🧟 പ്രേതകഥകൾ!
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Sachin Sharma
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शमशान की चुड़ैल: जिंदा जली दुल्हन की भयानक कहानी राजेश और प्रिया को अपने सपनों का घर मिल गया था। दिल्ली के बाहरी इलाके में बना यह नया अपार्टमेंट उनके बजट में एकदम सही था। तीन कमरे, बड़ा हॉल, और सबसे अच्छी बात - किराया बाकी जगहों से आधा। "यह इतना सस्ता क्यों है?" प्रिया ने पहली बार देखते समय पूछा। मकान मालिक ने मुस्कुराते हुए कहा, "बस थोड़ा दूर है शहर से, और पीछे की तरफ एक पुराना शमशान है। लोगों को पसंद नहीं आता।" राजेश ने हंसकर कहा, "हम पढ़े-लिखे लोग हैं प्रिया। ये सब अंधविश्वास है।" और राजेश और प्रिया वहां रहने चल दिए। पहली रात का डरावना अनुभव शिफ्ट होने के पहले दिन सब ठीक रहा। सामान लगाया, कमरे सजाए, और रात को थके-हारे सो गए। लेकिन रात ठीक बारह बजे प्रिया की नींद टूट गई। एक औरत की चीख। इतनी तेज, इतनी दर्द भरी कि उसके रोंगटे खड़े हो गए। "राजेश! सुना तुमने?" प्रिया ने पति को हिलाया। "क्या हुआ?" राजेश ने नींद में ही पूछा। "कोई चीख रही थी।" राजेश ने खिड़की से बाहर देखा। सन्नाटा था। "शायद कोई जानवर होगा। सो जाओ।" लेकिन प्रिया की आंखों में अब नींद कहां। वो चीख अब भी उसके कानों में गूंज रही थी। रोज रात बारह बजे का रहस्य अगली रात फिर वही हुआ। ठीक बारह बजे वही चीख। इस बार राजेश भी जाग गया। "ये क्या है?" उसने घबराकर पूछा। तीसरी रात, चौथी रात, पांचवीं रात। हर रात ठीक बारह बजे वही दर्द भरी चीख सुनाई देती। और अब तो उन्हें कुछ और भी सुनाई देने लगा था - पायल की झनकार, किसी के रोने की आवाज, और कभी-कभी तो ऐसा लगता जैसे कोई उनके दरवाजे पर खड़ा हो। प्रिया की हालत बिगड़ने लगी। वो ठीक से खा-पी नहीं पा रही थी। राजेश भी परेशान था पर अपने डर को छुपा रहा था। "हमें किसी से बात करनी चाहिए," प्रिया ने एक दिन कहा। पड़ोसी का खुलासा नीचे वाले फ्लैट में रहने वाली बूढ़ी काकी से जब उन्होंने पूछा तो वो चुप हो गईं। काफी देर बाद बोलीं, "तुम लोग ऊपर वाले फ्लैट में रहते हो ना?" "हां।" "वहां कोई टिकता नहीं बेटा। पिछले दो साल में पांच परिवार आए और चले गए।" राजेश का दिल तेजी से धड़कने लगा। "क्यों?" काकी ने आसपास देखा और धीरे से बोलीं, "इस इमारत के नीचे पचास साल पहले एक दुल्हन को जिंदा जला दिया गया था। उसकी आत्मा अब भी भटकती है।" प्रिया के हाथ-पैर ठंडे पड़ गए। "क्या?" --- पाठकों से निवेदन 🙏 दोस्तों कहानी बहुत ही भयावह और डरावनी है। पूरी कहानी का लिंक नीचे दिया गया है, लिंक एकदम साफ और सुरक्षित है, पूरी कहानी जरूर पढ़ें 👇 https://www.kahanighar.in/2025/11/jinda-jali-dulhan-horror-story-shamshan-ki-chudail-bhayanak-kahani.html दोस्तों अगर आपको मेरी लिखी हुई यह कहानी पसंद आए तो इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें 🙏 मै एक लेखक हूं, कृपया मुझे Follow करके मुझे Support कीजिए 🙏 #📚कविता-कहानी संग्रह #📓 हिंदी साहित्य #👀रोमांचक कहानियाँ 🕵️‍♂️ #डरावनी कहानियां #भूतिया कहानी
