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Lal Singh
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*📜 23 मार्च 📜* *🌹 स्वतंत्रता सेनानी 'सुहासिनी गांगुली' // पुण्यतिथि 🌹* जन्म : 03 फरवरी 1909 मृत्यु : 23 मार्च 1965 *सुहासिनी गांगुली के बारे में मुख्य बातें:* क्रांतिकारी जीवन: वे स्वामी विवेकानंद के भाई भूपेंद्रनाथ दत्ता के दल में थीं और चिटगांव शस्त्रागार छापे (1930) के क्रांतिकारियों को संरक्षण दिया था। सक्रिय भूमिका: उन्होंने 'छात्री संघ' में काम किया और बिना दास के साथ मिलकर बंगाल के गवर्नर स्टैनली जैक्सन की हत्या के प्रयास से जुड़ी थीं। जेल और संघर्ष: स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्हें कई बार गिरफ्तार किया गया और नजरबंद रखा गया। निधन: 23 मार्च, 1965 को एक सड़क दुर्घटना के बाद अस्पताल में लापरवाही के कारण बैक्टीरियल इन्फेक्शन से उनका निधन हुआ सुहासिनी गांगुली का जन्म 03 फरवरी 1909 को ढाका के विक्रमपुर जिला अंतर्गत बाघिया नामक गाँव के रहने वाले अविनाश चन्द्र गांगुली और सरलासुन्दरी देवी के यहां हुआ। सुहासिनी की पूरी पढ़ाई ढाका के ईडन हाईस्कूल व ईडन काॅलेज से हुई। एक बार तैराकी स्कूल में उनकी मुलाकात कल्याणी दास और कमला दासगुप्ता से हुआ और फिर वे क्रांतिकारी दल का साथ देने के लिए प्रशिक्षण लेने लगीं। वर्ष 1929 में विप्लवी दल के नेता रसिक लाल दास से परिचय होने के बाद तो वह पूरी तरह से दल में सक्रिय हो गईं। इसके लिए हेमन्त तरफदार ने भी उन्हें प्रोत्साहित किया। *>> शिक्षण <<* वर्ष 1930 में सुहासिनी गांगुली कलकत्ता में गूंगे-बहरे बच्चों के एक स्कूल में कार्य कर रहीं थीं। उन्हीं दिनों ‘चटगांव शस्त्रागार कांड’ के बाद क्रांतिकारी ब्रिटिश पुलिस की धर-पकड़ से बचने के लिए चन्द्रनगर को पलायन कर गए, तो सुहासिनी गांगुली भी क्रांतिकारियों को सुरक्षा के लिए कलकत्ता से चंद्रनगर आ गईं। चन्द्रनगर पहुँचकर उन्होंने वहीं के एक स्कूल में अध्यापन-कार्य ले लिया। शाम से सुबह तक वह क्रांतिकारियों की सहायक उनकी प्रिय सुहासिनी दीदी थीं। दिन भर एक समान्य अध्यापिका के रूप में काम पर जाती थीं और घर में शशिधर आचार्य की छद्म पत्नी बनकर रहती थीं ताकि किसी को संदेह न हो और यह घर एक सामान्य गृहस्थ का घर लगे और वह क्रांतिकारियों को सुरक्षा भी दे सकें। गणेश घोष, लोकनाथ बल, जीवन घोषाल, हेमन्त तरफदार आदि क्रांतिकारी बारी-बारी से यहीं आकर ठहरते। *>> गिरफ़्तारी <<* इतना कुछ करने के बाद भी ब्रिटिश अधिकारियों को सुहासिनी गांगुली पर संदेह हो गया। उस घर पर चौबीसों घंटे निगाह रखी जाने लगी। एक दिन यानी 1 सितम्बर, 1930 को उस मकान पर घेरा डाल दिया गया। आमने-सामने की मुठभेड़ में जीवन घोषाल मारे गए और अनन्त सिंह ने आत्म समर्पण कर दिया। शेष साथी और सुहासिनी गांगुली अपने तथाकथित पति शशिधर आचार्य के साथ गिरफ्तार हो गईं। उन्हें हिजली जेल भेज दिया गया, जहाँ इन्दुमति सिंह पहले से ही थीं। आठ साल की लम्बी अवधि के बाद वे वर्ष 1938 को रिहा हो गईं। *>> अन्त में <<* वर्ष 1942 के आन्दोलन में उन्होंने फिर से अपनी भूमिका निभाई और फिर से जेल गईं। इस बार वे वर्ष 1945 में जेल से बाहर आईं। उस समय हेमन्त तरफदार धनबाद के एक आश्रम में संन्यासी के भेष में रह रहे थे। रिहाई के बाद सुहासिनी गांगुली भी उसी आश्रम में पहुँच गईं और आश्रम की ममतामयी सुहासिनी दीदी बनकर वहीं रहने लगीं। 23 मार्च, 1965 यानी मृत्यु आने तक के बाकी का सारा जीवन उन्होंने इसी आश्रम में बिताया। 🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹 #पब्लिक
