sn vyas
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`या विद्या शिवकेशवादिजननी या वै जगन्मोहिनी`
`याब्रह्मादिपिपीलिकान्तजगदानन्दैकसन्दायिनी ।`
`या पञ्चप्रणवद्विरेफनलिनी या चित्कलामालिनी`
`सा पायात्परदेवता भगवती श्रीराजराजेश्वरी ॥`
`कल्याणायुतपूर्णचन्द्रवदनां प्राणेश्वरानन्दिनीं`
`पूर्णां पूर्णतरां परेशमहिषीं पूर्णामृतास्वादिनीम् ।`
`सम्पूर्णां परमोत्तमामृतकलां विद्यावतीं भारतीं`
`श्रीचक्रप्रियबिन्दुतर्पणपरां श्रीराजराजेश्वरीम् ॥`
[ `श्रीमन् मन्त्रमातृकास्तव ( श्रीराजराजेश्वरीतर्पणस्तोत्रम् )` ]
`अर्थात 👉🏻 जो विद्या ( ज्ञान ) , शिव एवं केशव ( विष्णु ) आदि देवों की जननी हैं , जो समस्त जगत को मोहित करने वाली ( जगन्मोहिनी ) हैं । जो ब्रह्मा से लेकर चींटी ( पिपीलिका ) पर्यन्त तक समस्त जीवों को परमानंद प्रदान करने वाली हैं , जो पाँच प्रणव ( ॐ ) रूपी भँवरों के लिए कमल के समान हैं तथा चित्कला रूपी माला से सुशोभित हैं— वे परदेवता भगवती श्रीराजराजेश्वरी हमारी रक्षा करें ॥१॥`
`जिनका मुखमंडल कल्याणकारी औऱ पूर्णिमा के चंद्रमा के समान पूर्ण ( तेजस्वी ) है , जो प्राणेश्वर ( भगवान शिव ) को आनंदित करने वाली हैं । जो सर्वथा पूर्ण , परात्पर , ईश्वर ( शिव ) की महिमा एवं पूर्ण अमृत का आस्वादन करने वाली हैं । जो संपूर्ण , सर्वोत्तम अमृत कलाओं से युक्त , विद्या तथा भारती ( सरस्वती ) स्वरूपा हैं तथा श्रीचक्र के मध्य बिंदु पर तर्पण ( पूजन ) करने में तत्पर रहती हैं— वे भगवती श्रीराजराजेश्वरी हैं ॥२॥`
`चित्र का रहस्य– चित्र में मध्य में श्रीराजराजेश्वरी ललिता हैं – रक्त-वस्त्र , इक्षु-दण्ड , पुष्प-बाण धारण किये । ऊपर नृसिंह मुख वाला उग्र-रूप – पराशक्ति का ही रौद्र पक्ष । दायें-बायें वीणा-धारिणी सरस्वती एवं कमल-धारिणी लक्ष्मी – वाग्भव-कामराज शक्तियाँ । नीचे वाराही तथा मातङ्गी – दण्डिनी औऱ मन्त्रिणी – सप्तमातृका की प्रधान , एवं सबसे नीचे देव-ऋषि-गन्धर्व – ब्रह्मादिपिपीलिकान्तजगत् – सभी देवी के चरण में ।`
`यही श्लोक का प्रत्यक्ष दर्शन है – शिव-केशव की जननी , जगन्मोहिनी , बिन्दु-तर्पण-परा ।`
`आज के लिए भाव– हे माँ ! आप शिव-केशव की भी जननी हैं , तो मेरी छोटी-सी चिन्ता का भार क्यों न लेंगी❔ आप पिपीलिका तक को आनन्द देती हैं , तो मुझ जीव को क्यों न देंगी❔आप बिन्दु-तर्पण से तृप्त होती हैं , तो मेरा एक आँसू भी तर्पण बन जाए ।`
`श्रीचक्र बिन्दु में वास करने वाली माँ हृदय-बिन्दु में भी वास करो ।`
`बाहर श्रीचक्र पूजे अथवा न पूजे – भीतर "अहं" का बिन्दु आपको अर्पित है ।`
`श्री मात्रे नमः🙏🏻🌹`
`या देवी सर्वभूतेषु चेतनेत्यभिधीयते🚩`
`🌄🌄 प्रभात वन्दन 🌄🌄©®` #लक्ष्मी #दुर्गा
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