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Sachin Sharma
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Girlfriend Horror Story in Hindi प्यार की शुरुआत राज शहर के सबसे अमीर घराने का बेटा था। उसके पिता का बड़ा कारोबार था। उनकी कई फैक्ट्रियां थीं, दुकानें थीं। राज की जिंदगी ऐशो-आराम में बीतती थी। महंगी गाड़ियां, बड़ा बंगला, नौकर-चाकर - सब कुछ था उसके पास। लेकिन राज की जिंदगी में खुशी नहीं थी। उसका दिल खाली था। जब तक उसने नेहा को नहीं देखा था। नेहा एक साधारण लड़की थी। मध्यम वर्ग के परिवार से थी। उसके पिता एक छोटे दफ्तर में काम करते थे। लेकिन नेहा में कुछ खास बात थी। उसकी सरलता, उसकी मासूमियत, उसका प्यार - यह सब राज को बहुत पसंद था। कॉलेज में दोनों की मुलाकात हुई। धीरे-धीरे दोस्ती बनी। फिर प्यार हो गया। राज ने पहली बार अपनी जिंदगी में सच्चा प्यार महसूस किया। नेहा के साथ रहकर उसे सुकून मिलता था। दोनों एक दूसरे के बिना नहीं रह सकते थे। राज ने नेहा से कहा, "मैं तुमसे शादी करूंगा। तुम मेरी जिंदगी हो।" नेहा खुश हो गई। उसे यकीन था कि राज उससे सच में प्यार करता है। लेकिन जब राज ने अपने घरवालों को बताया, तो घर में तूफान आ गया। घर में मचा बवाल और बढ़ता दबाव राज के पिता ने गुस्से में कहा, "यह शादी नहीं होगी! हम अपने घर में किसी गरीब लड़की को नहीं लाएंगे। तुम्हारी शादी उसी घर में होगी जो हमारे बराबर का हो।" राज की मां भी रोने लगी। "तुम हमारी इज्जत मिट्टी में मिला दोगे। लोग क्या कहेंगे?" राज ने बहुत समझाने की कोशिश की। "पापा, नेहा बहुत अच्छी लड़की है। उसमें सारे गुण हैं। बस उसके घर में पैसा नहीं है।" "पैसा ही सब कुछ है," उसके पिता ने कहा। "अगर तुमने यह शादी की तो मैं तुम्हें अपनी संपत्ति से बेदखल कर दूंगा। तुम सड़क पर आ जाओगे।" राज परेशान हो गया। उसे नेहा से बहुत प्यार था। लेकिन अपना पूरा आराम, अपनी ऐश की जिंदगी छोड़ना भी आसान नहीं था। घर में रोज लड़ाई होने लगी। राज के पिता ने उसे धमकाना शुरू कर दिया। "या तो उस लड़की को छोड़ो, या फिर इस घर को छोड़ो।" राज के दिमाग में अजीब विचार आने लगे। वो रात भर सो नहीं पाता था। उसे समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करे। फिर एक रात उसके दिमाग में एक भयानक विचार आया। एक ऐसा विचार जो शैतान भी सोचने से डरे। उस भयानक रात की योजना राज ने सोचा - अगर नेहा इस दुनिया में ही न रहे, तो सारी समस्याएं खत्म हो जाएंगी। उसे न अपना घर छोड़ना पड़ेगा, न अपना आराम। और सबसे बड़ी बात - नेहा से झूठ बोलने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। शैतान ने उसके दिमाग में यह बात