भारत के प्रसिद्ध मंदिर

भारत के प्रसिद्ध मंदिर

पावगढ़ एक हिल स्टेशन है जो प्रसिद्ध महाकाली कालिका मंदिर के लिए जाना जाता, गुजरात के वडोदरा से लगभग 46 किलोमीटर दूर है पावगढ़ एक हिल स्टेशन है। गुजरात राज्य के वडोदरा से लगभग 46 किलोमीटर दूर पंचमहल जिले में नगर पालिका है। यह एक प्रसिद्ध महाकाली मंदिर के लिए जाना जाता है जो हर दिन हजारों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है।पावागढ़ पहाड़ी के शिखर पर बना कालिका माता मंदिर पावन स्थल माना जाता है। पहाड़ी पर बना यह काली मंदिर बहुत प्राचीन है। पावागढ़ पहाड़ी की शुरुआत चंपानेर से होती है. इसकी तलहटी में चंपानेरी नगरी है, जिसे महाराज वनराज चावड़ा ने अपने बुद्धिमान मंत्री के नाम पर बसाया था. वर्तमान समय में पावागढ़ जिसका मूल नाम 'चंपानगर' या 'चंपानेर' भी था। चांपानेर, गुजरात की मध्ययुगीन राजधानी थी। इस नगर को जैन धर्म ग्रन्थों में तीर्थ स्थल माना गया है। पावागढ़ पहाड़ी के शिखर पर बना कालिका माता मंदिर पावन स्थल माना जाता है। पहाड़ी पर बना यह काली मंदिर बहुत प्राचीन है। कहा जाता है कि विश्वामित्र ने उसकी स्थापना की थी। इन्हीं ऋषि के नाम से इस पहाड़ी से निकलने वाली नदी 'विश्वामित्री' कहलाती है। महदजी सिंधिया ने पहाड़ी की चोटी पर पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ बनवाईं थीं। चांपानेर तक पहुँचने के लिए सात दरवाजों में से होकर जाना पड़ता है। यहां वर्षपर्यन्त बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। कैसे पहुंचे पावागढ़--चंपानेर वायुमार्ग अगर आप यहां हवाई यात्रा करके आना चाहते हैं तो यहां से सबसे नजदीक अहमदाबाद का एयरपोर्ट है, जिसकी दूरी यहां से करीब 190 किलोमीटर और वडोदरा से 50 किलोमीटर है. रेलमार्ग पावागढ़ पहुंचने के लिए यहां का नजदीकी बड़ा रेलवे स्टेशन वडोदरा है, जो कि दिल्ली और अहमदाबाद से सीधी रेल लाइनों से जुड़ा हुआ है. वडोदरा पहुंचने के बाद सड़क यातायात के सुलभ साधन उपलब्ध हैं. सड़क मार्ग प्रदेश सरकार और निजी कंपनियों की कई लक्जरी बसें और टैक्सी सेवा गुजरात के अनेक शहरों से यहां के लिए संचालित की जाती है. गौरतलब है कि नवरात्र के वक्त पावागढ़ में सैलानियों की खासी भीड़ उमड़ती है. प्राचीन चंपानेर का इतिहास प्राचीन चांपानेर नगरी 12 वर्ग मील में बसी हुई थी। पावागढ़ की पहाड़ी पर उस समय एक दुर्ग भी था, जिसे पवनगढ़ या पावागढ़ कहते थे। यह दुर्ग अब नष्ट हो गया है, पर वहां प्राचीन महाकाली का मंदिर आज भी विद्यमान है। चांपानेर की पहाड़ी समुद्र तल से 2800 फुट ऊँची है। इसका संबंध ऋषि विक्रमादित्य से बताया जाता है। चांपानेर का संस्थापक गुजरात नरेश वनराज का चंपा नामक मंत्री था। चांद बरौत नामक गुजराती लेखक के अनुसार 11वीं शती में गुजरात के शासक भीमदेव के समय में चांपानेर का राजा मामगौर तुअर था। 1300 ई. में चौहानों ने चांपानेर पर अधिकार कर लिया। 