#GodMorningTuesday
#हीरा_पहचानलिया_चौबीसी_खाप_ने
गरीब, ऐसा राम अगाध है, निरभय निहचल थीर।
अनहद नाद अखंड धुनि, नाड़ी बिना सरीर।।
संत गरीब दास जी महाराज जी "सुमिरण के अंग" से अपनी वाणी के माध्यम से बता रहे हैं कि परमेश्वर अचल (निश्चल) यानि अविनाशी है, निर्भय है। उस परमेश्वर के लोक में अखण्ड धुन बज रही है। उस परमेश्वर का शरीर पाँच तत्त्व से बने नाड़ी वाला नहीं है।
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