महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा

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sn vyas
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#महिषासुर मर्दिनी मां दुर्गा #जय मां महिषासुर मर्दिनी🙏🙏 यहाँ माँ शेरावली (दुर्गा माँ) की एक बहुत ही पवित्र और प्रसिद्ध कथा दी गई है, जिसे **महिषासुर वध की कथा** के नाम से जाना जाता है। इसी कथा के कारण माँ दुर्गा का नाम 'शेरावली' और 'महिषासुर मर्दिनी' पड़ा। ## माँ शेरावली और महिषासुर वध की कथा ### 1. महिषासुर का वरदान और अत्याचार प्राचीन काल में महिषासुर नाम का एक बहुत ही शक्तिशाली राक्षस था। उसने ब्रह्मा जी की घोर तपस्या की। उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर ब्रह्मा जी प्रकट हुए और उससे वरदान मांगने को कहा। महिषासुर ने अमर होने का वरदान मांगा, लेकिन ब्रह्मा जी ने कहा कि जिसका जन्म हुआ है, उसकी मृत्यु निश्चित है। तब चालाक महिषासुर ने सोच-समझकर वरदान मांगा: > *"हे प्रभु! फिर मुझे ऐसा वरदान दीजिए कि दुनियां का कोई भी देवता, असुर, मानव या कोई पुरुष मेरा वध न कर सके। मेरी मृत्यु केवल किसी स्त्री के हाथों ही हो।"* > महिषासुर जानता था कि औरतें स्वभाव से कोमल होती हैं और कोई भी स्त्री उसका सामना नहीं कर पाएगी। वरदान मिलते ही वह अहंकारी हो गया और उसने तीनों लोकों (पृथ्वी, पाताल और स्वर्ग) पर अत्याचार करना शुरू कर दिया। उसने देवताओं को हराकर स्वर्ग पर भी कब्ज़ा कर लिया। ### 2. माँ दुर्गा (शेरावली) का प्राकट्य महिषासुर के अत्याचारों से परेशान होकर सभी देवता भगवान शिव, भगवान विष्णु और ब्रह्मा जी की शरण में गए। देवताओं की बात सुनकर त्रिदेवों (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) को बहुत क्रोध आया। तभी सभी देवताओं और त्रिदेवों के शरीर से एक दिव्य तेज़ (रोशनी) निकला, जो आपस में मिल गया। उस महातेज़ से एक अत्यंत सुंदर और शक्तिशाली देवी प्रकट हुईं, जिन्हें **माँ दुर्गा** कहा गया। * **अस्त्र-शस्त्र:** भगवान शिव ने उन्हें अपना त्रिशूल दिया, भगवान विष्णु ने चक्र, इंद्र देव ने वज्र और बाकी सभी देवताओं ने भी अपने-अपने शक्तिशाली अस्त्र-शस्त्र माँ को भेंट किए। * **सवारी (शेर):** हिमवान (हिमालय) ने माँ दुर्गा को सवारी के लिए एक शक्तिशाली **सिंह (शेर)** भेंट किया। शेर पर सवार होने के कारण ही भक्त उन्हें आदर से **"मां शेरावली"** कहने लगे। ### 3. माँ दुर्गा और महिषासुर का भयंकर युद्ध माँ शेरावली अपनी सेना और शेर पर सवार होकर महिषासुर की नगरी की ओर बढ़ीं और उन्होंने ज़ोर से अट्टहास (गर्जना) किया। माँ की गर्जना सुनकर महिषासुर की सेना थर-थर कांपने लगी। महिषासुर और उसकी राक्षस सेना ने माँ दुर्गा पर हमला कर दिया। माँ शेरावली ने पल भर में महिषासुर के बड़े-बड़े सेनापतियों (चिक्षुर, चामर, असिलोमा) का अंत कर दिया। अंत में महिषासुर स्वयं युद्ध के मैदान में आया। वह अपनी माया से कभी भैंसा बनता, कभी हाथी, तो कभी शेर बनकर माँ पर वार करने लगा। यह युद्ध पूरे **9 दिनों** तक चलता रहा। ### 4. महिषासुर का वध दसवें दिन जब महिषासुर ने दोबारा भैंसे का रूप धारण कर माँ पर हमला करना चाहा, तब माँ शेरावली ने अपने पैर से महिषासुर को ज़मीन पर दबा दिया और अपने **त्रिशूल** से उसकी छाती पर वार कर दिया। त्रिशूल लगते ही महिषासुर के प्राण पखेरू उड़ गए और वह धरती पर गिर पड़ा। महिषासुर के मरते ही आकाश से फूलों की वर्षा होने लगी और सभी देवताओं ने माँ की जय-जयकार की। ## निष्कर्ष महिषासुर का वध करने के कारण ही माँ दुर्गा का नाम **'महिषासुर मर्दिनी'** पड़ा। माँ शेरावली की इस जीत को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। यही कारण है कि हर साल **नवरात्रि** के 9 दिनों में माँ के नौ रूपों की पूजा की जाती है और दसवें दिन **विजयादशमी (दशहरा)** का त्यौहार मनाया जाता है। > **बोलो सांचे दरबार की जय! जय माता दी!** >
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