एक सफ़र ऐसा भी
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#एक सफ़र ऐसा भी श्री राधे कृष्णा एक सफ़र ऐसा भी भाग -2 इस लेख को पुरा जरूर पढ़ें मैं भरतपुर से वापस लौटने कि तैयारी कर रही थी ।कुछ लोग रैन बसेरा से जा चुके थे और कुछ जानें कि तैयारी कर रहे थे ,तभी रैन बसेरा कि आनर सन्ध्या जी आईं मैंने कहा राधे राधे जी ओ एक दम से बोली, जा रहें हों मैंने कहा हां जी ,ओ बोली मैं तो आपसे नाराज़ हूं, मैंने कहा ऐसा क्यों ओ बोली हमारा दिल चुरा कर जा रही हो और सभी हंस पड़े। अभी मेरी गाड़ी रात को थी बातों ही बातों में मैंने सबको अंकल के बारे में बताया सब उनकी तारीफ कर रहे थे कि तब ही अंकल का फोन आया ओ बोलें मैं आ रहा हूं रैन बसेरा छोड़ दो चलो मेरे साथ,मै बोलीं कहा अंकल उधर से ओ बोलें मैंने तुम्हारे लिए इतना किया ,तुम मेरे लिए क्या करोगी मैं चुप थीं पर अभी सोच ही रही थी कि फोन कट गया अभी तक जो अंकल सुरक्षा दे रहे थे अब उनसे डर सा महसूस हुआ मैं अभी अपनी सोच में पड़ी हुई थी कि आंटी ने टोका अरी क्या हुआ कहां खो गई, मैंने कहा कुछ आंटी बस ऐसे ही, पर ओ ज़िद करने लगीं तो मैंने अंकल ने जो कहा था वहीं बंता दिया तब आंटी ने कहा मुझे कुछ ठीक नहीं लग रहा है,एक काम कर तू अपना मोबाइल बंद कर दें जब ओ आएंगे तो उनसे बात करने के बाद ही सोचेंगे आगे क्या करना है और जिजी ने कहा तेरी ट्रेन रात में नौ बजे की है तुम अभी मत जाओ मैंने उन सब कि बात मान कर मोबाइल बंद कर दिया और अंकल का इन्तजार करने लगी तब ही अंकल अपनी स्कूटी पर आते दिखे तो मैंने आंटी को दिखाया कि ओ रहें अंकल आ गये, चुकी यहां अंकल को कोई भी पहचानता नहीं था तो मैं उनको दिखा कर अन्दर चली गई सोचा ओ आकर एक बार सबसे बात कर लेंगे तो गलतफहमी खत्म हो जाएगी मैं उनके साथ चलीं जाउंगी पर मेरी उम्मीद पानी फिर गया ओ वहां किसी से कोई बात नहीं किसी से कुछ नहीं पूछा और वापस चलें गए। साम को जिजी के पति आएं तो उनको सब बातें जब पता चला तो उन्होंने ने कहा अरे एसी कोई बात नहीं है उनकी आदत है सबकी मदद करना, इतना सुनते ही मैं पछतावा से भर गई मुझे लगा मैंने एक सही इन्सान पर सक किया पर दिल में कहीं कोई डर था। मैंने किसी से कुछ नहीं कहां और रात को करीब सात बजे आंटी ने मुझे आटो रिक्शा पकड़ा दिया और ड्राइवर को हिदायत देते हुए कहा बच्ची को सही से स्टेशन तक छोड़ देना भाई उसने कहा आप फ़िक्र मत करो और मैं सुरक्षित स्टेशन पहुंच गई। अभी भी गाड़ी आने में समय था।