बैठा दी। राज ने एक योजना बनाई। उसने नेहा को फोन किया। "नेहा, कल शाम मुझसे मिलना। मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है।" नेहा खुश हो गई। उसे लगा शायद राज ने घरवालों को मना लिया है। अगली शाम नेहा तैयार होकर निकली। उसने अपनी पसंदीदा लाल सूट पहनी थी। उसके बाल संवारे हुए थे। वो बहुत खुश दिख रही थी। राज ने उसे शहर से बाहर एक सुनसान जगह पर बुलाया था। पहाड़ी रास्ता था। एक तरफ ऊंची चट्टानें थीं, दूसरी तरफ गहरी खाई। नेहा अपनी स्कूटी पर सवार होकर वहां पहुंची। राज अपनी गाड़ी में बैठा इंतजार कर रहा था। जब नेहा उसके पास आई, तो राज की आंखों में एक अजीब सा भाव था। नेहा ने पूछा, "राज, तुम ठीक तो हो? तुम्हारा चेहरा अजीब लग रहा है।" राज ने कहा, "हां, मैं ठीक हूं। चलो थोड़ा आगे चलते हैं।" --- निवेदन 🙏 दोस्तों मै पूरी कहानी यहां पर नहीं डाल सकता। आपको यह पूरी कहानी मेरी website पर मिलेगी। पूरी कहानी का लिंक नीचे दिया गया है, लिंक एकदम साफ और सुरक्षित है, पूरी कहानी जरूर पढ़ें 👇 https://www.kahanighar.in/2025/11/dead-girlfriend-horror-story-in-hindi.html अगर आपको मेरी लिखी हुई यह कहानी पसंद आए तो मुझे follow जरूर कर लीजिए। और इसे अपने दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें 🙏 #📚कविता-कहानी संग्रह #📓 हिंदी साहित्य #👀रोमांचक कहानियाँ 🕵️‍♂️ #डरावनी कहानियां #भूतिया कहानी
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Sachin Sharma
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OYO Hotel Room Real Story in Hindi – Jaipur Hotel की सच्ची घटना कहानी की शुरुआत अर्जुन को जयपुर में एक दिन रुकना था। ऑफिस का काम था। सुबह की मीटिंग थी फिर शाम को वापस दिल्ली जाना था। उसने सोचा कि रात को आराम से सो लेगा और सुबह तैयार होकर मीटिंग में चला जाएगा। उसने अपने फोन पर होटल देखने शुरू किए। ज्यादातर होटल दो से तीन हजार के बीच थे। एक दिन के लिए इतना खर्च करना उसे ठीक नहीं लगा। तभी उसे अपनी मोबाइल स्क्रीन पर एक विज्ञापन दिखा। बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा था - "सिर्फ आज! साठ प्रतिशत छूट!" अर्जुन ने क्लिक किया। एक ओयो होटल था। नाम था "ब्लू स्टार गेस्ट हाउस"। कीमत सिर्फ सात सौ निन्यानबे रुपये। उसने रिव्यू देखे। 3.8 Star ⭐। रिव्यू बुरे नहीं थे। कुछ लोगों ने लिखा था कि कमरा साफ है। कुछ ने कहा था कि लोकेशन ठीक है। अर्जुन ने ज्यादा नहीं सोचा। पेमेंट कर दिया। बुकिंग हो गई। कन्फर्मेशन आ गया। "Room No. 108" उसने बैग पैक किया और जयपुर के लिए निकल गया। होटल पहुंचकर जो पहला संकेत मिला उसे नजरअंदाज कर दिया शाम को सात बजे अर्जुन जयपुर पहुंचा। गूगल मैप की मदद से होटल ढूंढा। होटल एक पुरानी गली में था। आसपास छोटी-छोटी दुकानें थीं। कुछ बंद हो चुकी थीं। होटल की बिल्डिंग तीन मंजिला थी। बाहर से