Jitu Patidar
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🏵️ #भक्ति_क्या_है?”🏵️
🪷भक्ति केवल धर्म का नहीं, बल्कि जीवन और आत्मा के मिलन है।🪷
🌸आइए इसे गहराई से और सरल शब्दों में समझते हैं👇
🌺 1. भक्ति का अर्थ 🔱
🏵️“भज सेवायाम्” — संस्कृत धातु “भज” का अर्थ है🏵️
🌹 “सेवा करना, प्रेम करना, समर्पित होना।”🌹
🌼इसलिए ----
👉 भक्ति का अर्थ है — ईश्वर के प्रति प्रेमपूर्वक समर्पण।
🌸भक्ति वह भाव है जिसमें
मनुष्य अपने “अहं” को त्यागकर ईश्वर को अपना सब कुछ मान लेता है।🌸
🕉️ 2. भक्ति का स्वरूप
🔱भक्ति का कोई एक रूप नहीं — यह कई प्रकार से प्रकट होती है:👇
👉श्रवण भक्ति — भगवान की कथा, लीला, नाम सुनना।
👉कीर्तन भक्ति — नामस्मरण, भजन-कीर्तन करना।
👉स्मरण भक्ति — हर क्षण प्रभु को याद रखना।
👉सेवा भक्ति — ईश्वर और उनके भक्तों की सेवा करना।
👉दास्य भक्ति — स्वयं को प्रभु का सेवक मानना।
👉सख्य भक्ति — ईश्वर को अपना मित्र मानना।
👉वात्सल्य भक्ति — उन्हें अपने बच्चे के समान प्रेम करना।
👉माधुर्य भक्ति — भगवान को अपना प्रियतम मानना।
🌿 3. भक्ति का सार
🌹“प्रेम एव भगवान्” — भगवान प्रेम हैं।🌹
⚛️भक्ति का सार है — निर्मल प्रेम, जो किसी स्वार्थ या भय से रहित हो।⚛️
📿 सच्ची भक्ति में न फल की इच्छा होती है, न दिखावा —
केवल प्रेम और समर्पण होता है।
🌸 4. गीता में भक्ति
🕉️भगवान श्रीकृष्ण ने कहा —
🪷“भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः” (गीता 18.55)🪷
👉 “मुझे केवल भक्ति से ही वास्तविक रूप में जाना जा सकता है।”
📖 इसका अर्थ —
📝ज्ञान और कर्म दोनों मार्ग महान हैं, परंतु भक्ति मार्ग सबसे सरल और मधुर है,🏵️
👉क्योंकि इसमें “मैं” और “मेरा” मिट जाता है, और केवल “तुम (भगवान)” बचते हैं।
🌼 5. भक्ति का परिणाम
🪷जहाँ भक्ति है, वहाँ शांति है।
जहाँ प्रेम है, वहाँ ईश्वर का वास है।🪷
🕉️भक्ति से ---
👉मन निर्मल होता है 🕊️
👉अहंकार मिटता है 🌿
👉आत्मा को ईश्वर का अनुभव होता है ✨
💫 संक्षेप में:
🔱भक्ति वह पुल है जो मनुष्य को ईश्वर से जोड़ता है।🔱
🌹यह प्रेम का, विश्वास का और समर्पण का मार्ग है।🌹
🙏#जय_श्रीमन्नारायण🙏
🙏#सनातन_धर्म_युग_परिवर्तन🙏 #❤️जय श्री राधे कृष्णा🚩
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