om shai

19 Posts • 10K views
Sameer Dharmik
986 views 1 months ago
🌼🕉️ *जीवन को नई दिशा देने के लिए हमारे साथ जुड़ें* 🕉️🌼 ➖➖➖➖➖➖➖➖ प्रिय मित्रों 🙏 धर्म से जुड़ी सरल और ज्ञानवर्धक बातें, महान ऋषि-संतों की प्रेरक शिक्षाएँ और जीवन को उज्ज्वल बनाने वाले संदेश पाने के लिए हमारे सभी प्लेटफॉर्म से जुड़ें। हम जैसे महापुरुषों के आदर्शों से प्रेरित होकर संस्कार, सदाचार और आत्मबल बढ़ाने वाले विचार आपके तक पहुँचा रहे हैं। #bhakti #om #🕉 #by sameer dharmik 👇 अभी जुड़े हमारे साथ और follow करें 👇 ✨ *आइए, धर्म और अच्छे विचारों से अपने जीवन को प्रकाशमय बनाएं।*🙏🙏 #16 february
6 likes
13 shares
Sameer Dharmik
684 views 1 months ago
#om #🕉 #🕉️ओम नमा शिवाय🕉️ #om shanti से व्यवहार की सफलता ****************** चाहे आप विद्या बुद्धि में कितने ही विकसित क्यों न हो जाएं, आप अपने माता -पिता अथवा गुरुजनों की दृष्टि में बच्चे ही हैं। माँ अपने बूढ़े पुत्र को भी बालक समझती है, पिता उसमें आत्म भाव के कारण अपरिपक्वता ही देखा करता है। इसी प्रकार आपके गुरु, अध्यापक तथा अन्य गुरुजनों की दृष्टि में बड़े होकर भी आप छोटे ही बने हुए हैं। अतः उनसे अपना व्यवहार करते समय आपको बड़ा सतर्क रहना है। तनिक से मर्यादा के बाहर हो जाने का अर्थ अशिष्टता हो सकता है। आपका पिता-माता के प्रति चाहे वे कितने ही अनपढ़ या अशिक्षित हों, सम्मान-पूर्ण रहना चाहिए। आपका सम्बोधन शिष्टता एवं मर्यादा का प्रतीक हो। उससे उनके प्रति आपके सद्विचार, व्यवहार तथा सम्मान की भावना प्रकट होनी चाहिए। यह ध्यान रखिये कि आप उनके सामने अपनी शेखी न बघारने लगें, या ऐसी बातें न कर बैठें, जो आपमें नहीं हैं। आपके बड़े अनुभव में बढ़े-चढ़े होते हैं। वे संसार की कमजोरियों, गुप्त रहस्यों, उत्थान-पतन इत्यादि का अधिक ज्ञान रखते हैं। अतः उनके सामने आपकी झूठी, मिथ्या गर्व से भरी बातें अधिक नहीं चल पातीं। आपकी जो सच्ची योग्यता है, उसी को लेकर आप सम्मान पूर्ण ढंग से शिष्टाचार और सभ्यता का ध्यान रखते हुए बातें करें। बड़ों के सामने कोई गाली देना, कमीज के बटन या पेट खुला रखना बड़ी अशिष्टता का सूचक है। कमीज के खुले हुए बटन आपकी लापरवाही, बेहूदापन तथा आन्तरिक गन्दी आदतों को दिखाने वाले हैं। यदि समझदारी से न बैठा जाय, तो मनुष्य नंगा हो सकता है। यह अशिष्ट व्यवहार का एक प्रत्यक्ष नमूना है, जिसे नवयुवक अपनाते जा रहे हैं।अपने दैनिक व्यवहार में मर्यादा और बड़ों के सम्मान का ध्यान रखिये। बड़ों के सामने आवेश या क्रोध में आकर हम प्रायः अनेक जली-कटी बातें उच्चारण कर बैठते हैं, आवेश तथा भावुकता हमारी कमजोरियाँ भी बन जाती हैं। मनुष्य स्वभाव विचित्रताओं से परिपूर्ण है। राग अथवा द्वेष से, जिस भाव से भी वह किसी के प्रति भावुकता से बढ़ता है, तो उसी भाव के पोषक सारे अतीत के चित्र एक एक करके उसके सामने घूमने लगते हैं। बड़ों की अच्छाइयाँ, उनके द्वारा हम पर किए गये अनुग्रह जैसे लुप्त हो जाते हैं। प्रस्तुत रस को ही उत्तेजना मिलती रहती है। (संकलित व सम्पादित) अखण्ड ज्योति जनवरी 1968 #bhakti
14 likes
7 shares