जय मां दुर्गा

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sn vyas
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#जय मां दुर्गा प्रथम पंक्ति का अर्थ ("सिंह चढ़ी जब माँ चली ममता का ले हाथ"): इस पंक्ति में माँ दुर्गा के करुणामयी और शक्तिशाली रूप का वर्णन है। जब जगतजननी माँ जगदम्बा अपने वाहन 'सिंह' (शेर) पर सवार होकर निकलती हैं, तो उनके एक हाथ में भले ही दुष्टों के संहार के लिए अस्त्र-शस्त्र हों, लेकिन उनका दूसरा हाथ हमेशा अपने भक्तों के लिए 'ममता' और 'आशीर्वाद' (वरदहस्त) से भरा होता है। माँ का सिंह पर सवार होना उनके असीम साहस और निर्भयता को दर्शाता है, वहीं उनका ममतामयी हाथ यह बताता है कि वे अपने बच्चों के लिए कितनी कोमल और दयालु हैं। द्वितीय पंक्ति का अर्थ ("भक्तों के दुःख हर लिए बनके उनकी नाथ"): इस पंक्ति में माँ के रक्षक रूप को दर्शाया गया है। जैसे ही माँ अपने भक्तों की पुकार सुनकर आगे बढ़ती हैं, वे उनके जीवन के सभी कष्टों, दुखों, और संकटों को पल भर में हर (दूर कर) लेती हैं। 'नाथ' का अर्थ होता है स्वामी, रक्षक या पालनहार। माँ जगदम्बा स्वयं अपने भक्तों की 'नाथ' यानी कानूनी और आध्यात्मिक रक्षक बन जाती हैं। उनकी शरण में आने के बाद भक्तों को किसी भी बात का भय नहीं रहता, क्योंकि स्वयं ब्रह्मांड की स्वामिनी उनकी रक्षा कर रही होती हैं।
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