अब पहली बार मैंने टिकट पर नजर डालें तो मेरे होश उड़ गए टिकट पर कोई कोंच या सीट नम्बर नहीं था मैंने पि एन आर नम्बर सर्च किया पर कोई फायदा नहीं मैं पूछताछ में गई तो पता चला मेरा टिकट वेटिंग लिस्ट में हैं अब तो मुझे घबराहट होने लगी अब मैं क्या करूं कैसे इतनी भीड़ में सफ़र करुंगी पहली बार अंकल का झुंठ सामने आया ओ बताए थे टिकट कंफर्म है, अगर उन्होंने मुझसे पूछे बिना ही मेरा टिकट करा दिया और बोली दिया कंफर्म टिकट है मैंने उनके बात पर भरोसा किया और टिकट को एक बार देखा भी नहीं लास्ट समय में देखा तो अब कुछ हो नहीं सकता था फाइनली मैंने तय किया अब कुछ भी हो इसी से जाना है इतने में गाड़ी आ गई भिड़ बहुत था फिर भी किसी तरह चढ़ गई अब मेरी नज़र किसी ऐसी सीट को ढुंढ रहीं थीं जहां मैं बैठ कर अपना सफर कर सकूं पर मुझे एसी कोई सीट नहीं मिली तब मैंने अपने बैग से चादर निकाला और दो सीटों के बिच की जगह पर बिछाया और बैठ गई सोचा कोई बात नहीं एक सफ़र ऐसा भी होना चाहिए। गाड़ी अपनी रफ़्तार से चल रही थी और मेरे मन में अंकल की बात उतनी ही रफ़्तार से चल रही थी कौन सही कौन गलत कुछ समझ नहीं आ रहा था। तब ही पतिदेव का फोन आया तो मेरी सोच को विराम मिला मैंने फोन उठाया और उनको सबकुछ बता दिया उन्होंने ने कहा कोई बात नहीं घर आने के बाद फोन पर बात कर लेना तब मेरे मन को शांति मिलीं। तब तक जहां मैं बैठी थी उसी सीट के यात्री उतर गये अब ओ सीट खाली था मैंने भगवान को धन्यवाद कहा और सीट पर बैठ गई । सफ़र कट गया मैं वापस कुछ नई यादों के साथ अपने घर थी सुरक्षित पर अभी भी कहानी बाकी थी, घर आकर भी मैं अंकल को भुला नहीं पा रही थी बार बार एक ही ख्याल आ रहा था, मैंने एक अच्छे इंसान पर सक किया और एक दो बार उसने फोन पर बात करने कि कोशिश भी किया पर उन्होंने फोन नहीं उठाया दो महीने बाद अंकल का फोन आया मैंने जैसे ही फोन उठाया राधे राधे अंकल उधर से आवाज आई तुमने कहां था पुराने सिक्के दोगी ओ भेज दो मैंने कहा ठीक है अंकल पर ये कि इतने दिन से फोन क्यों नहीं किया और कोई खोज खबर नहीं लिया मर गई या जिन्दा है। ओ बोलें मैं तेरे होस्टल आया था पर तेरा मोबाइल बंद था तो मैं चला आया मैंने कहा क्यों आपको पूछ्ना था मेरे बारे में मैं तो वहीं थीं आप ऊपर क्यों नहीं आए ओ मेरी बातों को टाल दिए फिर बातों का सिलसिला शुरु हुआ ओ जब भी फोन करते एक ही बात करते सिक्के कब भेज रहीं हों पर अब मैं उनकी बातों को टाल रही थी क्योंकि अब मुझे उनकी बातों में कुछ ठीक नहीं लग रहा था पर मैं समझ नहीं पा रही थी एक दिन उन्होंने ने फोन किया और बोलें सुन तू जब तक तेरा नौकरी टिंचर में नहीं हो‌ जाता तुम प्राईवेट कालेज में नौकरी कर लो मैं लगवा दूंगा सैलरी भी अच्छी मील जाएगी मैंने अपने पतिदेव से पूछा तो बोले अगर मिल रहा है तो कर लो एक्सपीरियंस भी बन जाएगा तो आगे काम करेगा। मैंने अंकल को हां तो कह दिया पर अभी भी मन में कुछ ठीक नहीं लग रहा था, कुछ दिन बाद अंकल ने कहा अपने सारे डॉक्यूमेंट भेज दो मैंने डॉक्यूमेंट के फोटो भेज दिया सोचा देखते हैं क्या होता है जो भगवान कि मर्जी होगी वहीं होगा ओ बोलें मैंने कालेज में बात कर लिया है तुम्हारे सारे डॉक्यूमेंट जमा कर दिया हूं और तुमको एक जुलाई को भरतपुर आना होगा इंटरव्यू के लिए कालेज से फोन जायेगा तुमको मैं ख़ुश थी कि शायद मेरा डर ग़लत है।