मैं पुरुष हूँ...
मैं पुरुष हूँ, मैं भी प्रताड़ित होता हूँ, मैं भी घुटता हूँ, पिसता हूँ, टूटता हूँ, बिखरता हूँ भीतर ही भीतर, रो नहीं पाता, कह नहीं पाता, पत्थर हो चुका हूँ, तरस जाता हूँ पिघलने को, क्योंकि मैं पुरुष हूँ...। मैं भी सताया जाता हूँ जला दिया जाता हूँ उस "दहेज" की आग में जो हमनें कभी मांगा ही नहीं था, स्वाह कर दिया जाता हैं मेरे उस मान सम्मान को जो मैनें तिनका तिनका करके कमाया था, मगर मैं आह भी नहीं भर सकता, क्योंकि पुरुष हूँ..!
#पुरुष