देखने पर आम सी लग रही थी। नीले रंग का बोर्ड लगा था जिस पर ओयो का लोगो था। अर्जुन अंदर गया। एक छोटा सा रिसेप्शन था। वहां एक युवक बैठा था जो अपने फोन में कुछ देख रहा था। "नमस्कार, मेरा नाम अर्जुन है। मैंने एक कमरे की बुकिंग की है।" युवक ने ऊपर देखा। उसके चेहरे पर कोई भाव नहीं था। "आईडी दीजिए।" अर्जुन ने अपना आधार कार्ड दिया। युवक ने रजिस्टर में कुछ लिखा और एक चाबी दी। "कमरा नंबर 108। पहली मंजिल। सीढ़ियां बाईं तरफ हैं।" अर्जुन ने चाबी ली। तभी उसने देखा कि रिसेप्शन के पीछे की दीवार पर एक नोटिस चिपका था। बड़े अक्षरों में लिखा था: "कमरा नंबर 108 में कोई परेशानी हो तो तुरंत रिसेप्शन पर संपर्क करें।" अर्जुन को अजीब लगा। सिर्फ 108 के लिए? बाकी कमरों के लिए क्यों नहीं? "ये क्या है?" उसने पूछा। युवक ने नोटिस की तरफ देखा। "कुछ नहीं। बस एक सावधानी है। कभी-कभी उस कमरे में पानी की समस्या होती है। बस इसलिए।" अर्जुन को संतोषजनक जवाब नहीं लगा लेकिन वो थक गया था। उसने ज्यादा सवाल नहीं किए। कमरे में घुसते ही महसूस हुआ कि कुछ गलत है अर्जुन पहली मंजिल पर पहुंचा। गलियारे में मद्धम रोशनी थी। कुल छह कमरे थे। 101 से 106 तक। लेकिन 108 अलग था। वो गलियारे के एकदम आखिर में था। जैसे अलग से बना हुआ। अर्जुन ने सोचा शायद बाद में बनाया होगा। उसने चाबी से ताला खोला। दरवाजा चरमराया। अंदर अंधेरा था। उसने स्विच ढूंढा और लाइट जलाई। कमरा छोटा था। एक डबल बेड, एक छोटी टेबल, एक कुर्सी, और एक अलमारी। बाथरूम साइड में था। सब कुछ सामान्य था। लेकिन हवा भारी थी। जैसे कमरे में हवा का आना-जाना बंद हो। उसने खिड़की खोलने की कोशिश की। खिड़की जाम थी। नहीं खुली। अर्जुन ने सोचा कि कोई बात नहीं। एसी चला लूंगा। उसने एसी ऑन किया। एसी शुरू हुआ लेकिन ठंडी हवा की जगह एक अजीब सी आवाज आने लगी। घर्र... घर्र... घर्र... अर्जुन ने एसी बंद कर दिया। वैसे भी मौसम ठंडा था। एसी की जरूरत नहीं थी। उसने बैग रखा और बाथरूम में गया। फ्रेश होने के बाद उसने खाना मंगवाने का सोचा। फोन निकाला तो देखा कि सिग्नल बहुत कमजोर था। कभी एक बार आता, कभी गायब हो जाता। आखिरकार उसने किसी तरह खाना ऑर्डर किया। खाना आने में चालीस मिनट लगे। तब तक अर्जुन बेड पर लेट गया। पलंग आरामदायक था। नरम गद्दा। साफ चादर। उसने सोचा कि शायद ज्यादा सोच रहा है। कमरा ठीक है। बस थोड़ा पुराना है। --- कहानी का लिंक नीचे दिया गया है, लिंक एकदम साफ और सुरक्षित है, पूरी कहानी जरूर पढ़िए 👇 https://www.kahanighar.in/2025/11/oyo-room-108-real-horror-story-in-hindi.html दोस्तों अगर आपको मेरी लिखी हुई, यह कहानी पसंद आए, तो Follow जरूर करे 🙏 कहानी अपने दोस्तों के साथ भी जरूर शेयर करें 🙏 #📚कविता-कहानी संग्रह #📓 हिंदी साहित्य #👀रोमांचक कहानियाँ 🕵️‍♂️ #डरावनी कहानियां #भूतिया कहानी
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