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Lal Singh
575 views 29 days ago
*📜 विश्व मौसम विज्ञान दिवस 2026 - 23 मार्च 📜* इस वर्ष 23 मार्च को विश्व मौसम विज्ञान दिवस 2026 विश्व भर में मनाया गया। विश्व मौसम विज्ञान दिवस हर साल 23 मार्च को विश्व भर में मनाया जाता है और यह एक वार्षिक आयोजन है। यह दिन विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की स्थापना की वर्षगांठ के रूप में मनाया जाता है और पृथ्वी के वायुमंडल के व्यवहार पर केंद्रित है। यह दिन लोगों को पृथ्वी के वायुमंडल की रक्षा में उनकी भूमिका के प्रति जागरूक करने में भी मदद करता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की स्थापना वर्ष 1950 में हुई थी। डब्ल्यूएमओ मौसम, जलवायु, जल और पर्यावरण सहित चार पहलुओं को ध्यान में रखता है। यह समाज की सुरक्षा और कल्याण में राष्ट्रीय मौसम विज्ञान और जल विज्ञान सेवाओं के महत्वपूर्ण योगदान को दर्शाता है और विश्व भर में विभिन्न गतिविधियों के साथ मनाया जाता है। * विषय (Theme): इस वर्ष का विषय "आज का अवलोकन, कल की रक्षा" (Observing Today, Protecting Tomorrow) है। यह विषय भविष्य की पीढ़ियों के लिए जलवायु सुरक्षा और सटीक मौसम पूर्वानुमान के महत्व पर जोर देता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) जलवायु परिवर्तन पर विशेष ध्यान दे रहा है और इस वर्ष वे लोगों को यह बताना चाहते हैं कि समय पर सही कदम उठाना बड़ी समस्याओं को रोकने का एक कारगर तरीका हो सकता है। प्रारंभिक चेतावनियाँ अनगिनत जानें बचाती हैं, लेकिन दुर्भाग्य से, वे हमेशा पर्याप्त नहीं होतीं। तूफान कुछ ही घंटों में लाखों डॉलर का नुकसान कर सकते हैं और कभी-कभी उससे उबरने में समय लगता है। जरूरतमंदों की मदद के लिए स्वयंसेवा करने या दान देने के लिए अपने स्थानीय रेड क्रॉस से संपर्क करें। * उद्देश्य: इस दिन का मुख्य उद्देश्य समाज की सुरक्षा और भलाई के लिए मौसम विज्ञान विभाग (WMO) के योगदान को उजागर करना और लोगों को जलवायु परिवर्तन के प्रति जागरूक करना है। *विश्व मौसम विज्ञान दिवस : इतिहास* 1873 में, प्रथम मौसम संगठन का गठन किया गया और अंतर्राष्ट्रीय मौसम विज्ञान संघ का गठन राष्ट्रीय सीमाओं के पार मौसम संबंधी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए किया गया। 23 मार्च 1953 को, अंतर्राष्ट्रीय मौसम विज्ञान संगठन विश्व मौसम विज्ञान संगठन बन गया, जो आज भी वही है। 23 मार्च, 1961 को, संगठन की स्थापना की वर्षगांठ के उपलक्ष्य में पहला विश्व मौसम विज्ञान दिवस मनाया गया। * मुख्यालय: जिनेवा, स्विट्जरलैंड। अध्यक्ष: अब्दुल्ला अल मंदौस (वर्तमान कार्यकाल 2023-2027)। भूमिका: यह संगठन मौसम, जलवायु और जल संसाधनों के अंतरराष्ट्रीय समन्वय के लिए संयुक्त राष्ट्र की एक विशेष एजेंसी है। #पब्लिक
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