Jaydev Samal
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#एक सुंदर कहानी
*🌳🦚आज की कहानी🦚🦚*
💐 *उसका नाम अब भी गूंजता है* 💐
(एक अधूरी प्रेम कहानी जो पूर्णता को महादेव में खोजती है)
नीत, एक सरल, भोला और अबोध-सा युवक था — जिसकी दुनिया बहुत छोटी थी। कॉलेज, कुछ दोस्त, और सबसे ज़रूरी “ *साहिबा*”… वो लड़की जो उसकी ज़िंदगी का अर्थ बन गई थी।
साहिबा पढ़ाई में होशियार, समझदार और हर किसी के प्रति विनम्र थी। वहीं नीत थोड़ा संकोची, लेकिन सच्चे दिल से चाहने वाला इंसान था। उनका मिलना किसी योजना का नहीं, बल्कि ईश्वर की लिखी संयोग की पंक्तियों का परिणाम था।
शुरुआत हुई एक छोटी सी दोस्ती से।
फिर बातें बढ़ीं — घंटों फोन पर बात करना, एक-दूसरे की बातें सुनना, छोटी-छोटी खुशियों को साझा करना।
साहिबा की हँसी नीत के लिए किसी मंत्र जैसी थी।
वो जब हँसती, तो नीत को लगता कि उसकी पूरी दुनिया रौशन हो गई। हर कॉल, हर मैसेज उसके दिन की धड़कन बन गए थे।
लेकिन वक्त, जो कभी साथ लगता है, वही सबसे बड़ा फासला भी बन जाता है।
धीरे-धीरे उनकी बातें कम होने लगीं। पहले “गुड मॉर्निंग” और “गुड नाइट” मैसेज मिस हो गए, फिर दिन बीतने लगे बिना किसी बातचीत के।
एक दिन साहिबा ने कहा —
*नीत*, शायद अब हमें थोड़ा अलग हो जाना चाहिए… जिंदगी में बहुत कुछ है, जो हमें करना है।”
नीत ने कुछ नहीं कहा, बस मुस्कुराया।
क्योंकि वो जानता था — सच्चा प्रेम मांगता नहीं, बस देना जानता है।
दिन, महीने, साल गुजरते गए।
साहिबा की खबरें अब सिर्फ दूसरों से सुनाई देती थीं — वो अब बहुत खुश थी, अपने परिवार के साथ, अपने नए जीवन में।
नीत हर बार सुनकर खुश होता — जैसे किसी पुराने सपने की जीत पर मुस्कुरा रहा हो।
पर रात को जब चाँद खिड़की से झाँकता, तो नीत के दिल के अंदर वही अधूरी खामोशी गूंजती —
“क्या वो भी मुझे कभी याद करती होगी?”
वो अब मंदिरों में ज्यादा समय बिताने लगा था।
महादेव उसके सच्चे साथी बन गए थे।
वो हर रोज शिवलिंग पर जल चढ़ाते हुए यही प्रार्थना करता —
“ *हे भोलेनाथ, मेरी साहिबा को हमेशा खुश रखना।*”
कई लोगों ने पूछा —
“नीत, तुम आगे क्यों नहीं बढ़ते?”
वो बस मुस्कुरा देता —
“मैं आगे बढ़ चुका हूँ, बस दिशा अलग है। मैंने प्रेम खोया नहीं, उसे महादेव को समर्पित कर दिया है।”
उसकी आँखों में अब भी साहिबा की झलक थी,
पर मन में शांति थी — क्योंकि उसे यकीन था, जहाँ सच्चा प्रेम अधूरा रह जाए, वहाँ शिव उस प्रेम को शाश्वत बना देते हैं।
वक्त बीत गया…
नीत अब एक आध्यात्मिक मार्ग पर था — एक मुसाफिर, जो प्रेम से शुरू होकर प्रभु तक पहुँच गया था।
वो कहता था —
“तुम्हें तो न पा सका, लेकिन महादेव के दर पर तुम्हारी यादों को समेटे हर रोज खुद को पा रहा हूँ। क्योंकि प्रेम अगर सच्चा हो, तो वो विरह में भी पवित्र रहता है।”
और आज भी, जब मंदिर की घंटियाँ बजती हैं,
कहीं न कहीं नीत की आँखों में वो पहला प्यार झलक जाता है —
वो मुस्कान, वो मासूमियत, वो "साहिबा"…
जो अब उसकी नहीं, पर उसकी दुआओं की हमेशा रहेगी।
*जय जय श्री राम 🙏🏻*
*जय हिन्द 🇮🇳*
*सदैव प्रसन्न रहिए 🙏🏻*
*जो प्राप्त है, पर्याप्त है।।*
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