2122 1212 22
दुश्मनो से गले मिला जाये
वक्त के साथ अब चला जाये
हो गई है बेनूर महफ़िल ये
छोड़ कर अब इसे छला जाये
कहते है मतलबी यहाँ पर सब
इनके माहौल में ढला जाये
कट गये बाजू जिनके ज़ुल्मो में
कुछ सबक उनसे भी लिया जाये
देख लिया चलके राहे उल्फत में
हिज्रे गम कब तलक पिया जाये
गम दिया जिसने उम्र भर उन्हें
खुशियों की दुआ दिया जाये
( लक्ष्मण दावानी ✍ )
9/1/2017
#📚कविता-कहानी संग्रह #शायरी #💝 शायराना इश्क़ #✒ शायरी #📜मेरी कलम से✒️