Sachin Sharma
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छोटा बच्चा अकेला था— एक भयावह रात की सच्चाई
रात के 8 बजे थे।
पूरा घर बाहर जाने की तैयारियों में लगा हुआ था।
राहुल के मामा की शादी थी और सब उसी में जा रहे थे—
सिवाय राहुल के।
राहुल 9वीं कक्षा में था और अगले हफ्ते उसके exams थे।
माँ ने उससे पूछा भी,
“बेटा, चलना है क्या? थोड़ी देर रुककर वापस आ जाएँगे।”
लेकिन राहुल ने मुस्कुराते हुए कहा,
“नहीं माँ, मैं पढ़ लूँगा… सुबह test है।”
माँ ने उसके माथे को चूमा और प्यार से बोली,
“डर लगे तो वीडियो कॉल कर लेना…”
राहुल ने हँसते हुए कहा,
“अरे माँ, मैं बच्चा थोड़ी हूँ अब!”
यही बात उसे आधी रात तक याद आती रही।
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घर में पहली अजीब आवाज़
करीब रात के 10:30 बजे, राहुल पढ़ाई कर रहा था।
घर पूरी तरह शांत था।
बाहर की स्ट्रीट लाइट की हल्की रोशनी खिड़की से अंदर आ रही थी।
तभी…
“कर्क… कर्क…”
ड्रॉइंग रूम का दरवाज़ा धीरे-धीरे खुलने की आवाज़ आई।
राहुल चौंका।
पहले उसने सोचा— “शायद हवा होगी।”
वह उठा, जाकर दरवाज़ा बंद किया और वापस पढ़ने लगा।
कुछ मिनट बाद…
“धड़ाम!”
दरवाज़ा फिर से जोर से खुला।
इस बार राहुल का दिल धक-धक करने लगा।
उसने खुद को समझाया,
“हवा है… हाँ हवा ही है…”
लेकिन खिड़कियाँ बंद थीं।
पूरा घर बंद था।
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लाइट का खेल — ON/OFF खुद-ब-खुद
राहुल वापस टेबल पर आया ही था कि
कमरे की tube light एकदम से बंद हो गई।
अंधेरा… गहरा अंधेरा।
10 सेकंड बाद—
ट्यूबलाइट फिर से ON।
राहुल का माथा पसीने से भीग गया।
उसने घड़ी देखी — 11:15 PM।
वह डर के मारे अपना फोन उठाने ही वाला था कि
इस बार उसके कमरे के बगल वाले store room की लाइट
अपने आप चालू हो गई।
राहुल के हाथ ठंडे पड़ गए।
घर में कोई नहीं था…
फिर लाइट किसने चलाई?
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धीमे-धीमे कदमों की आवाज़
राहुल को store room के अंदर से
धीमे, खुरदुरे कदमों की आवाज़ सुनाई देने लगी—
टप… टप… टप…
उसने डर के मारे अपनी सांस रोक ली।
वह चुपचाप कमरे के कोने में जाकर बैठ गया,
घुटनों को कसकर पकड़ा और खुद को गोल कर लिया।
कदमों की आवाज़ धीरे-धीरे उसकी ओर बढ़ रही थी।
फिर…
store room का door… थोड़ा-सा खुला।
अंदर पूरी तरह अंधेरा था।
लेकिन ऐसा लगा जैसे कोई उसे देख रहा हो।
राहुल ने मोबाइल का flashlight ON किया
और जैसे ही रोशनी दरवाज़े पर पड़ी—
दरवाज़ा खुद-ब-खुद बंद हो गया।
“बस… बस अब तो मैं मर जाऊँगा…”
राहुल रोने लगा।
उसका शरीर काँप रहा था।
उसे लगने लगा कि घर का हर साया… उसी को घूर रहा है।
वह पूरी रात नींद और डर के बीच
एक कोने में दुबका रहा।
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सुबह का खौफनाक सच
सुबह 6 बजे घरवालों की आवाज़ आई।
दरवाज़ा खोला—
राहुल ठंड से काँप रहा था, चेहरा पीला, होठ सूखे हुए।
माँ चीख पड़ी—
“राहुल!!! क्या हुआ? ये हालत कैसे हुई?”
राहुल बोल नहीं पा रहा था।
उसका बुखार 103° था।
डॉक्टर ने कहा—
“डर से हुआ है। बच्चा पूरी रात जागा है।”
पर असली डर तो अभी बाकी था…
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CCTV फुटेज जिसने सबको हिला दिया
पापा ने सोचा कि कहीं कोई घर में घुसा तो नहीं।
उन्होंने CCTV खोला।
फुटेज देखते ही
माँ की चीख निकल गई।
राहुल कमरे में पढ़ रहा था…
और पीछे ड्रॉइंग रूम का दरवाज़ा
धीरे-धीरे अपने आप खुल रहा था।
फिर स्टोर रूम की लाइट अपने आप जलती है…
और कैमरे में
दरवाज़े के पास एक धुंधली-सी परछाईं दिखाई देती है।
कोई इंसान नहीं…
लेकिन किसी इंसान जैसी आकृति।
पापा के हाथ काँप गए,
“यह… यह क्या है?”
माँ तुरंत राहुल को सीने से लगा लेती है,
“मुझे माफ कर देना बेटा…
हमें तुम्हें अकेला नहीं छोड़ना चाहिए था…”
राहुल बस रो रहा था—
“मैं बहुत डर गया था माँ…”
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सीख:
👉 बच्चों को कभी भी रात में घर पर अकेला छोड़कर मत जाएं।
👉 डर सिर्फ कहानी नहीं— कई बार सच्चाई भी हो सकता है।
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पाठकों से निवेदन 🙏
मेरे प्रिय पाठकों, मै एक लेखक हूं, मै हिन्दी कहानियां एवं साहित्य लिखता हूं। मेरा काम सिर्फ कहानियां लिखना नहीं, बल्कि ऐसी कहानियां लिखना है जिससे कि लोगों को अच्छी सीख मिले।
आप सब पाठकों से निवेदन है 🙏, कि मुझ जैसे लेखक को सपोर्ट कीजिए। बस मेरी रचनाओं को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें। और मुझे Follow कर लीजिए, ऐसी ही अदभुत और शिक्षाप्रद कहानियां पढ़ने के लिए। धन्यवाद ❤️
यह तो बस छोटी सी कहानी है, इससे बड़ी बड़ी और detailed स्टोरी आपको मेरी website पर मिलेंगी। जहां horror • Love • Travel • Family कहानियां कई पार्ट में है।
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