sn vyas
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*सृष्टौ या सर्गरूपा जगदवनविधौ पालनी या च रौद्री*
*संहारे चापि यस्या जगदिदमखिलं क्रीडनं या पराख्या ।*
*पश्यन्ती मध्यमाथो तदनु भगवती वैखरी वर्णरूपा* *सास्मद्वाचं प्रसन्ना विधिहरिगिरिशाराधितालङ्करोतु ॥*
[ `श्रीमद्देवीभागवतमाहात्म्य, १.१` ]
`अर्थात 👉🏻 जगत् के सृष्टिकार्यमें जो उत्पत्तिरूपा , रक्षाकार्यमें पालनशक्तिरूपा , संहारकार्यमें रौद्ररूपा हैं ; सम्पूर्ण विश्व-प्रपञ्च जिनके लिये क्रीडास्वरूप है , जो परा-पश्यन्ति-मध्यमा तथा वैखरी वाणीरूपा , एवं जो श्रीब्रह्मा , श्रीहरि विष्णु तथा श्रीरुद्र शिव द्वारा निरन्तर समाराधित हैं , वे सुप्रसन्ना श्रीपारम्बा परमेश्वरी भगवती मेरी वाणीको अलंकृत करें ।`
*श्रीमात्रे नमः🌹*
`अद्भुत श्लोक है ये – श्रीमद्देवीभागवत माहात्म्य का मंगलाचरण है ये । इस १ श्लोक में ही सम्पूर्ण श्रीविद्या एवं वाक्-तत्त्व का सार समाहित है😊🪷`
`श्लोक का पदच्छेद औऱ भावार्थ –`
`🌸 १. सृष्टि-स्थिति-संहार रूपा –`
`सृष्टौ सर्गरूपा 👉🏻 सृष्टि में ब्रह्मा-शक्ति`
`जगदवनविधौ पालनी 👉🏻 रक्षा में विष्णु-शक्ति`
`संहारे रौद्री 👉🏻 प्रलय में रुद्र-शक्ति`
`यस्या जगदिदमखिलं क्रीडनम् 👉🏻 यह समस्त ब्रह्माण्ड जिनकी लीला-मात्र है`
`🌸 २. वाक् के चार रूप –`
`अथवा पराख्या 👉🏻 परा-वाक् अर्थात – मूलाधार में अव्यक्त नाद`
`पश्यन्ती 👉🏻 नाभि में अर्थ-रूप में स्फुरित`
`मध्यमा 👉🏻 हृदय में बुद्धि-रूप में विचार`
`वैखरी वर्णरूपा 👉🏻 कण्ठ से निकलने वाली अक्षर-रूप वाणी`
`☝🏻 माँ ही मूल से शब्द तक की यात्रा हैं । इसीलिए "ऐं" बीज वाक्-बीज है ।`
`🌸 ३. त्रिदेव-आराध्या`
`विधिहरिगिरिशाराधिता 👉🏻 विधि/ब्रह्मा , हरि/विष्णु , गिरिश/शिव 👉🏻 तीनों जिनकी आराधना करते हैं`
`वही प्रसन्न होकर "अस्मद्-वाचम् अलङ्करोतु" 👉🏻 हमारी वाणी को अलंकृत करें`
`माँ ही सृष्टि-पालन-संहार करती हैं , जगत् उनका खिलौना है । माँ ही परा से वैखरी तक वाणी बनकर प्रकट होती हैं । औऱ ब्रह्मा-विष्णु-शिव भी जिनको पूजते हैं , वे माँ हमारी जिह्वा पर बैठ जाएँ 👉🏻 तब वाणी से अमृत झरेगा ।`
`इसीलिए ग्रन्थ-आरम्भ में ये प्रार्थना है – वाणी शुद्ध होगी तभी देवी-तत्त्व समझ आएगा🚩`
`जगदम्बा अर्पणमस्तु🌹`
`श्रीमात्रे नमः🌹`
`🌄🌄 संध्या वन्दन 🌄🌄©®`
#जय मां दुर्गा
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