दूर है।
बीवी बच्चों की याद दिल में,
चुभ रही बन के नासूर है।
चली गई है मुझे छोड़कर,
वो स्वार्थी है या मज़बूर है।
✍🏻सुमित मानधना 'गौरव'😒
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