1484 ई. में महमूद बेगड़ा ने इस नगरी पर आक्रमण किया और वीर राजपूतों ने विवश होकर अपने प्राण शत्रु से लड़ते-लड़ते गवां दिए। रावल पतई जयसिंह और उसका मंत्री डूंगरसी पकड़े गए और इस्लाम स्वीकार न करने पर मुस्लिम आक्रांताओं ने 17 नवम्बर 1484 ई. में उनका वध कर दिया। इस प्रकार चांपानेर के 184 वर्ष के प्राचीन राजपूत राज्य की समाप्ति हुई। प्राचीन कालिका माता मंदिर पावागढ़ पहाड़ी के शिखर पर बना कालिका माता मंदिर पावन स्थल माना जाता है। पहाड़ी पर बना यह काली मंदिर बहुत प्राचीन है। करीब 1471 फुट की ऊंचाई पर माची हवेली स्थित है. यहां स्थित मंदिर तक जाने के लिए माची हवेली से रोप वे की सुविधा उपलब्ध है. यहां से पैदल मंदिर तक पहुंचने लिए लगभग 250 सीढ़ियां चढ़नी होती हैं. पावागढ़ का महाकाली मंदिर, उन्हीं शक्तिपीठों में से एक है. इतिहास के पन्नों में पावागढ़ का नाम महान संगीतज्ञ तानसेन के समकालीन संगीतकार बैजू बावरा के संदर्भ में आया है. महाकाली मंदिर से जुड़ी मान्यताएं – पावागढ़ में स्थित प्राचीन महाकाली का मंदिर माता के शक्तिपीठों में से एक है. शक्तिपीठ उन पूजा स्थलों को कहा जाता है, जहां सती के अंग गिरे थे. – पुराणों के अनुसार, पिता दक्ष के यज्ञ के दौरान अपमानित हुई सती ने योग बल से अपने प्राण त्याग दिए थे. सती की मृत्यु से व्यथित भगवान शिव उनके मृत शरीर को लेकर तांडव करते हुए ब्रह्मांड में भटकते रहे. माता के अंग जहां-जहां गिरे, वहीं शक्तिपीठ बन गये. – कहा जाता है कि सती के दाहिने पैर का अंगूठा यहीं गिरा था, जिसके कारण इस जगह का नाम पावागढ़ हुआ. इसीलिए यह स्थल बेहद पूजनीय और पवित्र मानी जाती है. – यहां की खास बात यह है कि यहां दक्षिणमुखी काली मां की मूर्ति है, जिसकी तांत्रिक पूजा की जाती है. इस पहाड़ी को गुरु विश्वामित्र से भी जोड़ा जाता है. कहते हैं कि गुरु विश्वामित्र ने यहां मां काली की तपस्या की थी. – बताया जाता है कि यह मंदिर अयोध्या के राजा भगवान श्री रामचंद्रजी के समय का है. इस मंदिर को एक जमाने में शत्रुंजय मंदिर कहा जाता था. माघ महीने के शुक्ल पक्ष में यहां मेला लगता है. सांप्रदायिक सौहार्द्र का प्रतीक देवी मां के शक्तिपीठों में से एक महाकाली के इस दरबार में सांप्रदायिक सौहार्द्र की एक अनोखी मिसाल देखने को मिलती है. एक ओर जहां महाकाली मंदिर हिंदुओं की आस्था का केंद्र है तो वहीं इस मंदिर की छत पर मुस्लिमों का पवित्र स्थल है जहां अदानशाह पीर की दरगाह है. यहां बड़ी संख्या में हिंदुओं के साथ ही मुस्लिम श्रद्धालु भी दर्शन करने के लिए आते हैं. पर्यटकों को लुभाता है पावागढ।
#

भारत के प्रसिद्ध मंदिर

भारत के प्रसिद्ध मंदिर - ShareChat
165 views
2 months ago
DOWNLOAD APP
ShareChat - Best & Only Indian Social Network - Download Now
Share on other apps
Facebook
WhatsApp
Copy Link
Delete
Embed
I want to report this post because this post is...
Embed Post