🙏रामायण ज्ञान🙏

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sn vyas
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#रामचरितमानस #🌺 श्री रामचरितमानस चौपाई 🌺 #रामायण #रामायण ज्ञान गोस्वामी तुलसीदास जी कहते हैं‒सुग्रीव और विभीषण दोनों भगवान्‌ के मित्र रहे । श्रीरामजी ने इन दोनों को अपनी शरण में रखा, यह सब कोई जानते हैं । भगवान्‌ ने इनको ‘सखा’ कहा है । खल मंडली बसहु दिनु राती । सखा धरम निबहइ केहि भाँती ॥ विभीषण से भगवान गले मिलकर पूछते हैं कि ‘दिन-रात दुष्टों की मण्डली में बसते हो, ऐसी दशा में, हे सखे ! तुम्हारा धर्म किस प्रकार निभता है ?’ ऐसे सुग्रीव को भी अपना सखा मानते हैं । जब विभीषण मिलने आया तो ‘कह प्रभु सखा बूझिऐ काहा’ भगवान्‌ ने सुग्रीव से कहा‒बोलो, सखा ! तुम्हारी क्या सम्मति है ? ऐसे दोनों ही सखा थे । इनको भगवान्‌ ने अपने शरण में रखा । ये दोनों ही भयभीत थे ! सुग्रीव बाली से डरता था और विभीषण को भी रावण ने जोर से धमकाया, लात भी मारी और कह दिया कि ‘मेरे नगर में रहता है और प्रीति तपस्वी (राम) से करता है । निकल जा यहाँ से ।’ ऐसे रावण ने उसे निकाल दिया तो वह भगवान्‌ के शरण आ गया । इन दोनों को भगवान्‌ ने अपने मित्र बना लिया । एक बात याद आ गयी‒रामायण में भगवान्‌ के तीन सखा हैं । (१) निषादराज गुह, (२) सुग्रीव और (३) विभीषण । इन तीनों को सखा बनाने का तात्पर्य क्या है ? भगवान् कहते हैं‒‘मैं सबको सखा बनानेके लिये तैयार हूँ ।’ तीन तरह के भक्त होते हैं । (१) साधक भक्त होता है, (२) सिद्ध भक्त होता है और (३) विषयी भक्त होता है । सांसारिक विषयी मनुष्य को भी भगवान् सखा बना लेते हैं, साधक भक्त को भी सखा बना लेते हैं और सिद्ध भक्त को भी सखा बना लेते हैं । इनमें निषादराज गुह सिद्ध भक्त था, जैसे ज्ञानी भक्त होते हैं, परमात्मा के प्यारे होते हैं, पूर्णता को प्राप्त‒ऐसे सिद्ध भक्त हैं निषादराज गुह । विभीषण साधक भक्त है, भगवत् प्राप्ति की साधना करने वाला है और सुग्रीव विषयी भक्त है । भगवान्‌ की भक्ति करता है, पर करता है विपत्ति आने पर, दुःख होने पर और जब दुःख मिट जाता है तो फिर जै रामजी की ! फिर कोई भक्ति नहीं । सुग्रीव के विषय में भगवान् राम ने लक्ष्मणजी से कहा‒ सुग्रीवहुँ सुधि मोरि बिसारी । पावा राज कोस पुर नारी ॥ सुग्रीव भी मेरी सुध भूल गया; क्योंकि उसको राज्य मिल गया, मकान मिल गया, नगर मिल गया, खजाना मिल गया, स्त्री मिल गयी । अब भजन कौन करे ? जब विपत्ति थी, डर था, तब भजन करता था । अब भय मिट गया, मौज से राज्य करता है, इसलिये सुग्रीव मेरे को भी भूल गया । ---:: ॐ :: ---
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