एक दिन अंकल का फोन आया तो मैं अचार बना रहीं थीं उन्होंने ने पूछा क्या कर रही हों मैंने कहा आचार बना रहीं हूं ओ बोलें मुझे नहीं खिलाओगी मैंने कहा अपना पता भेज दो मैं कुरियर कर दूंगी उन्होंने ने पता व्हाट्सएप पर भेजा और मैंने अपने पतिदेव से बोलकर कुरियर करवा दिया अब मेरे मन का डर धिरे धिरे खत्म हो रहा था शायद मेरा भ्रम था सब ठीक है। कुछ दिन बाद अंकल का फोन आया अभी तक तेरा पार्सल नहीं आया तुम झुंठ तो नहीं बोल रही है न मैंने कहा अंकल मैंने आपको पार्सल कि रसीद भी भेज दिया है फिर भी आप इतनी छोटी बात बोल रहे हैं ऐसा बहुत दिन तक चलता रहा ओ फोन करते और बोलते तुमने तो भेजा हीं नहीं वरना अभी तक पहुंच जाता ओ की तरह कि बातें बोलते मुझे बहुत बुरा लगता और अब पतिदेव से भी पूंछने में अच्छा नहीं लग रहा था पर एक दिन हिम्मत करके मैंने पूछा अंकल बोले है कि अभी तक पार्सल नहीं पहुंचा है।ओ बोलें ठीक है मैं देख लूंगा जब ओ कुरियर आफिस गये तो पता चला कि पार्सल आठ दिन पहले ही किसी ने रिसिव नहीं किया जिससे वापस आ गया है। कुरियर वाले ने दुबारा उसी पाते पर भेजा और आठ दिन बाद मेरे नम्बर पर एक अनजान नंबर से फोन आया आपने इस पाते पर मिस्टर के नाम से कुछ भेजा है मैंने कहा जी आचार भेजा है। उधर से एक महिला कि आवाज आई किसके लिए भेजा है मैंने कहा अंकल ने मांगा था तो मैंने भेज दिया मैंने पूछा क्या हुआ कोई प्रॉब्लम है तो ओ महिला भारी आवाज में बोली मैं तुम्हारे अंकल कि पत्नी हूं मैंने कहा नमस्ते आंटी उन्होंने ने कहा बेटा मैं समझ गई आप कि कोई ग़लती नही है पर मैं आपको बता दूं अपका ये अंकल बहुत ही धोखाधड़ी वाला इंसान हैं और मैंने इससे लव-मैरिज किया था पर मेरी पुरी ज़िन्दगी बर्बाद है उन्होंने ने आगे कहा अपका ये पार्सल दंश दिन पहले भी आया था पर मैं घर पर थी तो उसने नहीं लिया अब अंकल कि सारी सच्चाई मेरे सामने थी।पर मैं कुछ बोल नहीं पा रही थी उसके बाद ना तो अंकल का फोन आया ना ही किसी कालेज से । मैं तो बस भगवान से प्रार्थना कर रही हूं हे श्री कृष्ण जैसे हर क़दम पर मेरी रक्षा कि उसी प्रकार हर इंसान कि रक्षा करना भगवान। पर आज भी मुझे एक सवाल परेशान करता है आखिर अंकल को मुझसे क्या चाहिए था। क्या किसी के पास इस सवाल का जवाब है।
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